कोणार्क सूर्य मंदिर का इतिहास Konark Sun Temple History Architecture in Hindi

कोणार्क सूर्य मंदिर का इतिहास Konark Sun Temple History Architecture in Hindi

कोणार्क मंदिर या सूर्य मंदिर या भगवान का रथ मंदिर उड़ीसा के पूर्वी समुद्र तट पुरी के पास स्थित है। यह मंदिर सूर्य भगवान पर समर्पित है। सूर्य मंदिर का आकार भगवान सूर्य के रथ को दर्शाता है जिसमें 24 रथ के चक्के और 6 घोड़े नेतृत्व करते दिख रहे हैं। यह मंदिर देखने में बहुत ही सुंदर है और विश्व प्रसिद्ध भी है।

कोणार्क सूर्य मंदिर का इतिहास Konark Sun Temple History Architecture in Hindi

सूर्य मंदिर की प्रसिद्धि Sun temple fame

 कोणार्क सूर्य मंदिर का इतिहास Konark Sun Temple History Architecture in Hindi

कोनार्क मंदिर व्यापक रूप से इसकी वास्तुशिल्प भव्यता के लिए नहीं बल्कि मूर्तिकला काम की जटिलता और प्रफेशन के लिए भी जाना जाता है। यह कलिंग वास्तुकला की उपलब्धि का सर्वोच्च बिंदु है, जिसमें अनुग्रह, आनंद और जीवन की लय को दर्शाया गया है, जिसमें सभी अद्भुत चमत्कार शामिल हैं।

साथ ही कोणार्क मंदिर को यूनेस्को(UNESCO) विश्व धरोहर स्थल के रूप में भी घोषणा किया गया है। इसका निर्माण 1250 एडी के दौरान पूर्वी गंगा के राजा नरसिम्हा देव प्रथम द्वारा करवाया गया था। कोनार्क सूर्य मंदिर के प्रत्येक तरफ 12 पहियों की दो पंक्तियां हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि मंदिर में स्थित चक्र दिन के 24 घंटों को दर्शाता है और कुछ लोगों का मानना है कि यह चक्र वर्ष के 12 महीनों को दर्शाता है। लोगों का यह भी मानना है कि मंदिर के सात घोड़े सप्ताह के 7 दिन को दर्शाते हैं।

समुद्र तट के नाविकों ने इसका नाम काला पगोडा दिया था क्योंकि उनका मानना है यह मंदिर समुद्री लहरों को कुछ इस प्रकार आकर्षित करता है कि इसके कारण ज्यादातर दुर्घटनाग्रस्त जहाज़ो का मलवा मंदिर के पास जमा हो जाता है।

मोहम्मद गौरी के समय से ही ओडिशा पर कई मुस्लिम शहंशाओं ने आक्रमण किया परंतु हिंदू राजाओं ने हमेशा उन्हें पछाड़ा। हिंदू राजा जानते थे कि मुस्लिम राजाओं को ज्यादा दिन तक पीछे धकेलना आसान नहीं है तब भी उन्होंने दो शताब्दियों तक मुस्लिम शहंशाओं को पीछे धकेल कर रखा था।

13वीं शताब्दी के मध्य तक जब मुस्लिम शहंशाओं ने उत्तरी भारत पर कब्ज़ा किया और साथ ही बंगाल के कुछ प्रांतों को भी तभी नरसिम्हा देव प्रथम ने उनके खिलाफ आक्रमण किया। 1236एडी सुल्तान इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद दिल्ली की सल्तनत थोड़ी कमजोर पड़ गई। 1243 एड़ी, नरसिंह देव प्रथम और तूगान खान के बीचएक बहुत बड़ा युद्ध हुआ और उसमें नरसिंह देव की जीत हुई। इसी जीत की खुशी में वह एक मंदिर बनवाने मैं इच्छुक थे।

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इतिहास व कथा History & Story

कोणार्क मंदिर देखने में बहुत ही सुंदर है। कभी इस मंदिर के  1 मील उत्तर दिशा में चंद्रभागा नाम की एक नदी बहती थी जो समुद्र से जुड़ी हुई थी अब मौजूद नहीं है। उसी नदी के पास सुंदर शहर हुआ करता था जो एक व्यापार का मुख्य केंद्र था। ना सिर्फ यह बात बल्कि नदी के माध्यम से मंदिर बनाने के लिए जरूरी सामग्री भी आसानी से पहुंच पाता था इसलिए नरसिंह देव ने इस जगह को मुख्य रूप से चुना।

एक और पौराणिक कथा के अनुसार माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र सांबा ने एक बार नारद मुनि के साथ दुर्व्यवहार  किया जिसके कारण नारद ने सांबा को कुष्ठ रोग होने का श्राप दिया। जब सांबा को अपनी गलती का एहसास हुआ तो क्षमा मांगने पर नारद मुनि ने उन्हें मैत्री जंगल में 12 वर्षों तक सूर्य भगवान की तपस्या करने का रास्ता बताया।

अगले दिन सुबह जब सांबा चंद्रभागा नदी मेंस्नान कर रहे थे तो उन्हें पानी में सूर्य भगवान की एक मूर्ति मिली जिसे उन्होंने उस स्थान पर स्थापित किया जहां आज सूर्य मंदिर बना हुआ है।और पूजा आराधना करने पर सांबा को अपने श्राप से मुक्ति मिली और उनका रोग ठीक हो गया।

वास्तुकला Architecture

कोणार्क सूर्य मंदिर का इतिहास Konark Sun Temple History Architecture in Hindi
कोणार्क मंदिर का मुख्य द्वार

सूर्य मंदिर की वास्तुकला कई हद तक कलिंगा मंदिर की वास्तुकला से मिलता-जुलता है। इस मंदिर में बने हुए 12 जोड़ी चक्के सूर्य भगवान के रथ को बहुत ही सुंदरता से दर्शाते हैं। मंदिर के उत्तरी और दक्षिणी ओर 24 खुदे हुए चक्के बने हुए है जो लगभग 3 मीटर के व्यास में है जो कई मायने में महीनों, वर्षों और ऋतुओं को दर्शाते हैं। उन चक्कों या पहियों के बीच मंदिर की दीवार पर शानदार शेर, नर्तकियों, संगीतकारों तथा कामुक समूह का चित्रण किया गया है।

अन्य सभी भारतीय मंदिरों के जैसे ही सूर्य मंदिर में भी कुछ प्रमुख भाग बनाए गए हैं। सबसे पहले विमान  जो मंदिर का मुख्य अभ्यारण है और शिखर जो मंदिर के ऊपरी भाग का हिस्सा है। पूर्वी भाग में जहामोगन है जो लोगों के एकत्र होने के लिए बनाया गया था। उसी मंदिर के पूर्वी क्षेत्र में एक नाटमंदिर यानी कि मृत्य क्षेत्र भी बना हुआ है।

Help Source

http://www.shreekhetra.com/konarchi.htmlhttp://knowindia.gov.in/culture-and-heritage/monuments/sun-temple-konark.php

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