राजतंत्र पर निबंध Monarchy Essay in Hindi

इस लेख में हिंदी में राजतंत्र पर निबंध (Monarchy Essay in Hindi) बेहतरीन ढंग से लिखा गया है। इसमें राजतंत्र क्या है, राजतंत्र और लोकतंत्र में अंतर, राजतंत्र के फायदे और नुकसान, प्राचीन भारत में राजतंत्र और 10 राजतंत्र वाले देशों के नाम पर चर्चा किया गया है 

राजतंत्र क्या है? What is Monarchy in Hindi?

Contents

किसी भी देश अथवा स्थान पर शासन करने की प्रणालियों को कई श्रेणियों में विभाजित किया गया है। राजतंत्र, प्रजातंत्र, गणतंत्र तथा तानाशाही इत्यादि कई सारी शासन प्रणालियां हैं। 

एक ऐसी प्रणाली जिसमें केवल एक व्यक्ति ही शासन का अधिकारी होता है, ऐसे शासन प्रणाली को राजतंत्र कहा जाता है। राजतंत्र में राजा ही प्रजा का सर्वे सर्वा होता है।

अगर दुनिया में सबसे पुराने शासन पद्धतियों के बात की जाए, तो उसमें राजतंत्र सबसे प्राचीन है। आधुनिक युग में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भारत में भी आज से दशकों पहले राजतंत्र हुआ करता था। 

प्राचीन समय में लगभग हर देश में राजतंत्र कायम था, जो आज कुछ प्रतिशत में लोकतंत्र में परिवर्तित हो चुका है। राजतंत्र को भी दो श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें राजशाही तथा पूर्ण राजशाही का समावेश होता है। पूर्ण राजशाही यह तानाशाही का ही एक रूप माना जा सकता है।

जिस प्रकार लोकतंत्र अथवा प्रजातंत्र में शासन व्यवस्था सीधे जनता के हाथ में होती है और लोग ही देश के तथाकथित तौर पर सर्वे सर्वा माने जाते हैं। उसी तरह राजतंत्र में भी शासन केवल राजा के हाथों में होती है। आज भी दुनिया के कई देशों में राजशाही शासन व्यवस्था है।

राजतंत्र और लोकतंत्र में अंतर Difference between Monarchy and Democracy in Hindi

परिभाषा

  • लोकतंत्र जनता का, जनता द्वारा और जनता के लिए शासन व्यवस्था है। यह वाक्य अब्राहम लिंकन द्वारा लोकतंत्र के परिभाषा के रूप में कहीं गई सबसे प्रसिद्ध वाक्य है।
  • राजतंत्र ऐसा शासन व्यवस्था होता है ,जिसमें केवल राजा को ही शासन करने का एकाधिकार प्राप्त होता है। राजतंत्र में प्रजा की कोई भी भागीदारी सत्ता में नहीं होती है।

चुनाव प्रणाली

  • लोकतंत्र में जनता ही मतदान करके अपने नेताओं को चुनते हैं, जो केंद्र में सरकार बनाते हैं। यह लोगों पर निर्भर करता है, कि कौन सी पार्टी जीत कर सरकार बनाएगी।
  • राजतंत्र में प्रजा अपने राजा को नहीं चुनती है। यहां कोई भी मतदान प्रणाली नहीं होती, जिससे कि प्रजा अपने शासक को चुन सके। यह सिर्फ राजवंशों द्वारा ही तय किया जाता है कि राजा कौन बनेगा।

नियम कानून

  • चुनाव में जीते हुए लोग जब शासन व्यवस्था संभालते हैं, तो वे ऐसे नियम और कानूनों का प्रावधान करते हैं, जिससे कि लोगों का कल्याण हो सके। इन नियम कानूनों के लिए सरकार पूरी तरह से जनता के प्रति जवाबदेह होती है।
  • राजतंत्र में राजाओं की कोई भी जवाबदेही अपने प्रजा के प्रति नहीं होती है। वह जब चाहे तब कोई भी नियम कानून बना सकते हैं और तोड़ सकते हैं, इसमें प्रजा की कोई भी भूमिका नहीं होती।

जनता के प्रती उत्तरदायत्व

  • लोकतंत्र में शासन करने वाली सरकार पूरी तरह से लोगों के प्रति उत्तरदाई होती है। यदि सरकार किसी भी अपेक्षा पर खरी नहीं उतरती है, तो उसे जनता को जवाब देना पड़ता है। इसके अलावा यदि लोग चाहे तो शासकों को अपने पद से हटवा भी सकते हैं।
  • राजतंत्र में राजा अथवा रानियां किसी भी प्रकार से प्रजा के प्रति उत्तरदायि नहीं होती। यहां तक कि लोगों को इतनी शक्ति नहीं होती, कि वह राजा को उसके पद से हटा सके।

प्रतिवाद का अधिकार

  • लोकतंत्र में पक्ष के किसी भी निर्णय पर विपक्ष को प्रतिवाद अथवा विरोध करने का पूरा अधिकार होता है। प्रजा अपने मत को रखने और सरकार का विरोध करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र होती है।
  • राजतंत्र में लोगों को राजा की निंदा करने का कोई भी अधिकार प्राप्त नहीं होता है। यहां तक कि वह राजा के विरुद्ध जाकर अपने लिए ही मुश्किल खड़ी कर सकते हैं।

समानता

  • लोकतंत्र में सभी की भागीदारी एक समान होती है, चाहे वह किसी भी तबके का हो। अर्थात ऐसी शासन व्यवस्था में किसी के साथ भी पक्षपात नहीं किया जाता और सभी लोगों को समानता का अधिकार दिया गया है।
  • राजतंत्र में समानता नहीं देखी जाती है। यहां अधिकतर उन्हीं लोगों को सम्मान दिया जाता है, जो राजवंश से ताल्लुक रखते हैं अथवा अमीर घराने के होते हैं। आम जनता को उतनी समानता प्रदान नहीं होती है।

न्यायपालिका 

  • शासन के चार प्रमुख स्तंभ न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका और मीडिया। इनमें न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग रखा गया है, ताकि सभी को निष्पक्ष न्याय मिल सके।
  • लेकिन राजतंत्र में राजा ही कानून बनाने वाला, उसे लागू करने वाला और लोगों को न्याय देने वाला होता है। कई बार इसी कारण राजा निष्पक्ष न्याय नहीं कर पाता है।

शासन की बागड़ोर

  • देश का शासन संभालने के लिए लोकतंत्र में हमेशा चुनाव होते रहते हैं, जिसमें कई पार्टियां अथवा पक्ष और विपक्ष दोनों ही एक साथ सत्ता में बने रहते हैं। इस तरह शासन का बागडोर स्थिर नहीं रहता है।
  • लेकिन राजशाही शासन व्यवस्था में राजा का शासन पर एकाधिकार होता है। और राजवंश से ताल्लुक रखने वाले लोग ही अगले शासक चुने जाते हैं।

राजतंत्र के फायदे Advantages of Monarchy in Hindi

मतदान के लिए कोई संघर्ष नहीं

लोकतंत्र की तरह राजतंत्र में कोई भी मतदान की प्रक्रिया नहीं होती है। प्रजा को अपना शासक चुनने के लिए मतदान करने के संघर्ष से मुक्ति मिल जाती है।

खर्चीली चुनावी प्रक्रिया से राहत

क्योंकि यह पहले से निश्चित होता है, कि शासक केवल राजा ही होगा इसीलिए किसी भी तरह के चुनावी प्रक्रिया का आयोजन नहीं किया जाता, जिस तरह लोकतंत्र में होता है।

राजा द्वारा शीघ्र निर्णय

राजतंत्र का एक बहुत बड़ा लाभ है, कि किसी भी मुद्दे पर निर्णय लेने में केवल एक शासक अथवा राजा को बड़ी शीघ्रता और आसानी होती है। लोकतंत्र की तरह किसी भी निर्णय पर वाद विवाद राजतंत्र में नहीं होता।

शासन में स्थिरता

राजतंत्र में यह पहले से ही निश्चित होता है, कि राजवंश से ही अगला शासक चुना जाएगा। इसीलिए कोई भी चुनावी प्रक्रिया नहीं होती, अतः शासन में पूरी तरह से स्थिरता होती है।

सत्ता के लिए कोई भी मतभेद नहीं

अक्सर लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष दोनों ही तरह की पार्टियां आपस में ही सत्ता के लिए लड़ते झगड़ते रहती हैं। लेकिन राजतंत्र में ऐसी कोई भी समस्या उत्पन्न नहीं होती है। राजा ही सत्ता का एकमात्र अधिकारी होता है।

केवल एक के पास विकास की बागड़ोर 

यदि राजतंत्र में राजा ईमानदार और कर्मठ हो तो विकास की गति कई गुना बढ़ सकती है। जिस तरह लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष एक दूसरे के कार्यों को बुरा ठहराते हैं और उसकी आलोचना करते हैं। 

इससे विकास भी धीमी होती है। लेकिन केवल एक के पास ही निर्णय लेने का अधिकार होने के कारण विकास होने की संभावना अधिक होती है।

किसी भी समस्या का शीघ्रता से निवारण

राजशाही अथवा राजतंत्र में किसी भी समस्या को शीघ्रता से ही सुलझाया जा सकता है। ठीक उल्टा जिस तरह राजतंत्र में किसी समस्या को सुलझाने के लिए पहले ढेरों कानून और बिल को पास किया जाता है, तब जाकर कोई निर्णय लिया जाता है। राजतंत्र में समस्या का शीघ्र निवारण होता है।

प्रजा में अधिक अनुशासन

यह राजा का खौफ कहा जाए या कुछ भी लेकिन लोकतंत्र के मुकाबले राजतंत्र में प्रजा अधिक अनुशासित होती है।

भ्रष्टाचारियों को राजा का खौफ

जिस तरह प्रजातंत्र में भ्रष्टाचार करने वाले लोग तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर और दूसरों को घूस खिलाकर अपना बचाव कर लेते हैं, यह राजतंत्र में संभव नहीं होता। भ्रष्टाचारियों को दोषी पाने पर उन्हें राजा द्वारा कड़ी सजा दी जाती है, इसीलिए सभी इससे सजग रहते हैं।

राजतंत्र के नुकसान Disadvantages of Monarchy in Hindi

जनता की सुरक्षा का दायित्व 

राजतंत्र में राजा और रानियां जनता के मुकाबले अपना स्वार्थ साधने में अधिक लगे रहते हैं। जिस तरह लोकतंत्र में सरकार हर समय अपने लोगों की सुरक्षा करने का जिम्मा उठाती है, वह राजतंत्र में नहीं देखा जाता है। राजतंत्र में लोगों के जानमाल की हानि का दायित्व कई बार कोई नहीं उठाता।

विपक्ष का शून्य महत्व

एकाधिकार यह कई बार बहुत बुरा प्रभाव छोड़ता है, चाहे वह किसी भी चीज पर हो। राजा का प्रभाव इतना ज्यादा होता है, कि कोई भी विपक्ष उसके सामने टिक नहीं पाता। क्योंकि विपक्ष और पक्ष इन दोनों का ही होना बेहद जरूरी होता है, लेकिन राजतंत्र में विपक्ष का महत्व लगभग शून्य होता है।

राजा के विरुद्ध जाने की पाबंदी

यदि कोई भी व्यक्ति राजा या राजवंश के खिलाफ बातें करता है, तो उसे सजा भी मिल सकती है। राजतंत्र में खुलकर अपना मत रखने और विरोध करने का अधिकार नहीं मिल पाता है, यह इसका एक सबसे बड़ा हानी माना जा सकता है।

निंदा करने का अधिकार नहीं

जिस तरह प्रजातंत्र में केंद्र सरकार के किसी कदम का विरोध करने के लिए विपक्ष और जनता दोनों ही आगे आते हैं, यह अधिकार राजतंत्र में किसी को भी प्राप्त नहीं होता। कई बार राजा के विरुद्ध जाना मतलब सजाए मौत को बुलावा देना। अतः निंदा करने का अधिकार राजतंत्र में नहीं प्राप्त होता है।

न्यायपालिका स्वतंत्र नहीं 

जब किसी एक ही व्यक्ति के हाथ में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका सौंप दिया जाए, तो वह भले निष्पक्ष होकर कैसे काम कर सकेगा? राजतंत्र में राजा ही सर्वे सर्वा होता है। इस प्रकार निष्पक्ष न्याय राजतंत्र में प्राप्त कर पाना बेहद कठिन कार्य है।

वंशवाद और पक्षपात

राजवंश में पले बढ़े राजा के उत्तर अधिकारियों में कोई भी गुण हो, या ना हो लेकिन वहीं अगले शासक बनेंगे यह पहले से ही निश्चित हो जाता है। 

भले ही प्रजा में कोई व्यक्ति बेहद होनहार और गुणवान हो, लेकिन उसका कोई भी महत्व नहीं रहेगा क्योंकि वह राजवंश से ताल्लुक नहीं रखता है। इस तरह वंशवाद और पक्षपात राजतंत्र में अक्सर देखा जाता है।

पक्षपाती कानून व्यवस्था

यहां राजा मनमानी करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र होता है। वह चाहे कभी भी किसी कानून को बना सकता है और किसी कानून को खत्म भी कर सकता है। कई बार यह कानूनी व्यवस्थाएं राजतंत्र में बड़ी पक्षपाती होती हैं।

तानाशाही की संभावना

राजतंत्र को पूरी तरह से तानाशाह शासन कहना सही बात नहीं है। क्योंकि भारतीय इतिहास में कई महान राजा और रानियां हुए हैं, जिन्होंने लोगों का कल्याण किया है। 

लेकिन कई बार यह देखा गया है कि राजतंत्र में सत्ता पर काबू होने के कारण शासकों को घमंड हो जाता है और वे तानाशाही पर उतर आते हैं और लोगों के साथ अत्याचार करते हैं।

जनता के प्रती कोई जवाबदेही नहीं

कई बार राजतंत्र में शासक अपने जनता के लिए उत्तरदाई नहीं होते हैं। वह किसी भी तरह का कर्तव्य निभाना जरूरी नहीं समझते हैं। 

केवल अपने ही सुख सुविधाओं को भोगने में और अच्छा जीवन बिताने में ही व्यस्त रहते हैं, इस प्रकार वे जनता के प्रति जवाबदारी से बचते हैं।

प्राचीन भारत में राजतंत्र Monarchy in Ancient India Hindi

यदि प्राचीन शासन व्यवस्था की बात करें, तो राजतंत्र ही सर्वाधिक प्रचलित पद्धति थी। कई साहित्यिक साक्ष्य के मुताबिक, भारतीय इतिहास में राजत्व का उल्लेख मिलता है।

सनातन धर्म कि कई पवित्र ग्रंथ जैसे महाभारत में भी राजतंत्र को प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा कौटिल्य द्वारा रचित अर्थशास्त्र में भी राजा को केंद्र में रखकर राजतंत्र की तरफ इशारा किया गया है।

मनुस्मृति, प्रयाग प्रशस्ति, हर्षचरित इत्यादि जैसे हजारों ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं, जिनमें इसका का सीधे तौर पर उल्लेख है। प्राचीन भारत में अक्सर महान योद्धा या कोई अन्य महापुरुष राजा या राजवंश से ताल्लुक रखते थे।

बौद्ध काल में भी राजत्व अथवा राजतंत्र के बारे में बताया गया है। उत्तर युग के प्रारंभ में इन्हीं राजतंत्र शासन की प्रणालियों से प्रजातंत्र ने जन्म लिया। यदि देखा जाए तो पूरा भारतीय इतिहास राजतंत्र के उदाहरणों से भरा पड़ा है।

10 राजतंत्र वाले देशों के नाम 10 Monarchy Countries 

आज पूरी दुनिया में लोकतंत्र से चलने वाले देशों की संख्या अधिक है। एक समय था, जब दुनिया के लगभग सभी देश राजतंत्र पर चलते थे। हालांकि आज भी ऐसे कई देश है, जिनमें आज भी राजतंत्र शासन है। 

लगभग 44 ऐसे संप्रभु राज्य अथवा देश है, जहां शासन व्यवस्था राजा- रानी या राजवंश के हाथों में है। इन्हीं देशों की सूची में कई ऐसे देश हैं, जहां संवैधानिक राजशाही है, लेकिन अन्य कई देशों में राजतंत्र कायम है। 

10 ऐसे पूर्ण राजतंत्र वाले देशों की सूची निम्नलिखित दी गई है:

  1. वेटिकन
  2. कतर 
  3. यूनाइटेड अरब अमीरात(UAE)
  4. बहरीन 
  5. सऊदी अरब 
  6. दारुस्सलाम 
  7. ओमान 
  8. स्वाजीलैंड 
  9. भूटान  
  10. ब्रूनेई

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