भारत की जनजातियाँ व उनका वर्गीकरण Tribes of India in Hindi

भारत की जनजातियाँ Tribes of India in Hindi

हमारे भारत की संस्कृति ही ऐसी है कि यहां अनेकता में भी एकता पाई जाती है, और इस विविधता का कारण है भारत के अलग-अलग प्रदेशों में मौजूद जन जातियां।

तो आइए जानते हैं कि जनजाति किसे कहते हैं? क्या परिभाषा होगी शब्द जनजाति की!?? कुछ विशेषज्ञ जनजातियों को परिभाषित करने के लिए संस्कृति को आधार मानते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग क्षेत्र के अनुसार जनजातियों को विभाजित करते हैं। संस्कृति के अलावा और भी पक्ष है जो कि जनजाति को परिभाषित करने में मदद करते हैं, जैसे भौगोलिक स्थिति, भाषिक एवं राजनीतिक अवस्था भी।

भारत की जनजातियाँ व उनका वर्गीकरण Tribes of India in Hindi

दरअसल जनजाति परिवारों या परिवार समूहों का के समुदाय का नाम है। कुछ विशेष बिंदु है, जो की जनजातियों की विशेषताएं हैं, जैसे कि समूह का एक आम नाम होता है, एक ही क्षेत्र में निवास करते हैं एक ही भाषा बोलते हैं, विवाह एवं व्यापार भी आपस में ही करते हैं।

भारत की विभिन्न प्रकार की जन जातियां अलग-अलग राज्यों तथा क्षेत्र में रहते हुए भी एकजुट मालूम पड़ती है।

जनजातियों का वर्गीकरण-:

क्षेत्र के आधार पर जनजातियों का वर्गीकरण

पूर्वोत्तर क्षेत्र : कश्मीर, शिमला, हिमाचल प्रदेश, बंगाल, आसाम, सिक्किम; इन क्षेत्रों में लिंबू, लेपचा, आका, रामा, कचारी, गौरो, खासी, नागा आदि जन जातियां रहती है।

मध्य क्षेत्र : बिहार, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उड़ीसा; इन क्षेत्रों में खड़िया, संथाल, मुंडा, उराँव, गदब, बांदा आदि जन जातियां रहती है।

दक्षिण क्षेत्र : आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल; इन क्षेत्रों में चेचू, टोडा, कादर, कणीदर, कुरोवन आदि जन जातियां रहती है।

इसे भी पढ़ें -  भारतीय सभ्यता पर निबंध Essay on Indian Culture in Hindi - Bharatiya Sabhyata

पश्चिम क्षेत्र : इसमें राजस्थान में स्थित भील प्रमुख जाती है। ■ द्वीप समूह क्षेत्र : अंडमान, निकोबार आदि द्वीपों के क्षेत्र। इन क्षेत्रों में अंडमानी, जखा, सोयपेन जनपा आदि जन जातियां रहती है।

भाषा गत रूप से जनजातियों का वर्गीकरण -:

हमारे भारत देश में हजारों प्रकार की भाषा एवं बोलियां है, इन्हें चार भाषा परिवारों में रखा गया है :

  • इंडो यूरोपीयन
  • द्रविड़
  • ऑस्ट्रिक
  • तिब्बती चीनी

ऐसा कहा जाता है कि भारत में कुल 461 जन जातियां है।

हमारे देश में रहने वाले अलग अलग राज्य एवं क्षेत्रों के लोगों की चेहरे एवं शरीर की बनावट भी भिन्न-भिन्न प्रकार की है। इसी विविधता में भारत की खूबसूरती है, जैसे कि उदाहरण के तौर पर उत्तरी क्षेत्र में रहने वाले लोगों की आंखें तिरछी, छोटी होती है, पीला रंग होता है, सीधे बाल, चेहरा चौड़ा और नाक चपटी होती है। पूर्वी क्षेत्र में रहने वाले लोगों का रंग काला, छोटी-चपटी नाक होती है, हल्के घुंघराले बाल होते हैं। दक्षिण भारत में रहने वाले लोगों के बड़े होठ एवं बड़ी नाक होती है।

भारत की जनजातियां ही हमारे देश की आदिवासी तथा अन्य निवास करने वाली जनसंख्या को दर्शाती है। इनके जीवन व्यापन का ढंग भी बहुत पुराने समय से एक समान ही चला आ रहा है, परंतु कुछ परिवर्तन भी है। ज्यादातर जन जातियां पहले शिकार करके, मछली पकड़कर अथवा लकड़ी काट कर गुजारा करती थी पर अब कार्यों में बदलाव आए हैं और सभी ने कृषि एवं पशुपालन में रुचि लेना आरंभ कर दिया है।

दरअसल एक जनजाति समान संस्कृति वाले लोगों का स्वतंत्र विभाजन होता है। भारत में जनजातीय समुदाय काफी बड़ा है अथवा 50 से भी ज्यादा समुदाय देश में पाए जाते हैं। हमारे देश की सरकार अनु सूचित जनजातियों के विकास एवं वृद्धि के लिए लगातार प्रयास करती रहती है, क्योंकि यह देश की आबादी का 8% हिस्सा है।

इसे भी पढ़ें -  विश्व वन्यजीव दिवस पर निबंध Essay on World Wildlife Day in Hindi

दसवीं पंचवर्षीय योजना एवं वार्षिक योजना; इन दोनों योजनाओं का एक ही उद्देश्य है, जनजातियों का सामाजिक एवं आर्थिक तौर पर सशक्तिकरण करना। इन योजनाओं के कार्यक्रमों का सुचारू रूप से हर राज्य एवं क्षेत्र में पालन किया जाता है, ताकि देश के कोने कोने में रह रहे हर भारतवासी को इन सब प्रबंधों का लाभ मिल सके।

Featured Image –
Indian Garo Treble Couple with there Traditional Dress . https://commons.wikimedia.org/wiki/File:GARO_TRADITIONAL_DRESS-9.jpg

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.