महात्मा गांधी जयंती पर भाषण Mahatma Gandhi Jayanti Speech in Hindi

महात्मा गांधी जयंती पर भाषण Mahatma Gandhi Jayanti Speech in Hindi

प्यारे बच्चों आज मैं आपको “गांधी जयंती” पर भाषण देने जा रहा हूं। यह भाषण आप अपने स्कूल कॉलेज में इस्तेमाल कर सकते हैं। आपको गांधी जन्म दिवस पर यह भाषण ज़रूर पसंद आएगा।

महात्मा गांधी जयंती पर भाषण Mahatma Gandhi Jayanti Speech in Hindi

आदरणीय प्रिंसिपल सर, सभी शिक्षकगण, सहपाठियों और अभीभावकों को मेरा नमस्कार। मैं आप सभी का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ। मेरा नाम…..है. मैं कक्षा… में अध्ययन करता हूं। आज हम सभी “गांधी जयंती” मनाने के लिए यहाँ एकत्रित हुए हैं। हमारे देश में यह 2 अक्टूबर के दिन मनाई जाती है। इस अवसर पर मैं एक भाषण प्रस्तुत कर रहा हूँ।

महात्मा गांधी ने हमारे देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिये। उन्होंने एक लाठी लेकर और सिर्फ एक धोती पहन कर देश को आजादी दिला दी। वह सदैव मांस मदिरा से दूर रहते थे। एक आदर्श जीवन जीते थे। सरल और उच्च विचारों वाला जीवन जीते थे। आज का दिन महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन है। बापू ने 1917 में  “चम्पारण और खेड़ा सत्याग्रह”, 1929 में सविनय अवज्ञा आंदोलन”, 1930 में दांडी मार्च”, 1919- 1924 में खिलाफत आन्दोलन”, 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलनचलाकर देश को आजादी दिलाई।

उनका जन्म आज ही के दिन 2 अक्टूबर 1869 पोरबंदर में हुआ था। उनके पिताजी का नाम करमचंद गांधी था, उनकी माता का नाम पुतलीबाई था। वो सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। अहिंसा के द्वारा देश को आजाद करवाना चाहते थे।

उन्होंने कभी भी हिंसा का सहारा नहीं लिया। हमारे देश के लोग प्यार से उन्हें “बापू” कहकर पुकारते हैं। उनको “राष्ट्रपिता” भी कहा जाता है। देश को आजाद कराने में महात्मा गांधी का प्रमुख योगदान था इसलिए भारत की मुद्रा पर उनका चित्र बना होता है।

उन्होंने भारत को 200 वर्षों की अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराया था। गांधी जयंती के अवसर पर विश्व भर में “अहिंसा दिवस” के रूप में भी मनाया जाता है। वो एक महान नेता थे। उन्होंने सारा जीवन उच्च विचार का सिद्दांत अपनाया था। इंग्लैंड से बैरिस्टर की उपाधि भी प्राप्त की थी।

मात्र 13 वर्ष में उनका विवाह कस्तूरबा गांधी से हो गया था। उन दिनों बाल विवाह प्रचलन में था। देश को आजाद कराने के लिए महात्मा गांधी ने पांच प्रमुख आंदोलन किए-  दक्षिण अफ्रीका का आंदोलन, असहयोग आंदोलन,  नमक आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन और हरीजन आंदोलन।

महात्मा गांधी को 1893 में दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की नीति का सामना करना पड़ा। ट्रेन में उनके पास प्रथम श्रेणी का टिकट था, इसके बावजूद उनको तीसरी श्रेणी में ढकेल दिया गया और पीटा भी गया। उन्होंने इसका विरोध करने का फैसला लिया।

1894 में दक्षिण अफ्रीका के नेटाल में लेटेस्ट इंडियन कांग्रेस की स्थापना की।  दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों को वोट देने का अधिकार नहीं था। महात्मा गांधी ने इसके लिए संघर्ष करना शुरू कर दिया। उन्हें रोकने के लिए अनेक हमले किए।

1918 में उन्होंने चंपारण सत्याग्रह शुरू किया। इस सत्याग्रह में अंग्रेज भारतीय किसानों को नील की फसल उगाने पर जोर डालते थे और फसल पर बहुत कम कीमत देते थे। इसका विरोध करने के लिए महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह शुरू किया।

गुजरात के खेड़ा नामक गांव में भीषण बाढ़ आ गई थी, इसलिए वहां के लोग कर (टैक्स) देने में अक्षम हो गए थे। महात्मा गांधी ने इसके लिए खेड़ा सत्याग्रह शुरू किया और किसानों को कर से छूट दिलाई। 1919 में महात्मा गांधी ने खिलाफत आंदोलन शुरु किया।

उन्होंने कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए हिंदू मुसलमानों को एक कर दिया। मुस्लिम समाज को हिंदुओं के साथ लाने के लिए महात्मा गांधी ने ऑल इंडिया मुस्लिम कांफ्रेंस की स्थापना की। इसके पश्चात हिंदू मुस्लिम दोनों संप्रदाय के लोग साथ मिलकर अंग्रेजों को भारत से भगाने में लग गये।

जलियांवाला हत्याकांड के विरोध में महात्मा गांधी ने 1 अगस्त को 1920 को असहयोग आंदोलन शुरु किया। उन्होंने अंग्रेजों के शासन के खिलाफ आवाज उठाई। स्वदेशी अपनाओ का नारा दिया। इसके लिए उनको जेल भी जाना पड़ा।

महात्मा गांधी ने 9 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन शुरु किया। 1930 में महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया। उन्होंने 12 मार्च 1930 को दांडी यात्रा शुरू की और नमक कानून को तोड़ा।

महात्मा गांधी ने दांडी यात्रा 24 दिनों में पूरी की। उन्होंने साबरमती से दांडी तक 246 मील का सफर तय किया। यहां नमक बनाकर उन्होंने नमक कानून तोड़ा। 4 मई 1930 की रात्रि में महात्मा गांधी को गिरफ्तार कर लिया गया। नमक सत्याग्रह में कुल 80000 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

बापू ने हरिजन आंदोलन शुरु किया। उन्होंने दलित वर्ग के लोगों को हरिजन नाम दिया और कहा कि वह भगवान की संतान है। 8 मई 1935 को गांधी जी ने हरिजन आंदोलन में मदद करने के लिए 21 दिनों का लंबा उपवास रखा। उन दिनों भारत में छुआछूत बहुत फैला हुआ था।

दलित वर्ग के लोगों को अपनी बात कहने का अधिकार नहीं था। छुआछूत एक सामाजिक बुराई थी। उस समय देश के मंदिरों में हरिजन (दलित वर्ग) का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित था। 1 जनवरी 1934 का दिन निश्चय दिवस के रुप में मनाया गया। दक्षिण भारत के मंदिरों में हरिजनों को प्रवेश की स्वीकृति दे दी गई।

1940 में महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया। इसमें बच्चे, बूढ़े और जवान सभी वर्ग के लोगों ने हिस्सा लिया। 15 अगस्त 1947 को भारत देश आजाद हो गया। इसके साथ ही एक नया देश पाकिस्तान भी बनाया गया।

महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा का पक्ष लेते थे। वह सादा जीवन उच्च विचार के सिद्धांत पर विश्वास रखते थे। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी। उन्हें तीन गोली मारी गई थी और उनके अंतिम शब्द थे।

“हे राम” हम लोग उन्हें राष्ट्रपिता कहकर बुलाते हैं। सुभाष चंद्र बोस ने पहली बार उन्हें राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था। आज हम सभी लोग स्वतंत्र देश में साँस लेते है। हमे यह नही भूलना चाहिये की “बापू” ने हमे आजादी देने के लिए अपने प्राण त्याग दिए। हम सबको उन्हें सदैव याद रखना चाहिये।

आशा है आपको मेरा भाषण पसंद आया होगा। इन्ही शब्दों के साथ मैं अपना भाषण समाप्त करता हूँ। धन्यवाद!

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