भारत छोड़ो आंदोलन का इतिहास History of Quit India Movement in Hindi

इस लेख में आप भारत छोड़ो आंदोलन का इतिहास History of Quit India Movement in Hindi पढ़ेंगे। इसमें आप आंदोलन का प्रमुख कारण, प्रस्ताव, नेतृत्व कर्ताओं, परिणाम, से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

आज़ादी कभी भी मांग के प्राप्त नहीं की जा सकती उसे छीनना पढ़ता है, यह कथन सुभाष चंद्र बोस के हैं। भारत छोड़ो आंदोलन एक ऐसा ऐतिहासिक आंदोलन है, जिसके कारण अंग्रेज भारत छोड़ने पर मजबूर हो गए थे।

भारत छोड़ो आंदोलन का इतिहास History of Quit India Movement in Hindi

हिंदुस्तान ने सदियों तक गुलामी की मार झेली है। भारतीय इतिहास के इस काले अध्याय को भुलाया नहीं जा सकता। एक देश पर सैकड़ों अलग-अलग आक्रमणकारियों द्वारा वार करने के पश्चात भी उसके वजूद को मिटाया नहीं जा सका है। 

हमारा देश भारत महापुरुषों की भूमि है। इस पवित्र भूमि पर जन्मे महान लोग अपना दायित्व हमेशा निभाते हैं, जब जब देश को उनकी आवश्यकता होती है।

अंग्रेजो के खिलाफ भारतवासियों ने कई आंदोलन किए हैं। आंदोलन कभी रफ्तार पकड़ते तो कभी इन्हें अंग्रेजी ऑफिसरों द्वारा दबा दिया जाता। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अमर शहीद मंगल पांडे ने हिंदुस्तान की आजादी की नींव रख दी थी। 

अगर भारतीय इतिहास में आखरी और सबसे मजबूत आंदोलन की बात करें तो वह भारत छोड़ो आंदोलन है। यह वह दौर था जब पूरा हिंदुस्तान एक ही सुर में सुर मिलाते हुए, अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगा रहा था।

देश के वरिष्ठ नेताओं और क्रांतिकारियों द्वारा किया गया भारत छोड़ो आंदोलन आज तक का सबसे बड़ा आंदोलन साबित हुआ है। इस आंदोलन को भारत के स्वतंत्रता के लिए बड़ा श्रेय जाता है। 

सन 1942 में किए गए भारत छोड़ो आंदोलन में हिंदुस्तान की लगभग आधी से अधिक आबादी सड़कों पर उतर आई थी। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब एक साथ इतने लोग संगठित हुए हों और देश को आजादी दिलाने में आगे आए हों।

महात्मा गांधी और कांग्रेस के कुछ बड़े नेता इस आंदोलन का मुख्य चेहरा थे। आंदोलन की रणनीति के अनुसार ब्रिटिश हुकूमत के समक्ष किसी भी प्रकार की  हिंसा करने पर प्रतिबंध था। किंतु जब अंग्रेजों ने लोगों का नेतृत्व करने वाले नेताओं को जेल में बंद कर दिया तो भीड़ खुद ही अपना नेतृत्व करती गई और भयंकर तबाही मचाई।

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काकोरी ट्रेन कांड की घटना के लगभग 17 वर्षों बाद 8 अगस्त 1942 के दिन भारत छोड़ो आंदोलन को अंजाम दिया गया। अगस्त महीना वाकई में भारतीय इतिहास के लिए एक महत्वपूर्ण महीना है, क्योंकि कई और महत्वपूर्ण देशभक्ति के कार्यों को इसी दिन किया गया है। ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ चलाए गए भारत छोड़ो आंदोलन को “अगस्त क्रांति” भी कहा जाता है।

भारत छोड़ो आंदोलन का मुख्य कारण Main reason for Quit India Movement in Hindi

ब्रिटिश हुकूमत अपनी दमनकारी नीतियों के जरिए देश को अलग-अलग भागों में बांट देना चाहते थे। भारतीयों के साथ अन्याय पूर्ण व्यवहार के चलते लोगों में आक्रोश सातवें आसमान पर था। आजादी ही भारतीयों द्वारा चलाए गए किसी भी आंदोलन का केंद्र होती थी।

क्रिप्स मिशन‘ की नाकामयाबी भारत छोड़ो आंदोलन के मुख्य कारणों में से एक माना जा सकता है। दूसरे विश्वयुद्ध के समय भारतीयों का सहयोग प्राप्त करने के लिए मार्च 1942 में ब्रिटिश सरकार ने भारत में क्रिप्स मिशन भेजा था। स्टेफोर्ड क्रिप्स की अध्यक्षता में यह मिशन भारत लाया गया था।

जब ब्रिटेन द्वितीय विश्वयुद्ध की तैयारी में व्यस्त था, तो भारत की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी। अंग्रेजों ने भारतीयों पर इतने सारे कर लगाए थे, जिसे भरना बहुत कठिन था। 

लोगों के पास खाने के लिए कुछ नहीं हुआ करता था। कुछ स्त्रोतों के आधार पर यह भी पता चलता है कि भुखमरी के कारण मरने वाले लोगों की संख्या सैकड़ों में हो रही थी।

यह बात तो सब जानते हैं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस जो, कि पहले नेशनल कांग्रेस के ही सदस्य होते थे उनकी महात्मा गांधी से अच्छे संबंध नहीं थे। 

जब गांधी ने अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिए दूसरे मजबूत देशों से सहायता लेने वाला नेताजी का सुझाव अस्वीकृत कर दिया था, तो सुभाष चंद्र जी अकेले ही अंग्रेजों के चंगुल से निकलकर काबुल के रास्ते दूसरे देशों में मदद की उम्मीद से गए थे।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जब ‘चलो दिल्ली‘ का नारा देते हुए देशवासियों को एक संदेश दिया था। तो गांधीजी, जो एक अहिंसावादी विचारधारा के व्यक्ति थे उन्होंने भी हालात को भांपते हुए ‘करो या मरो‘ जैसे हिंसक नारे दिए। 

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गांधीजी ने जब भारतीयों तक युद्ध के संकेत पहुंचाएं तो करोड़ों लोग उनका साथ देने के लिए सड़कों पर उतर आए थे। इस घटना ने भारतीयों के मन में जलते हुए आक्रोश पर घी डालने का काम किया था। परिणाम स्वरूप भारत छोड़ो आंदोलन किया गया।

इसके अलावा ब्रिटिश गवर्नमेंट की अन्याय पूर्व शर्तें और  और नीतियों के कारण अब लोग स्वतंत्रता से कम किसी भी समझौते पर तैयार होने वाले नहीं थे, इसीलिए एक बड़े युद्ध स्तर पर आंदोलन को अंजाम दिया गया।

भारत छोड़ो प्रस्ताव कब और कहां पास किया गया? When and Where was the Quit India Resolution passed in Hindi?

गौरतलब है कि ‘अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी’ के मुंबई बैठक में 8 अगस्त 1942 की शाम को “अंग्रेजों भारत छोड़ो” का ऐतिहासिक नारा दिया गया। गांधी जी ने ग्वालियर टैंक मैदान, जिसे आज के समय में ‘अगस्त क्रांति मैदान’ कहा जाता है वहां “करो या मरो” का नारा दिया था।

युसूफ मेहरली जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता में एक महत्वपूर्ण किरदार निभाया है, सबसे पहले उनके द्वारा ही भारत छोड़ो का नारा दिया गया था। भारत छोड़ो आंदोलन में गांधी जी ने युसूफ मेहरली के द्वारा दिए गए नारे को पूरे आंदोलन का आधार बना दिया।

गांधी जी द्वारा दिया गया करो या मरो का नारा लाल बहादुर शास्त्री द्वारा ‘मरो नहीं मारो’ के नारे में बदल दिया गया। अपने दूर दृष्टिता की मदद से शास्त्री जी इस नारे में छुपे एक नकारात्मक भाव को पहचान गए थे। इसीलिए उन्होंने लोगों का उत्साह बढ़ाने के लिए मरो नहीं मारो का नारा दिया।

जब भारत छोड़ो प्रस्ताव को पास किया गया था, उसके कुछ घंटों में ही कांग्रेस के लगभग सभी बड़े और वरिष्ठ नेताओं को ब्रिटिश सरकार के द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके अलावा आम लोगों द्वारा अपने नेताओं की गिरफ्तारी के कारण काफी हिंसक धरना प्रदर्शन भी किए गए थे।

भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व Leader of Quit India Movement in Hindi

भारत छोड़ो आंदोलन का मुख्य नेतृत्व महात्मा गांधी के द्वारा किया गया था। गांधीजी के केवल एक आवाहन पर करोड़ों भारतीय इस आंदोलन में जुड़ गए थे। इस आंदोलन में युवाओं की संख्या अधिक थी जो अपनी पढ़ाई लिखाई और कामकाज छोड़कर देश को आजाद करवाने के लिए आगे आए थे।

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आंदोलन में जुड़े हुए भारी भीड़ को दिशा देने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और जयप्रकाश नारायण जैसे नेशनल कांग्रेस के बड़े नेताओं ने अपना योगदान दिया।

मेदिनीपुर, सातारा आदि कई जिलों में यह आंदोलन अपने चरम पर पहुंच चुका था। पूर्वोत्तर राज्यों में मुख्यतः बंगाल में आंदोलन के कारण काफी हिंसा प्रदर्शन हुआ था।

जब ब्रिटिश सरकार द्वारा कांग्रेस के सभी नेतृत्व कर्ताओं को बंदी बना लिया गया, तो भीड़ का मार्गदर्शन करने के लिए कोई बड़ा नेता नहीं बचा था। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे थे कि कुछ दिनों के अंदर ही भीड़ अपने आप शांत हो जाएगी।

लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ बल्कि लाखों लोगों की भीड़ ने खुद ही अपना नेतृत्व किया जो अंग्रेजों के लिए किसी सर दर्द से कम नहीं था। भारत छोड़ो आंदोलन के समय में लॉर्ड वोवेल भारत के वायसराय थे।

भारत छोड़ो आंदोलन का परिणाम Result of Quit India Movement in Hindi

भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व करने वाले सभी नेताओं को कुछ घंटों के अंदर ही जेल में डाल दिया गया। अंग्रेजों ने गांधी जी को आंदोलन का मुख्य जिम्मेदार बताया और उन्हें पुणे के आगा खान पैलेस में नजरबंद कर दिया गया।

इस आंदोलन प्रदर्शन में लोग बेहद हिंसक हो चुके थे। जिसके परिणाम स्वरूप रेलवे ट्रैक, खंभे, स्टेशन, सरकारी संपत्तियों और कई अन्य चीजों को पागल हुई भीड़ ने खत्म कर दिया था। भारत छोड़ो आंदोलन के समय लोगों द्वारा कई ऐसे कार्य देखे गए थे, जो पहले से नियोजित नहीं थे।

ब्रिटिश सरकार ने इसके प्रतिरोध में भयानक नरसंहार किया था। अंग्रेजों ने इस आंदोलन को दबाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर ली थी। लोगों की भीड़ पर सरेआम गोलियां चलवा कर और लाठी चार्ज करके इस विद्रोह को दबाने का पूरा प्रयास किया गया था।

रातों-रात ब्रिटिश गवर्नमेंट से नेशनल कॉन्ग्रेस के नेताओं को गिरफ्तार करने का आदेश आ चुका था। इसके अलावा गिरफ्तार होने वाले लोगों का आंकड़ा लाखों के पार था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अंग्रेजों ने गैरकानूनी संगठन घोषित करके उस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था।

9 अगस्त आते-आते सड़कों पर सैकड़ों लोगों की लाशें यहां-वहां बिखरी पड़ी थी। अंग्रेजों ने कांग्रेसियों के गिरफ्तारी के पश्चात लाखों का जुर्माना भी लगाया था।

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