बेरोजगारी पर भाषण Speech on Unemployment in Hindi

इस लेख में हमने बेकारी या बेरोजगारी पर भाषण (Speech on Unemployment in Hindi) दिया है। आज बेरोजगारी विश्व भर में एक बड़ी समस्या बन चुकी है।

बेकारी या बेरोजगारी पर भाषण Speech on Unemployment in Hindi

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माननीय प्रिंसिपल,सर माननीय शिक्षकगण और मेरे प्रिय दोस्तों आप सभी को मेरा नमस्कार,

आज हमने अपने इस आर्टिकल में बेरोजगारी पर भाषण प्रस्तुत किया है। जैसा कि हमें पता है भारत बेरोजगारी जैसी बड़ी समस्या से जूझ रहा है। देश के युवा नौकरी के अवसरों की कमी से परेशान है। ये हम सभी के लिए एक ज़रुरी मुद्दा है और इस समस्या से जनता को सही समय पर अवगत कराने के लिए हम सभी को मिल कर इसे सार्वजनिक रूप से हर जगह लोगो को जागरूक करना चाहिए। 

 बेरोजगारी का सीधा मतलब लोगो को रोज़गार न मिलना।  बेरोजगारी में उन्ही लोगो को लिया जाता है जिनको काम न मिला हो, उनको नही जो काम न करना चाहे। बेरोजगारी के मुख्य तीन रूप है – श्रमिक वर्ग जो अशिक्षित है, शिक्षित लोग जिनके पास कोई तकनीकी नही है और तीसरे वो जो शिक्षित है और उनके पास तकनीक भी है। 

श्रमिक वर्ग या मज़दूर वर्ग के लोगो की आज स्थिति ऐसी है कि उनको अपना रोज़गार खुद ही तलाश करना पड़ता है। क्योंकि दैनिक आधार पर पैसे कमाने के लिए और कोई उपाय नही है। मज़दूर वर्ग के लोगो को किसी विशेष जगह पर नियमित रूप से काम तो मिल जाता है लेकिन कभी काम नही भी मिल पता है। इस वर्ग के लोगो की बुनियादी आवश्यकतायें ( रोटी, कपड़ा और मकान ) पूरी हो या ना हो लेकिन वो बेरोजगारी की इस हालत में भी अपनी कोशिश जारी रखते है। 

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हमारे देश में  60 प्रतिशत युवा है और रोज़गार न होने की वजह साक्षर लोग की आबादी बढती जा रही ही इसका मुख्य कारण है कि सरकार द्वारा कार्यालयों में इन्हें सही तरीके से समायोजित न कर पाना। इस वर्ग के लोग शिक्षित तो होते है लेकिन उनके पास कोई तकनीकी नहीं होने के कारण ये क्लर्क जैसी सरकारी नौकरियों की तैयारी करते है। और अपनी आधी उम्र तैयारी में लगा देते है इस तरह धीरे धीरे बेरोजगारी और भी बढ़ने लगती।  

ऐसे लोग जिनके पास तकनीकी है उनको और ज्यादा निराशा का सामना करना पड़ता है क्योंकि उन लोगो को इनके योग्यता के अनुसार नौकरी नही मिल पाती और वो और ज्यादा निराश रहते है। इस वर्ग में भी बेरोजगारी धीरे धीरे बढती जा रही है क्योंकि आज हर तीसरा आदमी तकनीकी विशेषता प्राप्त करना चाहता है। हमारे लिए ये तो अच्छी बात है कि हर आदमी उच्च शिक्षा की ओर जा रहे है लेकिन दुःख की यह है कि उनको सही रोज़गार नही मिल पता और बेरोजगारी धीरे धीरे बढती जा रही है।

अगर भारत में बेरोजगारी दर की बात करे तो बेरोजगारी आंकड़े 2011 से ही बढ़ रहे है। 2011 में बेरोजगारी आंकड़े 3.5 प्रतिशत था। ये आंकड़ा 2012 में बढ़कर 3.6  हो गया। 2013 में ये आंकड़ा और बढ़ा और ये 3.7 पहुँच गया। 2018 में 5.9 और अब 2019 में ये आंकड़ा बढ़कर 7.2 % हो गया है। इस वक़्त भारत में बेरोजगारी पिछले 45 वर्षो मे उच्चतम है। अगर उच्च शिक्षा में देखा जाये तो महिलाओं की बेरोजगारी ज्यादा है पुरुषों की अपेक्षा में। 

जैसा की हमें पता है कि हमारे महान भारत देश की जनसंख्या 1.30 अरब जनसंख्या वाला विशाल देश है, और शायद यही एक मुख्य वजह है की हमारे देश में बेरोजगारी तेजी से बढती जा रही है। इतनी ज्यादा जनसंख्या होने के कारण हमारी सरकार सभी के लिए रोज़गार उपलब्ध कराने में असमर्थ है।

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बेरोजगारी के मुख्य कारण क्या है?

हमारे देश में बेरोजगारी के कई कारण है जिनकी वजह से दिन-ब-दिन बेरोजगारी जैसे समस्या बढती जा रही है – 

इसमें सबसे मुख्य कारण है जनसंख्या। हमारे देश की जनसंख्या दुनिया भर में दूसरे स्थान पर है और यही मुख्य कारण है कि जनसंख्या ज्यादा होने के कारण हमारी सरकार बेरोजगारी को खत्म नही कर पा रही है।

दूसरा मुख्य कारण ये भी है कि लोग स्वारोजगार नही करना चाहते। यहाँ हर तीसरा व्यक्ति सरकारी नौकरी का ख़्वाब देखता है और नौकरी के पीछे अपना महत्वपूर्ण समय बर्बाद कर देते है। जिससे बेरोजगारी बढती जा रही है।

तीसरा मुख्य कारण ये है कि हमारे यहाँ शिक्षा प्रणाली अच्छी नही और बच्चे का ज्ञान किताबों तक ही सीमित रह जाता है। जिससे उनको बाहरी दुनिया के बारे नही पता चल पाता। 

भारत में नौकरियों की ज्यादा कमी नही है लेकिन यहाँ पर हर व्यक्ति सरकारी नौकरियों की तैयारी करते है जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है, जिससे अतिरिक्त व्यक्तियों के हाथ निराशा ही लगती है।

 बेरोजगारी कम करने के उपाय क्या है?

अगर बेरोजगारी जैसी बड़ी समस्या को हल करे तो शायद ये इतना भी कठिन नही लेकिन लोग को ये समझना होगा कि बेरोजगारी कैसे खत्म किया जा सकता है। भारत सरकार द्वारा कुछ योजनाये और कुछ कार्यक्रम चलाये जा रहे है जिससे आने वाले समय में बेरोजगारी को कम किया जा सके।

देश में बेरोजगारी की समस्या को हल करने के लिए सरकार द्वारा 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम शुरू किया था। जिसमे एक साल में एक व्यक्ति को 100 दिन का रोज़गार दिया जायेगा। ये योजना पहले केवल 200 जिले में लागू किया गया था, लेकिन बाद में इसे 600 जिले में लागू किया गया। 

इसके अतिरिक्त भारत सरकार द्वारा बहुत से स्वरोजगार योजनाये भीचलाये जा रहे है। जिसमे सरकार स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है। सरकार के द्वारा स्वरोजगार शुरू करने के लिए लोन(Loan) भी दे रही है। सरकार का मानना है कि आप लोगो को नौकरी दे, लोगो से नौकरी माँगे नही। 

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ये हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अपने आस-पास के लोगो को समझाये कि स्वारोजगार के क्या फायदे है। जिससे बेरोजगारी कम हो सके। लोगो के दिमाग में ये होता है कि कहीं व्यापार या स्वयं-रोज़गार में विफल न हो जाये लेकिन शायद उनको ये नही पता कि अगर वो व्यवसाय शुरू करता है तो कितने लोगो को रोज़गार दे सकता है। 

हमें बेरोजगारी को कम करने की शुरूआत छात्रों से करना चाहिए क्योंकि ये आने वाले समय भारत का भविष्य है। हमें छात्रों को प्रोत्साहित करने और उन्हें सही मार्ग दिखाने की आवश्यकता है जिसके वे इस समस्या को हराने में सक्षम हो सके।

ये तभी हो सकता है जब एक अच्छा शिक्षक छात्रों को सही रूप में अपनी रूचि के अनुसार अपना कैरियर चुनने की सलाह दे और इसके साथ साथ उनको बेरोजगारी के बारे में बताये। जिससे आगे चल कर ये बेरोजगारी जैसी समस्या को कम कर सके। 

इसकी के साथ मैं अपना ये भाषण (बेरोजगारी पर भाषण) यही पर खत्म करने की अनुमति चाहता हूँ। धन्यवाद।

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