बौद्ध धर्म पर निबंध Essay on Buddhism in Hindi – Boudh Dharm

बौद्ध धर्म पर निबंध Essay on Buddhism in Hindi – Boudh Dharm

बौद्ध धर्म दुनिया के बड़े धर्मों में से एक है। इसके संस्थापक गौतम बुद्ध थे। जिन्हे शाक्यमुनि के नाम से भी जाना जाता है। ईसाई और इस्लाम धर्म से पहले बौद्ध धर्म नहीं आया था।

इन दोनों धर्मों के बाद बौद्ध धर्म की गिनती दुनिया के बड़े धर्मों में होने लगी। इस धर्म को मानने वाले लोग भूटान, नेपाल, भारत, श्रीलंका, चीन, जापान, कम्बोडिया, थाईलैंड और कोरिया में देखने को मिलते हैं। इन देशों के अलावा ऐसे कई अन्य देश भी हैं जो इस धर्म का पालन करते हैं।

बौद्ध धर्म पर निबंध Essay on Buddhism in Hindi – Boudh Dharm

बौद्ध धर्म पर निबंध Essay on Buddhism in Hindi - Boudh Dharm

बौद्ध धर्म का इतिहास

बौद्ध धर्म की स्थापना गौतम बुद्ध ने की थी और इन्हे एशिया का ज्योति पुंज भी कहा जाता है। गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसवी में लुम्बनी नेपाल में हुआ था। इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। इनके पिता का नाम शुद्धोधन था।

गौतम बुद्ध के जन्म के कुछ दिन पश्चात ही उनकी माता मायादेवी का देहांत हो गया और फिर इनका पालन – पोषण इनकी सौतेली माता गौतमी ने किया था। जब इनकी माता सिद्धार्थ को जन्म देने वाली होती हैं तब इनको एक सपना आता है कि एक सफ़ेद हांथी इनके पास आ रहा है और इनके चरणों में कमल अर्पित कर रहा है।

ऐसा सपना देखकर इनकी माँ आश्चर्यचकित हो जाती हैं और विद्वानों से पूछती हैं। तब विद्वान बताते हैं कि इसके दो कारण हो सकते हैं – या तो तुम्हारा बेटा इस पृथ्वी पर राज्य करेगा या वो धर्म का पाठ पढ़ाने वाला बनेगा।

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इन्हे बचपन से ही हर तरह की सुविधाएं दी गयीं थी। ऐसा कहा जाता है कि इनके पिता जी ने इन्हे तीन महल दिए थे जिसमें तीन तालाब थे और तीनों में अलग- अलग तरह के कमल उगते थे। इन्हे बाहरी दुनिया का कुछ भी ज्ञान नहीं था।

क्योंकि इनको सारी सुविधाएं इनके राज महल में ही उपलब्ध कराई जाती थी। जब सिद्धार्थ 16 वर्ष के थे तब इनका विवाह दंडपाणि शाक्य की कन्या यशोधरा से करवा दिया गया। इनका एक पुत्र हुआ जिसका नाम राहुल रखा गया। ये अपनी पत्नी से अतिशय प्रेम करते थे, इतना प्रेम करते थे कि प्रेम में लीन होने पर ये दोनों पति – पत्नी छत से नीचे गलियारे में गिर जाते हैं। कहने का तात्पर्य कि उन्हें होश नहीं रहता था।

एक बार की बात है जब सिद्धार्थ कपिलवस्तु के भ्रमण के लिए अपने सारथी के साथ निकले तब उन्हें चार दृश्य दिखाई दिए – (1) एक बूढ़ा व्यक्ति, (2) एक बीमार व्यक्ति, (3) शव और (4 ) एक संयासी

तब उन्होंने सारथी से पूछा कि ये सब क्या है ? तब सारथी ने बताया कि यही सब जीवन की सच्चाई है। तब सिद्धार्थ को लगा कि मैं कहाँ मोह – माया में फंसा हुआ हूँ। ये सब तो दुःखी करने वाली चीज़ें हैं, इनका अंत कैसे होगा? इस तरह के सवालों के जवाब के लिए वे घर से निकल पड़े।

29 वर्ष की आयु में इन्होने सांसारिक चीज़ों से मोह त्याग दिया और महल छोड़ कर चले गए। इसके बाद इन्होने आलारकलाम (सिद्धार्थ के प्रथम गुरु) से सांख्य दर्शन की शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद इन्होने कठिन तपस्या की।

6 वर्ष तक इन्होने निरंजना नदी के किनारे, पीपल के पेड़ के नीचे तपस्या की तब 35 वर्ष की आयु में इन्हे ज्ञान प्राप्त हुआ। ज्ञान प्राप्त होने के बाद ये गौतम बुद्ध नाम से जाने जाने लगे। जहाँ इन्हे ज्ञान प्राप्त हुआ था वह स्थान बोधगया नामक नाम से जाना जाने लगा।

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इन्होने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया। जिसे धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है। इन्होने अपने उपदेश सबसे अधिक कौशल देश की राजधानी श्रीवस्ती में पालि भाषा में दिए। इनके अनुयायी शासकों में से बिंबसार, प्रसेनजित और उदयन प्रमुख हैं। गौतम बुद्ध की मृत्यु कुशीनारा में चुंद द्वारा जहर युक्त भोजन खिलाने से हुई थी। जिसे महापरिनिर्वाण कहते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि इनके शरीर के अवशेषों को आठ भागों में बाँट कर वहां आठ स्तूपों का निर्माण किया गया है। बौद्ध धर्म अनीश्वरवादी है और पुनर्जन्म पर विश्वास रखता है।

बौद्ध धर्म पर निबंध Essay on Buddhism in Hindi - Boudh Dharm

बुद्ध के अनुयायी को दो भागों में बांटा गया है 

भिक्षुक और उपासक।  

जिन लोगों ने सन्यास ग्रहण कर लिया था वे भिक्षुक थे और गृहस्थ आश्रम व्यतीत करते हुए बौद्ध धर्म का अनुसरण करने वाले लोगों को उपासक कहा गया है।

बुद्ध,धम्म संघ – बौद्ध धर्म के तीन रत्न हैं –

  1. बुद्धं शरणं गच्छामि, – मैं बुद्ध की शरण में जाता हूँ।  
  2. संघं शरणं गच्छामि, –  मैं संघ की शरण में जाता हूँ।  
  3. धम्मं शरणं गच्छामि। –  मैं धम्म नीति की शरण में जाता हूँ।

बौद्ध धर्म को दो भागों में बांटा गया है

हीनयान और महायान।

गौतम बुद्ध ने दुःख से सम्बंधित चार आर्य सत्यों को बताया है

  1. दुःख – इस संसार में सब जगह दुःख है। जन्म में, बीमारी में, किसी से अलग होने में, इक्षाओं की पूर्ति न होने में।
  2. दुःख कारण – तृष्णा दुःख का कारण है।
  3. दुःख निरोध – तृष्णा से मुक्ति पायी जा सकती है।
  4. दुख निरोधगामिनी प्रतिपदा – अष्टांगिक मार्ग के अनुसार तृष्णा से मुक्ति पायी जा सकती है।

“दर्द अपरिहार्य है और पीड़ा वैकल्पिक है।”

सांसारिक दुखों से मुक्त होने के लिए भगवान गौतम बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग के बारे में बताया है,जो निम्न प्रकार हैं –

1. सम्यक दृष्टि,
2. सम्यक संकल्प,
3. सम्यक वाणी,
4. सम्यक कर्मांत,
5. सम्यक आजीव,
6. सम्यक व्यायाम,
7. सम्यक स्मृति,
8. सम्यक समाधि

बुद्ध भगवान ने स्वयं कहा था कि ध्यान करो, ज्ञान की प्राप्ति करो, मुझसे बात करो, मुझपे आँखें बंद करके विश्वास मत करो। आप खुद अपने आप को जानो। आप अपने आप से प्रेम करो। यदि आप वास्तव में खुद से प्यार करते हैं, तो आप कभी भी दूसरे को चोट नहीं पहुंचाएंगे।

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मैं आप सबको रास्ता दिखा सकता हूँ, करना क्या है ? ये आपको तय करना है। बौद्ध धर्म का सबसे प्रमुख त्योहार बुद्ध पूर्णिमा है, जिसे न जाने कितने देशों के लोग मनाते हैं। गौतम बुद्ध और बुद्धिज़्म पर साहित्य में भी स्थान देखने को मिलता है।

डॉ. भीम राव अम्बेडकर जी की रचना “द बुद्धा एंड द धम्मा”, एडविन अर्नाल्ड द्वारा रचित कविता “द लाइट ऑफ़ एशिया”, दलाई लामा द्वारा रचित “द फोर नोबल ट्रुथ्स”, राहुल सांकृत्यायन द्वारा रचित “महामानव बुद्ध”, अश्वघोष द्वारा रचित संस्कृत महाकाव्य “बुद्ध्चरितम्” और बौद्ध धर्म की सबसे प्रसिद्द रचना “धम्मपद” है।

सम्राट अशोक ने इस धर्म को अपनाया था। वे बुद्ध के बड़े अनुयायिओं में से एक थे। ये बुद्ध की मानवतावादी विचारों से अत्यधिक प्रभावित हुए थे। इन्होने बुद्ध की स्मृति में कई स्तम्भ स्थापित करवाए थे जो आज भी श्री लंका, थाईलैंड, चीन, लुम्बनी में अशोक स्तम्भ के नाम से जाने जाते हैं। वास्तव में यह एक ऐसा धर्म है जो मानवता को सिखाता है और जीवन की सच्चाई से अवगत कराता है।

Help Source –

https://en.wikipedia.org/wiki/Buddhism
https://en.wikipedia.org/wiki/Gautama_Buddha
http://www.buddhanet.net/pdf_file/lifebuddha.pdf
https://www.britannica.com/topic/Buddhism

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