स्वच्छता पर भाषण Speech on Cleanliness in Hindi

स्वच्छता पर भाषण Speech on Cleanliness in Hindi

सभी आदरणीय श्रोताओं को सुप्रभात। आज मैं आप सभी के साथ साफ-सफाई पर अपने विचार साझा करना चाहता हूं। स्वछता एक ऐसी प्रक्रिया है जो कि कभी खत्म नहीं होती, और उसे बार बार दोहराते रहने की जरूरत पड़ती रहती है।

स्वच्छता पर भाषण Speech on Cleanliness in Hindi

आप अपने जीवन में यह कभी भी नहीं कह सकते कि आपने आज सम्पूर्ण जीवन के लिए नहा लिया है या अब आपको कभी नहाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसा होने के बहुत से कारण है।

हमारा पर्यावरण ऐसे घटकों से मिलकर बना है जिनके कारण गन्दगी बढ़ती है। दरअसल असल खतरा गन्दगी से नहीं है अपितु गन्दगी में बढ़ने वाले विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीवों से है जो कि मानवों के लिए काफी ज्यादा हानिकारक हो सकते हैं। 

साफ सफाई के कई चरण होते हैं, जैसे व्यक्तिगत सफाई, आस पास की सफाई, और एक हद तक मानसिक सफाई भी। दरअसल साफ सफाई न रखने के कई दुष्परिणाम हैं। आप यह जानते होंगे कि भारत मे डेंगू के कारण कितने सारे लोगों की मृत्यु हो जाती है।

डायरिया, कालरा, मलेरिया और अन्य इस तरह की बीमारियों ने भारत में कितना कोहराम मचाया है यह आप सभी जानते हैं। सफाई एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है और इसे बार बार दोहराने से लोगों को आलस आता है।

लेकिन यह सोचनीय है कि हमारे द्वारा की गई लापरवाहीयों के कारण कितने ही सारे लोग त्रस्त हो जाते हैं। हमारे द्वारा फैलाए गए कूड़े के कारण कितने सारी ही जगहों पर मच्छरों का डेरा बन जाता है। यही मच्छर फिर अपने विकराल रूप में आकर तरह तरह बीमारियों के पनपने की जड़ बनते हैं। यह प्रक्रिया हमारी आँखों के आगे होती है और हम क्या करते हैं, केवल लापरवाही। 

भारत में प्रदूषण अपने चरम पर है क्या तो हवा, क्या पानी, क्या जल और क्या ही पर्यावरण। सब कुछ, मैं दोहराता हूँ सब कुछ प्रदूषण की चपेट में आ चुका है। इस प्रदूषण के कारण अलग अलग तरह की बीमारियां फैल रही हैं।

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ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है। पृथ्वी का तापमान असमान हो चुका है। मानवों का औसत जीवन काल कम हो रहा है। आने वाली पीढ़ियों के लिए यह एक खतरा है और ऐसा सब होने की जड़ है हमारा साफ सफाई न रखना।

भारत की नदियों और नालों की ओर अगर नजर डाली जाए तो यह साफ दिखता है कि हमें किस हद तक उन्हे गन्दा करके रखा हुआ है। घर का, बाहर का, फैक्ट्री का, हर जगह का कूड़ा हम उठाकर उन नदियों में पटक आते हैं।

उन नदियों में प्रदूषण होने के कारण जलीय जीवन प्रभावित होता है। कूड़ा डालने से, मल मूत्र अपशिष्ट को सीधे तौर पर नदियों में प्रवाहित करने से जल संसाधन को काफी ज्यादा क्षय होता है।

जरा सोचिए कि वही पानी जब हमारे घरों में पीने के लिए आएगा तब उससे हमें कितने पोषक तत्व प्राप्त होंगे या फिर उसे पीकर हमें कितनी ज्यादा बीमारियों का सामना करना पड़ेगा। जरा विचार किजिए कि यदि वही पानी वाष्पिकृत होकर, वर्षा बनकर जमीन पर पड़ेगा तो उससे मृदा को कितनी अधिक हानि पहुंचेगी।

आपने अम्ल वर्षा का नाम तो सुना ही होगा, अम्ल वर्षा अम्लीय प्रकार की वर्षा होती है। इस प्रकार की वर्षा का कारक होता है जल में असमान रूप से गन्दगी का घुलना और यह गन्दगी केवल ऊपरी तौर पर ही नहीं अपितु जल में इस प्रकार घुल चुकी है कि जल को बड़े बड़े फिल्टरस में साफ करना पड़ता है, अन्यथा वह पीने के तो क्या नहाने तक के प्रयोग मे नही लाया जा सकता है। 

वायु, जल और खाद्य, यह तीन चीजे मानवों के लिए आधारभूत आवश्यकताएं हैं। इनके बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। लेकिन गन्दगी फैलाने और साफ सफाई न रखने के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित यही तीनों चीजें हुई हैं।

जल के विषय में मैं आप सभी को बता चुका हूं, अब वायु के विषय में तथ्यों से अवगत कराता हूँ। वायु किस हद तक प्रदूषित हो चुकी है यह आप जानते हैं। इसका सीधा संबंध हमारे द्वारा फैलाई गई गन्दगी है।

सोचिये वो कूड़ा को हमने किसी खाली स्थान पर जमा किया था, इस कूड़े से निबटने के लिए आसपास के लोग उसे या तो जल में प्रवाहित कर देंगे या फिर जला देंगे। जल में प्रवाहित करने के बाद होने वाले नुकसान आप जानते हैं लेकिन क्या हो यदि उन्हे जला दिया जाए। उन्हे जलाने के पश्चात वे रासायनिक तौर पर वायु में घुल जाते हैं, जरा सोचिए प्लास्टिक जलाने पर कितनी ज्यादा हानिकारक हो सकती है।

कूड़े के अन्य भाग जैसे सड़े गले अपशिष्ट एवं अन्य प्रकार की चीजें जलने के बाद वायु को प्रदूषित करती है। वायु प्रदूषण के परिणामों की कल्पना भर ही भयावह है। बीते दशक में दमे के कारण मरने वाले मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। लोग दमे के कारण मरने लगे हैं।

वायु प्रदूषित होने के कारण मरीजों को ऑक्सिजन के सिलेंडर लगाने पड़ते हैं। यह एक गंभीर समस्या है कि हम एक ऐसे युग का निर्माण कर चुके हैं जहां पर वायु जो कि मानवों के लिए एक मूल तत्व है, उसे तक खरीदकर प्रयोग करना पड़ रहा है। साफ सफाई न रखें से, एवं अपशिष्टों से सही तरह से न निबटने के कारण हम भारी संकट में आ सकते हैं। 

आदरणीय श्रोताओं, मैं आप सभी को आसपास की सफाई के बारे में बता चुका हूं, अब बात करते हैं निजी सफाई की। हमारा यह मानव जीवन, हमारे लिए एक सौभाग्य है। साफ सफाई रखने से ही हम अपने शरीर की रक्षा कर सकते हैं एवं काफी आगे तक अपने शरीर को बनाए रख सकते हैं।

साफ सफाई न होने के कारण हमें कई तरह की बीमारियों तक का सामना कर पड़ सकता है। इस तरह की बीमारियों से बचने के लिए अपने दैनिक जीवन में सफाई को विशेष महत्व दें। प्रतिदिन स्नान करें और आसपास के वातारण को भी साफ सुथरा रखें।

आदरणीय श्रोताओं साफ सफाई का तीसरा चरण है मानसिक सफाई। आपने यह जरूर देखा होगा कि कई बार जब हम किसी कार्य में लीन होते हैं तभी हमारे मन में बुरे विचारों का प्रवेश होता है। यह कई बार नकारात्मक असर डालते हैं और हमारी कार्य करने की क्षमता और प्रेरणा को खराब करते हैं। इन विचारों से बचने के लिए मानसिक सफाई काफी ज्यादा जरूरी है। यह जरूरी है कि आप अपने आसपास के माहौल को सकारात्मक रखें। ध्यान एवं योग जरूर करें। 

आदरणीय श्रोताओं मुझे सुनने के लिए आप सभी का धन्यवाद। मैं यह आशा करता हूँ कि आप सभी साफ सफाई रखकर विश्व के कल्याण में जरूर योगदान देंगे। धन्‍यवाद, जय हिंद 

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