प्रमुख भारतीय समाज सुधारक Social Reformers of India in Hindi

प्रमुख भारतीय समाज सुधारक और उनके योगदान Social Reformers of India in Hindi

कई दशक आते हैं तो कई दशक जाते हैं परंतु जो रह जाते हैं वह है महान समाज सुधारकों के महान कार्य और हमारे समाज में उनके लिए सम्मान। भारत के लिए यह एक बहुत ही सम्मान की बात है कि राजा राममोहन रॉय, दयानंद सरस्वती, मदर टेरेसा जैसे महान समाज सुधारकों ने इस पावन धरती में जन्म लिया और अपने महान कार्यों से समाज में एक नई सोच और विचारधारा को जागृत किया।

सभी महान महान समाज सुधारकों ने समाज में कट्टरपंथी परिवर्तन के क्रांति को शुरू किया। कुछ महान समाज सुधारकों ने जाति भेदभाव को दूर करने का ठान लिया तो कुछ नहीं कन्या शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया।

इन महान व्यक्तियों ने लोगों की भलाई के अविश्वसनीय  कार्य किये जिससे समाज में एक सुन्दर, शांत, मानवता और खुशियों से भरा हुआ वातावरण बना रहे। इन महान व्यक्तियों में देश में एक नयी सोच की शुरुवात की जिनका आज भी हम पालन करते हैं।

समाज से सामाजिक बुराइयों द्वारा होने के लम्बे शोषण को कई हद तक इन समाज सुधारकों ने अपने कदम से कम करने में मदद किया। इस लेख में कई महान समाज सुधारकों के विषय में हमने बताया है और उनके महान कार्यों का उल्लेख भी किया है।

प्रमुख भारतीय समाज सुधारक Social Reformers of India in Hindi

राजा राम मोहन रॉय Raja Ram Mohan Roy

राजा राम मोहन रॉय (22 मई 1772 – 26 सितम्बर 1833),उन्होंने ब्रह्म सभा आंदोलन की शुरुआत 1828 में की और बाद में इसी के फलस्वरुप ब्रह्म समाज की स्थापना की। यह एक प्रभावशाली धार्मिक और सामाजिक आन्दोलन था।

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उनका प्रभाव राजनीति, लोक प्रशासन और शिक्षा के साथ-साथ धर्म के क्षेत्र में स्पष्ट था। राजा राममोहन राय जी को खासकर बंगाल की क्षेत्रों में सती प्रथा को समाप्त करने के उनके प्रयासों के लिए जाना जाता है। उन्हें भारतीय पुनर्जागरण के पिता के रूप में भी जाना जाता है।

राजा राम मोहन रॉय का जीवन परिचय पढ़ें…

स्वामी विवेकानंद Swami Vivekananda

स्वामी विवेकानंद( 12 जनवरी 1863 – 4 जुलाई 1902), उनका नाम जन्म होने के बाद नरेंद्र दत्ता रखा गया था। वह एक हिंदू साधु थे जो 19वीं सदी में महान साधु रामकृष्ण परमहंस जी के परम शिष्य थे। उन्होंने आधुनिक वेदांत और राज योग की शिक्षा लोगों को दिया।

साथ ही उन्होंने 19वीं सदी के अंत समय में हिंदू धर्म का प्रचार प्रसार विश्व स्तर पर किया। विवेकानंद ने रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी। 1893 अमेरिका, शिकागो में विश्व धर्म संसद में उनके हिन्दू धर्म पर भाषण को आज भी पूरी दुनिया में याद किया जाता है।

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय पढ़ें…

ज्योतिराव गोविंदराव फुले Jyotirao Govindrao Phule

ज्योति राव फुले( 11 अप्रैल 1827 –  28 नवंबर 1890), भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता, एक विचारक, जाति-विरोधी सामाजिक सुधारक और महाराष्ट्र के एक लेखक थे। उन्होंने जाति प्रथा, छुआ-छात, जैसे समाज के कलंक को को दूर करने और हिंदू परिवार के जीवन में सुधार लाने का प्रयास किया।

उन्होंने अपने अनुयायियों के साथ मिलकर सत्यशोधक समाज की स्थापना की जिसका मूलाधार समाज में जाति भेदभाव को दूर करके नीची जातियों को भी समान अधिकार दिलाना था। उन्हें खासकर महाराष्ट्र में एक महान समाज सुधारक आंदोलन जागृत करने के लिए जाना जाता है। साथ ही उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ महिलाओं को शिक्षा दिलाने पर भी भारत में बढ़ावा दिया।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर Ishwar Chandra Vidyasagar

ईश्वर चंद्र विद्यासागर( 26 सितंबर 1820 –  29 जुलाई 1891), जन्म के बाद उनका नाम ईश्वर चंद्र बंदोपाध्याय था। वह ब्रिटिश भारत के दौरान के एक बंगाली बहुश्रुत और बंगाल पुनर्जागरण के एक प्रमुख नेता थे। वह एक दार्शनिक, अकादमिक शिक्षक, लेखक, अनुवादक, प्रकाशक, उद्यमी, सुधारक और परोपकारी व्यक्ति थे।

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बंगाली गद्य को सरल बनाने और आधुनिकीकरण के उनके प्रयास महत्वपूर्ण थे। उन्होंने बंगाली वर्णमाला और प्रकार को भी तर्कसंगत और सरलीकृत किया। उन्होंने ब्रिटिश सरकार को विधवा पुनर्विवाह अधिनियम को पारित करने के लिए भी मजबूर किया था।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर का जीवन परिचय पढ़ें…

दयानंद सरस्वती Dayanand Saraswati

दयानंद सरस्वती( 12 फरवरी 1824 –  30 अक्टूबर 1883), वह एक धार्मिक नेता और आर्य समाज के संस्थापक थे जिन्होंने वैदिक धर्म के भारतीय सुधार आंदोलन मैं अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने ही सर्वप्रथम 1876 ‘स्वराज’ शब्द को शुरू किया जिसे बाद में लोकमान्य तिलक ने भारत की आजादी के नारे के रूप में बढ़ावा दिया।

स्वामी दयानंद सरस्वती को वैदिक विद्या और संस्कृत भाषा का प्रसिद्ध विद्वान माना जाता है। साथ ही,, भारत के दार्शनिक और राष्ट्रपति, एस राधाकृष्णन ने उन्हें “आधुनिक भारत के निर्माताओं” में से एक कहा, जैसा कि श्री अरबिंदो।

दयानंद सरस्वती का जीवन परिचय पढ़ें…

बाबा आमटे Baba Amte

बाबा आमटे( 26 दिसंबर 1914 – 9 फरवरी 2008), उनका असली नाम मुरलीधर देवीदास आमटे है। वह एक भारतीय समाज सेवक और सामाजिक कार्यकर्ता थे जिन्हें कुष्ठ रोग से पीड़ित गरीब लोगों के पुनर्वास और उत्थान के लिए विशेष रूप से उनके काम के लिए जाना जाता हैं।

उन्होंने अपनी पत्नी साधना आमटे के साथ मिलकर साल 1950 में कुष्ठ रोगियों के लिए एक संस्था आनंदवन की शुरुआत की थी। उन्हें पद्मा विभूषण, गांधी शांति पुरस्कार, रामन मैगसेसे पुरस्कार, टेम्पलटन पुरस्कार और जमनालाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

विनोबा भावे Vinoba Bhave

विनायक नरहरि विनोबा भावे( 11 सितंबर 1895 –  15 नवंबर 1982), को मुख्य रूप से विनोबा भावे के नाम से जाना जाता है।वह एक भारतीय वकील और अहिंसा व  मानव अधिकार के लिए लड़ने वाले व्यक्ति थे।विनोबा भावे को उनके भूदान आंदोलन के लिए भी जाना जाता है।

उन्हें महात्मा गांधी जी के ‘आध्यात्मिक उत्तराधिकारी’ और  ‘भारत के राष्ट्रीय शिक्षक’ के रूप में भी माना जाता है। उन्हें प्रथम सत्याग्रही माना जाता है जवाहरलाल नेहरु जी के साथ जिन्होंने महात्मा गांधी जी के सत्याग्रह आंदोलन में साथ दिया।

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मदर टेरेसा Mother Teresa

मदर टेरेसा( 26 अगस्त 1910 –  5 सितंबर 1997) जिन्हें कलकत्ता के सेंट टेरेसा के रूप में रोमन कैथोलिक चर्च में माना जाता है। उनका असली नाम अंजे गोन्शे बोजक्षी था परंतु उनके महान कार्यों में उन्हें मदर टेरेसा के नाम से मशहूर बना दिया।

उनका जन्म ऑटोमन साम्राज्य के कोसोवो विलायत के एक हिस्से में हुआ था। मैसेडोनिया में 18 साल रहने के बाद वह आयरलैंड पहुंची और उसके बाद वह भारत आए जहां उन्होंने अपना पूरा जीवन व्यतीत किया। सन 1950 में मदर टेरेसा है रोमन कैथोलिक चर्च, मिशनरी ऑफ चैरिटी की शुरुआत की जिसमें साल 2012 तक 133 देशों की 4500 सिस्टर जुड़ चुकी थी।

क्या समूह एचआईवी एड्स से मरने वाले लोगों, कुष्ठ और ट्यूबरकुलोसिस से प्रभावित लोगों और उनके परिवार की देखभाल करती थी। मदर टेरेसा को साल 1962 में रामन मैगसेसे शांति पुरस्कार और 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया।

भीमराव रामजी अंबेडकर Bhimrao Ramji Ambedkar

बी आर अंबेडकर / भीमराव रामजी अंबेडकर(14 अप्रैल 1891 –  6 दिसंबर 1956), उन्हें बाबासाहेब के नाम से जाना जाता है। वह एक भारतीय वकील, अर्थशास्त्री, राजनेता और सामाजिक सुधारक जिन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रोत्साहन दिया और दलित लोगों के ऊपर होने वाले  छुआ छात भेदभाव का विरोध किया।

साथ ही बाबासाहेब आंबेडकर ने महिलाओं और श्रमिकों के अधिकार तो दिलाने का प्रयास किया। वह स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री बने। उन्हें भारतीय संविधान के वास्तुकार और भारत गणराज्य के संस्थापक पिता के रुप में भी माना जाता है।

भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय पढ़ें… 

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