भारत विभाजन का इतिहास, कारण, परिणाम The partition of India in Hindi

भारत विभाजन का इतिहास, कारण, परिणाम The Partition of India in Hindi

भारत और पाक का बंटवारा : India Pakistan partition

भारत और पाकिस्तान का विभाजन होने से जनता में उथल पुथल मच गयी कई लोगों की जिंदगी बदल गयी कई लोग बिछड़ गये। एक समय था जब हमारा हिन्दुस्तानी ब्रिटिश सरकार के कब्ज़े में था पर 1947 में कुछ ऐसा हुआ कि मानों अंग्रेजों ने अपना सब कुछ खो दिया।

ब्रिटिश सरकार का राज British Rule

17वी शताब्दी के समय ब्रिटिश से लोग भारत आये और भारत में उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी की शुरुआत की। 1857 में भारतीय फ़ौज ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत कर दी। 

इस बगाबत का कारण था कारतूस, यह विद्रोह मेरठ के कुछ बेरोज़गारी सैनिकों के द्वारा शुरु हुआ था सैनिकों के बेरोज़गार होने का कारण वो कारतूस थे जिनको नयी एनफील्ड राइफल में लगाना होता था। इन कारतूसों में एक ग्रीस उपयोग किया गया था जिसको गाय और सूअर की चर्बी से मिलाकर  बनाया गया था। सैनिकों को कारतूस राइफल में लगाने के लिये पहले उसे अपने मुंह से हटाना पड़ता था।

उसके बाद वह कारतूस राइफल में डालता था हिंदू और मुस्लिम दोनों ही जाति के धर्म के सैनिकों को यह अपने धार्मिक कारणों की वजह से यह नामंज़ूर था इसलिये इन सैनिकों ने इस कारतूस को इस्तेमाल करने से मना कर दिया, जिस कारण वे बेरोज़गार हो गये थे। 

इस विद्रोह में अवध, बुंदेलखंड,रोहिलखंड, दिल्ली, इलाहाबाद, मेरठ, आगरा और पश्चिमी बिहार को सबसे ज्यादा तनाव हुये, क्रूर लड़ाइयां भी लड़ी गईं, दिल्ली और उसके आसपास के राज्यों में,जल्दी ही यह विद्रोह ने एक आग पकड़ ली।

लेकिन यह विद्रोह भी असफल हो गया और अंग्रेजी सेना भारतीय जनता के साथ लूट और हत्याये करने लगी, और भारतीय जनता  निराश हो गयी। क्योंकि अपनी आँखों के सामने अपनों की हत्या लोग सहन नहीं कर पाये और इस तरह 1857 का विद्रोह सफल न हो सका और एक साल के भीतर ही यह खत्म कर दिया गया करीब एक साल बाद 1858 तक पूरा भारत ब्रिटिश सरकार के हक में चला गया।

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विभाजन का कारण Reason

1885 में कांग्रेस का गठन हुआ जो कि एक धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक पार्टी थी कांग्रेस का लक्ष्य था भारतीय में एक राष्ट्रवादी भावना को बनाये रखना। उस समय विंस्टन चर्चिल प्रधानमंत्री थे उन्होंने ब्रिटेन की लड़ाई में भारतीयों का समर्थन माँगा तो गांधी जी ने उस समय भारतीयों को साथ न देने के लिये प्रेरित किया उनका कहना था कि इस ब्रिटिश सरकार ने हमें हमारे घरों से बेघर किया है हमसे हमारी धरती माँ को छीन लिया है इसीलिए हम ब्रिटिश सरकार का साथ नहीं देंगे और हमें इस लड़ाई का हिस्सा नहीं बनना चाहिये। 

8 अगस्त सन 1942 को भारत छोड़ो आन्दोलन आरम्भ किया गया  यह आन्दोलन महात्मा गाँधी के नेतृत्व में शुरू हुआ था इस आन्दोलन का मुख्य लक्ष्य भारत से ब्रिटिश सरकार के दबाव को ख़त्म करना था और अपना भारत आज़ाद करना था। इस आन्दोलन के शुरू होने के बाद भारत में ब्रिटिश शासन लड़खड़ा गया। 

अंग्रेज समझ गये थे कि अब वह भारत में ज्यादा दिन न रह पाएंगे और जल्द ही उनको भारत छोड़ना पद सकता है तब ब्रिटिश सरकार ने इस आन्दोलन को गैर क़ानूनी बता कर जवाहरलाल नेहरु और अन्य काँग्रेसी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया जिस कारण जनता और भी भड़क गयी और चारों तरफ हिंसक विरोध का वातावरण फ़ैल गया।

बँटवारे की विचारधारा Thinking

1930 का समय वह समय था जब कांग्रेस और मुसलमान के बीच गांठ पड़ने लगी थी मुस्लिम चाहते थे कि उनका एक अलग देश बने। सन 1933 में पाकिस्तान का नया नाम आया जिसका अर्थ है-

P – पंजाब 

A – नॉर्थ वेस्ट के अफगान 

K – कश्मीर 

S – सिंध

TAN – बलूचिस्तान

इसके अलावा पाकिस्तान का उर्दू में अर्थ पवित्र भी होता है।

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भारत के आखिरी बायसराय माउन्टबेटन Viceroy Louis Mountbatten

1940 में तो समझो अंग्रेजो की हालत ही डगमगा गयी अब उनका लौट जाना पक्का हो गया था।1946 में  हमारे भारत के आखिरी वायसरॉय का भारत में आने का केवल अब एक ही कारण था कि भारत से ब्रिटिश का अंत इस समय ब्रिटिश सरकार की विदाई का समय निश्चित हो चला था भारत में आज़ादी का झंडा फहराने में केवल अब एक ही साल बचा हुआ था।

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ब्रिटिश सरकार के अंतिम बचे हुये कुछ दिन भारत में: Last days of British India

इस समय मुस्लिम और हिंदुओं की एकता को बनाये रखना एक मुश्किल का कारण बन चुका था। जून 1947 में लार्ड माउन्टेन ने बँटवारे की घोषणा कर दी और तब नेहरू जी और जिन्ना ने इस घोषणा को सारे भारतवासियों को सुनाया और इस फैसले में मोहम्मद और जवाहरलाल नेहरू ने अपनी रजामंदी भी दी।

पाकिस्तान और भारत की सीमा Border of Pakistan and India

सिरिल रेडक्लिफ के द्वारा 17 अगस्त 1947  को भारत और पाकिस्तान की सीमा खीच दी गई जिसका नाम रखा गया। इस तरह बंटवारा हो गया और इसका असर जनता पर हुआ और लाखों हिन्दू मुसलमान और सिख का गुस्सा भड़क उठा और ये लगने लगा की इस बंटवारे का असर कुछ अलग ही रूप दिखायेगा।

पाकिस्तान की स्थापना Establishment of Pakistan

अब सन 1947 को 14 अगस्त को पाकिस्तान का गठन हुआ मुसलमानों का यह नया देश पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान से मिलकर बना जबकि  बीच के कुछ हिस्से 1500 किलोमीटर के क्षेत्र में भारत फैला हुआ था। माउन्टबेटन ने जिन्ना को उनके नये देश के गवर्नर के रूप में शपथ धारण कराई यह शपथ पाकिस्तान की राजधानी कराची में हुई। 

आज़ाद भारत की शुरुवात The Independent India

14-15 अगस्त में दोनों देशों का बँटवारा हो गया लार्ड माउन्टबेटन ने जवाहरलाल नेहरु को भारत का प्रथम प्रधानमंत्री  घोषित किया उन्होंने भारत में शपथ ली और लाखों भारतीयों ने ख़ुशियाँ मनाई हालाँकि इस दिन महात्मा गाँधी मुसलमानों के साथ कलकत्ता में थे।

आज़ादी के समय लोगों के कष्ट व अत्याचार Problems faced by Indians after Independence 

सिंध और पंजाब में हिन्दू और सिख की संख्या ज्यादा थी लेकिन दोनों प्रांतों को विभाजन की इस अग्नि में पिसना पड़ा दूसरी ओर पूरे बंगाल की हम बात करें तो हिन्दू बहुत अधिक थे लेकिन पूर्वी बंगाल में मुस्लिम शासक की संख्या अधिक थी। जब बँटवारा हुआ तो इसका सबसे ज्यादा कष्ट कश्मीर, पंजाब, बंगाल और सिंध के हिन्दू और मुस्लिम को हुआ।

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इस तरह हमारे भारत वर्ष में 662 रियासतें बनी थीं। जिसमें से 565 रजबाड़े ब्रिटिश सरकार के कब्जे में थे। 565 रजवाड़ों में से 552 रियासतों ने अपनी इच्छानुसार भारतीय संघ में शामिल होना चाहा। जूनागढ़, कश्मीर त्रावणकोर और हैदराबाद के अलावा बाकी की रियासतों ने स्वेच्छा के साथ पाकिस्तान जाना चाहा। 

फिर मराठा, मुगल का अंत हुआ और हमारा भारत कुछ छोटे कुछ बड़े राज्यों में बंट गया जैसे सिंध, दिल्ली, भोपाल, भावलपुर, अवध, कर्नाटक, बंगाल, मैसूर, हैदराबाद, जूनागढ़ और सूरत में मुस्लिम शासन करते  थे। इन मुस्लिम शासकों के राज्य में हिन्दूओं की संख्या अधिक थी और कश्मीर और जम्मू में शासन करने वाले हिन्दू थे पर  कश्मीर में मुस्लिम संख्या में ज्यादा थे और पंजाब तथा सर हिंद में सिक्खों का राज्य चलता था।

असम, मणिपुर, कछार, त्रिपुरा, जयंतिया, तंजोर, कुर्ग, त्रावनकोर (केरल), कोल्हापुर, सतारा,नागपुर, ग्वालियर, इंदौर, बड़ौदा तथा राजपुताना, बघेलखंड, बुंदेलखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और हिमाचल  के राज्यों में शासन करने वाले भी हिन्दू थे और हिन्दूओं की संख्या भी ज्यादा थी।

भारत की आज़ादी के समय की कहानी बहुत ही दर्दनाक है इसमें कुछ ऐसे लोग थे जो भारत का बंटवारा बिलकुल भी नहीं चाहते थे तो वही कुछ लोग इस बंटवारे से सहमत भी थे,कुछ लोग धर्म के आधार पर बंटवारा नहीं चाहते थे तो कुछ लोग हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्म के आधार पर बंटवारा चाहते थे उनका कहना था कि हिन्दुओ को भारतब में रहना चाहिए और मुसलमानों को पकिस्तान रवाना कर दिया जाना चाहिये ताकि आगे आने वाले दिनों में कोई लड़ाई झगडे न हो और देश में शांति बनी रहे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और डाक्टर राममोहन लोहिया तो इस बंटवारे को बिलकुल गलत मानते है वे इस पक्ष ने कभी नहीं रहे।

माना जाता है जिस समय भारत को आज़ादी मिली उस वक्त  लगभग 5 लाख लोगों से ज्यादा की मौते हुई कई हज़ार लोग अगवा कर लिए गये कई महिलाएं बलात्कार का शिकार बनी और हजारों घर बेघर हो गए कई बच्चे अनाथ हो गये। और 1 करोड़ से भी ज्यादा लोग शरणार्थी बन गये। 

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