सरोगेसी प्रक्रिया: पूरी जानकारी Surrogacy Information in Hindi

इस लेख में हम आपको सरोगेसी प्रक्रिया की पूरी जानकारी (Surrogacy Information in Hindi) देने वाले है, जिसमे हम आपको सरोगेसी क्या होता है, इसकी प्रक्रिया, खर्च, फायदे और नुकसान के साथ सरोगेसी विधेयक कानून के बारे में भी जानकारी देने वाले है। 

सरोगेसी प्रक्रिया की पूरी जानकारी Surrogacy Information in Hindi

आप सभी को पता है कि हर दंपत्ति चाहता है कि  उसका एक संतान हो, जिससे उनको भी संतान का सुख प्राप्त हो सके। किंतु बहुत सी महिलाएं भी होती है, माँ बनाने के लिए सक्षम नही होती है और उनको संतान सुख मिल पाना एक सपना जैसा लगता है। लेकिन आज की आधुनिक समय में सरोगेसी उन औरतों के लिए वरदान है जो माँ नहीं बन पाती है।

चिकित्सा के क्षेत्र में ये तकनीकी किसी उन महिलाओं के लिए  वरदान से कम नही है जो माँ नही बन सकती। इस तकनीकी का इस्तेमाल बहुत से फ़िल्मी दुनिया के  सितारों, बिज़नेस मैन के साथ और भी बहुत से लोगों ने भी पैरेंट बनाने के लिए उपयोग किया है।

सरोगेसी क्या होता है? What is Surrogacy in Hindi?

हम सभी जानते है कि आज पूरी दुनिया ने विज्ञान के क्षेत्र में बहुत विकास कर लिया है। चिकित्सा के क्षेत्र में भी अपने आपको साबित करते हुए वैज्ञानिकों ने इस तकनीकी की भी खोज किया है। इस खोज ने उन सभी महिलाओं के लिए वरदान है, जो कभी भी माँ नही बन सकती। 

सरोगेसी एक ऐसी तकनीकी है, जिसके द्वारा माँ न बन पाने वाली महिलाएं भी संतान प्राप्त कर सकती है। अगर इसके आसन भाषा में समझाया जाए, तो इसे “उधार या किराये पर लिया हुआ कोख” भी कहा जा सकता है।

अगर किसी महिला का गर्भ धारण नही हो रहा है, अर्थात वो माँ नही बन पा रही है, उसे बच्चे को जन्म देने में समस्या आती है या गर्भपात हो जाता है अथवा उसके गर्भाशय में किसी प्रकार का संक्रमण है। 

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ऐसी स्थिति में सरोगेसी एक अच्छा विकल्प है माँ बनने के लिए। सरोगेसी में एक दूसरी महिला और दंपत्ति के बीच एक प्रकार का समझौता होता है। जिसमे दंपत्ति दूसरी महिला को पैसे देते है और वो उसके बच्चे को अपने गर्भ में पालती है। 

इस प्रक्रिया में जो महिला माँ बनना चाहती है उसके गर्भाशय में निषेचित हुए अंडे यानी भ्रूण (Embryo) को एक निश्चित समय के पश्चात् निकालकर उसको दूसरी स्वस्थ महिला के गर्भ में स्थांतरित कर दिया जाता है। 

दूसरी महिला के गर्भाशय में इस बच्चे का पूर्ण रूप से विकास होता है और समय पूरा होने के बाद स्वस्थ बच्चे का जन्म होता है। इसमें दंपत्ति, अन्य महिला के कोख को किराए पर लिया जाता है, और इस महिला को सरोगेट मदर (Surrogate Mother) के नाम से जाना जाता है। (source)

सरोगेसी के प्रकार Types of Surrogacy in Hindi

ये दो प्रकार के होते है पहला ट्रेडिशनल और जेस्टेशनल सरोगेसी-

1. ट्रेडिशनल सरोगेसी (Traditional Surrogacy)

इसमें पिता के शुक्राणुओं को किसी अन्य महिला के साथ निषेचित करके भ्रूण बनाया जाता है, क्योंकि उस महिला के कोई संभावना नहीं होती है।

2. जेस्टेशनल सरोगेसी (Gestational Surrogacy )

इसमें दंपत्ति के  यानि माता-पिता के अंडे और स्पर्म को परखनली में निषेचित करवाते है और फिर भ्रूण को स्थानांतरित करते है। (source)

सरोगेसी में कितना खर्च आता है? Surrogacy Cost in India

दोस्तों, अगर हम सरोगेसी की प्रक्रिया में आने वाले खर्च की बात करें, तो डॉक्टरों का मानना है कि इस प्रक्रिया में ज्यादा पैसे खर्च होते है। इसमें लगभग 15 से 20 लाख का खर्च आता है। 

ये महंगे होने का कारण यह है कि सरोगेट मदर या उसके परिवार को अच्छी देखभाल के लिए हर महीने 15 से 20  हजार रुपये देने पड़ते है। इसे आप दूसरे शब्दों में उसकी कोख का का किराया भी समझ सकते है। 

जो लोग सरोगेसी के द्वारा संतान प्राप्त करना चाहते है, तो उससे पहले इसके बारे में पूरी तरह से जांच अवश्य कर लें। (source)

सरोगेसी मदर क्या होती है? What is the Meaning of Surrogacy Mother?

सरोगेसी के प्रक्रिया में गर्भधारण करने वाली महिला को ही सरोगेट मदर (Surrogate Mother) कहते है। सरोगेट मदर बनने के लिए कोई भी उस महिला से ज़बरदस्ती नहीं कर सकता है, ये उसके निर्णय पर निर्भर करता है।

इसमें माता-पिता और अन्य महिला यानी सरोगेट मदर के बीच एक एग्रीमेंट होता है। जिसके अंतर्गत भ्रूण बनने के बाद से बच्चे के जन्म के समय तक माता-पिता के निगरानी में बच्चे की देखभाल की जाएगी। 

इसमें संतान की प्राप्ति करने वाले माता-पिता को इंटेंडेड पेरेंट्स (Intended Parents) कहते है और इसे Third Party Reproduction भी कहते है। (source)

सरोगेसी के फायदे What Are the Advantages of Surrogacy?

अगर हम सरोगेसी के फायदे की बात करें, तो ये निम्न प्रकार के है:

  1. सरोगेसी के कारण बहुत ऐसे परिवार पूरे हो सकते है, जहाँ निःसंतान माता-पिता अकेले रहते है या LGBT जोड़ों को बच्चे प्रदान करके उनके परिवार को पूरा कर सकते है।
  2. सरोगेसी के प्रक्रिया के दौरान आपको विश्वसनीय डॉक्टरों का मार्गदर्शन मिलता है, जो आपके आशंकाओं को दूर करने में मदद करेंगे।
  3. हर माता-पिता चाहते है कि उनके बच्चों में उनका ही अनुवांशिक अंश हो, जो कि सरोगेसी प्रक्रिया से माता-पिता के जनन कोशिकाओं को निषेचित करवाकर निश्चित समय पर भ्रूण का स्थानांतरण सरोगेट मदर के गर्भाशय में कर दिया जाता है।
  4. चिकित्सा के क्षेत्र में हुए विकास के कारण सरोगेसी के प्रक्रिया में गर्भावस्था की उच्च सफलता दर (High success rates) है, इसका मुख्य कारण है कि इंटेंडेड पैरेंट (Intended Parents) के द्वारा समय, भावना और पैसे हर तरीके से मदद की जाती है।
  5.  इस प्रक्रिया में सरोगेट मदर की पहले अच्छी तरह से जांच की जाती है, ताकि किसी भी प्रकार की समस्या न हो।
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सरोगेसी के नुकसान What Are the Disadvantages of Surrogacy?

हम सभी जानते है कि नुकसान तो हर क्षेत्र में होते है, उसी प्रकार सरोगेसी के नुकसान इस प्रकार है

  1. अब तो आप जान गए होंगे की सरोगेसी एक कठिन प्रक्रिया है, इसलिए सरोगेट मदर और सरोगेसी संस्था का चुनाव सावधानी से करना चाहिए।
  2. हम सभी जानते है कि सरोगेसी प्रक्रिया में पैसे की एक अच्छी रकम खर्च होती है, इसके लिए आप एक स्वास्थ्य ऋण या किसी प्रकार का लोन लेना पड़ सकता है।
  3. इसकी प्रक्रिया के बाद सरोगेट मदर से बच्चे को इंटेंडेड पैरेंट को दे दिया जाता है, इस कारण कई बार बच्चों पर भावनात्मक प्रभाव पड़ता है। (source)

सरोगेसी प्रक्रिया के विषय में जानकारी Information About Surrogacy Process in Hindi

नीचे हमने सरोगेसी की प्रक्रिया के चरण के प्रकार बताए हैं –

मेडिकल स्क्रीनिं

पहले चरण में सरोगेट मदर और इंटेंडेड पेरेंट्स का अच्छी तरह से जांच की जाती है। इस प्रक्रिया में सरोगेट मदर का शारीरिक जांच जैसे खून जाँच, अल्ट्रासाउंड आदि किया जाता है कि गर्भधारण करने के लिए स्वस्थ है अथवा नहीं। इसके साथ कुछ संक्रमण रोगों के भी जाँच किये जाते है।

भ्रूण का स्थानांतरण

इस प्रक्रिया में डॉक्टरों द्वारा आपके मासिक धर्म चक्र को रेगुलेट करने के लिए जन्म नियंत्रण गोलियों के साथ कुछ हॉर्मोन का इस्तेमाल भी किया जाता है। जनन कोशिकाओं के निषेचन के लगभग 5 दिनों के बाद भ्रूण का स्थानांतरण कैथेटर का इस्तेमाल करके ग्रीवा (Cervix) के द्वारा भ्रूण को गर्भाशय में डाल दिया जाता है।

गर्भावस्था को रोकने के लिए लगभग 12  हफ्ते तक शरीर में प्रेगनेंसी हॉर्मोन को नियंत्रित किया जाता है, क्योंकि इसके बाद गर्भनाल (Placenta) से हॉर्मोन बनना शुरू हो जाता है। 

प्रेगनेंसी स्थिरता

भ्रूण स्थानांतरण के कुछ समय बाद क्लिनिक जा कर डॉक्टरों द्वारा जाँच करवाना पड़ता है। डॉक्टर आपके हॉर्मोन को चेक करते है और पता लगते है कि गर्भवस्था स्थिर है अथवा नही। कई स्थिर न होने कई बार भ्रूण स्थानांतरण करना पड़ता है।

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जन्म

भ्रूण स्थानान्तरण के बाद समय-समय पर डॉक्टर के पास जाँच के लिए जाना पड़ता है। कई बार अल्ट्रासाउंड और अन्य जाँच के जाना पड़ता है। डॉक्टरों के देख रेख मे क्लिनिक में बच्चे का जन्म होता है। 

इस प्रक्रिया में बच्चे के जन्म के बाद उसकी देखभाल की ज़िम्मेदारी सरोगेट मदर का नही होता है। इंटेंडेड पैरेंट्स बच्चे का देखभाल करते है।  

सरोगेसी (विनियमन) विधेयक 2019 क्या है? Surrogacy Regulation Bill

इस कानून की आवश्यकता क्यों पड़ी ? जानें-

सरोगेसी (विनियमन) विधेयक [Surrogacy (Regulation) Bill], 5 अगस्त 2019  को लोकसभा में पारित किया गया, जिससे सरोगेसी को संवैधानिक मान्यता मिला सके और वाणिज्यिक सरोगेसी (Commercial Surrogacy) पर रोक लग सके।

इसके कुछ महत्वपूर्ण बिंदु निम्न है-

  1. वैवाहिक पति और पत्नी जो निःसंतान है, उनमे महिला की उम्र 23 से 50 के बीच हो और पुरुष की उम्र 26 से 55 बीच होना चाहिए।
  2. सरोगेसी का इस्तेमाल वही लोग कर सकेंगे, जिनका वैवाहिक जीवन कम से कम 5 वर्ष बीत चुका है।
  3. जिस महिला को सरोगेट मदर बनना है उसकी उम्र 25 से 35 के बीच होना चाहिए और साथ  ही वो महिला दंपत्ति के कोई करीबी रिश्तेदार हों।
  4. इस प्रक्रिया से जन्म लेने वाला बच्चा, दंपत्ति का बायोलॉजिकल बच्चा कहा जायेगा।
  5. जो भी इस विधेयक का उल्लंघन करेगा, उसे 10  साल की जेल और 10 लाख रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है।
  6. इसका इस्तेमाल संतान के लिंग चयन के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
  7. इस कानून के अनुसार दंपत्ति इस बच्चे को किसी भी स्थिति में छोड़ नही सकते है। 
  8. सरोगेट मदर के लिए बीमा का प्रावधान भी किया गया है जिससे उसे विभिन्न प्रकार के समस्याओं से सुरक्षित रह सके। 
  9. इस विधेयक को लाने का उद्देश्य यह है कि सरोगेसी का इस्तेमाल व्यावसायिक रूप से न हो सके। इसका उपयोग परोपकार के रूप में होना चाहिए। 

आशा करते हैं आपको सरोगेसी प्रक्रिया पर यह पूरी जानकारी Surrogacy Information in Hindi लेख पसंद आया होगा। यह लेख मात्र जानकारी हेतु है। अगर आप सरोगेसी के विषय में अधिक जानना चाहते हैं तो अपने Gynecologist से संपर्क करें।

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