शुंग वंश का इतिहास History of Shunga dynasty in Hindi

शुंग काल का इतिहास (मौर्योत्तर काल) History of Shunga dynasty in Hindi : 185 -149 ई.पू. शुंग काल के समय ब्राह्मणों का राज्य था।

ब्राह्मण राज्य –

मौर्य राज्य के उत्तराधिकारी आगे जाकर दो राज्यों में बंट जाते है। 

  1. देशी उत्तराधिकारी 
  2. विदेशी उत्तराधिकारी 

देशी उत्तराधिकारी में सबसे पहले शुंग वंश ही आता है। मौर्य साम्राज्य के अंत के बाद इसके मध्य भाग की सत्ता शुंग वंश के हाथ में आ गयी।

शुंग वंश के पूर्वज Ancestor of the Shunga dynasty

शुंग वंश के पूर्वज मौर्यों की सेवा किया करते थे। ये उज्जैन के निवासी थे जो कि मध्यप्रदेश जिले में है और क्षिप्रा नदी के किनारे बसा हुआ है। यही भगवान शंकर का प्रसिद्ध मंदिर महाकालेश्वर भी स्थित है।

पुष्यमित्र शुंग ने शुंग वंश की स्थापना की थी।

पुष्यमित्र अंतिम मौर्य साम्राज्य वृहदृत की हत्या कर देता है पूरे मगध पर कब्ज़ा कर लेता है और अगर हम मगध की  बात करते है तो मगध के पहले शासक का नाम भी वृहदृत था और अंतिम शासक का नाम भी वृहदृत था।

पुष्यमित्र द्वारा वृहदृत की हत्या क्यों की गयी –

पुष्यमित्र शुंग के काल में भारत में यवन का आक्रमण होता है यवन लोग पहले अफग़ानिस्तान पर कब्ज़ा किया था इसके बाद फिर  गंधार पर कब्ज़ा किया और इसतरह वे आगे बढ़ते हुए मौर्य पर भी कब्ज़ा करने का प्रयत्न करने लगे। पुष्यमित्र शुंग इस समय मगध के  सेनापति के रूप में नियुक्त था।

इस समय मगध की गद्दी वृहदृत के हाथ में थी तो पुष्यमित्र को सेनापति होने के नाते यह महसूस हुआ कि अगर उनके राजा वृहदृत ने इस बात का कोई समाधान न निकाला तो पूरा मगध यवन लोगों के हाथ में चला जायेगा। 

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वृहदृत एक शांतीप्रिय नेता था वह युद्ध से दूर  रहना चाहता था। वृहदृत अशोक के वंश से था। सम्राट अशोक ने जब कलिंग का युद्ध लड़ा तो उसकी मुलाकात उपगुप्त नाम के एक बौद्ध से हुई, जब अशोक उपगुप्त के सम्पर्क में आता है तो उपगुप्त उसको ज्ञान देता है यह युद्ध संसार एक मोह माया है।

अशोक उपगुप्त के ज्ञान का अनुसरण करते हुए बौद्ध धर्म अपना लेता है और पूरे भारत में उसने 84000 स्तूपों की रचना करा देता है और अपने बच्चों को अलग अलग देशों में बोद्ध धर्म का प्रचार करने के लिये भेज देता इसी पीढ़ी में एक वृहदृत भी थे इसलिए वह शांतिप्रिय थे। 

इसतरह पुष्यमित्र के द्वारा वृहदृत की हत्या कर दी गयी अगर पुष्यमित्र हत्या नही करता तो पाटलीपुत्र  पर यवन का अधिकार हो जाता तब पुष्यमित्र ने अपनी राजधानी मध्यप्रदेश के बिदिशा शहर को बना दिया ताकि जनता के द्वारा होने बाले विद्रोह से बचा जा सके। इन सब के बावजूद उसने अपनी सेनापति की उपाधि को भी नहीं बदला।

पुष्यमित्र शुंग के बारे में जानकारी –

अयोध्या अभिलेख में ये लिखा हुआ है कि पुष्यमित्र शुंग ने दो अश्वमेघ यज्ञ कराये थे एक उसने अपने राज्य शुरू करने के समय कराया था दूसरा अपने अंतिम समय में।

इस युद्ध को करने में महर्षि पतंजलि की भूमिका थी यह सबसे पहले योग गुरु थे। पुष्यमित्र शुंग के समय में ही हिन्दू धर्म का उद्धार हुआ उन्होंने 84000 स्तूपों को नष्ट करा दिया क्यों कि पुष्यमित्र बोद्धधर्म के विपरीत थे पर बाद में इन्होंने दो स्तूपों का निर्माण भी कराया जिनके नाम भरहूत स्तूप जो कि सतना में स्थित है।

दूसरा साँची स्तूप रायसेन जिले में है, साँची में  एक बड़ा स्तूप है और दो छोटे छोटे स्तूप है कुल मिलाकर साँची में तीन स्तूप है बड़े स्तूप को महा स्तूप कहते है और इसमें महात्मा बुद्ध के धातु अवशेष को रखा गया है जैसे उनके सामानों को रखा गया है। 

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महास्तूप का निर्माण चारों तरफ ईटों से हुआ है पहले इसके निर्माण में काष्ट वेदिका का उपयोग किया गया था पर बाद में उसको सुरक्षित रखने के लिये पुष्यमित्र ने पुनः निर्माण कराया ताकि वह हजारों साल तक सुरक्षित बने रहे।

शुंग वंश की विशेषतायें Facts and Features of Shunga dynasty in Hindi

  1. मनुस्मृति के वर्तमान स्वरूप की रचना भी शुंग काल में हुई थी मनुस्मृति दुनियां की सबसे पुराणी स्म्रृति में से एक है।
  2. बिदिशा का गरु स्तभ भी शुंग के शासन काल में बना था।
  3. अजंता का नवां चैत्य मंदिर भी शुंग के शासन काल में ही बनाया गया था।
  4. नाशिक तथा कारले का चैत्य मंदिर भी शुंग वंश के द्वारा बनाया गया।
  5. मथुरा में अनेक यक्ष की मूर्तियाँ भी शुंग वंश के बारे में बताती है।
  6. पुष्यमित्र शुंग ने पाटलिपुत्र में स्थित कुकुटा रामबिहार नामक एक जगह को तीन बार नष्ट करने का प्रयास किया  क्योंकि यहाँ के लोग ज्यादा ही विद्रोह करते थे पर वह असफल रहा।
  7. पुष्यमित्र शुंग ने 36 साल तक शासन किया।
  8. शुंग वंश में 10 शासकों ने शासन किया।
  9. भारतीयों ने यवन से ज्योतिषी का ज्ञान प्राप्त किया।
  10. इसतरह शुंग वंश आगे बढ़ता गया और 149 ई. पू. में इसका अंत हो गया। 

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