साबरमती आश्रम का इतिहास और कहानी Sabarmati Ashram History Story in Hindi

साबरमती आश्रम का इतिहास और कहानी Sabarmati Ashram History Story in Hindi

साबरमती आश्रम, भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा स्थापित किया जाने वाला आश्रम है। जिसका पुराना नाम सत्याग्रह आश्रम था। ये भारत के गुजरात के अहमदाबाद के पास साबरमती के किनारे स्थित है। चूकी ये साबरमती नदी के किनारे पर स्थित था इसलिए इसका नाम साबरमती आश्रम रख दिया गया।

साबरमती आश्रम का इतिहास और कहानी Sabarmati Ashram History Story in Hindi

साबरमती आश्रम का इतिहास

इसकी स्थापना सन 1917 में अहमदाबाद में हुई। सत्यग्रह आश्रम के स्थापना के कुछ समय पश्चात् इसका नाम बदल कर साबरमती रख दिया गया। साबरमती आश्रम के एक तरफ सेन्ट्रल जेल है और दूसरी तरफ शमशान है इसके बावजूद यहाँ की शांति को देखकर कोई भी आश्चर्य में आ सकता है। इसी आश्रम में महात्मा गांधी ने अपनी पत्नी के साथ 12 वर्ष साथ में व्यतीत किया था।

दक्षिण अफ्रीका से अपनी पढाई पूरी करके जब गांधी जी वापस लौटे तब इन्होने सर्वप्रथम अहमदाबाद के कोचरब नामक स्थान में 15 मई सन 1915 में एक आश्रम स्थापित किया जिसका नाम सत्याग्रह रखा गया।

लेकिन 2 वर्ष के पश्चात् इस आश्रम को स्थान्तरित करना पड़ा क्योकि गांधी जी चाहते थे कि यहाँ खेती, पशुपालन, खादी जैसे काम हो लेकिन जगह कम होने के कारण इस आश्रम को साबरमती नदी के किनारे स्थान्तरित कर दिया गया और इसी नदी के नाम पर इसका नाम साबरमती रखा गया। महात्मा गांधी जी ने इसी आश्रम में रह कर 1930 में स्वंतन्त्रता संग्राम की लड़ाई लड़ी और यही से दांडी मार्च भी किया था और दांडी पहुँच कर नमक कानून भी तोडा था।

जब ये आश्रम प्रारम्भ हुआ तो यहाँ ठीक से रहने की जगह भी नही थी और यहाँ रहने वालो की संख्या 40 थी लेकिन धीरे धीरे सब बदल गया और साबरमती आश्रम बड़ा हो गया और लोगो को रहने में कोई भी दिक्कत नही आ रहा थी।

महात्मा गांधी जी आहिंसावाद, आत्मसयम, सत्य  बालने वाले थे और वो सामाजिक और आर्थिक क्रांति से देश को बदलने की चाहत रखते थे। गाँधी जी ने वहां के लोगो में एकता उत्पन्न करके वह खादी, चरखा और ग्रामीण काम से आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिश की और आहिंसा के द्वारा ही देश को स्वंत्रता दिलाने की कोशिश की। जिसके कारण उसमे इनको सफलता भी मिली।

साबरमती आश्रम को गांधी जी में ऐसा पाठशाला बनाया जोकि कृषि, साक्षरता और मानव श्रम को केंद्र मानकर  उनको हर चीज के बारे में बातया जाने लगा। कुछ समय पश्चात जब स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई आगे बढ़ी तो महात्मा गांधी ने 12 मार्च सन 1930 में शपथ लिया और उन्होंने कहा मैं जब तक साबरमती आश्रम में वापस नही आऊंगा जब तक भारत को आजादी नही मिल जाती।

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महात्मा गांधी और स्वतंत्रता सेनानियों के साथ बहुत संघर्ष के भारत को 15 अगस्त 1947 में आजादी मिल गई लेकिन 30 जनवरी 1948 में महात्मा गांधी जी का देहांत हो गया और गाँधी जी फिर कभी उस आश्रम में वापस नहीं जा पाए जो उन्होंने बनाया था।     

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वर्तमान में साबरमती में मौजूद स्थान

महात्मा गांधी जी के देहांत के बाद उनकी याद में साबरमती आश्रम को म्यूजियम में बदल दिया गया। वर्तमान समय में इसे गांधी स्मारक संग्राहलय के नाम से भी जाना जाता है। इस आश्रम के अलग-अलग स्थान को अलग-अलग नाम दिया गया है जोकि इस तरह है –  

ह्रदय कुंज

यह आश्रम का वह स्थान है जहाँ गांधी जी रहा करते थे जोकि आश्रम के बीचो-बीच में है। इस स्थान का नाम ह्रदय कुंज काका साहब कालेकर ने दिया है। गांधी जी ने यही से दांडी यात्रा भी शुरू की थी।

नंदिनी अतिथिगृह

आश्रम में आने वाले लोग जिस स्थान में रहते थे उसे नंदिनी अतिथिगृह कहा गया है। ये आश्रम से थोड़ी दुरी पर गेस्ट हॉउस है। यहाँ बहुत से महान लोग रह चुके है जैसे – डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरु, सी राजगोपालाचारी, रवीद्रनाथ टैगोर जैसे बहुत से लोग यहाँ रह चुके है।

प्रार्थना भूमि

इस आश्रम में रहने वाले लोग अपनी सुहब की शुरुआत प्रार्थना से करते थे और ये वही स्थान है जहा रोज सभी लोग प्रार्थना करते थे।

विनोबा- मीरा कुटीर

साबरमती आश्रम के एक स्थान का नाम विनोबा-मीरा कुटीर है। इसका नाम विनोबा भावे और गांधी जी ने अपने इस शिष्य विनोबा भावे का नाम मीरा रखा था। विनोबा भावे इस आश्रम में कुछ महीने बिताया था इसीलिए इस स्थान का नाम विनोबा- मीरा कुटीर है।

उद्योग मंदिर

आश्रम का ये वो स्थान है जहाँ गांधी जी आर्थिक स्थिति को को व्यवहारिक रूप से बदलने के लिए खादी वस्त्र बनाने के लिए चरखे लगाये थे। गाँधी जी के साथ उनके अनुयायी भी यहाँ आ कर चरखा चलाते थे और गांधी जी सबको खादी वस्त्र बनाने का शिक्षा देते थे। उसी आधार पर इसका नाम उद्योग मंदिर रखा गया।

पर्यटक स्थल

साबरमती अब एक पर्यटक स्थल बन गया है, यहाँ प्रतिवर्ष लगभग 7 लाख लोग घूमने के लिए आते है। और ये आश्रम सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है। यहाँ पर गांधी जी द्वारा चलये गए चरखे को अभी भी संभाल कर रखा गया है और यहाँ आने वाले लोगो को वहां की सभी वस्तुए दिखाई जाती है।

इस आश्रम में गांधी जी के जीवन की सभी वस्तुओं को भी रखा गया है। साबरमती आश्रम में एक लाइब्रेरी भी है जिसमे गांधी जी की 34,000 पांडुलिपि, 6000 फोटो निगेटिव और 200 फोटोस्टेट फाइल राखी गई है। साथ ही इस लाइब्रेरी में 35000 किताबे भी है।

साबरमती के बहुत से एतिहासिक महत्व है और गांधी जी के द्वारा किये गए कार्य और उनके विचारो को समझना इतना भी आसान नही है। भारत के बहुत से आजादी के इतिहास इस स्थान से जुड़े हुए है। और हमें उनके बारे में जानने के लिए यहाँ अवश्य आना चाहिए। 

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