शेख चिल्ली की मज़ेदार कहानियाँ Sheikh Chilli Funny Stories in Hindi

शेख चिल्ली की मज़ेदार कहानियाँ Sheikh Chilli Funny Stories in Hindi

शेख चिल्ली की हास्य कहानियाँ बच्चों को पहुत पसंद आती है। शेख चिल्ली ना सिर्फ एक कहानी का किरदार है बल्कि इसके पीछा सच्चा इतहास है। उनका असली नाम सूफी अब्द-उर-रजाक था और उनका इतिहास सम्राट शाहजहां के बड़े बेटे मुगल राजकुमार दारा शिकोह (एडी 1650) से जुड़ा हुआ है।

शेख चिल्ली की मज़ेदार कहानियाँ Sheikh Chilli Funny Stories in Hindi

मियां शेख चिल्ली और चार चोर Sheikh Chilli and 4 Thives

एक बार अंधेरी रात में मियां शेख चिल्ली अपने घर की ओर चले जा रहे थे तभी उन्होंने देखा कि चार लोग दबे पाँव कहीं जा रहे हैं मियां शेख चिल्ली उनके पास गए और पूछा आप लोग इस वक्त कहां जा रहे हैं।

तभी उन चारों लोगों को लगा कि यह भी हमारी तरह चोर है और यह भी चोरी करने जा रहा है तो उन्होंने बिना डरे हुए शेख चिल्ली को बता दिया कि हम चारों लोग चोर हैं और हम चोरी करने जा रहे हैं।

मियां शेख चिल्ली सोचने लगे कि मैं भी इनके साथ हो लेता हूं जिससे कुछ नया सीखने को मिलेगा। मियां शेख चिल्ली उनके साथ  चलने के लिए कहने लगे लेकिन चोरों ने मना कर दिया। मियां शेख चिल्ली बार-बार उनसे अपने साथ ले चलने के लिए विनती कर रहे थे तभी चोरों ने कहा ठीक है। चारों चोर और मियां शेख चिल्ली अंधेरी रात में धीरे-धीरे दबे पांव आगे बढ़ने लगे।

कुछ दूर जाने के बाद उन्हें एक रहीश आलीशान घर दिखाई दिया और वे उसमें धीरे-धीरे अंदर घुस गए। उन चारों चोर में से एक चोर ने शेख चिल्ली को हिदायत दी , कि कोई आवाज़ मत करना अन्यथा हम पकड़े जाएंगे और हमेशा छुपे रहना और धीरे-धीरे कीमती सामानों और पैसों को ढूंढो। मियां शेख चिल्ली की ये पहली चोरी थी , इसलिए वो बड़े उत्सुक थे , उन्होंने सोचा चलो इनकी मदद करते है।

मियां शेख़ चिल्ली और चारों चोर पूरे घर में कीमती सामान और पैसे ढूंढने लगे। मियां शेख चिल्ली ढूंढ ही रहे थे लेकिन अचानक उनको खीर पकने की सुगंध आई। मियां शेख चिल्ली के मुँह में पानी आ गया और उसको खाने के लिए उसकी ओर चल दिए। वो चोरी करने आये है ये ख्याल उनके दिमाग से उतर गया, उनको सिर्फ खीर खाने की जल्दी थी।

मियां शेख चिल्ली रसोई घर में पहुंचे जहां खीर बन रही थी और उन्हें वहां पर देखा एक बुढ़िया जो खीर बनाते हुए कुर्सी पर बैठी थी और शायद उसकी आंख लग गई थी। मियां शेख चिल्ली एक कटोरी में खीर परोसी और खाने लगे तभी बुढ़िया ने अचानक नींद में उनकी तरफ हाथ किया तो शेख चिल्ली को लगा कि बुढ़िया भूखी है और खीर मांग रही है इसी नेक सोच के साथ उन्होंने कटोरी से खीर निकालकर उसके हाथ में रख दिया।

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खीर बहुत गर्म होने के कारण बुढ़िया का हाथ जल गया और तिल-मिला उठी और चिल्लाने लगी। बुढ़िया की चिल्लाहट को सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए अब चारों चोर और मियां शेख चिल्ली को भागने के लिए कोई रास्ता नहीं था इसलिए वह उसी घर में छुप गए। तब बुढ़िया ने बताया कि इस घर में कुछ चोर घुस आए हैं सभी लोग चोर को ढूंढने लगे तभी एक चोर पकड़ा गया।

सभी लोगों ने उसको खूब पीटा और उसे सवाल जवाब करने लगे रहे थे तुम यहां क्या चुराने आये थे “चोर-ऊपर वाला जाने”  तुमने क्या क्या चुराया “चोर- ऊपर वाला जाने” चोर बार-बार यही कह रहा था – ऊपर वाला जाने ऊपर वाला जाने तो लोगों ने सोचा इसे जाने देते है ये हमेशा सभी बातों में अल्लाह को याद करता है, तभी अचानक से धड़ाम की आवाज आयी।

मियां शेख चिल्ली ऊपर छुपे हुए थे जो कूद पड़े थे और चोर को मारते हुए बोले उन्होंने कहा , तुम और तुम्हारे साथी चोरी करो और नाम मेरा लगाओ ऊपर वाला जाने। मियां शेख चिल्ली ने सबको बताया कि ये चोर और इसके तीन साथी चोरी करने आ रहे थे तभी मैंने इनको देखा और मैं भी इसके साथ हो लिया यह चारों चोर चोरी करने आए हैं मैं भी उनके साथ हो लिया था यह देखने के लिए ये लोग क्या करते हैं, लोगों ने बाकी तीनों चोरों को ढूंढ कर खूब पीटा इसी बीच मियां शेखचिल्ली मौका देखकर खिसक लिए।

शेख चिल्ली और उसकी घोड़ी Sheikh Chilli and his Horse

काफी समय से शेख चिल्ली की पत्नी मायके में रह रही थी वह वापस नहीं आ रही थी तो शेखचिल्ली स्वयं उसे लाने के लिए अपने ससुराल पहुंच गए और वहां कुछ दिन बिताए। कुछ दिन बिताने के बाद शेख चिल्ली और उसकी पत्नी अपने घर वापस आने के लिए रवाना हुए।  शेखचिल्ली के साथ एक घोड़ी भी थी जो काफी दुबली पतली थी शेख चिल्ली उस पर बैठ गए और चलने लगे और साथ में उनकी पत्नी पैदल चल रही थी।

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कुछ दुरी जाने के बाद कुछ लोग उनको देखकर बोल रहे थे कि कितना बड़ा मूर्ख है खुद घोड़ी पर बैठकर चल रहा है और अपनी पत्नी को पैदल लेकर जा रहा है, शेख चिल्ली को बुरा लगा और वह नीचे उतर गया और अपनी पत्नी को ऊपर बिठा दिया। उनकी पत्नी भी थक गई थी इसीलिए वह घोड़ी पर बैठकर खुश हुई और चलने लगी। शेख चिल्ली और उसकी पत्नी जा रहे थे।

तभी रास्ते में कुछ लोगों ने कहा कि कितना बड़ा मूर्ख है इसकी पत्नी के होते हुए भी यह पैदल चल रहा है और इसकी पत्नी घोड़ी पर बैठी है उसको भी शर्म नही आ रही है। शेख चिल्ली को बात बुरी लगी और वह भी स्वयं उस घोड़ी पर अपनी पत्नी के साथ बैठ गया। थोड़ी ही दूर चलने के बाद घोड़ी ने भी जवाब दे दिया वह काफी दुबली पतली थी इसलिए दोनों का बोझ सहन नहीं कर पा रही थी।

शेख चिल्ली उसपर चाबुक बरसाते हुए जा रहा था , तभी लोग आपस में बातें कर रहे थे कि देखो उसको कितना बड़ा मुर्ख है उस दुबली पतली घोड़ी पर दोनों बैठकर जा रहे है, बेचारे बेजुबान जानवर पर उनको तरस भी नही आ रहा है।

शेख चिल्ली ये बात सुनकर नीचे उतर गया और अपनी पत्नी को भी नीचे उतार दिया। अब शेख चिल्ली और उसकी पत्नी पैदल चल रहे थे और साथ में उसकी घोड़ी भी चल रही थी कुछ दूर जाने के बाद कुछ लोग फिर शेख चिल्ली के ऊपर हँसने लगे और उसे मूर्ख बोलने लगे और कहने लगे कि साथ में एक घोड़ी होते हुए भी दोनों पैदल जा रहे हैं।

अब शेख चिल्ली को गुस्सा आने लगा था वह घोड़ी को जमीन पर लेटाया और उसके हाथ पैर बांध दिए और अपने कंधे पर लाद लिया।  कुछ दूर जाने के बाद फिर कुछ लोगों ने उसका मजाक उड़ाया और कहने लगे , मुर्ख है मुर्ख – देखो कितना बड़ा मूर्ख है घोड़ी को अपने ऊपर लाद कर जा रहा है तभी शेखचिल्ली को बहुत तेज गुस्सा आया और तिल मिला उठा। वो गुस्से में घोड़ी को पास की तालाब में फेंक दिया और वापस चला गया।

लोग हमेशा आपको बोलते रहेंगे , आप अच्छा करो या बुरा कभी किसी की बात नही सुननी चाहिए, लोगों का काम है कहना

शेख चिल्ली और तार Sheikh Chilli and Telegram

एक बार शेख चिल्ली अपने घर से पैसे कमाने के लिए शहर की ओर गया और वहां पर नौकरी ढूंढना शुरू कर दिया। कुछ समय के बाद शेख चिल्ली को नौकरी मिल गई। एक दिन शेख चिल्ली के मालिक ने उसको कुछ पैसे और मनी आर्डर दिया और कहा – जाओ इसको तार कर दो। शेख चिल्ली तार घर पहुंचा और वहां पर जो बाबू था उससे पूछा तार से पैसे कैसे जाते हैं तब बाबू ने जवाब दिया क्यों नहीं जा सकते, जा सकते हैं।

तब शेख चिल्ली ने सोचा – हो सकता है शायद जाते हो। कुछ समय बाद शेख चिल्ली को अपने पत्नी के पैसे भेजने थे तो उसको याद आया की जैसे मेरे मालिक ने जैसे पैसे भेजे थे मैं भी वैसे भेज देता हुँ। वह तार घर की और चल दिया और उसने तार कर दिया।

कुछ दिन बाद उसकी पत्नी की चिट्ठी आई कि आप ने जो पैसे भेजे थे वह आ गए हैं आप वहां से एक तेल की शीशी ले आइए। तब शेख चिल्ली ने सोचा मैं जब घर जाऊंगा उसने काफी समय है।

उसने सोचा अगर तार से पैसे जा सकते है तो शीशी भी जा सकती है। अगर मैं इस तेल की शीशी को तार से भेज दूं तो जल्दी भी पहुंच जाएगा उसके बाद शेख चिल्ली ने दुकान से एक तेल की शीशी खरीदी और तार घर जा पहुंचा और उसने तार बाबू से कहा मुझे तेल की शीशी तार करनी है। इतना सुनते ही तार घर का बाबू शेख चिल्ली को देखने लगा और अपने मन में कहा- यह तो बहुत बड़ा बेवकूफ है।

तार घर के बाबू ने उस शीशी को रख लिया और कहा कि यह तार हो गया है। शेख चिल्ली बड़ा खुश हुआ और वहां से चला गया। कुछ दिन बाद उसकी पत्नी की चिट्ठी आई कि अभी तक आपने तेल की शीशी नहीं भेजी।

शेख चिल्ली ने सोचा मैंने तो तार कर दिया तो अभी तक क्यों नही पंहुचा। तब शेख चिल्ली को बहुत तेज गुस्सा आया और वह तुरंत तार घर पहुंचा और तार घर बाबू से बोला अभी तक मेरी तेल की शीशी क्यों नहीं पहुंची , जब मैंने तार किया था।

तो तार घर बाबू ने कहा जब आपकी तेल की शीशी तार से जा रही थी तब किसी ने उसमें डंडा मार दिया और वह शीशी फूट गई। अब आप बताइए इसमें मेरा क्या दोष है। तब शेख चिल्ली ने कहा कहा – सही बात है इसमें आपका कोई कसूर नहीं। लेकिन अगर वह डंडा मारने वाला मिल जाए मैं उसको बहुत मारूंगा और उससे अपनी शीशी मांगूंगा। यह कहकर शेख चिल्ली वहाँ से चला गया।

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