बाइबिल क्या है? महत्व, इतिहास What is Bible? Importance & History in Hindi

बाइबिल क्या है? बाइबल का महत्व, इतिहास What is Bible? Importance & History in Hindi

बाइबल ईसाईयों का पवित्र ग्रंथ है। सभी ईसाई इसे पढ़ते हैं और इसकी पूजा करते हैं। इसके दो भाग हैं : पूर्वविधान (ओल्ड टेस्टामैंट) और नवविधान (न्यू टेस्टामेंट) बाइबिल का आधा भाग यहूदियों का भी धर्म ग्रंथ है।

ऐसा माना जाता है कि ईश्वर की प्रेरणा से मनुष्य ने बाइबल को लिखा था। इसमें ईसा मसीह के व्यक्तित्व, चमत्कारों, कार्यों, शिक्षा आदि के बारे में बताया गया है। किस प्रकार ईसा मसीह ने चर्च की स्थापना की उसके बारे में बताया गया है।

बाइबल की भाषा बहुत ही आसान है। इसमें गूढ़ दार्शनिक बातें नहीं बताई गई है जिसे लोगों को समझने में दिक्कत हो। मनुष्य किस तरह धर्म और मुक्ति के मार्ग पर जाएं यह बाइबिल में अच्छी तरह बताया गया है। किन तत्वों का आचरण, किन पापों से मनुष्य को दूर रहना चाहिए इसके बारे में बाइबिल में बताया गया है। बाइबल के दो भाग हैं पुराना नियम और नया नियम।

बाइबिल क्या है? महत्व, इतिहास What is Bible? Importance & History in Hindi

बाइबिल की रोचक बातें INTERESTING FACTS OF BIBLE

बाइबिल विश्व में सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली धर्म ग्रंथ है। इसकी 500 करोड़ कॉपियां बिक चुकी है। यह 2400 से ज्यादा भाषाओं में उपलब्ध है। चीन में सबसे अधिक बाइबिल की कॉपी प्रकाशित की जाती है।

इस ग्रंथ में बाइबल की कसम खाने की मनाही है। इसलिए भारत देश में किसी भी न्यायालय में बाइबल की कसम नहीं खिलाई जाती है। डोमिनिकन रिपब्लिक विश्व में एकमात्र ऐसा देश है जिसके झंडे में बाइबल छपी हुई है।

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बाइबल के अनुसार आज से 6000 वर्ष पूर्व ईश्वर ने मनुष्यों को बनाया था। बाइबिल ग्रंथ में डायनासोर के बारे में बताया गया है। 1 दिसंबर 2017 को वाशिंगटन डीसी में बाइबल संग्रहालय खोला गया यह सभी पर्यटकों के लिए खोला गया है।

पुराना नियम OLD TESTAMENT

पुराने नियम में यहूदी धर्म की पौराणिक कहानियां गाथाएं लिखी हुई है। यह हिब्रू, इब्रानी और अरामी भाषा में लिखी गई है।

नया नियम NEW TESTAMENT

इस भाग में ईसा मसीह से जुड़ी हुई कहानियां है जो उनके शिष्यों ने लिखी है। ईसा मसीह की जीवनी, उनकी शिक्षा क्या है इसके बारे में बताया गया है। कुछ अरामी और ज्यादातर हिस्सा ग्रीक भाषा में लिखा गया है।

ईसा मसीह के 4 शिष्यों – मत्ती, लूका, युहन्ना और मरकुस ने उनकी जीवनी और उपदेशों के बारे में वर्णन किया है। बाइबिल में कुल मिलाकर 66 भाग है। पूर्व विधान (ओल्ड टेस्टामेंट) में 29 भाग है और नव विधान (न्यू टेस्टामेंट) में 27 भाग है। यहूदी धर्म की बाइबल पुराना नियम के अंतर्गत लिखी गई है।

अंग्रेजी भाषा में बाइबिल का अनुवाद  ENGLISH TRANSLATION OF BIBLE

भौगोलिक दृष्टि से बाइबल विश्व का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला धार्मिक ग्रंथ है। अमेरिका, कनाडा ,दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, फ्रांस, वेटिकन, स्पेन, रोम, ब्रिटेन समेत सभी यूरोप में यह धार्मिक ग्रंथ पढ़ा जाता है।

इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड समेत सभी इसाई देशों में भी प्रमुख धर्म ग्रंथ है। यह ईसा मसीह के उद्देश्यों के बारे में बताता है। यह यहूदी धर्म के बारे में सभी पौराणिक कहानियां बताता है। प्राचीन काल में यहूदी बहुत ही खूंखार कबीले वाले लोग हुआ करते थे।

बाइबल का महत्व – पढ़ने के  फायदे  IMPORTANCE OF BIBLE/ BENEFITS TO READ BIBLE

बाइबल का महत्व इस प्रकार है-

  •        बाइबल पढ़ने से मनुष्य पर यीशु मसीह ईश्वर की कृपा बनी रहती है। उसका आशीष प्राप्त होता है।
  •        बाइबल पढ़ने से हमें मुसीबतों का सामना करने की शक्ति मिलती है। ईश्वर पर विश्वास बना रहता है। यह जीवन में आशा की किरण देती है। ऐसे लोग जो अपने मार्ग से भटक चुके हैं उनको एक नया रास्ता दिखाती है।
  •        इसको पढ़कर मुक्ति पाई जा सकती है। सत्य क्या है? कैसे जाना जा सकता है? जब तक व्यक्ति सत्य का नहीं जान पाता तब तक व्यक्ति आजाद नहीं हो सकता है।
  •        बाइबल मनुष्यों को पाप करने से रोकती है। जो लोग पाप करते हैं वह शैतान के गुलाम होते हैं।
  •        बाइबल पढ़ने से व्यक्ति ईश्वर को अच्छी तरह समझ सकता है। लोगो को इस पुस्तक के कवर से इसे जज नहीं करना चाहिए।
  •        बाइबल पढ़ने से हम ईश्वर के साथ रह सकते हैं, उससे वार्तालाप कर सकते हैं, उसके साथ समय बिता सकते हैं, उससे बातें कर सकते हैं। बाइबल पढ़ने से व्यक्ति अपने आप को गहराई से समझ सकता है। पादरी ऐसा कहते हैं कि यदि आप ईश्वर को जानना चाहते हैं तो आपको खुद को जानना होगा।
  •        मनुष्य गलतियां करता है तो ईश्वर यीशु मसीह उसे माफ कर देते हैं। ईश्वर बहुत ही दयावान है। बाइबल यीशु मसीह के बारे में है।
  •        बाइबिल ने मनुष्यों को मुक्ति का मार्ग बताया गया है। बाइबल पढ़ने से हम खुद को और अपने बच्चों को भी अच्छे संस्कार दे सकते हैं। यह आत्म अनुशासन को बढ़ावा देता है। जो लोग बाइबल पढ़ते हैं वह गुनाह नहीं करते हैं आत्मा का शुद्धिकरण होता है। बाइबिल पढने वाले सत्य के मार्ग पर चलते है।
  •        जिस प्रकार यदि मनुष्य खाना ना खाए तो दिन पर दिन कमजोर होता जाता है उसी तरह यदि मनुष्य ईश्वर का साथ छोड़ दे तो उसकी आत्मा कमजोर होती जाती है। इसलिए खुद के ईश्वर से जुड़ाव रखने के लिए बाइबल पढ़ना बहुत जरूरी है।
  •        इसे पढ़ने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक विचार आते हैं। निराशा से भरे विचार दूर होते हैं। व्यक्ति का मन अच्छा होता है।
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बाइबिल कैसे पढ़ना चाहिये HOW TO READ BIBLE

बाइबल को सही तरह से पढ़ना चाहिए। इसे कभी भी जल्दबाजी में नहीं पढ़ना चाहिए। इससे हमेशा प्रार्थना और नम्रता के साथ पढ़ना चाहिए। किसी व्यक्ति को यह घमंड नहीं करना चाहिए कि वह दूसरे से अधिक देर तक पढ़ता है। यदि कोई गलती हो तो हमें ईश्वर इस मसीह से माफी मांगनी चाहिए।

नए लोगों को नया विधान (न्यू टेस्टामेंट) पढ़ना चाहिए। नए नियम की चौथी पुस्तक यूहन्ना ने लिखी है। रचित सुसमाचार से इसे पढ़ना चाहिए। यह समाचार सीधा और सरल शब्दों में लिखा गया है जो कोई भी व्यक्ति समझ सकता है। यह उद्धार की योजना बताता है। प्रभु यीशु मसीह कौन थे, उन्होंने क्या सिखाया इसके बारे में पूरी जानकारी देता है। इसके बाद मरकुस द्वारा लिखा गया समाचार पढ़ना चाहिए।

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