पूर्व छात्र मिलन समारोह भाषण Speech on Alumni Meet in Hindi

स्कूल या कॉलेज पर पूर्व छात्र मिलन समारोह भाषण Speech on Alumni Meet in Hindi

सभी आदरणीय श्रोताओं को सुप्रभात। आदरणीय प्रधानाचार्य जी, आदरणीय अध्यापक गण एवं मेरे अभिन्न सहपाठियों, आज हम सभी, प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी एक दूसरे से मिलने के लिए इकठ्ठा हुए हैं। 

यहां आकर, कई सालों पुरानी यादें ताजा हो जाती है। मुझे आज भी याद है मैं दस वर्ष पूर्व विश्वविद्यालय के दरवाजे से रोते हुए निकला था। उस वक़्त मेरी आँखों में सपने थे, हाथों में डिग्री थी और करियर में काफी कुछ करने की संभावना भी, लेकिन मैं उन सभी को छोड़कर यहां रहना चाहता था। 

अपने विश्व विद्यालय को छोड़ना कभी भी इतना आसान नहीं होता। हमारे जीवन में आज मैं आप सभी के योगदान और इस विश्वविद्यालय के योगदान के बारे में ही बात करूंगा। 

सबसे पहले मैं विश्वविद्यालय के कुलपति जी का धन्यवाद करना चाहूंगा। उन्होने मुझे मेरी बात रखने का मौका दिया और आप सभी का स्वागत करने का कार्य मुझ पर सौंप दिया। 

मैं विश्वविद्यालय के मिलन समारोह में आप सभी का स्वागत करता हूं। यह विश्वविद्यालय बाहर से ईंट पत्थरों से बना भले ही प्रतीत होता हो लेकिन इसे भावनाओं से बनाया गया है। 

मेरे और आप सभी के जीवन में निश्चित तौर पर यहां के वातावरण का सकारात्मक प्रभाव तो जरूर पड़ा होगा। आज मैं इस मंच से उसी वातावरण का धन्यवाद देने आया हूँ। 

आज हम सभी यहां इकठ्ठा हुए हैं। यह देखकर काफी हैरानगी होती है कि दस वर्षों में कुछ भी नहीं बदला है। मैं अपने सभी सीनियर्स, सुपर सीनियर्स और अध्यापकों को पिछले दस वर्षों से उतना ही करुणामय देख पा रहा हूँ। 

समय गुजरता चला जाता है, विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए यह कभी ज्ञात ही नहीं हुआ कि समय कब गुजर गया। 

मैं जब विश्वविद्यालय में दाखिला लेकर आया था तो मुझे यह उम्मीद जरा भी न थी कि मेरा जीवन इस तरह से बदल जाएगा। यदि मैं अन्य विश्वविद्यालयों से इस विश्वविद्यालय की तुलना करूँ तो मैं यह पता हूँ कि शिक्षा हर विश्वविद्यालय में मिल सकती है परंतु संस्कार आपको केवल यहीं और केवल यहीं मिल सकते हैं। 

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मैं आपको अपने शुरुआती दिनों के बारें में बताया हूँ। दरअसल जब मैंने यहां पर दाखिला लिया था तब यह विश्वविद्यालय मुझे किसी बोझ की तरह नज़र आता था। ऐसा इस कारण था क्यूंकि मैंने यहां आने से पहले अपने स्कूल को छोड़ा था और वहां से मैं काफी भावुकता से जुड़ा हुआ था। 

बीतते समय के साथ विश्वविद्यालय के साथ मेरा लगाव भी बढ़ता गया और मैं यहां से भावुक तौर पर जुड़ गया। ऐसा केवल मेरे साथ ही नहीं अपितु आप सभी के साथ ऐसा ही हुआ है। 

यह विश्वविद्यालय हमारे लिए हमारे जीवन के आधार के तौर पर उभरा है। हम सभी ने जो भी कुछ सीखा है वह केवल और केवल यहीं से। आज हम सभी अपने जीवन के किसी न किसी मुकाम पर खड़े हैं। यहां कोई आईएएस अधिकारी है तो किसी ने अपनी कम्पनी को बहु राष्ट्रीय कर लिया है, लेकिन हम सभी अपने व्यस्त जीवन में से समय निकालकर यहां जरूर आते हैं। 

यह दर्शाता है कि हम विश्वविद्यालय के साथ किस प्रकार जुड़े हुए हैं। विश्वविद्यालय बना होता है विद्यार्थियों और अध्यापकों को मिलाकर। ऐसे में अगर मैं यहां के अध्यापकों के लिए दो शब्द न कहूँ तो यह भाषण अधूरा रह जाएगा। 

मेरे जीवन में यहां के अध्यापकों द्वारा दिए गए संस्कारों का प्रभाव बहुत ज्यादा है। मैंने उनसे विनम्रता और दयालुता जैसे जीवन यापन के महत्वपूर्ण पाठ सीखे हैं। उन्होने मुझे जो भी पढ़ाया लिखाया उसी के कारण आज मैं अपनी ज़िन्दगी में एक मुकाम पर खड़ा हूँ। 

आदरणीय अध्यापकों मैं आपका धन्यवाद करना चाहता हूं। मैं अब इतना कहकर अपनी जगह लूंगा। आप सभी को पुनः एक वर्ष के उपरांत देखकर अच्छा लग रहा है। 

हम सभी का दायित्व है कि विश्वविद्यालय का आस्तित्व बना रहे। धन्यवाद 

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