2019 दोल जात्रा पर निबंध व जानकारी Essay on Doljatra Festival in Hindi

2019 दोल जात्रा पर निबंध व जानकारी Essay on Doljatra Festival in Hindi

जय श्री कृष्ण 

दोल जात्रा या दोल पूर्णिमा कब है?

2019 दोल जात्रा / दोल पूर्णिमा 21 मार्च, 2019 को है।

2019 दोल जात्रा पर निबंध व जानकारी Essay on Doljatra Festival in Hindi

दोल जात्रा / दोल यात्रा / दोल पूर्णिमा (Doljatra / Dol Yatra / Dol Purnima) पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मनाया जाने वाला एक मुख्य त्यौहार है। इस त्यौहार में भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है।

यह त्यौहार होली त्यौहार के साथ ही मनाया जाता है। इस दिन लोग श्री कृष्ण जी के चित्र या मूर्ति की पूजा करते हैं और इस दिन को बहुत ही बड़े तौर पर मनाते हैं। इस दिन श्रीकृष्ण जी की प्रतिमा को रंगों से सजाया जाता है जिसे बंगाली भाषा में ‘अबीर’ कहा जाता है।

भगवान श्री कृष्णा जी की प्रतिमा को सुन्दर रूप से सजाया जाता है। सजाने के बाद भगवान् कजी प्रतिमा या मूर्ति को सुन्दर झूले में बिठा कर फूलों, कपड़ों, पत्तों और रंगीन कागजों से सजा दिया जाता है और जुलुस निकला जाता है जिसे हम दोल जात्रा / दोल यात्रा (Doljatra / Dol Yatra) के नाम से जानते हैं।

इस जुलुस में लोग नाचते हैं, एक दुसरे को रंग लगाते हैं, खूब सारे संगीत और शंख के पवित्र ध्वनि के साथ आगे बढ़ते हैं। रंग के पाउडर को बंगाली में फाग और ओडिया में फगु कहा जाता है।

दोल पूर्णिमा बंगाली लोगों के लिए और भी महत्वपूर्ण दिन होता है क्योंकि यह दिन चैतन्य माहाप्रभु जी का जन्म दिवस भी होता है। वो एक महँ वैष्णव संत थे जिन्होंने आधुनिक संकीर्तन को आगे बढ़ाया और लोकप्रिय बनाया। उन्होंने राधा कृष्ण के जूनून को अध्यात्मिक रूप से आगे बढ़ाया।

इस दिन सभी लोग अपने से बड़ों के पैरों में रंग लगा कर उनसे आशीर्वाद लेता हैं। भारत में ज्यादातर राज्यों में इस दिनको छोटी होली के नाम पर मानते हैं और गुलाल खेलते हैं।

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साधारण रूप से दोल पूर्णिमा या दोल जात्रा एक से दो दिन मनाया जाता है। पर मथुरा और वृन्दावन में दोल यात्रा 16 दिन लगातार मनाया जाता है।

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