श्रीमद भगवद गीता क्या है What is Srimad Bhagavad Gita & Its Importance in Hindi?

श्रीमद्भगवदगीता / श्रीमद भगवद गीता क्या है What is Srimad Bhagavad Gita & Its Importance in Hindi? also Its Reading Benefits

भारत की संस्कृति और सभ्यता में “श्रीमद्भगवदगीता” या “भगवत गीता” का महत्वपूर्ण स्थान है। यह विश्व की सबसे प्रसिद्ध पुस्तकों में से एक है। भारत में ही नही बल्कि विदेशों में यह ग्रंथ बहुत पढ़ा जाता है। इसमें श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को उपदेश दिया गया है।

यही उपदेश भगवत गीता के नाम से प्रसिद्ध है। इसमें कुल 18 पर्व (अध्याय) और 720 श्लोक है। भीष्मपर्व में श्रीकृष्ण का उपदेश दिया गया है। हिंदू धर्म में इस ग्रंथ को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। इसकी रचना महर्षि वेदव्यास ने की थी।

यह किसी जाति, धर्म विशेष का ग्रंथ नही बल्कि सम्पूर्ण मानवता का ग्रंथ है। यह मनुष्यों को कर्म का संदेश देता है। पाश्चात्य विद्वान हम्बाल्ट ने गीता से प्रभावित होकर कहा है कि- “किसी ज्ञात भाषा में उपलब्ध गीतों में सम्भवत: सबसे अधिक  सुन्दर और दार्शनिक गीता है।

गीतः-गज्त्र त्रैंश्त्र जगत की परम निधि है” इसमें सभी वेदों का सार है। इस ग्रन्थ का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। महाभारत के युद्ध में अर्जुन जीवन की समस्याओं से हताश हो गये थे। किंकर्तव्यविमूढ़ होकर अपने कर्म और युद्ध धर्म से विमुख हो गये थे। तब श्रीकृष्ण ने उनको निष्काम भाव से कर्म करने का उपदेश दिया था। फल की इक्षा छोड़कर कर्म करने का उपदेश दिया।

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पढ़ें: भगवद गीता के ज्ञानवर्धक उपदेश

श्रीमद्भगवदगीता /श्रीमद भगवद गीता क्या है What is Srimad Bhagavad Gita & Its Importance in Hindi? also Its Reading Benefits

Contents

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गीता का उपदेश PREACHING OF BHAGAWAD GITA

“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भू: मा ते सङ्‌गोस्त्वकर्मणि”

यह कहते हुए श्रीकृष्ण बोले कि आत्मा अजर अमर अविनाशी है। इसे कोई मार नही सकता है। इसे न जल भिगो सकता है और न ही अग्नि जला सकती है। आत्मा को हवा उड़ा नही सकती और कोई अस्त्र इसे काट नही सकता। जिस तरह व्यक्ति कपड़ा पुराना हो जाने पर नये वस्त्र धारण कर लेता है, उसी तरह व्यक्ति के मरने के बाद आत्मा नया शरीर धारण कर लेती है। इसे कभी मारा नही जा सकता।

इसलिए हे अर्जुन!! अपने रिश्तेदारों, भाई- बहनों की मृत्यु पर तुम शोक न करो।  तुम युद्ध करो!! यदि तुम्हे युद्ध में विजय प्राप्त हुई तो श्री मिलेगी पर यदि तुम युद्ध नही कोरोगे तो अपयश मिलेगा। देश में इस पुस्तक का प्रकाशन “गीता प्रेस” करती है। दूरदर्शन चैनल (DD1) पर यह ग्रंथ धारावाहिक के रूप में दिखाया गया था जो बहुत प्रसिद्ध रहा था।

श्रीमद्भगवदगीता/ गीता का महत्व IMPORTANCE OF BHAGAWAD GITA

कलयुग में गीता पढ़कर लोगो को अपनी समस्याओं का हल मिलता है, इसे पढ़ने से आत्मिक शांति मिलती है। यह ग्रन्थ भटके मनुष्यों को राह दिखाता है। इसे पढ़ने से लोगो का पाप समाप्त हो जाता है।

आज का मनुष्य जीवन की चिंताओं, समस्याओं, अनेक तरह के तनावों से घिरा हुआ है। कई बार वह भटक जाता है। उसे कुछ समझ नही आता है की क्या करे। ऐसे में गीता मनुष्यों को “क्रियाशीलता” का संदेश देती है। यह जीवन जीने की कला सिखाती है।

चिन्ता ज्वाल शरीर में, बन दावा लगि जाए।
प्रगट धुआँ नहिं ऊपजे, मन अन्दर धुँधियाय।।

अपने जीवन में कर्म करते हुए हम अनेक बार सफल और असफल होते है। पर तनिक सी असफलता मनुष्य को परेशान कर देती है। वो परेशान हो जाता है, चिंतित होकर जीवन जीने लगता है। ऐसे में गीता सिखाती है की कर्म करें पर फल की इक्षा न करे।

और पढ़ें -  50 श्रीमद्भगवद्गीता कर्म पर उपदेश Srimad Bhagavad Gita Karma Quotes in Hindi

फल की कामना करने से व्यक्ति अनायास ही भ्रमित चिंतित परेशान हो जाते है। गीता कहती है की फल को ईश्वर पर छोड़ देना चाहिये क्यूंकि मनुष्य के हाथ में सिर्फ कर्म करना ही है।

फल देना ईश्वर के हाथ में है। यह पुस्तक आम लोगो के लिए एक मुक्ति द्वार है। हमारे जीवन में अनेक समस्याएँ हमारे मन के द्वारा पैदा होती है। मनुष्य का मन बहुत चंचल होता है। किसी एक जगह पर नही टिकता है। इधर से उधर भागता रहता है। स्वयं श्रीकृष्ण भगवान ने इसे वश में करना अत्यंत कठिन बताया है।

श्रीमद्भगवदगीता पढने के लाभ IMPORTANCE OF READING BHAGAWAD GITA

गीता योगशक्ति से मन को वश में करना सिखाती है-

  • लोगो की चिंताओं को दूर करती है
  • भटके मनुष्यों को सही राह दिखाती है
  • निष्काम रूप से कर्म करने को कहती है
  • इसे पढ़ने से मोक्ष मिलता है
  • इसे पढ़ने वाले को आत्मिक शांति मिलती है
  • किये गये कर्म को ईश्वर पर छोड़ने के लिए कहती है
  • चंचल मन में वश में करने का उपाय बताती है
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सफल होने के लिए गीता के 10 मंत्र 10 MANTRAS OF SUCCESS BY BHAGAWAD  GEEETA BOOK

कोई भी व्यक्ति गीता पढकर सफल बन सकता है। इसका मूलमंत्र इस प्रकार है-

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काम में ख़ुशी खोजो

जिस व्यक्ति को अपने काम में आनन्द आने लगता है वह कई कई घंटो तक जी जान से काम करता है। ऐसी में सफलता तो मिलनी ही है।

तनाव दूर रखे

यह ऐसी चीज है जो किसी भी चीज को सही प्रकार नही होने देती है। अक्सर तनाव में वाहन चलाने पर ही दुर्घटना होती है। इसलिए इसे दूर भगाएं।

ईश्वर पर विश्वास रखे

अक्सर असफलता मिलने पर व्यक्ति का ईश्वर पर से विश्वास उठ जाता है। ऐसे में गीता विश्वास बनाये रखने का उपदेश देती है। हो सकता है की आपके कर्म का फल आपको कुछ समय बाद मिले।

अशांत मन को वश में करना सीखो

गीता योग के द्वारा चंचल या अशांत मन को स्थिर करने का उपदेश देती है। क्यूंकि अशांत मन से किया गया काम कभी सफल नही होता है।

खुद का निर्माण

खुद में विश्वास करो। खुद का निर्माण सद्कर्म द्वारा करो।

खुद का आकलन करो

अपनी अच्छाई, बुराइयों को देखो। खुद पर अनुशासन रखो। मन में अंधकार हो तो उसे आशा की किरण से रोशन करो।

देखने का दृष्टिकोण बदलो

जीवन में अनेक समस्याएं हमारे गलत दृष्टिकोण की वजह से उपजती है। ऐसी में इसे बदलना चाहिये।

क्रोध पर नियन्त्रण करो

आमतौर पर मनुष्य सभी बड़े अपराध क्रोध के समय करता है। क्रोध से बुद्धि नष्ट हो जाती है, व्यक्ति समझ ही नही पाता है की वह क्या कर रहा है। बाद में वह बहुत पछतावा करता है। इसलिए हमे क्रोध को वश में करना चाहिये।

असफलता से मत घबराओ

क्यूंकि सफलता और असफलता जीवन में आते जाते रहते है। इसलिए मनुष्य को कर्म में अधिक विश्वास करना चाहिये।

गीता कुंडली में शनि पीढ़ा दूर करती है

यदि आपकी कुंडली में शनि गृह अशुभ स्थान पर है जो आपको गीता के “प्रथम पाठ” पढ़ना चाहिये। सभी लोगो को यह पुस्तक पढ़नी चाहिये।

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