दिवाली में पटाखों का उपयोग क्यों ना करें? Say No to Crackers this Diwali in Hindi

दिवाली में पटाखों का उपयोग क्यों ना करें? Say No to Crackers this Diwali in Hindi

पटाखों के उपयोग से हम अपने पर्यावरण को कैसे प्रदूषित कर रहें?
क्या आतिशबाजी से हमारे पर्यावरण को खतरा है?

दिवाली का महोत्सव हर किसी व्यक्ति के लिए बहुत की ख़ुशी का त्यौहार होता है। पर में आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूँ कि दिवाली के त्यौहार के लिए हम एक महीने पूर्व से ही तैयारी करते हैं घर और मोहल्ले की सफाई करते हैं क्या सिर्फ इसलिए ताकि दीपावली के दिन हमें उसी गली-मोहल्ले को प्रदूषित कर सकें?

जी हाँ दोस्तों यह सोचने की बात है। ज्यादातर लोग वही कर रहे हैं दिवाली का त्यौहार हमारे जीवन में हम खुशियाँ और समृद्धि लाने के लिए मनाते हैं पर पटाखों के उपयोग से एक तो हम अपने ही पृथ्वी को बर्बाद करते हैं और दूसरी और पटाखों के हादसों से कई लोग जख्मी हुए तो कुछ लोगों ने अपना जान खोया।

क्या पटाखों के साथ दिवाली मनाना सुख समृद्धि का त्यौहार दीपवाली हो सकता है? जी नहीं दोस्तों, दीपावली खुशियों का त्यौहार है और हर किसी को अपने दीपावली के त्यौहार को शांति से ख़ुशी के साथ बिना पटाखों के मनाना चाहिए।

दिवाली में पटाखों का उपयोग क्यों ना करें? Say No to Crackers this Diwali in Hindi

अब आप पूछेंगे ऐसा क्या है इन पटाखों में जिसके कारण आज हम इसके बारे में बात कर रहे हैं। चलिए आपको पटाखों से होने वाले कुछ महत्वपूर्ण हानियों के बारे में बताते हैं –

1. बड़े-बड़े डॉक्टरों का कहना है की ह्रदय और फूस-फूस रोगी, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज के रोगियों की तबियत पटाखों के प्रदुषण के कारण और भी ज्यादा ख़राब हो जाती है। इसलिए इस प्रकार के रोगी दीपवाली के समय घर से बहार बिलकुल ना निकलें।

2. एक तो हम स्वच्छ भारत अभियान को अमल लाने की बात करते हैं और दूसरी ओर पटाखों को फोड़ कर अपने वातावरण को और भी दूषित कर रहे हैं। कई हज़ार टन पटाखों का कूड़ा हम एक दीपावली के दिन में ही अपने देश भर में फैला देते हैं और दोष देते हैं नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों पर। क्या ये सही है?

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3. यह पटाखों का ज़हरीला कूड़ा जब जमीन में धस कर रह जाता है तो मिट्टी प्रदूषण, जब जलने के बाद धुआं तो वायु प्रदुषण, पटाखों के फूटने की वजह से ध्वनि प्रदुषण, और वही जला हुआ जहरीला कूड़ा जब नदियों में जाता है तो जल प्रदुषण फैलता है। बस दो पल के बेकार की ख़ुशी के लिए हम अपना और आने वाली पीढ़ी का जीवन बर्बाद कर रहे हैं।

4. पटाखे बहुत ही जहरीले रसायनों से बना होता है जिनसे कैंसर तक होने का खतरा बना रहता है। वही रसायन पदार्थ पटाखे फूटने के बाद नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड जैसे खतरनाक गैसों हमारे पर्यावरण में मिल जाते हैं।

5. पटाखों का उपयोग सबसे ज्यादा बच्चे करते हैं और इसीलिए इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। बाद में यही पटाखे कई प्रकार के इन्फेक्शन और बिमारियों का कारन बनते हैं।

6. वैसे तो बच्चों के हाँथ में फुलझड़ियाँ कितनी अच्छी दिखती है पर क्या आपको पता है उसके धुएं में भी खतरनाक जहरीले पदार्थ जैसे बेरियम, स्ट्रोंशियम, कॉपर, आयरन होते हैं जो बच्चों के शरीर के लिए बहुत ही हानिकर होते हैं।

7. वैसे तो पटाखे शरीर पर बहुत बुरा प्रभाव पहुंचाते हैं परन्तु पटाखे शरीर को बाहरी तरफ से बहुत चोट पहुंचा सकते हैं। प्रतिवर्ष देश भर में कई ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं जिनके कारण कई लोग अपने ऑंखें खो देते हैं, कई लोगों के हाँथ पैर जल जाते हैं तो कुछ लोगों की इसमें जान भी चले जाती है।

8. दिवाली के पटाखों से प्रदुषण दिल्ली जैसे महानगरों में कुछ इस प्रकार होता है की सरदी के महीने में कोहरे और बादल के जैसा दिखने लगता है। यहाँ तक भी कहा गया है की दीपावली की वजह से भारत का 50% वायु प्रदुषण से ढक जाता है।

अगर हम चाहें तो दीपावली के त्यौहार को बिना पटाखों के भी मना सकते हैं। बस उसके लिए दृढ संकल्प और सही सोच की आवश्यकता है। क्या हम सभी अपने दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ मिलकर एक स्वच्छ स्वस्थ दिवाली नहीं मना सकते हैं? आशा करते हैं आपकी इस बार की दिवाली पटाखों के बिना खुशियों से बहरी हुई हो ! Wishing You a Happy Diwali 2018

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