भारत की लाल मिट्टी Red Soil in India – Hindi

भारत की लाल मिट्टी (Red Soil in India), मिट्टी का एक प्रकार है जिसका निर्माण जलवायु के परिवर्तन के परिणाम स्वरूप रवेदार और कायंतरित शैलो के विघटन (टूटने-फूटने) और  वियोजन से होता है।

इस मिट्टी में आयरन ऑक्साइड की अधिकता होने के कारण इसका रंग लाल होता है। लेकिन जब ये मिट्टी जल के संपर्क में आती है, तो इसका रंग पीला हो जाता है। इसीलिए इसे लाल और पीली मिट्टी भी कहते है। इस मिट्टी का pH मान 5 से 7 के बीच होता है।

इसमें खेती करना आसान नही है, क्योंकि इसमें पोषक तत्वों कमी होती है और इसके पानी धारण क्षमता (water holding capacity) कम होती है। इसके साथ साथ इसमें ह्यूमस (Humus) की भी कमी होती है। ह्यूमस की कमी होने के कारण ये मिट्टी बंजर भूमि के रूप में पाई जाती है।

भारत की लाल मिट्टी Red soil in India

लाल मिट्टी (Red soil) भारत में पाई जाने वाली मिट्टियों का तीसरा सबसे बड़ा समूह है। ये लगभग 3.5 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र में फैला हुआ है। जो उत्तर में बुंदेलखंड और दक्षिण में तमिलनाडु तक, पूर्व में राजमहल पहाड़ी से पश्चिम में कच्छ तक फैला हुआ है।

वितरण (Distribution)

लाल मिट्टी (Red soil) भारत के कई राज्यों में पाई जाती है। जैसे ये मिट्टी पश्चिमी तमिलनाडु में, कर्नाटक के कुछ क्षेत्र में, दक्षिणी महाराष्ट्र में, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, ओडिशा, झारखंड और छोटा नागपुर पठार में पाया जा सकता है।

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इस मिटटी कुछ राज्यों में कई स्थानों पर बिखरी हुई पाई जाती है। जैसे उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर, झांसी, बांदा, हमीरपुर तथा राजस्थान के उदयपुर,  चित्तौड़गढ़,  डूंगरपुर,  बांसवाड़ा और भीलवाड़ा जिले में पाई जाती है। इसकी मिट्टी का कुछ भाग पश्चिम बंगाल में भी पाया जाता है।

इस लाल मिट्टी में पाए जाने वाले तत्व Elements found in this red soil of India

लाल मिट्टी (Red soil) की बनावट रेत और मिट्टी से अलग होती है। किंतु ये दोमट की तरह होती है। इसके छिद्र-युक्त (porous) और भुरभुरापन (friable) होने के कारण इसमें पानी ज्यादा देर तक नही रुकता है। इस मिट्टी में चूना,  कंकर और मुक्त कार्बोनेट्स की अनुपस्थिति और घुलनशील लवण बहुत ही कम मात्रा में पाए जाते है।

इस मिट्टी की रासायनिक संरचना में पानी में अघुलनशील सामग्री 90.47%, लोहा 3.61%,  एल्यूमीनियम 2.92%,  कार्बनिक पदार्थ 1.01%,  मैग्नीशियम 0.70%,  चूना 0.56%,  कार्बन डाइऑक्साइड 0.30%,  पोटाश 0.25%,  सोडा 0.12%, फास्फोरस 0.09% और नाइट्रोजन 0.08% पाया जाता है।  इस मिट्टी की रासायनिक संरचना अलग- अलग क्षेत्रो में भिन्न भी हो सकते है।

अगर सामान्य भाषा में कहा जाये, तो इस मिट्टी में चूना, मैग्नीशियम, फास्फेट। नाइट्रोजन, ह्यूमस और पोटाश की कमी होती है। ये मिट्टी का ऊंचे स्थानों पर  पतली, बजरीयुक्त, रेतीली, हल्के रंग की होती है, जिसमे बाजरा जैसी फसल उगाई जा सकती होती है।

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किंतु ये निचले मैदानी और घाटियों में सभी पोषक तत्वों से भरपूर और उपजाऊ दोमट के रूप में पायी जाती है। जिसमे कपास, गेहूं, दालें, तंबाकू, ज्वार, अलसी, बाजरा, आलू और फल जैसी फसले उगाया जा सकता है, लेकिन इस फसलों के लिए पानी की आवश्यकता होगी।

लाल मिट्टी की आकृति विज्ञान Morphology of Red Soil

भारतीय लाल मिट्टी को Ray Chaudhary (1941) ने दो श्रेणियों में बाँटा है:

1. लाल दोमट मिट्टी (Red Loam Soil)

इस मिट्टी का निर्माण ग्रेनाइट,  चार्नोकाइट्स (charnocite) और डायराइट चट्टानों (diorite rocks) के अपघटन द्वारा हुआ है। इसमें भी चूना, मैग्नीशियम, फास्फेट। नाइट्रोजन, ह्यूमस की कमी होती है लेकिन पोटाश उपयुक्त मात्रा में पाये जाते है। इसमें भी छिद्र-युक्त (porous) और भुरभुरापन (friable) होने के कारण इसमें पानी ज्यादा देर तक नही रुकता है।

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 ये मिट्टी प्रायः शिमोगा, आंध्र प्रदेश (रायलसीमा), तेलंगाना, पूर्वी तमिलनाडु (जासूसी रूप से तिरुवनमलाई और कुड्डालोर जिले), उड़ीसा, झारखंड (छोटा नागपुर),  उत्तर प्रदेश (बुंदेलखंड), मध्य प्रदेश (बालाघाट और छिंदवाड़ा),  राजस्थान (बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, कोटा और अजमेर जिले), मेघालय, मिज़ोरम, मणिपुर और नागालैंड में पाया जाता है।

2. रेतेली लाल मिट्टी (Sandy Red Soil)

लाल मिट्टी का निर्माण ग्रेनाइट, ग्रैनी गेनिस (grani gneiss), क्वार्टजाइट और बलुआ पत्थर के विघटन (टूटने और फूटने) से हुई है। ये एक प्रकार की भुरभुरी मिट्टी हैं, जिसमें sesquioxide clays के द्वितीयक संघटकों की मात्रा अधिक होती है।

ये प्रायः पूर्व मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में (छत्तीसगढ़ क्षेत्र को छोड़कर), ओडिशा, आंध्र प्रदेश की पड़ोसी पहाड़ियों और तमिलनाडु (पूर्वी घाट और सह्याद्रिस) में पाये जाते है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के द्वारा लाल मिट्टी (Red Soil) को चार श्रेणियों में विभाजित किया है –

  • लाल मिट्टी।
  • लाल बजरी मिट्टी।
  • लाल और पीली मिट्टी।
  • मिश्रित लाल और काली मिट्टी।

लाल मिट्टी के फायदे Advantages of red soil

  1. लाल मिट्टी उस प्रकार की मिट्टी है जो गर्म, नम और समशीतोष्ण जलवायु की स्थिति में विकसित होती है तथा मेटामॉर्फिक चट्टानों के अपक्षय द्वारा बनती है।
  2. इसमें अन्य मिट्टियों की तुलना में जल निकासी की बेहतर क्षमता होती है।
  3. वे स्वभाव से छिद्र-युक्त (porous), बारीक और उपजाऊ हैं। लाल मिट्टी में लोहा, एल्यूमीनियम की मात्रा अधिक होती है और इनकी प्रकृति उच्च अम्लीय होती है।

लाल मिट्टी के नुकसान Disadvantages of red soil

  1. इसमें चूने, फॉस्फेट और नाइट्रोजन की कमी होती है।
  2. ये मिट्टी पतली, छिद्र-पूर्ण (porous) है और ये  बजरीयुक्त होती है।
  3. इसमें पानी धारण क्षमता (Water holding capacity) बहुत कम होती है।
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