समुद्र अपरदन (तटीय क्षरण) और उसका प्रभाव Sea or Coastal Erosion in Hindi

आज के इस आर्टिकल में आप जानेंगे समुद्र अपरदन (तटीय क्षरण) और उसका प्रभाव Sea erosion/ Coastal erosion in Hindi and its implications

समुद्र अपरदन (तटीय क्षरण) और उसका प्रभाव Sea or Coastal Erosion in Hindi

समुद्र अपरदन क्या होता है?

समुद्र की लहरें, तेज हवा, जवार भाटा, समुद्री तूफान, सुनामी, आदि के समुद्र तट से टकराने से वहां की चट्टान, मिट्टी और भूमी में कटान होती है। इसे ही समुद्र अपरदन कहते हैं। समुद्र अपरदन को “तटीय क्षरण” भी कहा जाता है।

एक और जहां समुद्र से मछलियां, मोती और दूसरी वस्तुयें प्राप्त होती हैं, वहीं समुद्र अपरदन से समुद्र तटों को भारी नुकसान होता है। समुद्र तटों पर ना केवल बड़ी मात्रा में जनसंख्या निवास करती है बल्कि वहां पर रोजगार का सृजन भी होता है।

समुद्र तटों पर पर्यटक घूमने आते हैं जिससे रोजगार पनपता है। इसके साथ ही समुद्री जहाज वहां पर आकर ठहरते हैं। मछुआरे मछली पकड़ने का काम करते हैं। परंतु समुद्र अपरदन के कारण धीरे धीरे समुद्र तट की भूमि कटती जाती है और समुद्र में गायब हो जाती है।

इसके कारण ही लक्ष्य+ी+ की जैव विविधता नष्ट हो रही है। सरकार को शीघ्र ही ऐसे प्रयास करने होंगे जिससे समुद्र अपरदन रुक जाए। भारत एक ऐसा देश है जो 3 दिशाओं से समुद्र से घिरा हुआ है। यहां की समुद्र तटीय रेखा भी काफी लंबी है। यह 7516 किमी लम्बी है। ऐसे में समुद्र अपरदन को रोकना और भी अधिक आवश्यक हो जाता है।

अंडमान निकोबार दीप समूह का 89 % बंगाल की खाड़ी के कारण ही नष्ट हो गया है। वहां की जैव विविधता तेजी से नष्ट हो रही है। समुद्र अपरदन के कारण ही तमिलनाडु की 62% समुद्र तट आज अस्थाई बन गया है। गोवा के समुद्र तट को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। अब गोवा का सिर्फ 52% समुद्र तट ही स्थाई रह गया है।

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समुद्र अपरदन के कारण

रेत, कोरल और दूसरे खनिजों का खनन, जलवायु परिवर्तन, समुद्री लहरों की ऊर्जा, शक्तिशाली तटवर्ती हवा, जल ग्रहण क्षेत्र में बनाया गया बांध

समुद्र अपरदन के प्रकार

मानव जनित समुद्र अपरदन

यह समुद्र अपरदन मनुष्यों के कार्यों की वजह से होता है। समुद्र तट पर रेत का खनन, खेती, घर मकान और उद्योग बनाने के लिए समुद्र तट का कटाव किया जाता है। इससे उन्हें नुकसान पहुंचता है। विभिन्न प्रकार की व्यवसायिक गतिविधियां भी समुद्र अपरदन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्राकृतिक समुद्र अपरदन

प्राकृतिक अपरदन मुख्यतः समुद्र की लहरों के द्वारा होता है। समुद्र में आने वाले तूफान, सुनामी, ज्वार भाटा के कारण समुद्र तटों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। समुद्री तूफान में हवा और लहरें दोनों ही बहुत तेज गति से चलती हैं और समुद्र तट से टकराती हैं और उसे नुकसान पहुंचाती हैं। सुनामी में समुद्र अपरदन कुछ अधिक मात्रा में होता है।

सुनामी के समय समुद्र में 20 से 50 फुट ऊंची लहरें उत्पन्न होती हैं जो समुद्र तट को जल में डुबो देते हैं। सभी पेड़ पौधों को नष्ट कर देती हैं और समुद्र तट को नुकसान पहुंचाती हैं। इसके कारण बड़ी मात्रा में समुद्र तट कटकर विलुप्त हो जाते है।

समुद्र अपरदन को रोकने के उपाय

समुद्र अपरदन को कैसे रोकें –

  • सामाजिक वानिकी को प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • सरकार को समुद्र तटों का संरक्षण करना चाहिए। वहां पर पेड़ पौधे अधिक से अधिक मात्रा में लगाने चाहिए जिससे मिट्टी की कसावट बनी रहे। जिन स्थानों पर लहरें तीव्र गति से आकर टकराती हैं वहां पर ब्रेकर लगाना चाहिए। बड़े-बड़े विशाल पत्थरों को ब्रेकर की तरह इस्तेमाल किया जाता है जिसे समुद्र तट सुरक्षित बना रहे। इसके लिए राज्य सरकार परमिशन देती है।
  • जियो-सिंथेटिक ट्यूबों की स्थापना करनी चाहिए।
  • कम ऊंचाई वाली दीवार (गैरोनी) का निर्माण समुद्र तट के चारों तरफ होना चाहिए। जो देखने में भले ही अच्छी ना लगे परंतु इससे समुद्र तट के किनारे बने हुए मकानों को सुरक्षा मिलती है। इस तरह की दीवार कंक्रीट सीमेंट से बनाई जाती है जो बहुत मजबूत होती है। समुद्र की लहरें उससे टकराती हैं पर कोई नुकसान नहीं होता है।
  • ब्रेक वाटर संरचनाओं का निर्माण करना चाहिये।
  • खारा पत्थर पैकेजिंग की व्यवस्था होनी चाहिए।
  • जिस जगह समुद्र तट कट गया है वहां पर दूसरी जगह से मिट्टी लाकर डालना चाहिए और उसे बराबर करना चाहिए।
  • समुद्र तट के किनारे हवा रोधक भी लगाना चाहिए।
  • समुद्र तटों को बचाने के लिए मैनग्रोव का वृक्षारोपण लगाना चाहिए। सरकार का ऐसा मानना है कि 200 मीटर तक मैंनग्रोव की पट्टी को रखना जरूरी होता है।
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समुद्र अपरदन के सबसे अधिक मामले

समुद्र अपरदन के सबसे अधिक मामले चीन, श्रीलंका, जापान, मलेशिया, भारत, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, थाईलैंड, वियतनाम में देखने को मिलते हैं। चीन के जिआंगसू राज्य में सबसे अधिक समुद्र अपरदन चिंता का विषय है। यहां हर साल 85 मीटर तक की भूमि समुद्र अपरदन में नष्ट हो जाती है। पश्चिम बंगाल में सागर द्वीप तेजी से समुद्र अपरदन का शिकार हो रहा है।

समुद्री तूफान, लहरें और ज्वार 6 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच कर समुद्र तट को नुकसान पहुंचा रहे हैं। मनुष्य समुद्र तटों के किनारे खेती कर रहे हैं। इससे मैंग्रोव वनस्पति को नुकसान पहुंच रहा है। गोदावरी डेल्टा में बांध बनने के कारण समुद्र अपरदन तेजी से होने लगा है।

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