भारत में मिट्टी के प्रकार Types of Soil in India (Hindi)

इस लेख में भारत में मिट्टी के प्रकार Types of Soil in India (Hindi) विस्तार से दिया गया है। मिट्टी तथा मिट्टी के प्रकार के बारे में कक्षा 6 से 12 तक विभिन्न रूपों से पूछा जाता है।

परीक्षाओं में मिट्टी के प्रकार को ज़मीन के प्रकार के रूप में भी पूछा जाता है। इस लेख में मिट्टी तथा उसके प्रकार के बारे में सरल रूप से दिया गया है।

इंसान की सभी गतिविधियाँ ज़मीन से ही जुड़ी होती हैं। पृथ्वी के आवरण को तीन भागों में बाँटा गया है जलावरण, मृदावरण और वातावरण। जिसमें ज़मीन तथा मिट्टी से जुड़ी सभी गतिविधियाँ मृदावरण में शामिल होती हैं।

मिट्टी क्या है? What is Soil?

पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत को मिट्टी कहा जाता है जिसमें वनस्पतियों के विकास के लिए आवश्यक खनिज द्रव्य और जैविक द्रव्य होते हैं। खनिज द्रव्यों का अनुपात सभी ज़मीन में एक जैसा नहीं होता।  भारत के हर क्षेत्र में मिट्टी के रंग-रूप तथा गुण-धर्म में विभिन्नता देखने को मिलती है।

मनुष्य अपना ज्यादातर समय ज़मीन के नज़दीक बिताता हैं। प्राचीन काल से ही मानव रहने के लिए मिट्टी के घरों का उपयोग करता आ रहा है बचपन में खेलने के लिए मिट्टी के खिलौने तथा अंत्येष्टि में शरीर के पंच भूतों का मिट्टी में मिल जाना यह सामान्य प्रक्रिया है।

मिट्टी का निर्माण Soil formation

पृथ्वी पर मिट्टी यह पतली पपड़ियों तथा अनेक कणों से बनी हुई एक पतली परत होती है जिसमें खनिज, नमी  तथा हवा वगैरह मिली होती हैं।

मिट्टी के नीचे मूल चट्टान के स्तर होते हैं मिट्टी का निर्माण उन्हीं चट्टानों के घिसाव और कटाव से मिलने वाले पदार्थों से होता है। सरल रूप में कहें तो मिट्टी खनिज और जैविक तत्वों का प्राकृतिक मिश्रण है जिसमें वनस्पतियों की वृद्धि तथा विकास की क्षमता है।

मूल चट्टानों के घिसाव व कटाव से बारीक कण मिट्टी में मिलते हैं तथा इस मिट्टी में वनस्पतियों तथा जीव जंतुओं के सड़ने से बने तत्व उस मिट्टी को सेंद्रिय बनाते हैं इन्हें की अधिकता या न्यूनता से ज़मीन की उर्वरकता को मापा जाता है।

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मिट्टी के प्रकार Types of Soil

भारत में जलवायु की भिन्नता देखने को मिलती है अर्थात जहां उत्तराखंड व कश्मीर में शीतलता रहती है वही राजस्थान तथा केरल जैसे राज्यों में बहुत ही गर्मी देखने को मिलती है और जलवायु के अनुसार वहां की मिट्टी का रूप भी परिवर्तित होते रहता है।

भारतीय कृषि संशोधन परिषद (ICAR) के द्वारा भारतीय ज़मीन व मिट्टी को आठ प्रकार में बाँटा गया है यह ज़मीन का प्रकार, रंग, जलवायु, चट्टान, कण रचना और उपजाउपन जैसे तथ्यों को ध्यान में रखकर किया गया है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के द्वारा मिट्टी के आठ प्रकार
(Types of Soil in India by ICAR)

  1. कांप मिट्टी Alluvial Soil
  2. काली मिट्टी Black Cotton Soil
  3. लाल मिट्टी Red Soil
  4. रेतीली / रेगिस्तानी मिट्टी Arid or Desert Soil
  5. लेटेराईट या पड़खाऊ मिट्टी Laterite Soil
  6. दलदली हल्की काली मिट्टी Peaty and Other Organic Soil
  7. जंगली मिट्टी व पर्वतीय मिट्टी Forest and Mountainous Soil
  8. लवणीय और क्षारीय मिट्टी Saline and Alkaline Soils

1. कांप मिट्टी Alluvial Soil

कांप की मिट्टी भारत के कुल क्षेत्रफल के लगभग 43% भाग पर देखने को मिलती है। पूर्व दिशा में मौजूद ब्रह्मपुत्र की घाटी से शुरू होकर पश्चिम के सतलज नदी तक इसका विस्तार है।

यही नहीं उत्तर भारत के मैदान तथा दक्षिण भारत के नर्मदा, तापी, महानदी, कावेरी घाटी, कृष्णा, गोदावरी के प्रदेश में कांप की मिट्टी देखने को मिलती है।

कांप की ज़मीन में चूना, पोटाश व फास्फोरिक एसिड की अधिकता देखने को मिलती है। जबकि इसमें नाइट्रोजन और नमी की कमी दिखाई देती है।

काप की मिट्टी में यदि दलहन की फसलें लगाई तो जाए नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। कांप की मिट्टी में कपास, मकाई, गन्ना, गेहूं, धान जैसी फसलें ली जा सकती हैं।

भारत में उत्तरी गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा बिहार में कांप की मिट्टी की अधिकता देखने को मिलती है।

2. काली मिट्टी Black Cotton Soil

काली मिट्टी वाली ज़मीन को रेगुर ज़मीन भी कहते हैं। काली मिट्टी यह भारत के कुल क्षेत्रफल का लगभग 15% भाग में फैली हुई है। काली ज़मीन का उद्भव दक्खन के लावा बिछने से हुआ है।

काली  मिट्टी वाली ज़मीन में लोहा, एलुमिनियम,  मैग्निशियम कार्बोनेट, चुना, पोटाश व कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाई जाती है इसलिए यह अधिक उपजाऊ मिट्टी मानी जाती है। काली मिट्टी में नमी को धारण करने की क्षमता बहुत ही अधिक होती है और नमी खत्म हो जाने पर इसमें दरार आ जाती है।

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 इस प्रकार की मिट्टी में मूंगफली, उड़द, तंबाकू, सरसों, कपास और अलसी जैसी फसलें ली जाती हैं और खासकर कपास के लिए काली मिट्टी सबसे बेहतरीन मानी जाती है।

काली मिट्टी आंध्र प्रदेश, गुजरात, पश्चिम मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र के ज्यादातर भागों में देखने को मिलती है और काली ज़मीनी की अधिकता के कारण गुजरात यह मूंगफली उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान पर स्थित है।

3. लाल मिट्टी Red Soil

लाल मिट्टी में फेरिक ऑक्साइड की अधिकता देखने को मिलती है इसके कारण यह लाल रंग की हो जाती है। लाल मिट्टी भारत के कुल क्षेत्रफल के 19% भाग में देखने को मिलती है।

लाल मिट्टी में मैग्निशियम, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश की कमी होती है जिसके कारण इसमें सिर्फ बाजरी, कपास, मूंगफली, अलसी, आलू जैसी फसलें ली जाती है।

दक्षिण के द्विकल्प में तमिलनाडु से लेकर उत्तर में बुंदेलखंड तक तथा पूर्व में राजमहल की पहाड़ियों के पश्चिम में कक्षा तक लाल मिट्टी फैली हुई है राजस्थान के कई भागों में लाल मिट्टी की अधिकता देखने को मिलती है।

4. रेतीली / रेगिस्तानी मिट्टी Arid or Desert Soil

रेगिस्तानी प्रकार की मिट्टी बहुत ही कम उपजाऊ तथा नमी वाली मानी जाती है। रेगिस्तानी मिटटी अत्यंत गर्म तथा शुष्क परिस्थितियों में बनती हैं। रेगिस्तानी मिटटी में क्षार की अधिकता होती है।

भारत में दक्षिणी पंजाब हरियाणा राजस्थान तथा गुजरात के सौराष्ट्र में पाई जाती है। रेगिस्तानी मिटटी में सिंचाई की सुविधा के अनुसार बाजरी तथा ज्वार की फसल ली जाती है।

5. लेटेराईट या पड़खाऊ मिट्टी Laterite Soil

लेटेराईट मिट्टी को लेटिन भाषा के शब्द “लेटर” यानी ईट पर से लिया गया है। लेटेराईट मिट्टी में आयरन ऑक्साइड की अधिकता देखने को मिलती है जिसके कारण या भीगने पर मक्खन की तरह नरम और सूख जाने पर बहुत ही कड़ी हो जाती है।

लेटेराईट मिट्टी में आयरन, एलुमिनियम और पोटाश की अधिकता देखने को मिलती है यह ज़मीन वैसे तो बहुत ही कम उपजाऊ होती है लेकिन इसमें खाद तथा पानी के अनुसार चाय कॉफी काजू कपास धान गन्ना व रागी जैसी फसलें ली जाती हैं। लेटेराईट मिट्टी की ज़मीन भारत के द्विप्कल्पीय पठारी प्रदेश ऊंचाई वाले स्थान पर देखने को मिलती है।

6. दलदली हल्की काली मिट्टी Peaty and Other Organic Soil

इस प्रकार की मिट्टी नमी की अधिकता वाली जगह पर तथा जैविक पदार्थों के संचय से बनती हैं। बारिश के दिनों में पीट मिट्टी वाली ज़मीन पानी में डूबी रहती है और पानी हटने के बाद इसमें धान की खेती की जाती है। दलदल या पीट मिट्टी में क्षार की अधिकता होती है  तथा फोस्फेट और पोटाश की कमी होती है।

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पीट मिट्टी वाली ज़मीन भारत के पश्चिम बंगाल तमिलनाडु उड़ीसा उत्तराखंड तथा उत्तर बिहार के मध्य भाग में देखने को मिलती है। इस प्रकार की ज़मीन बेहद मर्यादित क्षेत्र में स्थित है।

7. जंगली मिट्टी व पर्वतीय मिट्टी Forest and Mountainous Soil

जंगली मिट्टी हिमालय की घाटियों के शंकुद्रुम वनों में 3 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच हिमालय की तराई वाले क्षेत्रों में स्थित है। जंगली मिट्टी वृक्ष के गिरे हुए पत्तों से ढकी रहती है और सड़ने से इसकी उर्वरकता  बढ़ जाती है  और सड़ने से जंगली मिट्टी का ऊपरी भाग काला हो जाता है।

जंगली मिट्टी में चाय, कॉफी, गरम  मसाले, गेहूं, मक्का, धान इत्यादि फसलें ली जाती हैं। यह ज़मीन भी बेहद मर्यादित क्षेत्रों में देखने को मिलती है।

इस प्रकार की मिट्टी हिमालय की घाटियों तथा ढलान वाले क्षेत्रों में लगभग ढाई हजार से तीन हज़ार किलोमीटर की ऊंचाई पर देखने को मिलती है। पर्वतीय मिट्टी का स्तर बेहद ही पतला होता है।

इस प्रकार की मिट्टी असम कश्मीर हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड जैसी जगहों पर भी देखने को मिलते हैं तथा यहां पर देवदार चीड़ तथा पाइन के वृक्षों की अधिकता होती है और इन्हीं पेड़ों के अगल बगल पर्वतीय मिट्टी भी देखने को मिलती है।

8. लवणीय और क्षारीय मिट्टी Saline and Alkaline Soils

लवणीय और क्षारीय मिट्टी को रेह, उसार, कल्लर, रकार, थूर और चोपन भी कहा जाता है। इस मिट्टी में सोडियम, कैल्सियम और मैग्निशियम की मात्रा अधिक होने के कारण यह मिट्टी खासकर अनुपजाऊ होती है।

भारत में लवणीय और क्षारीय मिट्टी राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में पाई जाति है। हालकी यह रेगिस्तानी क्षेत्रों से थोड़ा ज्यादा बारिश वाले क्षेत्रों में ऐसी मिट्टी ज्यादा पाई जाति है।

निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में आपने मिट्टी क्या है तथा मिट्टी के प्रकार के बारे में विस्तार से पढ़ें यहां पर मिट्टी के प्रकार को बेहद सरल रूप से लिखने की कोशिश की गई है। अगर या लेख आपको पसंद आया हो तो इसे शेयर ज़रूर करें।

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