विश्वकर्मा पूजा पर निबंध, कथा, महत्व Vishwakarma Puja Essay in Hindi

विश्वकर्मा पूजा पर निबंध व महत्व Vishwakarma Puja Essay in Hindi

विश्वकर्मा पूजा को विश्वकर्मा दिवस या जयंती भी कहा जाता है। विश्वकर्मा जयंती को प्रतिवर्ष सितम्बर के महीने में उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दिन लगभग पुरे भारत में विधि के अनुसार मनाया जाता है।

इस दिन सबसे बड़े वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। इतिहास के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को देवशिल्पी यानी की देवताओं के वास्तुकार के रूप में पूजा जाता है। त्रिलोका या त्रिपक्षीय उन्हें त्रिलोका या त्रिपक्षीय युग का भी निर्माता माना जाता है।

साथ ही विश्वकर्मा जी में अपने शक्ति से  देवताओं के उड़ान रथ, महल और हथियार का भी निर्माण किया था। यहाँ तक की यह भी माना जाता है की इंद्र का महा अस्त्र जो ऋषि दधिची के हड्डियों से बना हुआ था वह भी वुश्वकर्मा भगवान द्वरा ही बनाया गया था।

न सिर्फ स्वर्ग बल्कि उन्हें इस पुरे सृष्टि का निर्माता माना जाता है। उन्होंने सत्य युग में सोने की लंका जहाँ असुर राज रावण रहा करता था, त्रेता युग में द्वारका शहर, जहाँ श्री कृष्ण थे, द्वापर युग में हस्तिनापुर शहर का निर्माण जो पांडवों और कौरवों का राज्य था सभी का निर्माता उनको माना जाता है।

विश्वकर्मा पूजा पर निबंध, कथा, महत्व Vishwakarma Puja Essay in Hindi

2019 में विश्वकर्मा पूजाका अयोजन VISHWAKARMA PUJA IN 2019

विश्वकर्मा पूजा 2019 में 17 सितंबर, सोमवार के दिन मनाया जायेगा।

पूजा उत्सव VISHWAKARMA PUJA CELEBRATION

विश्वकर्मा पूजा लगभग सभी दफ्तरों और कार्यालयों मनाया जाता है, परन्तु इंजिनियर, आर्किटेक्ट, चित्रकार, मैकेनिक, वेल्डिंग दुकान वालें, या कारखानों में इसको मुख्य तौर से मनाया जाता है। इस दिन ऑफिस और कारखानों के लोग अपने कारखानों और कार्यालयों की अच्छे से साफ़-सफाई करते हैं और विश्वकर्मा भगवान के मिटटी की मूर्तियों को पूजा के लिए सजाते हैं। घरों में भी लोग अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, घर और गाडी-मोटर की पूजा करते हैं। चलिए विश्वकर्मा पूजा की विधि पढ़ें।

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उत्तर भारत में यह पूजा बड़े उल्लास के साथ मनाई जाती है। इस पूजा में आदि शिल्पकार और वास्तुकार “भगवान विश्वककर्मा” की पूजा की जाती है। इस दिन सभी राजमिस्त्री, बुनकर, कारीगर जो लोहे और अन्य धातुओं से वस्तु निर्माण करते है, इंजीनियर, राजमिस्त्री, मजदूर, शिल्पकार, कामगार, हार्डवेयर, इलेक्ट्रिशियन, टेक्निशियन, ड्राइवर, बढ़ई, वेल्डर, मकेनिक, सभी औद्योगिक घराने के लोग इस पूजा को बड़े धूमधाम से मनाते है। इस दिन कारखानों, वर्कशाप की साफ़ सफाई की जाती है। गुब्बारे, रंग बिरंगे कागजों से कार्यस्थल को सजाया जाता है। औजारों की सफाई, रंगाई पुताई की जाती है।

सभी लोग सुबह नहाकर पूजा स्थल पर भगवान विश्वकर्मा की फोटो लगाते है। उस पर फूल माला चढ़ाते है। धूप, दीपक, अगरबत्ती जलाकर औजारों की पूजा की जाती है। फिर प्रसाद का भोग लगाकर हाथ में फूल और अक्षत लेकर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते है।

‘‘ऊॅ श्री श्रीष्टिनतया सर्वसिधहया विश्वकरमाया नमो नमः” मंत्र का उच्चारण करते है। हवन करने के बाद आरती पढ़ते है। फिर सभी को प्रसाद दिया जाता है। सभी कारीगरों को इस पूजा का इंतजार रहता है। इस दिन दुकान या फैक्ट्री में काम नही होता है। सिर्फ पूजा की जाती है। इस पूजा के अगले दिन “भगवान विश्वककर्मा” की मूर्ति स्थापित की जाती है।

मूर्ति विसर्जन VISHWAKARMA MURTI VISARJAN

उसका विसर्जन भी बहुत धूमधाम से किया जाता है। भक्त अबीर गुलाल लगाकर संगीत के साथ गाते नाचते झूमते हुए “भगवान विश्वककर्मा” की प्रतिमा निकालते है। लोगो को प्रसाद वितरण होता रहता है।

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इस पूजा में सभी कर्मचारी भगवान विश्वकर्मा से नया और कुशल शिल्पज्ञान, वास्तुज्ञान मांगते है और कहते है की शिल्प करते समय, कोई भवन, इमारत बनाते समय कोई दुर्घटना न हो।  इस दिन श्रम की पूजा भी की जाती है। बिना श्रम के कुछ भी नया निर्माण कर पाना संभव नही है।

“भगवान विश्वककर्मा” का जन्म या शुरुवात BIRTH OF VISHWAKARMA PUJA

भगवान विष्णु की नाभि- कमल से ब्रह्मा जी उपत्त्न हुए थे। उन्होंने सृष्टि की रचना की। उनके पुत्र धर्म के सातवें पुत्र थे भगवान विश्वककर्मा। उनको जन्म से ही वास्तुकला में महारत प्राप्त थी।

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विश्वकर्मा पूजा का महत्व  IMPORTANCE OF VISHWAKARMA PUJA

हम सभी के जीवन में शिप्ल का अत्यधिक महत्व है। कोई भी घर, मकान, भवन, नवीन रचना का काम शिल्प के अंतर्गत ही आता है। कुशल शिल्प विद्द्या और ज्ञान से मनुष्य विशाल इमारते, पुल, वायुयान, रेल, सड़क पानी के जहाज, वाहन आदि बनाता है।

इसलिए हम सभी के जीवन में शिल्प विद्द्या का शुरू से महत्व रहा है। आधुनिक समय में इंजीनियर, मिस्त्री, वेल्डर, मकेनिक जैसे पेशेवर लोग शिल्प निर्माण का काम करते है।

इसलिए मनुष्य के जीवन में सदैव विश्वकर्मा पूजा का महत्व है। यदि मनुष्य के पास शिल्प ज्ञान न हो तो वह कोई भी भवन, इमारत नही बना पायेगा। इसलिए भगवान विश्वकर्मा को “वास्तुशास्त्र का देवता” भी कहा जाता है। इनको “प्रथम इंजीनियर”, “देवताओं का इंजीनियर” और “मशीन का देवता” भी कहा जाता है।

विष्णुपुराण में विश्वकर्मा को देवताओं का “देव बढ़ई” कहा गया है। यह पूजा करने से अनेक फायदे है। इससे व्यापार में तरक्की होती है। पूजा करने से मशीन खराब नही होती है। व्यापार में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होती है। जिस व्यक्ति के पास 1 कारखाना होता है उसके पास अनेक कारखाने हो जाते है।

भगवान विश्वकर्मा द्वारा बनाये गये प्रमुख भवन और वस्तुयें, वाहन  FAMOUS BUILDINGS AND TOOLS CREATED BY GOD VISHWAKARMA

सभी देवताओ में भगवान विश्वकर्मा का महत्वपूर्ण स्थान है। इन्होने अनेक प्रसिद्ध भवनों और वस्तुओ की रचना की। रावण के लिए सोने की लंका बनाई तो स्वर्ग में इंद्र का सिंघासन आपने बनाया।

जब असुर देवताओं को सताने लगे तो इन्होने ऋषि दधीची की हड्डियों से इंद्र का वज्र बनाकर असुरो का नाश किया। रावण के अंत के बाद राम, लक्ष्मण, सीता व अन्य साथी पुष्पक विमान पर बैठकर अयोध्या नगरी लौटे थे।

पुष्पक विमान का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा ने किया था। कर्ण का कुंडल इन्होने ही बनाया था। इसके अतिरिक्त भगवान शिव का त्रिशूल, विष्णु का सुदर्शन चक्र, यमराज का कालदंड बनाया था।

पांड्वो के लिए शानदार इंद्रप्रस्थ नगरी का निर्माण किया जो कौरव चकित रह गये। हस्तिनापुर को भी इन्होने ही बनाया था। जगन्नाथ पूरी में “जगन्नाथ” मंदिर का निर्माण किया। इस तरह अनेक प्रसिद्ध भवनों का इन्होने निर्माण किया था।

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पूजा विधि VISHWAKARMA PUJA VIDHI

विश्वकर्मा पूजा विधि –

  1. सबसे पहले सवेरे से अपने घर के गाडी मोटर या अपने दूकान के मशीनों को धो लें या साफ़ कर लें, घर की साफ़ सफाई करें और पूजा के सभी सामग्री को एक दिन पहले से ही तैयार रखें।
  2. उसके बाद स्नान कर लें और अपने पत्नी के साथ पूजा स्थान पर बैठ जाएँ।
  3. उसके बाद पूजा पर बैठने के बाद विष्णु जी को ध्यान करके मंत्र ‘ऊॅ श्री श्रीष्टिनतया सर्वसिधहया विश्वकरमाया नमो नमः’ के साथ फूल चढ़ाएं।
  4. अपनी पत्नी और स्वयं के हाथ में रक्षासूत्र बंधें।
  5. पुष्प कमंडल में डालें और समक्ष रखें।
  6. उसके बाद भगवान विश्वकर्मा को ध्यान करें।
  7. उसके बाद शुद्ध करके जमीन पर 8 पंखुड़ियों वाला कमल बनायें।
  8. उसी स्थान पर साथ प्रकार के अनाज रखें और उसपर मिटटी और ताम्बे के पात्र का पानी छिडकाव करें।
  9. उसके बाद चावल पात्र को समर्पित करें और वरुण देव को ध्यान करें।
  10. साथ प्रकार की मिटटी, सुपारी, दक्षिणा कलश में डाल कर कलश को कपडे से ढकें।
  11. उसके बाद अंत में विश्वकर्मा भगवान को फूल चढ़ा कर – आशीर्वाद लें और उच्चारण करें – हे विश्वकर्मा जी, आपके आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति मिले – मेरी पूजा स्वीकार कीजये।

आरती श्री विश्‍वकर्मा जी की AARTI VISHWAKARAMA JI KI

ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।

सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥1॥

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।

शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥2॥

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।

ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥3॥

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।

संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना॥4॥

जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।

सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥5॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।

द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥6॥

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।

मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥7॥

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।

कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥8॥

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