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दिवाली पर निबंध: इतिहास, महत्व, परंपराएँ और पर्यावरण-अनुकूल उत्सव

दिवाली पर निबंध Essay on Diwali in Hindi, prakash ka tyohaar
विषय सूची
  1. 1  दिवाली पर निबंध
  2. 2  दिवाली कब मनाई जाती है?
  3. 3  दिवाली का इतिहास और धार्मिक परंपराएँ
  4. 4  दीपावली शब्द का अर्थ
  5. 5  दिवाली का उत्सव कैसे मनाया जाता है?
  6. 6  दिवाली का महत्व
  7. 7  भाई दूज और दीपावली
  8. 8  विदेशों में दिवाली का उत्सव
  9. 9  दिवाली कैसे मनाएँ?
  10. 10  दिवाली पर प्रार्थना
  11. 11  पर्यावरण पर दिवाली का प्रभाव
  12. 12  सुरक्षित और कम प्रदूषण वाली दिवाली कैसे मनाएँ?
  13. 13  दिवाली की विविध परंपराएँ
  14. 14  अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  15. 15  स्रोत और संदर्भ
  16. 16  निष्कर्ष

इस लेख में हमने (दीपवाली) दिवाली पर निबंध हिन्दी में लिखा है जिसमे हमने दीपावली का इतिहास, महत्व, उत्सव, पूजा के विषय में बताया है। यह दीपावली निबंध 1500 शब्दों में स्कूल और कॉलेज के बच्चों के लिए लिखा गया है।

दिवाली पर निबंध

दीपावली हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। हर देशवासी को इस त्यौहार का इंतजार रहता है। यह रोशनी और प्रकाश का त्यौहार है। इस दिन बच्चों को खाने के लिए तरह तरह की मिठाइयां मिलती हैं और पटाखे चलाने को मिलते हैं।

दीपावली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। यह त्यौहार अंधकार पर प्रकाश की विजय को दिखाता है।

इस दिन घरों में दिए जलाए जाते हैं। विभिन्न प्रकार की लाइटें, रंग बिरंगी रोशनी लगाई जाती हैं। लोग नए वस्त्र पहनते हैं। शाम को मिठाइयां बांटी जाती हैं, लोग दावतों में जाते हैं।

दिवाली कब मनाई जाती है?

यह त्यौहार 24 सोमवार 2022, के दिन मनाया जायेगा।

दिवाली का इतिहास और धार्मिक परंपराएँ

दीपावली भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस त्यौहार को सिख, बौद्ध और जैन धर्म के लोग मनाते हैं। सिख समुदाय इसे बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है।

दिवाली के दिन ही भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या वापस लौटे थे। श्रीराम का स्वागत सत्कार करने के लिए अयोध्या के निवासियों ने घी के दीपक जलाए थे।

उस दिन कार्तिक महीने की अमावस्या थी। घने अंधकार में प्रकाश करने के लिए अयोध्या वासियों ने दिए जलाए थे। तब से यह दिन हर साल सभी भारतीय प्रकाश पर्व (दीपावली) के रूप में मनाते हैं।

दिवाली त्यौहार दिखाता है कि बुराई पर सदैव अच्छाई की जीत होती है, सत्य की जीत सदैव होती है। यह त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है।

इस दिन भगवान श्री राम सीता माता के साथ 14 वर्षों का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे। उसी खुशी में यह त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन पांडव 12 वर्षों का वनवास काटकर घर लौटे थे।

हिन्दी कैलेंडर के अनुसार नव वर्ष दीपावली के दिन शुरू होता है। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई, अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय को दिखाता है।

दीपावली शब्द का अर्थ

दीपावली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के 2 शब्दों ‘दीप’ और ‘आवली’ से हुई है। दीप का अर्थ है दीपक है जबकि आवली का मतलब लाइन है। इस तरह दीपावली का अर्थ है दीपकों की लाइन।

दिवाली का उत्सव कैसे मनाया जाता है?

दीवाली त्यौहार का इंतजार सभी बच्चों और बड़ों को होता है। लोग अपने घरों की सफाई करते हैं। हर तरह का कूड़ा उठाकर बाहर फेंकते हैं। उसके बाद दीवारों, घरों को रंग आ जाता है। दुकानदार अपनी दुकान की सफाई करते हैं और नई पेंटिंग करते हैं।

दीपावली आते ही सभी बाजार चमक उठते हैं। सामानों से भर जाते है। बच्चे और पुरुष पटाखे लगाकर अपनी खुशियां मनाते हैं।

सभी लोग गणेश, लक्ष्मी और अन्य देवताओं की पूजा पूरे विधि-विधान से करते हैं। देवी लक्ष्मी को घर आने के लिए निवेदन करते है जिससे घर में खुशहाली आती है।

दिवाली का महत्व

इस दिन हजारों लोग सोने के गहने, बर्तन, कपड़े और दूसरी चीजें खरीदते हैं। दुकानदारों और व्यापारियों के लिए यह त्यौहार प्रमुख है क्योंकि इस दिन बिक्री सबसे अधिक होती है। उनको जादा से जादा लाभ कमाने का मौका मिलता है।

सभी दुकानदारों को इस दिन का बेसब्री से इंतजार होता है। पटाखे और आतिशबाजी सामग्री के व्यापारी इस दिन माल बेचकर बहट लाभ कमाते हैं। पटाखे से वायु और ध्वनि प्रदूषण भी होता है।

दीपावली से 2 दिन पहले धनतेरस का त्यौहार होता है। इस दिन बाजारों में बहुत रौनक होती है। धनतेरस के दिन बर्तन, सोने के गहने, टीवी, फ्रिज, कूलर, वाशिंग&;मशीन जैसे सामान लेना शुभ समझा जाता है।

शाम को पूजा करने के लिए लोग खील बताशे और गणेश लक्ष्मी की मूर्तियां लाते हैं। दीपावली के दिन लोग ऐसा मानते हैं कि गणेश लक्ष्मी की पूजा करने से वह घर में आएंगी। हम सभी को लक्ष्मी (पैसों) की बहुत जरूरत होती है।

इसलिए यह त्यौहार और भी महत्वपूर्ण बन जाता है। गणेश लक्ष्मी की पूजा करने से धन और सुख में वृद्धि होती है। संपन्नता घर में आती है। इस दिन धन के देवता “कुबेर” की भी पूजा की जाती है।

भाई दूज और दीपावली

भाई दूज के दिन भाई बहन का गठबंधन कर यमुना नदी में स्नान कराते हैं। बहन भाई के माथे पर तिलक लगाती है और कामना करती है कि वह सदैव दुखों और कष्टों से दूर रहे। भाई अपनी बहन को पैसा या अन्य कोई उपहार देता है।

विदेशों में दिवाली का उत्सव

यह त्यौहार भारत, नेपाल, श्रीलंका, मलेशिया, मॉरीशस, सिंगापुर, पाकिस्तान-ऑस्ट्रेलिया जी मनाया जाता है। नेपाल में यह विशेष धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन नेपाली संवत में नया साल शुरू होता है।

  • नेपाल- में दीवाली का त्योहार पांच दिनों तक चलता है। पहले दिन कौवे की पूजा की जाती है। उसे प्रसाद दिया जाता है। दूसरे दिन कुत्ते को उसकी ईमानदारी के लिए प्रसाद दिया जाता है। तीसरे दिन गाय को प्रसाद दिया जाता है। चौथे दिन बैल को प्रसाद दिया जाता है।
  • मलेशिया- में दीपावली के दिन दूसरे धर्मों के लोगों को घर पर दावत दी जाती है।
  • श्रीलंका- में दीपावली का त्यौहार तमिल संप्रदाय के लोग मनाते हैं। इस दिन नृत्य, दावते और आतिशबाजी की जाती है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका- में दीपावली का त्यौहार व्हाइट हाउस में मनाया जाता है। पहली बार सन 2003 में व्हाइट हाउस में दीपावली का त्यौहार मनाया गया था। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश द्वारा इसकी घोषणा की गई थी। सन 2009 में राष्ट्रपति बराक ओबामा भी दिवाली के उत्सव में सम्मिलित हुए थे।
  • ब्रिटेन- में बड़ी मात्रा में भारतीय रहते हैं। प्रिंस चार्ल्स बहुत बार दीपावली के उत्सव में शामिल हो चुके हैं। ब्रिटेन के स्वामीनारायण मंदिर में दीपावली का त्यौहार मुख्य रूप से मनाया जाता है।
  • मॉरीशस- में बड़ी मात्रा में हिंदू रहते हैं। दीपावली के दिन वहां पर सरकारी अवकाश होता है।

दिवाली कैसे मनाएँ?

सभी हिन्दू भारतीय परिवार दिवाली त्योहार का बहुत उत्साह से इंतज़ार करते हैं। लोग अपने घरों को एक-दो दिन पहले से ही साफ-सुथरा रखते हैं।

दिवाली की सुबह लोग अपने घरों को जगमगाते हुए सुंदर लाइट से सजाते हैं। शाम होते है दिवाली त्योहार का असली रंग दिखने लगता है।

लोग शाम को नहा-धो कर नए कपड़े पहनते हैं और परिवार के सभी इकट्ठा हो कर माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। पूजा के साथ सभी घरों में दीप जलते हैं और बच्चे पाठखे फोड़ते हैं।

सभी रिश्तेदार अपने सगे-संबंधियों के घर घूमने जाते हैं और स्वादिष्ट मिठाईयां ले कर जाते हैं। ज्यादातर लोग इस दिन को मज़ाक करते हुए मिठाई अदल-बदल का दिन भी कहते हैं।

दिवाली पर प्रार्थना

क्षेत्र अनुसार दीवाली त्यौहार पर प्रार्थनाएं अगला-अलग होती हैं। उदाहरण के लिए बृहदा रंयक उपनिषद &;की ये प्रार्थना जिसमें प्रकाश उत्सव चित्रित है-

‘असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥’

अनुवाद:

असत्य से सत्य की ओर।
अंधकार से प्रकाश की ओर।
मृत्यु से अमरता की ओर।(हमें ले जाओ)
ॐ शांति शांति शांति।।

पर्यावरण पर दिवाली का प्रभाव

दीपावली में चलाये जाने वाले पटाखे और आतिशबाजी की सामग्री से बहुत प्रकार की हानियां होती हैं। इन पटाखों के अंदर ज्वलनशील पदार्थ बारूद होता है। पटाखों से अनेक प्रकार की दुर्घटनाएं होती हैं।

मैग्नीशियम, लेड, जिंक. कैडियम जैसे जहरीले पदार्थ होते हैं। बहुत बार फैक्ट्री में पटाखे बनाते समय ही ज्वलनशील पदार्थ में विस्फोट हो जाता है। हर साल बहुत से मजदूरों की जान चली जाती है। इन पटाखों को चलाने से बहुत सी हानियां हैं।

बहुत से बच्चे और बड़े भी पटाखों को चलाने में घायल हो जाते हैं। पड़ोस में आग भी लग जाती है। यह पटाखे बहुत सारा धुंआ और गैसें छोड़ते हैं जिससे वायु प्रदूषण होता है। इसलिए अब सरकार पटाखों और आतिशबाजी की सामग्री पर रोक लगा रही है।

सिर्फ 3 दिन पटाखों की बिक्री की जाती है। इस प्रकार के वायु प्रदूषण से बहुत सी बीमारियां होती हैं। अस्थमा और दिल के मरीजों को सांस लेने में बहुत तकलीफ होती है। इसके साथ ही छोटे बच्चों को भी सांस लेने में बहुत तकलीफ होती है। इसलिए हम सभी को प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाने चाहिए।

सुरक्षित और कम प्रदूषण वाली दिवाली कैसे मनाएँ?

हो सके तो दीवाली त्यौहार पर पटाखे न चलायें। यदि बहुत आवश्यक हो तो इको फ्रेंडली पटाखे चलाएं। तेज आवाज वाले पटाखे बिल्कुल ना चलाएं क्योंकि इससे दुर्घटना होने की संभावना बहुत अधिक होती है। इसके अलावा उच्च क्षमता वाले पटाखे से दूर रहें।

इससे बड़ी दुर्घटना हो सकती है। पटाखे हमेशा अधिकृत लाइसेंस वाली दुकान से ही खरीदना चाहिये। सस्ते और चाइनीस पटाखों से दूर रहें क्योंकि उनको चलाते समय दुर्घटना होने की संभावना बहुत अधिक होती है।

रॉकेट का इस्तेमाल खुली जगह में करना चाहिए। पटाखों को पास नहीं चलाना चाहिए। उनको दूर से चलाना चाहिए। अस्थमा और दमा के मरीजो को पटाखों से दूर रहना चाहिए।

आतिशबाजी के समय बहुत सारा धुंआ और गैस वायुमंडल में जाता है जिससे वायु प्रदूषण होता है। इसलिए बहुत से लोग दीपावली के दिन पटाखे ना जलाने की सलाह देते हैं।

पटाखे चलाने में बहुत सारा धन व्यर्थ ही खर्च हो जाता है। यह धन यदि हम किसी गरीब व्यक्ति को दे दें तो पैसों का सार्थक इस्तेमाल होगा।

सभी लोगों को दीपावाली का त्यौहार धूमधाम से मनाना चाहिए। इस दिन आतिशबाजी करने से बहुत सारा वायु प्रदूषण होता है और यह पटाखे बहुत ही खतरनाक भी होते हैं।

हर साल बहुत से लोग आतिशबाजी करते हुए घायल हो जाते हैं। एक स्वच्छ, सुन्दरं, और सुरक्षित दिवाली मनाना हमारी परंपरा हमें सिखाती है।

दिवाली की विविध परंपराएँ

दिवाली को केवल एक ही धार्मिक कथा से जोड़ना पर्याप्त नहीं है। उत्तर भारत में राम के अयोध्या लौटने की परंपरा प्रसिद्ध है, जबकि कई क्षेत्रों में लक्ष्मी पूजा, कृष्ण से जुड़ी कथाएँ, काली पूजा या जैन और सिख परंपराओं के अलग ऐतिहासिक-सांस्कृतिक अर्थ भी जुड़े हैं।

इसलिए दिवाली भारतीय सांस्कृतिक विविधता का भी उदाहरण है। अलग राज्य, भाषा और समुदाय अपनी परंपरा के अनुसार दीप, पूजा, भोजन और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

घर की सफाई और दीप सजावट त्योहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आधुनिक समय में अत्यधिक प्लास्टिक सजावट की बजाय मिट्टी के दीप, पुनः उपयोग योग्य सजावट और स्थानीय उत्पाद चुनना अधिक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प हो सकता है।

पटाखों से वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ सकता है, विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा रोगियों और पशुओं के लिए। स्थानीय कानून और समय-सीमा का पालन करना और कम प्रदूषण वाला उत्सव चुनना जिम्मेदार व्यवहार है।

दिवाली का सामाजिक संदेश प्रकाश, आशा, परिवार और उदारता से जुड़ा है। जरूरतमंद लोगों की सहायता, स्थानीय कारीगरों से खरीद और भोजन की बर्बादी कम करना त्योहार की खुशी को अधिक अर्थपूर्ण बना सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवाली कब मनाई जाती है?

हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक अमावस्या के आसपास; तारीख हर वर्ष बदलती है।

दिवाली का मुख्य प्रतीक क्या है?

दीपक, प्रकाश और अंधकार पर प्रकाश की विजय का सांस्कृतिक प्रतीक।

क्या दिवाली केवल हिन्दू त्योहार है?

यह मुख्यतः हिन्दू परंपरा से जुड़ी है, लेकिन जैन, सिख और विभिन्न क्षेत्रीय परंपराओं में भी इसके अलग अर्थ हैं।

दिवाली में लक्ष्मी पूजा क्यों होती है?

कई हिन्दू परंपराओं में देवी लक्ष्मी को समृद्धि और शुभता से जोड़ा जाता है।

पर्यावरण-अनुकूल दिवाली कैसे मनाएँ?

कम पटाखे, मिट्टी के दीप, कम प्लास्टिक और स्थानीय उत्पादों का उपयोग करें।

दिवाली का सामाजिक संदेश क्या है?

आशा, परिवार, उदारता और मिल-जुलकर खुशी बाँटना।

स्रोत और संदर्भ

निष्कर्ष

आशा करते हैं आपको दिवाली पर निबंध अच्छा लगा होगा। हम सभी को प्रतिवर्ष दिवाली का उत्सव पर्यावरण की प्राकृतिक सुंदरता को बचाने, स्वछता बनाये रखने और आनंद लेने के लिए मनान चाहिए।

साथ ही बच्चों को दिवाली के सही महत्व को बताना चाहिए जिससे की आने वाली पीठी भी इससे सीखें और यह परंपरा चलती रहे। आप सभी को दीवापली की हार्दिक शुभकामनायें!

टिप्पणियाँ (5)

5 टिप्पणियाँ

  1. Ye post bahut achchhi hai. Diwali ke bare me full on Information mil gaya hai. Aur sabse khas baat is website ka post new hai

  2. बिजय कुमार जी , दिवाली पर आर्टिकल लिखने के लिए धन्यवाद और इसे इंटरनेट पर पब्लिश करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। वैसे तो इंटरनेट पर दिवाली पर बहुत सी जानकारी /आर्टिकल हैं लेकिन आपकी दी हुई दिवाली पर जानकारी बहुत ही क्रिएटिव है। मुझे बहुत अच्छा लगा पड़ कर। शुक्रिया।

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