मीरा बाई के पद (दोहे) अर्थ सहित Meera Bai Ke Pad with Meaning in Hindi

इस लेख में मीरा बाई के पद व दोहे हिन्दी अर्थ सहित (Meera Bai Ke Pad with Meaning in Hindi) शामिल किया गया है। मीराबाई से आज कौन नहीं अवगत होगा अगर प्रेम की बात करें तो उनके जैसा शुद्ध प्रेम की परिभाषा कोई नहीं दे सका है।

मीराबाई (Mirabai) जी ने सैंकड़ो दोहों और गीतों को रचा है यह लेख उनके सैकड़ों कृतियों में से कुछ Best Meera bai dohe को इस लेख में शामिल किया जा रहा है। हर दोहे के अर्थ को एकदम सरल और आकर्षक ढंग से लिखा गया है।

आईये जानते हैं – मीरा बाई के पद (Meera Bai Ke Pad)

मीराबाई द्वारा रचित सर्वश्रेष्ठ पद व दोहे Best Meera Bai Pad and Dohe in Hindi

1. माई री! मै तो लियो गोविन्दो मोल।
कोई कहे चान, कोई कहे चौड़े, लियो री बजता ढोल।।
कोई कहै मुन्हंगो, कोई कहे सुहंगो, लियो री तराजू रे तोल।
कोई कहे कारो, कोई कहे गोरो, लियो री आख्या खोल।।
याही कुं सब जग जानत हैं, रियो री अमोलक मोल।
मीराँ कुं प्रभु दरसन दीज्यो, पूरब जन्म का कोल।।

मीरा बाई के पद का हिन्दी अर्थ

इस पद में मीरा बाई अपनी सखी से कहती हैं- माई मेने श्री कृष्ण को मोल ले लिया हैं। कोई कहता हैं, अपने प्रियतम को चुपचाप बिना किसी को बताए पा लिया हैं। कोई कहता हैं, खुल्लम खुला सबके सामने मोल लिया हैं।

मै तो ढोल-बजा बजाकर कहती हूँ बिना छिपाव दुराव सभी के सामने लिया हैं। कोई कहता हैं, तुमने सौदा महंगा लिया हैं तो कोई कहता हैं सस्ता लिया हैं। अरे सखी मेने तो तराजू से तोलकर गुण अवगुण देखकर मौल लिया हैं। कोई काला कहता हैं तो कोई गोरा मगर मैने तो अपनी आँखों को खोलकर यानि सोच समझकर कृष्ण को खरीदा हैं।

2. मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोई।
जाके सिर मोर मुकट मेरो पति सोई।।

मीरा बाई के पद का हिन्दी अर्थ

इस दोहे में मीराबाई जी कहती हैं की मेरे तो मात्र श्री कृष्ण हैं जिन्होंने उंगली पे पर्वत उठाकर गिरधर नाम पाया उनके अलावा मैं किसी को अपना नहीं मानती। जिनके मस्तक पर मोर मोकुट शोभित है वही हैं मेरे पति।

3. मन रे परसी हरी के चरण।
सुभाग शीतल कमल कोमल।
त्रिविध ज्वालाहरण।
जिन चरण ध्रुव अटल किन्ही रख अपनी शरण।
जिन चरण ब्रह्माण भेद्यो नख शिखा सिर धरण।
जिन चरण प्रभु परसी लीन्हे करी गौतम करण।
जिन चरण फनी नाग नाथ्यो गोप लीला करण।
जिन चरण गोबर्धन धर्यो गर्व माधव हरण।
दासी मीरा लाल गिरीधर आगम तारण तारण।
मीरा मगन भाई।
लिसतें तो मीरा मगनभाई।।

मीरा बाई के पद का हिन्दी अर्थ

इसे भी पढ़ें -  श्रीकृष्ण की पूर्ण कथा - जन्म से मृत्यु तक Lord Krishna Complete Story in Hindi

इस दोहे में मीराबाई जी कहती हैं कि उनका मन हमेशा ही श्री कृष्ण के चरणों में तल्लीन हैं| ऐसे श्री हरि जिनका मन शीतल और चरणों में ध्रुव हैं| जिनके चरणों में पूरा ब्रम्हांड और शेष नाग हैं| जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था| ये दासी मीरा का मन उसी हरी के चरणों, उनकी लीलाओं में लगा हुआ हैं|

4. मनमोहन कान्हा विनती करूं दिन रैन।
राह तके मेरे नैन।
अब तो दरस देदो कुञ्ज बिहारी।
मनवा हैं बैचेन।
नेह की डोरी तुम संग जोरी।
हमसे तो नहीं जावेगी तोड़ी।
हे मुरली धर कृष्ण मुरारी।
तनिक ना आवे चैन।
राह तके मेरे नैन ……..
मै म्हारों सुपनमा।
लिसतें तो मै म्हारों सुपनमा।।

मीरा बाई के पद का हिन्दी अर्थ

मीरा अपने भजन के माध्यम से श्री कृष्ण से विनती कर रही हैं कि हे माधव ! मैं दिन रात तुम्हारी राह देख रही हूँ। मेरी आँखे तुम्हे देखने के लिए बैचेन हैं मेरे मन को भी तुम्हारे दर्शन की ही ललक हैं। मैंने अपने नैन केवल तुम से मिलाये हैं अब ये मिलन टूट नहीं पायेगा। तुम आकर दर्शन दे जाओं तब ही  मुझे चैन मिलेगा।

5. मै म्हारो सुपनमा पर्नारे दीनानाथ।
छप्पन कोटा जाना पधराया दूल्हो श्री बृजनाथ।
सुपनमा तोरण बंध्या री सुपनमा गया हाथ।
सुपनमा म्हारे परण गया पाया अचल सुहाग।
मीरा रो गिरीधर नी प्यारी पूरब जनम रो हाड।
मतवारो बादल आयो रे।
लिसतें तो मतवारो बादल आयो रे।।

मीरा बाई के पद का हिन्दी अर्थ

इस पंक्ति में मीराबाई जी कहती हैं कि उनके सपने में श्री कृष्ण दुल्हे राजा बनकर पधारे आये थे। सपने में तोरण बंधा था जिसे श्री कृष्ण ने हाथों से तोड़ा था। सपने में मीरा ने कृष्ण के पैर छुये और सुहागन बनी।

6. ऐरी म्हां दरद दिवाणी
म्हारा दरद न जाण्यौ कोय
घायल री गत घायल जाण्यौ
हिवडो अगण सन्जोय।।
जौहर की गत जौहरी जाणै
क्या जाण्यौ जण खोय
मीरां री प्रभु पीर मिटांगा
जो वैद साँवरो होय।।

मीरा बाई के पद का हिन्दी अर्थ

इस पद में कृष्ण भक्त कवयित्री मीराबाई जी कहती है – हे सखि मुझे तो प्रभु के प्रेम-वेदना भी पागल कर जाती है। इस पीड़ा को कोई नहीं समझ सका। समझता भी कैसे? क्योंकि इस दर्द को मात्र वही समझ सकता है जिसने इस दर्द को पहले सहा हो, प्रभु के प्रेम में घायल हुआ हो। मेरा हृदय तो इस आग को भी संजोए हुए है। गहनों को तो एक सोनार ही परख सकता है, जिसने प्रेम की पीड़ा रूपी यह अमूल्य गहना ही खो दिया हो वह क्या जानेगा। अब मीरा की पीड़ा तो तभी मिटेगी अगर सांवरे श्री कृष्ण ही वैद्य बन कर चले आएं।

इसे भी पढ़ें -  वनीकरण या वृक्षारोपण पर निबंध Essay on Afforestation in Hindi

7. वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु किरपा करि अपनायो. पायो जी मैंने…
जनम जनम की पूंजी पाई जग में सभी खोवायो. पायो जी मैंने…
खरचै न खूटै चोर न लूटै दिन दिन बढ़त सवायो. पायो जी मैंने…
सत की नाव खेवटिया सतगुरु भवसागर तर आयो. पायो जी मैंने…
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर हरष हरष जस गायो. पायो जी मैंने

मीरा बाई के पद का हिन्दी अर्थ

इस पंक्ति में मीराबाई कहती हैं की मैंने राम नाम का आलौकिक धन प्राप्त कर लिया है। जिसे उनके गुरु रविदास जी ने दिया हैं। इस एक नाम को पाकर उन्होंने कई जन्मो का धन एवम सभी का प्रेम पा लिया हैं। यह धन ना खरचने से से कम होता हैं और ना ही चोरी होता हैं यह धन तो दिन रात बढ़ता ही जा रहा हैं| यह ऐसा धन हैं जो मोक्ष का मार्ग दिखता हैं। इस नाम को अर्थात श्री कृष्ण को पाकर मीरा ने ख़ुशी – ख़ुशी से उनका गुणगान गाया।

8. तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई|
छाड़ि दई कुलकि कानि कहा करिहै कोई

मीरा बाई के पद का हिन्दी अर्थ

इस पंक्ति में मीराबाई जी कहती हैं की मेरे ना तो पिता हैं और ना माता, ना ही कोई भाई। अगर मेरा कोई है तो वह मेरे गिरधर गोपाल (श्री कृष्ण) हैं।

9. मतवारो बादल आयें रे।
हरी को संदेसों कछु न लायें रे।
दादुर मोर पापीहा बोले।
कोएल सबद सुनावे रे।
काली अंधियारी बिजली चमके।
बिरहिना अती दर्पाये रे।
मन रे परसी हरी के चरण।
लिसतें तो मन रे परसी हरी के चरण।

मीरा बाई के पद का हिन्दी अर्थ

प्रस्तुत दोहे में मीरा कहती हैं की बादल गरज गरज कर आ रहे हैं लेकिन कृष्ण का कोई संदेशा नहीं लाये। वर्षा ऋतू में मौर ने भी पंख फैला लिए हैं और कोयल भी मधुर आवाज में गा रही हैं और काले बदलो की अंधियारी में बिजली की आवाज से कलेजा रोने को हैं विरह की आग को बढ़ा रहा हैं। मन बस हरी के दर्शन का प्यासा हैं।

10. भज मन! चरण-कँवल अविनाशी।
जेताई दीसै धरनि गगन विच, तेता सब उठ जासी।
इस देहि का गरब ना करणा, माटी में मिल जासी।
यों संसार चहर की बाजी, साझ पड्या उठ जासी।
कहा भयो हैं भगवा पहरया, घर तज भये सन्यासी।
जोगी होई जुगति नहि जांनि, उलटी जन्म फिर आसी।
अरज करू अबला कर जोरे, स्याम! तुम्हारी दासी।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर! काटो जम की फांसी।

मीरा बाई के पद का हिन्दी अर्थ

प्रस्तुत पद में मीराबाई कहती हैं कि हे मेरे मन तू कभी नष्ट ना हो सकने वाले कृष्ण भगवान् के चरणों का ध्यान धरा कर। तुझे इस धरती और आसमान के बीच जो कुछ दिखाई दे रहा हैं वह एक दिन जरुर नष्ट हो जायेगा इसलिए यह जो तुम्हारा शरीर हैं इस पर बेकार में ही अहंकार कर रहे हो, यह भी एक दिन मिटटी में मिल जाएगा। यह संसार एक खेल की तरह हैं जिसकी बाजी शाम को खत्म हो जाती हैं । उसी प्रकार यह संसार भी नष्ट होने वाला हैं। भगवान् को प्राप्त करने के लिए भगवा वस्त्र धारण करना काफी नही हैं।

इसे भी पढ़ें -  कृष्ण प्रेमी मीरा बाई का जीवन परिचय Meera Bai Biography in Hindi

साथ ही मीराबाई जी कहती हैं कि साधू, सन्यासी बनने से भी न तो ईश्वर की प्राप्ति होती हैं और न ही जीवन मृत्यु  के इस चक्कर से मुक्ति मिल पाती है। इसलिए अगर ईश्वर  को प्राप्त करने की योजना नहीं अपनाई तो इस संसार में फिर से जन्म लेना पड़ेगा और वहीं मीराबाई ने अपने प्रभु से हाथ जोड़कर विनती करते हुए कहा है कि हे कृष्ण मै तुम्हारी दासी हूं, कृपया मुझे जन्म-मरण के  इस चक्र से मुक्ति दिलवाओ।

11. जब के तुम बिछुरे प्रभु मोरे कबहूँ न पायों चैन।।
सबद सुनत मेरी छतियाँ काँपे मीठे-मीठे बैन।
बिरह कथा कांसुं कहूँ सजनी, बह गईं करवत ऐन।।
कल परत पल हरि मग जोंवत भई छमासी रेण।
मीराँ के प्रभु कबरे मिलोगे, दुःख मेटण सुख देण।।

मीरा बाई के पद का हिन्दी अर्थ

इस पद में मीराबाई जी कहती हैं कि हे प्रभु कित्नते दिनों से आपके दर्शन नहीं हुए हैं , इसलिए आपके दर्शन की लालसा से मेरे नेत्र दुःख रहे हैं। जब से आप मुझसे अलग हुए हैं, मैने कभी चैन नही पाया हैं। कोई भी आवाज होती हैं तो मुझे लगता हैं आप आ रहे हैं, आपके दर्शन के लिए मेरा ह्रदय अधीर हो उठता हैं। और मुख से मीठे वचन निकलने लगते हैं।

पीड़ा में कड़वे शब्द तो होते ही नही हैं। मीरा कहती हैं, सखी मुझे भगवान से न मिलने की पीड़ा हो रही हैं, मै किसे अपनी विरह व्यथा सुनाऊ, वैसे भी इससे कोई फायदा भी तो नही हैं। इतनी असहनीय पीड़ा हो रही हैं, यदि कांशी में जाकर करवट बदलू तो भी यह कष्ट कम नही होता। पल-पल भगवान् की प्रतीक्षा ही किये रहती हु। उनकी प्रतीक्षा में यह समय बड़ा होने लग गया हैं, एक रात 6 महीने के बराबर लगती हैं आखिर में मीरा कहती हैं, प्रभु जब आप आकर मिलोगे तभी मेरी यह पीड़ा दूर होगी। आपके आने से ही सारा दुःख मिटेगा। आप आकर मेरा दुःख दूर कर दीजिए।

आशा करते हैं आपको मीरा बाई के दोहे पसंद आये होंगे। आप इन्हें अपने कंप्यूटर में PDF download भी कर सकते हैं।

Featured Image – Wikipedia

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.