भारत में न्यायालय के प्रकार (अदालत या कोर्ट) Types of Courts in India Hindi

भारत में न्यायालय के प्रकार (अदालत या कोर्ट) Types of Courts in India Hindi

भारत में 6 प्रकार के न्यायालय स्थापित किए गए हैं– उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय, जिला और अधीनस्थ न्यायालय, ट्रिब्यूनल, फास्ट ट्रेक कोर्ट और लोक अदालत। भारत का शीर्ष न्यायालय राजधानी दिल्ली में स्थित है। इसे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) कहते हैं।

राज्य स्तर पर हर राज्य के लिए उच्च न्यायालय (High Court) स्थापित किया गया है। इसे निचली अदालत भी कहा जाता है। भारत एक बड़ा और विशाल देश है इसलिए इसके पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण में चार महानगरों में 24 उच्च न्यायालय (High Court) स्थापित किए गए हैं

भारत में न्यायालय के प्रकार (अदालत या कोर्ट) Types of Courts in India Hindi

सर्वोच्च न्यायालय Supreme Court

यह देश का शीर्ष न्यायालय है। इसका मुखिया प्रधान न्यायाधीश होता है। राज्यों के बीच के विवाद, मौलिक अधिकार, मानव अधिकारों से संबंधित याचिकाओं को यह देखता है। भारत के उच्चतम न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई थी।

यह अभी तक 24000 से अधिक निर्णय दे चुका है। वर्तमान में दीपक मिश्रा प्रधान न्यायाधीश हैं। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल 65 वर्ष तक होता है। उच्चतम न्यायालय में 30 न्यायाधीश और 1 मुख्य न्यायाधीश होता है।

देश की विभिन्न सरकारों के बीच विवादों का निपटारा भी सुप्रीम कोर्ट में किया जाता है। उच्चतम न्यायालय मुख्यताः देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों के लिए काम करता है। यह दूसरे उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों के कार्य में भी हस्तक्षेप कर सकता है।  

उच्च न्यायालय High Court

भारत में कुल 24 उच्च न्यायालय हैं। ये राज्य स्तर पर सीमित होते हैं और अपने राज्यों के विवादों को निपटाते हैंउच्च न्यायालय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214, अध्याय 5 भाग 6 के अंतर्गत स्थापित किए गए हैं।

इन न्यायालयों का मुख्य काम निचली अदालतों की अपील और रिट याचिका का निपटारा करना होता है। रिट याचिका उच्च न्यायालय का मूल विधि क्षेत्र होता है

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उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत का राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल के साथ परामर्श के बाद करता है। कोलकाता हाईकोर्ट देश का सबसे पुराना उच्च न्यायालय है जिसकी स्थापना 1862 में की गई थी। सभी उच्च न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय के अधीन होते है।

भारत के 24 हाई कोर्ट की सूची इस प्रकार है List of High Courts in India

  1. हैदराबाद स्थित आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय जो कि आंध्र और तेलंगाना के लिए है। (Hyderabad-based Andhra Pradesh High Court which is for Andhra and Telangana.)
  2. इलाहबाद में उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट। (Uttar Pradesh High Court in Allahabad.)
  3. महाराष्ट्र, दादरा और नगर हवेली, गोवा और दमन और दीव का बाॅम्बे हाई कोर्ट। (Bombay High Court of Maharashtra, Dadra and Nagar Haveli, Goa and Daman and Diu.)
  4. पश्चित बंगाल और अंडमान और निकोबार का कलकत्ता उच्च न्यायालय। (The Calcutta High Court of West Bengal and Andaman and Nicobar)
  5. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (Chhattisgarh High Court)
  6. दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का दिल्ली हाई कोर्ट। (Delhi High Court of Delhi National Capital Region)
  7. गुजरात हाई कोर्ट। (Gujarat High Court)
  8. आसाम, नागालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश के लिए गुवाहाटी हाई कोर्ट। (Guwahati High Court for Assam, Nagaland, Mizoram and Arunachal Pradesh.)
  9. हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट। (Himachal Pradesh High Court.)
  10. जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय। (Jammu and Kashmir High Court)
  11. झारखंड उच्च न्यायालय। (Jharkhand High Court)
  12. कर्नाटक उच्च न्यायालय। (Karnataka High Court)
  13. केरल और लक्षद्वीप के लिए केरल हाई कोर्ट। (Kerala High Court for Kerala and Lakshadweep.)
  14. तमिलनाडु और पुडुचेरी का मद्रास हाई कोर्ट। (Madras High Court of Tamilnadu and Puducherry.)
  15. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय। (Madhya Pradesh High Court)
  16. मेघालय उच्च न्यायालय। (Meghalaya High Court)
  17. मणिपुर उच्च न्यायालय। (Manipur High Court)
  18. उड़ीसा उच्च न्यायालय। (Orissa High Court)
  19. पटना उच्च न्यायालय। (Patna High Court )
  20. पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ का पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय। (Punjab and Haryana High Court of Punjab, Haryana and Chandigarh.)
  21. राजस्थान उच्च न्यायालय। (Rajasthan High Court)
  22. सिक्किम उच्च न्यायालय। (Sikkim High Court)
  23. उत्तराखंड उच्च न्यायालय। (Uttarakhand High Court)
  24. त्रिपुरा हाई कोर्ट। (Tripura High Court)

जिला और अधीनस्थ न्यायालय The District and Subordinate Judiciary

देश में जिला स्तर पर न्याय देने के लिए जिला और अधीनस्थ न्यायालयों की स्थापना की गई है। जिला जज सभी सिविल मामलों और आपराधिक मुकदमों की सुनवाई करते हैं। सभी जिला और अधीनस्थ न्यायालय उच्च न्यायालय के अधीन होते हैं।

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निचली अदालतों में सिविल मामलों को देखने के लिए आरोही क्रम में जूनियर सिविल जज कोर्ट, प्रिंसिपल जूनियर सिविल जज कोर्ट, वरिष्ठ सिविल जज कोर्ट देखते हैं।

ट्रिब्यूनल Tribunal

सामान्य तौर पर ट्रिब्यूनल एक व्यक्ति या संस्था को कहा जाता है, जिसके पास न्यायिक काम करने का अधिकार हो चाहे। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार देश में कुल 19 ट्रिब्यूनल हैं-

  1. बिजली के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल (Appellate Tribunal for Electricity)
  2. सशस्त्र सेना ट्रिब्यूनल (Armed Forces Tribunal)
  3. केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (Central Electricity Regulatory Commission)
  4. केंद्रीय प्रशासनिक आयोग (Central administrative commission)
  5. कंपनी लॉ बोर्ड (Company law board)
  6. भारत का प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India)
  7. प्रतियोगिता अपीलीय ट्रिब्यूनल (Competition Appellate Tribunal)
  8. कॉपीराईट बोर्ड (Copyright Board)
  9. सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा अपीलीय ट्रिब्यूनल (Customs, Excise and Service Appellate Tribunal)
  10. साइबर अपीलीय ट्रिब्यूनल (Cyber Appellate Tribunal)
  11. कर्मचारी भविष्य निधि अपीलीय ट्रिब्यूनल (Employees Provident Fund Appellate Tribunal)
  12. आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल (Income Tax Appellate Tribunal)
  13. बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (Insurance regulator and development authority)
  14. बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड (Intellectual Property Appellate Board)
  15. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (National Green Tribunal)
  16. भारत का प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Securities and exchange board of india)
  17. टेलीकाॅम निपटान और अपीलीय ट्रिब्यूनल (Telecom Disputes Settlement and Appellate Tribunal)
  18. दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (Telecommunication regulatory authority)

फास्ट ट्रैक कोर्ट Fast track court

फ़ास्ट ट्रैक अदालतों की कार्य प्रणाली ट्रायल कोर्ट या सेशन कोर्ट की ही तरह होती है।  ये महिलाओं के साथ किये गये अपराधो के निपटारे के लिए प्रसिद्ध हो गयी है। फास्ट ट्रेक अदालतों में 1 महीने में 12 से 15 मुकदमें निपटाए जाते हैं।

इन अदालतों की स्थापना वर्ष 2000 में की गई थी। लंबित पड़े मामलों को निपटाने के लिए और आरोपियों को जल्द सजा देने के लिए इन अदालतों की स्थापना की गई थी।

फास्ट ट्रेक अदालतों का मुख्य ध्यान महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा के मुकदमों का निपटारा करना है। इस समय देश में लगभग 900 फ़ास्ट ट्रेक अदालतें काम कर रही है।

लोक अदालत Public Court

लोक अदालत  विवादों के निपटारे की एक वैकल्पिक व्यवस्था है। यह ग्राम पंचायत और पंच परमेश्वर के गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित है।  लोक अदालत का अर्थ है लोगों का न्यायालय।

मोटर दुर्घटना मुआवजे के मामले, वैवाहिक और पारिवारिक विवाद, भूमि अधिग्रहण के विवाद और विभाजन के दावे जैसे मामलों को लोक अदालते अच्छी तरह से निपटाती है।  यह सिर्फ न्याय नहीं करती बल्कि नागरिकों के हितों की रक्षा भी करती है।

लोक अदालत के अनेक लाभ हैं। इसमें वकील पर खर्च नहीं होता है। कोर्ट फीस नहीं देनी पड़ती है। किसी पक्ष को सजा नहीं मिलती है। समझौते के द्वारा विवाद को सुलझाया जाता है। लोक अदालतों में मुआवजा हर्जाना तुरंत मिल जाता है। मामले का निपटारा तुरंत हो जाता है। इसमें आसानी से न्याय मिल जाता है।

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