संघी मन्दिर का इतिहास और कहानी Sanghi Temple History Story in Hindi

संघी मन्दिर का इतिहास और कहानी Sanghi Temple History Story in Hindi

संघी मंदिर तेलंगाना राज्य के संघी नगर में स्थित है जो कि एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह हैदराबाद से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसे देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। इसे रवि संघी ने बहुत ही कम समय में बनवाया था। इस कार्य में उनकी पत्नी अनीता संघी ने मदद की थी।

यह मंदिर मुख्य रूप से भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित है। पर इसके परिसर में हनुमान, बालाजी, श्रीराम, पद्मावती, शिव, कार्तिक, विजय गणपति और दुर्गा मंदिर भी बने हुए हैं। यह प्रसिद्ध मंदिर परमानंद गिरी पहाड़ी में स्थित है जोकि सैकड़ों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

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संघी मन्दिर का इतिहास और कहानी Sanghi Temple History Story in Hindi

संघी मन्दिर की विशेषता

इस मंदिर का गोपुरम (शिल्प से सज्जित स्मारकीय अट्टालिका या मन्दिर का शिखर) बहुत ही ऊंचा है जो काफी दूर से देखा जा सकता है। हर साल श्रद्धालु अपनी मनोकामना मांगने इस मंदिर में आते हैं। यह बहुत ही सुंदर दक्षिण भारतीय वास्तुशिल्प शैली में बना हुआ है। इसमें कुल तीन गोपुरम बने हुए हैं जो आसमान छूते हैं।

संघी मन्दिर के परिसर में बने हुए अन्य मन्दिर

हनुमान मंदिर

यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है जो श्रीराम के महान भक्त थे। हनुमान जी को उनकी भक्ति, धैर्य, साहस और पराक्रम की वजह से जाना जाता है। श्री राम की भक्ति सिद्ध करने के लिए उन्होंने अपने सीने को फाड़ कर दिखा दिया था कि उनके हृदय में भगवान राम और सीता ही बसते हैं।

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बालाजी मंदिर

यह मंदिर भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित है जो सभी धर्मों और संपन्नता के देवता हैं। यह संघी मंदिर के परिसर में मध्य भाग में स्थित है। यहीं पर वेंकटेश्वर भगवान वेंकटेश्वर की शाही मूर्ति स्थित है।

श्री राम मंदिर

यह मंदिर भगवान राम को समर्पित है। यह बालाजी मंदिर के बाएं हाथ पर बना हुआ है। भगवान राम एक आदर्श पुरुष थे। उन्होंने रावण जैसे दुष्ट व्यक्ति का वध करके बुराई पर अच्छाई की जीत दिलवाई थी। इस मंदिर में श्री राम के साथ सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां भी लगी हुई हैं। साथ में उनके परम भक्त हनुमान की मूर्ति भी है।

अष्टलक्ष्मी मंदिर

यह मंदिर बालाजी और पद्मावती मंदिर के बीच में स्थित है। इसमें 8 रूपों वाली आदि लक्ष्मी माता की मूर्ति लगी हुई है। उनके एक हाथ अभय मुद्रा को दर्शाता है और दूसरा हाथ भक्तों को वर देता है।

पद्मावती मंदिर

यह मंदिर भगवान वेंकटेश्वर की पत्नी पद्मावती को समर्पित है, जो संघी मंदिर में बालाजी मंदिर के दाएं हाथ पर स्थित है। देवी पद्मावती कमल के पुष्प पर बैठी हैं। उनके हाथों में कमल है जो करुणा और प्रेम का प्रतीक है।

शिव मंदिर

यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। वे देवों के देव “महादेव” कहे जाते हैं। हिंदू धर्म में भगवान शिव (शंकर) के कई रूप हैं। एक तरफ उन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है परंतु क्रोध आने पर वह विनाशक भी कहलाते हैं। भगवान शिव अपना तीसरा नेत्र खोलकर सब कुछ भस्म कर देते हैं। उनकी जटाओ से गंगा नदी बहती है और मस्तक पर चंद्र है। उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल रहता है।

कार्तिकेय मंदिर

यह मंदिर भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है। यह गणेश मंदिर के बाएं तरफ स्थित है। देवता कार्तिकेय के हाथ में लाठी है और बाएं हाथ को कमर पर रखे हैं और शेर के कपड़े धारण किए हुए हैं।

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विजय गणपति मंदिर

ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर की पूजा करने वालों के सभी कष्ट और समस्याएं दूर होती हैं। यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है जो बुद्धि के देवता हैं। ये भगवान शिव और पार्वती के पुत्र हैं। सभी देवताओं में भगवान गणेश को सबसे पहले पूजा जाता है।

इनका वाहन मूषक है। इन्हें मोदक (लड्डू) खाना बहुत पसंद है। किसी भी शुभ काम करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है जिससे वह कार्य सफल हो।

दुर्गा मंदिर

यह मंदिर माता दुर्गा को समर्पित है जो की शक्ति का अवतार है। वह सौम्य रूप में भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करती है, परंतु क्रोधित होने पर पापियों का नाश करती हैं। वह पर्वतों के देवता सुमेरु की पुत्री हैं। उनके तीन नेत्र हैं। उन्होंने केसरिया वस्त्र धारण किया हुआ है।

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