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पोंगल त्यौहार पर निबंध Essay on Pongal Festival in Hindi

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पोंगल त्यौहार पर निबंध Essay on Pongal Festival in Hindi

पोंगल त्यौहार पर निबंध Essay on Pongal Festival in Hindi

पोंगल त्यौहार पर निबंध Essay on Pongal Festival in Hindi: पोंगल तमिल नाडू का सबसे बड़ा किसानो और उनके फसल से जुड़ा पर्व है। तमिल नाडू में हिन्दू धर्म से जुड़े लोग इस त्यौहार को बहुत ही घूम-धाम से मनाते हैं। यह त्यौहार Makar Sankranti के समय मनाया जाता है।

इस दिन गाँव में इसकी ज्यादा तैयारियां और धूम मची होती है। इस दिन सभी गाँव के लोग जो इस त्यौहार को मनाते हैं सूर्य भगवान् (God Sun) की पूजा करते हैं और उनपर कृपा बनाये रखने की कामना करते हैं।

ग्रेगोरियन कैलंडर के अनुसार पोंगल त्यौहार प्रतिवर्ष 14 जनवरी से 17 जनवरी के बीच मनाया जाता है। पोंगल का दिन सभी लोग इंतेज़ार करते हैं और इस दिन भगवान् को चावल भोग में चढाते हैं। इस त्यौहार को लोग अपने आंगन या प्रांगन में सभी लोगों के साथ मनाते हैं।

इस समय खेत हरा भरा लहराता रहता है और अपने इस धान खेती के सफल होने की ख़ुशी में हर जगह हर्ष उल्लास रहता है।

पोंगल कब है? When Pongal Observed 2017

शनिवार, जनवरी 14, 2017, प्रतिबंधित छुट्टी

Saturday, January 14, 2017, Pongal Celebrated, Restricted Holiday

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पोंगल उत्सव Pongal Celebration 2017

ह त्यौहार 4 दिन तक माया जाता है अलग-अलग भाग में।

पहला दिन – भोगी पोंगल Day 1 – Bhogi Pongal

पोंगल त्यौहार से एक पहले महिलाएं अपने घरों को अच्छे साफ़ करते हैं। वे बड़े मिटटी से बनाए हुए बर्तनों को कुमकुम और स्वस्तिक से सजाते हैं।

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दूसरा दिन – सूर्य पोंगल Day 2- Surya Pongal

घर के सबसे बड़े व्यक्ति को पोंगल के दिन  बड़े मिटटी के बर्तन में चावल और पानी डालने को दिया जाता है जो की एक सम्मान भी है। पोंगल यानी की पका हुआ चावल भगवान् को चढाने के लिए बनाया जाता है। परन्तु जो लोग यह भोग बनाते हैं उन्हें बहुत ही ध्यान रखना पड़ता है कुयोंकि उन्हें सुन्दर रंगोली पर रखे बिना अह बनाना पड़ता है।

इस त्यौहार को तमिल नाडू के साथ साथ पडोसी राज्य जैसे कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी धूम-धाम से मनाया जाता है।

पोंगल त्यौहार की सुबह चाहें बच्चे हों या बूढ़े सब कोई व्यक्ति सभी झील या नदियों में पवित्र स्नान करते हैं और गाँव के लोग तालाबों और कुँए के पानी से स्नान करते हैं। स्वभाविक रूप से देखें तो यह त्यौहार ढेर सारी खुशियों और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

सभी लोग इस दिन नए कपडे पहनते हैं। शाम को सभी लोग एक दुसरे से मिलते हैं और चावल खाते हैं। कुछ लोग थके हारे होते हैं तो पहले दिन के त्यौहार के उत्सव को याद करते हुए सो जाते हैं।

तीसरा दिन – मुत्तु पोंगल Day 3 – Muttu Pongal

 

पोंगल के तीसरे दिन को एक अलग ही तरीके से मनाया जाता है। यह दिन खासकर अपने पालतू पशुओं को आदर-सत्कार देने का होता है। ऐसा इस लिए किया जाता है क्योंकि फसल के सिंचाई से ले कर फसल के कटाई तक पशु भी बहुत मदद करते हैं तो उनका सम्मान करना तो धर्म होता है।

गाय, बैलों को बहुत ही सुन्दर रूप से सजाया जाता है और उनकी पूजा भी की जाती है। इस दिन को कनु पोंगल भी कहा जाता है और इस प्रथा के पलान करने को कनु पीडी कहा जाता है।

इस दिन सभी महिलाएं अपने भाइयों के अच्छे जीवन और सफलता के लिए कामना करती हैं। पोंगल के तीसरे दिन महिलाएं अपने भाईयों के लिए ढेर साड़ी स्वादिष्ट मिठाइयाँ और पकवान बनाये जाते हैं।

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चौथा दिन – कानुम पोंगल Day 4 – Kaanum Pongal

चौथे दिन या अंतिम दिन को कन्नुम पोंगल के नाम से जाना जाता है। यह दिन सभी लोगों के मिल बैठ के खाने का होता है। सभी लोग अपने से बड़े लोगों का आशीर्वाद लेते हैं और इस प्रकार यह पवित्र त्यौहार पोंगल Pongal मनाया जाता है।

Image Source Flickr – Nithi Anand

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3 Comments

  1. Ram Choudhary

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    Reply

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