थार मरुस्थल – भारत का महान मरुस्थल Thar – The Great Indian Desert in Hindi

आज के इस आर्टिकल में हम आपको थार मरुस्थल – जो भारत का सबसे महान मरुस्थल है The Great Indian Desert in Hindi के विषय में बताएँगे।

थार का फैलाव Extension of Thar

थार मरुस्थल को समस्त विश्व में ‘द ग्रेट इंडियन डेजर्ट’ के नाम से जाना जाता है। थार मरुस्थल प्रायद्वीपीय भारत के उत्तर पश्चिमी हिस्से में करीब 200,000 वर्ग किमी. भू-भाग में फैला हुआ है।

यह एक विशाल शुष्क क्षेत्र है, जो भारत तथा पाकिस्तान के मध्य एक प्राकृतिक सीमा-रेखा का भी निर्माण करता है। इस मरुस्थल का अधिकांश हिस्सा भारत के राजस्थान राज्य में है, तथा इसके कुछ हिस्से गुजरात के कच्छ के रण, हरियाणा तथा पंजाब में फैले हुए हैं।

थार मरुस्थल – भारत का महान मरुस्थल Thar – The Great Indian Desert in Hindi

पाकिस्तान में थार Thar in Pakistan

थार मरुस्थल का 85% भू-भाग भारतीय सीमा में तथा करीब 15% भू-भाग पाकिस्तानी सीमा के अंदर स्थित है।

इस मरुस्थल के अधिकांश हिस्से में सरकने वाले रेत के टीले पाये जाते हैं। यहाँ की रेत बहुत तेज़ हवाओं के कारण अपना स्थान परिवर्तित करती रहती है।

थार की एकमात्र नदी Only River of Thar

थार मरुस्थल में एकमात्र लूनी नदी पाई जाती है। इस क्षेत्र में वर्षा प्रति वर्ष करीब 100-500 मिमी, जुलाई से सितंबर महीनों के बीच होती है। वर्षा यहाँ काफी कम मात्रा में होती है, जो कि 4 सेमी. से लेकर 20 सेमी. तक होती है।

थार में मई तथा जून के महीने सबसे गर्म होते हैं, जिनमे तापमान 50° सेल्सियस तक पहुंच जाता है। जनवरी का महीना सबसे ठंडा होता है, जिसमे तापमान 5° से 10° सेल्सियस के मध्य बना रहता है, तथा ओलावृष्टि की सम्भावना भी बनी रहती है। 

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थार मरुस्थल में राजस्थान में सांभर, कुचामन, डिडवाना, पचपद्र, फलोदी तथा गुजरात में खरगोड़ा आदि खारे पानी की झीलें पाई जाती हैं। मानसून के दौरान ये झीलें पानी का संग्रहण करती हैं तथा बाकी के वर्ष में ये जल का वाष्पन करती हैं। झीलों का खारापन यहाँ की चट्टानों के अपक्षय का परिणाम है। 

थार नाम की उत्पति Origin of Thar

थार मरुस्थल - भारत का महान मरुस्थल Thar - The Great Indian Desert in Hindi

थार मरुस्थल का नाम ‘थुल’ शब्द से पड़ा। थुल का अर्थ स्थानीय भाषा में रेत के टीले होते हैं। ये टीले अलग अलग आकार और आकृति के होते हैं। 

यहाँ की मिट्टी कई प्रकार की होती है- रेतीली मिट्टी, लाल रेतीली मिट्टी, भूरी मिट्टी इत्यादि। यह सभी मिट्टियाँ खुरदुरी, तथा कैल्शियम युक्त होती हैं। अक्सर इन मिट्टियों के नीचे चूने की मोटी परतें जमा पाई जाती हैं। यह मिट्टियाँ अक्सर बंजर होती हैं, जिस कारण यहाँ वनस्पति नही उग पाती हैं। तथा मिट्टी अक्सर अत्यधिक वायु-अपरदन के कारण रेत के साथ उड़ जाया करती है। 

मरुस्थल की वनस्पति घास वाली, कंटीली होती है। यहाँ के पौधे तथा वृक्ष अकाल तथा कम वर्ष में भी वृद्धि करते हैं। पूरे मरुस्थली क्षेत्र में खजरी वृक्ष बहुतायत मात्रा में पाया जाता है। 

थार मरुस्थल में घास के मैदानों में काला हिरण, चिंकारा इत्यादि जानवर देखे जा सकते हैं। इस मरुस्थल में संकटग्रस्त ग्रेट बस्टर्ड पक्षी भी निवास करते हैं।

थार में जीवन Life in Thar

मरुस्थल के अधिकांश लोग ग्रामीण जीवन व्यतीत करते हैं तथा अलग अलग स्थानों पर विभिन्न जनसांख्यिक घनत्व में निवास करते हैं। हिन्दू तथा मुस्लिम दोनों ही धर्म के लोग यहाँ निवास करते हैं, तथा जनसंख्या जटिल आर्थिक तथा सामाजिक समूहों में वर्गीकृत है।

प्रमुख भाषाओं के तौर पर उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सिंधी, उत्तर-पश्चिमी हिस्से में लाहन्दा तथा पूर्वी तथा मध्य भाग में मारवाड़ी भाषा अत्यधिक प्रचलन में है। थार मरुस्थल की जातीय संरचना में भी विविधता पाई जाती है। जिनमे से सबसे प्रमुख तथा शक्तिशाली राजपूत हैं, जो सामान्यतः थार में मुख्य भाग में निवास करते हैं।

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इसके अतिरिक्त यहाँ पर घुमंतू प्रजातियां पशु पालन, हस्तकला तथा व्यापार के कार्यों से जुड़े रहते हैं। सामान्य रूप से, ये प्रजातियां निष्क्रिय तथा गतिहीन जनजीवन तथा अर्थव्यवस्था से सहजैविक रूप से सम्बन्ध रखते हैं।

मरुस्थल में प्राकृतिक संसाधन के रूप में घास प्रमुख है। यह घास निवासियों के लिए पोषण के साधन तथा औषधि के रूप में अत्यधिक महत्व रखती है। इससे ही दवाई में प्रयुक्त होने वाले एल्कालॉइड्स अर्थात क्षाराभ तथा साबुन बनाने के लिए प्रयुक्त किये गए तैलीय पदार्थ प्राप्त किये जाते हैं। 

थार मरुस्थल में कुछ प्रजाति के ही चौपाया जीव पाये जाते हैं, जो हैं थारपरकर, कंकरे, भेड़, ऊंट इत्यादि। इनमे से ऊंट का प्रयोग आवागमन के लिए, खेती में हल खींचने तथा अन्य कृषि कार्यों में किया जाता है। थार में जहाँ पर भी जल की कुछ उपलब्धता होती है, वहां पर कृषकों द्वारा गेहूं तथा कपास आदि की खेती की जाती है।

थार मरुस्थल में जल का अभाव है, इसलिए यहाँ जब भी वर्षा होती है, तो वर्षा के जल को टैंक इत्यादि में संग्रहित कर लिया जाता है। जिसका उपयोग पीने के लिए तथा घरों में किया जाता है। यहाँ पर अधिकांशतः भूमिगत जल का प्रयोग नही किया जा सकता, क्योंकि यह जल बहुत अधिक गहराई में होता है तथा अधिकतर यह पानी खारा होता है। कुओं तथा टैंकों के अलावा, मरुस्थल में जल का प्रमुख स्रोत नहरें हैं। 

बैराज Sindhu Bairaj

वर्ष 1932 में निर्मित सुक्कुर बैराज सिंधु नदी के जल द्वारा पाकिस्तान के संपूर्ण थार क्षेत्र में नहरों के द्वारा जल उपलब्ध करता है तथा सतलुज नदी का जल गंग नहर द्वारा उत्तर-पश्चिमी भू-भाग तक पहुंचाया जाता है।

वहीं भारत के थार मरुस्थल को इंदिरा गांधी नहर द्वारा जल उपलब्ध कराया जाता है। यह नहर भारत के पंजाब में सतलुज तथा व्यास नदियों के मध्य से शुरू होती है तथा करीब 470 किमी तक दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र की तरफ जाती है। पंजाब में सतलुज नदी पर स्थित भाकरा नांगल बांध के द्वारा कस्बों तथा शहरों में बिजली पहुंचाई जाती है।

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थार के त्योहार Festivals of Thar

थार मरुस्थल में प्रति वर्ष अनेक त्यौहार मनाये जाते हैं, जो देश-विदेश से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। राजस्थान में प्रति वर्ष यह उत्सव बड़े ही उत्साह एवं जोश से मनाएं जाते हैं। यह उत्सव वर्ष में एक बार सर्दियों के मौसम में आयोजित किये जाते।

इसमें लोग विभिन्न प्रकार की वेश-भूषा में नृत्य तथा गायन के कार्यक्रमों द्वारा अपने इतिहास में प्रेम, पराक्रम तथा शौर्य की गाथाओं का बखान करते हैं। राजस्थान के लोकगीतों में उसके प्राचीन इतिहास तथा समृद्ध संस्कृति का वर्णन होता है। यह उत्सव वहां के लोगों के रोजगार तथा मनोरंजन का प्रमुख साधन है।

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