गरम दल का इतिहास History of Garam Dal in Hindi

इस लेख में गरम दल का इतिहास History of Garam Dal in Hindi पढ़ेंगे। इसमें गरम दल के प्रमुख नेता (लाल, बाल, पाल) का योगदान, दल की शुरुवात, विचारधारा, विद्रोह के विषय में जानकारी सम्मिलित किया गया है।

गरम दल का इतिहास History of Garam Dal in Hindi

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी, लेकिन 1907 तक यह दो गुटों में विभाजित हो गई थी: तिलक के नेतृत्व में कट्टरपंथी गरम दल (गर्म गुट) और गोखले के नेतृत्व में उदारवादी नरम दल। इस लेख में आप गरम दल के इतिहास के विषय में मुख्य जानकारियाँ पढ़ सकते हैं।

आज हम गरम दल के बारे में कुछ जानेंगे और उनसे जुड़े कुछ नेता जैसे लाल बाल पाल की तिकड़ी के बारे में बात करेंगें कि किस तरह हमारे भारत के इन राष्ट्रवादी नेताओं ने भारत को ग़ुलाम की जंजीर से आज़ाद कराया।

गरम दल के प्रमुक नेता Main Leaders of Garam Dal

गरम दल के प्रमुख नेता तथा उनका पूरा नाम:

ये तीन नेता देश में लाल बाल पाल के नाम से भी प्रसिद्ध है। 

गरम दल की शुरुवात कब और क्यों हुई? When and Why Garam Dal is Formed?

क्रांतिकारियों का उदय 1905 से 1918 ई. में हुई जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दो भागों में बंट गयी – गरम दल और नरम दल। इस समय भारत की बागडोर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के हाथों में थी जो कि उग्रवादी युग के नाम से जाना जाता है।

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यह उस समय की बात है, जब हमारे भारतीय नेताओं का ब्रिटिश सरकार से विश्वास उठ गया तब कांग्रेस में एक नये युग का उदय हुआ जिसे उग्रवादी युग का नाम दिया गया और इस युग में अपनी मांगों को पूरा कराने के लिये शांति की जगह संघर्ष का मार्ग अपनाया गया।

गरम दल के प्रमुख नेताओं में बाल गंगाधर तिलक, विपिन चन्द्र पाल, लाला लाजपत राय और अरविन्द घोष का नाम प्रमुख है।

गरम दल के नेताओं की विचारधारा Ideology of Garam Dal in Hindi

उग्र गरम दल के इन नेताओं का यह विचार था कि हम अगर सरकार पर दवाब डालेंगे तो हम अपने अधिकार को प्राप्त कर सकते है अन्यथा हमें कुछ नहीं मिल सकता है।

इस दल की तिकड़ी ने मिलकर क्रांतिकारी हवा चलाई इस तरह लाल-बाल-पाल तिकड़ी ने उस समय के युवा वर्ग में स्वतंत्रता के लिये जोश भर दिया था जो कि संघर्ष करके जल्द ही स्वतंत्रता पाना चाहता था।

अब इस दल में दिन प्रतिदिन युवाओं की संख्या बढती जा रही थी और स्वतंत्रता के लिये आग भी बढ़ती जा रही थी। इस तरह दो दल बन गए एक जो शांति के मार्ग पर चल कर अपने अधिकार पाना चाहता था जो कि नरम दल के नाम से विख्यात हुआ और दूसरा केवल संघर्ष चाहता था और क्रांति का मार्ग अपनाना चाहता था। 

उग्रवादी दल अर्थात गरम दल के नाम से विख्यात हुआ। गरम दल के नेता अब सरकार के साथ असहयोग और नौकरशाही के लिए संघर्ष करना चाहते थे।

गरम दल के नेता सरकार द्वारा किये गये सुधारों और उनके द्वारा दिए गये अधिकारों से असंतुष्ट थे। वे सरकार का जितना विद्रोह करते थे उतना ही नरम दल अर्थात् उदारवादी नेताओं का भी विद्रोह करते थे।

नरम दल के प्रति विद्रोह Rebellion Against the Naram Dal

इसका कारण था नरम दल के नेता ब्रिटिश सरकार की बात कुछ हद तक मान कर भारत को शांति के मार्ग से आज़ाद कराना चाहते थे। नरम दल में कुछ मुख्य नेता थे गोपाल कृष्ण गोखले, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरु ,सरदार वल्लभ भाई पटेल

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गरम दल की तिकड़ी के अग्रदूत लाल बाल पाल ब्रिटिश सरकार को वरदान नहीं भारत के लिये एक अभिशाप मानते थे। गरम दल के लोगों को अंग्रेज़ बिलकुल भी पसंद नहीं थे इस दल के नेताओं का मनना था कि स्वराज हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है और हम इसे प्राप्त करके रहेंगे इसके लिये चाहे कुछ भी करना पड़े हम गुलामी की जंजीर को मिटा कर रहेंगे। 

गरम दल के नेता गंगाधर तिलक का कहना था कि अगर हमने अंग्रेजों के साथ सरकार बनाया तो हम अपने देश भारत और भारत की जनता  के साथ फिर से धोखा करेंगे। गरम दल के नेता हमेशा वंदे मातरम का नारा लगाते थे क्यों कि अंग्रेजों को यह नारा पसंद नहीं था।

लाल बाल पाल जिन्होंने स्वदेशी आंदोलन की वकालत की उन्होंने सभी आयातित वस्तुओं का बहिष्कार किया। वे विदेशी सामान को अंग्रेजी सरकार के सामने जला देते थे। उन तीनों का मानना था विनती और शांति जैसे हथियारों से अब काम नहीं चलेगा इसी कारण यह तिकड़ी गांधी जी के साथ नहीं थी।

एक बार तो विपिन चंद्र पाल ने गांधी जी से कहा आप स्वतंत्रता पाने के लिये जो शांति का रास्ता अपना रहे है उस रास्ते से हमें कभी भी आज़ादी नहीं मिल सकती स्वतंत्रता पाने के लिये हमें संघर्ष करना होगा।

इन्होंने 1905 के बंग-भंग में भाग लिया और बंगाल विभाजन के विरुद्ध लोगो को भड़काया इस तरह बंगाल में उन्होंने हड़ताल की और विदेशी वस्तुओं का जनता के साथ मिलकर जमकर बहिष्कार किया भारत की जनता को विदेशी सामान न लेने के लिये समझाया। 

लाल बाल पाल से आप क्या समझते हैं?

1. लाल: लाला लाजपत राय

लाला लाजपत राय  का जन्म 18 जनवरी 1865 जैन धर्म में रहने वाले एक परिवार में हुआ था। लाला लाजपत राय को पंजाब का केसरी कहते है इन्ही ने ही पंजाब नेशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कंपनी की स्थापना की थी।

गरम दल के इस नेता ने जब साइमन कमीशन के विरुद्ध एक प्रदर्शन में हिस्सा लिया और दौरान ये घायल हुए हुए और 17 नवम्बर 1928 में इस नेता ने अपना शरीर त्याग दिया था।

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लाला लाजपत राय के द्वारा लिखी गई पुस्तकें:

  • यंग इंडिया
  • अनहैप्पी इंडिया 
  • इन्होंने अपनी आत्म कथा भी लिखी है।

2. बाल: बाल गंगाधर तिलक

बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 में रत्नागिरी महाराष्ट्र में हुआ था। आप स्वतंत्रता सेनानी के आलावा समाज सुधारक,हिंदी, गणित, संस्कृत, इतिहास और खगोल विज्ञान के विद्वान भी थे उन्होंने भारत की स्वतंत्रता अपना योगदान दिया और कई युवा पीढ़ी को जागृत भी किया।

उन्होंने एल एल वी की डिग्री प्राप्त की और फिर पुणे के एक स्कूल में गणित पढ़ाने लगे बाद में वे एक पत्रकार बन गये और देश को आज़ादी के लिये अपना जीवन दान दे दिया। भारत के सेनानी 1 अगस्त 1920 को हमें छोड़कर हमसे दूर चले गये।

3. पाल: विपिन चन्द्र पाल

विपिन चन्द्र पल का जन्म 7 नवम्बर 1858 में हबीबगंज बांग्लादेश में हुआ था। ये स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक और पत्रकार थे। उनके पिता का नाम रामचंद्र पाल था वे एक जमींदार थे और फ़ारसी में उन्हें महारत हासिल थी।

उन्होंने पॉल कैथेड्रल मिशन में अपनी शिक्षा पूरी की और फिर बाद में उसी कॉलेज में वह शिक्षक बन गये। विपिन चन्द्र पाल तो बहुत छोटी उम्र से ही समाज के सुधारक बन चुके थे और सामाजिक कुरीतियों जैसी परम्पराओं का विरोध करने लगे थे उन्होंने एक विधवा से शादी की थी।

इसी कारण उन्हें अपने घरवालों को त्यागना पड़ा वे अपनी दिल की सुनते थे और उन्होंने वही किया जो उन्हें उचित लगा। 1908 में बाल गंगाधर तिलक खुदीराम बोस के एक बम हमले में साथ दिया जिसके कारण उनको वर्मा की जेल में डाल दिया गया।

उन्होंने उस जेल में कई पुस्तकें लिख डाली और हमारे नेहरू ने उन्हें भारतीय क्रांतिकारी का जनक कहा। इनकी मृत्यु 20 मई 1932 में कोलकाता में हुई।

विपिन चन्द्र पाल के द्वारा लिखी गई पुस्तकें:

  • स्वराज एंड द प्रेजेंट सिचुऐशन 
  • नैस्नालिटी एंड एम्पायर 
  • द न्यू स्पिरिट 
  • क्वीन विक्टोरिया 
  • द बेसिक ऑफ रिफार्म 
  • स्टडी इन हिदुइस्म

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