कुरान क्या है? महत्व, इतिहास What is Quran? Importance & History in Hindi

कुरान क्या है? महत्व, इतिहास What is Quran? Importance & History in Hindi? इस लेख में हम जानेंगे – कुरान का असली अर्थ, इसकी मान्यता, कुरान के आदेश, इसके पांच स्तंभ और तथ्यों के बारे में।

कुरान क्या है? महत्व, इतिहास What is Quran? Importance & History in Hindi

कुरान का इतिहास History of Quran

कुरान इस्लाम धर्म की सबसे पवित्र किताब मानी जाती है। ऐसा कहा जाता है कि कुरान अल्लाह/ईश्वर द्वारा भेजी गई आखिरी और सर्वोच्च किताब हैं, इससे पहले भी कई पुस्तकें/ ग्रंथ इस्लाम धर्म में आई/आए है पर यह अंतिम और उत्तम मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि कुरान एक आसमान से उतरी हुई किताब/ग्रंथ है, मतलब ??

मुस्लिम मानते हैं कि जिब्रील (जो कि फरिश्ते माने जाते हैं) द्वारा यह पुस्तक हजरत मुहम्मद को सुनाई गई थी, हजरत मुहम्मद इस्लाम के आखिरी नबी मतलब संदेशवाहक माने जाते हैं, उनसे पहले भी काफी संदेशवाहक आए, परंतु वह अंतिम है और अल्लाह के सबसे करीब माने जाते है।

लगभग 1400 साल पहले यह ग्रंथ अस्तित्व में आया, कुरान का खुलासा सन 610 से सन 632 तक किया गया। कुरान दरअसल एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें अल्लाह ने मनुष्यों के लिए पवित्र संदेश लिखे है।

कुरान के उतरने का एक मकसद था, उस समय के लोगों में शांति और सौहार्द लाना, कुरान के संदेशों के बाद काफी अनपढ़ लोग सभ्य हो गए थे। कुरान दरअसल जीवन व्यापन करने का तरीका है, सिर्फ एक पुस्तक नहीं है – ऐसा मुस्लिम मानते हैं।

कुरान में जीवन व्यापन, शादी, रिश्तेदारों से व्यवहार, व्यापार, युद्ध, जायदाद का बटवारा आदि सभी के बारे में विश्लेषण है। कुरान एक मार्गदर्शन की पुस्तक है तथा अल्लाह/ईश्वर का अंतिम प्रकाशन है, मुस्लिम इस ग्रंथ को धर्म की सच्चाई का संकेत मानते हैं।

मुस्लिम इतिहास के मुताबिक मुहम्मद ने मदीना में स्वतंत्र मुस्लिम समुदाय का गठन किया और अपने कई साथियों को कुरान पढ़ने और कानूनों को सीखने का आदेश दिया। इस प्रकार मुस्लिमों का एक समूह साक्षर बना। शुरुआत में कुरान को तख्तों, खालों, लकड़ियों और हड्डियों पर दर्ज किया गया था। सन 632 में मुहम्मद के निधन के बाद कुरान को लिखा गया, वह कैसे ??

क्योंकि उनके सभी साथियों को कुरान कंठस्थ याद था। पहले खलीफा/नेता, अबू बकर ने सन 634 में कुरान को पुस्तक के रूप में इकट्ठा करने का फैसला किया और सन 655 में ज़ैद इब्न थाबित ने कुरान को पहली बार इकट्ठा कर पुस्तक का रूप दिया, क्योंकि जब मुहम्मद पढ़ा करते थे, तो वह लिखा करते थे।

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कुरान के बारे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह पुस्तक जब से अस्तित्व में आई है, से लेकर आज के दिन तक बदली नहीं है, मतलब इसमें किसी के भी द्वारा कोई एक भी बदलाव नहीं किया गया है। यह सबसे शुद्ध रूप में है और ना ही इसकी तुलना मानवीय बोली से की जा सकती है- ऐसा मुस्लिम मानते हैं।

कुरान के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु Important things about Quran

  • कुरान पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली किताब है।
  • कुरान में 30 पाठ है, 114 अध्याय है (जिन्हें सूरत कहते हैं), हर अध्याय में श्लोक हैं जिन्हें आयत कहते हैं, कुरान में 6666 आयतें हैं, कुछ के अनुसार 6238।
  • पूरे 22 साल 5 महीने और 14 दिन लगे थे कुरान को पूरी तरह उतरने में।
  • कुरान पहली बार आखरी पैगंबर मुहम्मद को मक्का की एक हीरा नाम की गुफा में सुनाया गया था।

इस्लाम की मान्यता Recognition of Islam

मुस्लिम मानते हैं कि अल्लाह ने सबसे पहले फरिश्तों को रोशनी से बनाया, जिन्न/शैतान को आग से बनाया और फिर मिट्टी से आदम को बनाया और आदम की पसली से उनकी बीवी हव्वा को बनाया। इतिहासकारों के अनुसार जिन्न आदम से बैर रखता था, क्योंकि अल्लाह ने जिन्न को आदम को सजदा करने (के आगे झुकने) को कहा था,

परंतु शैतान ने यह बात नहीं मानी और यह दलील दी कि मैं पहले बना हूं और आग से बना हूं, जो की मिट्टी से बेहतर है। शैतान ने एक दिन आदम और उनकी बीवी को एक पेड़ का फल खाने पर मजबूर कर दिया, जिसे अल्लाह ने खाने को मना किया था।

इस बात से अल्लाह बहुत नाराज हुए और आदम और उनकी बीवी को जमीन/पृथ्वी पर भेज दिया और उनसे कहा गया कि आप इस पृथ्वी पर एक सीमित समय के लिए है, आपकी संताने होगी और उनकी भी बहुत संतानें, साधनों का उपयोग करने की छूट है आदि; परंतु उस समय सीमा के बाद अल्लाह के पास सभी को वापस लौटना होगा। उस सिमित वक्त में आप सभी कार्य कर सकते हैं

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सभी अच्छे और बुरे कार्यों का हिसाब कयामत के दिन होगा जिसे मुस्लिम आखिरत कहते हैं (अंतिम दिन कहते हैं)। इन सब के उपरांत अल्लाह ने मनुष्य को ठीक रूप से जीवन गुजारने के लिए आदेशों को पहुंचाने का प्रबंध किया जो कि कुरान में लिखे गए आदेश है अथवा पृथ्वी पर अपने दूत/ पैगंबर/संदेशवाहक भेजें जो मनुष्यों को ईश्वर का संदेश दें।

कहा जाता है कि अब तक कुल संख्या में 1,84,000 दूत भेजे जा चुके हैं और अंतिम मुहम्मद थे, यह भी कहा गया है कि कुरान के बाद अब और कोई ईश्वरीय किताब नहीं आएगी।

इस्लाम एवं कुरान के आदेश 

कुरान में दी गई कुछ महत्वपूर्ण सिख जो हमें ज़रूर जनना और जीवन में उतारना चाहिए –

  • अपने आसपास सभी के साथ मुहब्बत/प्रेम से रहे
  • मां बाप का सम्मान करें, अगर उनके द्वारा तकलीफ पहुंचती है तो उफ्फ तक ना करें, उसका बदला या इनाम आपको दुनिया में और मृत्यु के बाद, दोनों में मिलेगा।
  • ध्यान रखें कि आपका पड़ोसी भूखा ना सोए, वरना मुस्लिम होने के तौर पर यह आपकी हार होगी।
  • किसी बेकसूर का कत्ल ना करें।
  • बिना वजह पानी ना बहाए
  • जो भी आपको इस पृथ्वी पर इस जीवन में दिया गया है, उस पर ईश्वर का धन्यवाद कहें, कमियां ना निकाले। जितना ज्यादा धन्यवाद कहेंगे, उतना अधिक अल्लाह/ईश्वर कृपा करेंगे और कमी निकालने पर छीन लेंगे।
  • औरत पर्दे में रहे, अपने शरीर को ढककर रखें, खास तौर पर सिर का ढ़कना जरूरी है, चेहरे को ढ़कना जरूरी नहीं है।
  • मर्द के लिए यह पर्दा है कि वह जब भी किसी महिला के पास हो तो अपनी नजर नीची करके रखें।
  • मां बाप को प्रेम की दृष्टि से देखना भी एक पुण्य का काम है।
  • हमारे कंधों पर फरिश्ते बैठे रहते हैं, जो कि अच्छे काम/नेकी को 10 गुना करके लिखते हैं तथा ईश्वर तक पहुंचाते हैं और 4 गलतियों को एक गलती करके लिखते हैं।
  • साफ सफाई को इस्लाम धर्म में आधा ईमान/भरोसा/विश्वास कहा जाता है तथा मुस्लिम को अपने शरीर की साफ सफाई पर खास ध्यान देना चाहिए।
  • अगर आपको कोई तंग करता है, तो आप उसका उतना ही बराबर बदला उससे ले सकते हैं, इसमें कोई शक नहीं पर अगर आप सब्र करेंगे तो अल्लाह/ईश्वर बेहतर फैसला देगा – ऐसा माना जाता है।

इस्लाम के पांच स्तंभ Five pillars of Islam

यह हैं इस्लाम के 5 स्तंभ –

  1. शहादत- इस बात को मानना के अल्लाह के सिवाय कोई पूजा के लायक नहीं है और मुहम्मद उनके आखिरी नबी/संदेश वाहक हैं।
  2. नमाज- दिन में पांच वक्त नमाज को पढ़ना।
  3. ज़कात- अपने पैसों का कुछ भाग गरीबो में दान करना।
  4. रोज़ा- रमजान के महीने में पूरे 30 दिन रोजे रखना।
  5. हज- एक बार जीवन में हज अवश्य करना, अगर मुमकिन हो सके तो।

साइंस/विज्ञान और कुरान

ऐसा कहा जाता है कि कुरान एक वैज्ञानिक पुस्तक है, काफी विशेषज्ञों ने इस बात को जांचा परखा और माना है। जो आविष्कार विज्ञान आज के युग में करता आ रहा है, वह सभी चीजें कुरान में पहले से ही दर्ज है/लिखी हुई है। (नीचे दिए गए यह सभी तथ्य वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध पर आधारित हैं) -:

  • जीवन की शुरुआत- वैज्ञानिक कहते हैं कि जीवन की शुरुआत पानी से हुई और कुरान में भी यही लिखा हुआ है कि पानी ही जीवन का स्त्रोत है।
  • सूर्य और ग्रहों का इर्द-गिर्द घूमना भी कुरान में दर्ज है।
  • मानव मस्तिष्क का विकास 40 की उम्र में रुक जाता है, यह तथ्य भी कुरान में दर्ज है।
  • महिला की बच्चादानी में भ्रूण के विकास का क्रम भी कुरान में गहराई से बताया गया है।
  • हर व्यक्ति के उंगलियों के निशान/फिंगरप्रिंट अपने आप में अनोखे होते हैं, पृथ्वी पर किसी दूसरे इंसान से नहीं मिलते हैं, यह बात भी कुरान में दर्ज है।

4 thoughts on “कुरान क्या है? महत्व, इतिहास What is Quran? Importance & History in Hindi”

  1. मजहब नहीं सिखाता आपस मैं बैर रखना।।
    सच कहूं पढ़ कर अच्छा लगा।

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