दादा-दादी या नाना-नानी पर भाषण Speech on Grandparents in Hindi

दोस्तों आज हमने अपने आर्टिकल में दादा-दादी/ नाना-नानी पर भाषण (Speech on Grandparents in Hindi) प्रस्तुत कर रहे है मैं उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को मेरा ये भाषण पसंद आयेगा।

दादा-दादी या नाना-नानी पर भाषण Speech on Grandparents in Hindi

सम्मानित प्राचार्य, शिक्षकगण, अभिभावक, दादा-दादी/नाना-नानी और मेरे प्रिय मित्रों,

यहाँ उपस्थित सभी को मेरा सुप्रभात, दोस्तों आज हम सभी यहाँ बड़ों के सम्मान करने के लिए इकट्ठा हुए है। बड़ों की उपस्थिति का अर्थ है कि किसी भी घर की भलाई और सकारात्मकता में वृद्धत्व का जश्न मानना है ।

दोस्तों जैसा की हमें पता है कि हमारे नाना-नानी / दादा-दादी (Grandparents) हमारे परिवार को वास्तविक रूप से सबसे मजबूत बंधन प्रदान करते है। और हमारे परिवार के सदस्यों को एक साथ रखते है।  

दादा-दादी / नाना-नानी (Grandparents) के होने से अवकाश के दौरान चाचा-चाची और चचरे भाइयों के साथ समय बिताने का भी मौका मिलता है, जो हमारे जीवन का सबसे अच्छा हिस्सा होता है। 

दोस्तों आप को पता होगा जिनको अपने घर में माता पिता और दादा-दादी / नाना-नानी दोनों का प्यार मिलता है, उन्हें अपने जीवन में हर चीज दोगुनी मिलती है। जैसे दोगुना प्यार, दोगुना अनुभव और दोगुना मज़ा भी।

दादा-दादी / नाना-नानी हमारे जीवन में सूर्य की तरह होते है क्योंकि दादा-दादी / नाना-नानी से बहुत सारे अच्छे गुणों को उभारने में मदद करते है।

इस दुनिया में बहुत सारे बच्चे ऐसे भी है जो बहुत ही दुर्भाग्यशाली है क्योंकि उन्होंने अपने दादा-दादी / नाना-नानी को नही देखा और दादा-दादी / नाना-नानी से मिलने वाले प्यार और उनके विचारों से वंचित रह जाते है। 

दोस्तों मुझे हर दिन अपने दादा-दादी से कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता है। जब मैं अपने दादी के साथ होता हूँ तो दादी मुझे कपड़े कैसे पहनने है, किसी का आदर कैसे करना है, मम्मी की घर के काम में मदद कैसे करना है, वो मुझे ये सब सिखाती है।

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मेरे दादा जी मुझे हमेशा बड़ों का आदर करना, बड़ों से बात कैसे करना है सिखाते रहते है। जब मैं शाम को खेल कर आता हूँ तो मेरे दादा जी मुझे समझाते है कि शाम को जब बाहर से आओ तो अपने जूतों को रैक में रखने से बाहर की धूल और कीटाणुओं को रोकने में भी मदद मिलती है।

उन्होंने मुझे सिखाया कि स्विचबोर्ड के तार छूने से बिजली का झटका (करेंट) भी लग सकता है। मेरे दादा-दादी ने मुझे यह भी सिखाया है कि जब कोई बड़ा आप के घर आये तो उसका पैर छूना चाहिए और उनका आदर करना चाहिए। 

दोस्तों मैं अगर आप सभी से कहूँ कि आप सभी अपनी बचपन की यादों में झाकिये तो आपको नाना-नानी के घर की गर्मी की छुट्टियाँ ज़रुर याद आयेगी। जब हम वहां जाते थे तो नानी कहती थी कितने दुबले हो गये हो। घर पर खाना नही कहते हो क्या।

उनके प्यार से मिल भर जाता था। मुझे तो हमें अपने नाना-नानी के घर की याद आती है। वहां खेलने का मज़ा, नये खाने का मज़ा और नाना-नानी का खूब सारा प्यार। दोस्तों कभी कभी तो मेरा मन करता है कि मैं फिर से छोटा हो जाऊँ और नाना-नानी के घर चला जाऊँ।

मुझे नाना-नानी के घर की मस्ती अभी भी याद आया करती है क्या आप सभी को भी नाना-नानी घर गर्मियों वाली छुट्टियाँ याद आती है। 

दोस्तों आज एक ऐसा समय आ गया है, जहाँ बहुत से ऐसे लोग है जो बड़े बुजर्गो का सम्मान नही करते है, क्योंकि उनको रिश्तों का सही मोल नही पता है। धीरे धीरे ऐसा समय आ रहा है जब हम अपनी पुरानी संस्कृति को भूल रहे है और अपने बड़े बुजर्गो (दादा-दादी / नाना-नानी) के साथ समय बिताने के बजाय हम फ़ोन, वीडियो गेम, इंटरनेट में व्यस्त रहते है।

आज की इस दुनिया में आज कल के बच्चे अपने दादा-दादी / नाना-नानी को नज़रअंदाज़ कर रहे है लेकिन फिर भी हमारे बड़े बुजुर्ग (दादा-दादी / नाना-नानी) हमसे उतना ही प्यार करते है।

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क्योंकि उन्हें हमारी जिंदगी में अपनी जिंदगी दिखती है। उनके दिल में अपने नाती-पोते के लिए अत्यंत प्रेम भाव होता है। और होंठो पर हमेशा हमारे लिए अच्छे के लिए भगवान से प्रार्थना किया करते है। 

दोस्तों हमारी जिंदगी में दादा-दादी / नाना-नानी की जगह कोई और नही ले सकता है। न तो उनके प्यार और स्नेह कोई और प्रति स्थापित नही कर सकता है। इसीलिए बुजर्गो को अनमोल यूँ ही नहीं कहा जाता है।

क्योंकि उनका हमारी जीवन में बहुत ही बड़ा रोल होता है। हम उनको नज़रअंदाज़ नही कर सकते है। हम माने चाहे या नही लेकिन उनका प्यार और विश्वास हमसे जुड़े होने के कारण ही हम धनवान कहलाते है क्योंकि कोई पासे से धनवान नही होता।

जो अपने रिश्ते को अच्छे से निभाते है उससे धनी इस दुनिया में कोई नही है। और अपने रिश्तों को भूल जाते है इस दुनिया में उनसे गरीब कोई नही होता है। 

दोस्तों मैं आप सब से पूछना चाहता हूँ कि आज हम देखते है लोग अपने बूढ़े माँ-बाप को वृद्ध आश्रम छोड़ देते है, क्या ये सही है? क्या उनको अपने नाती पोते के साथ रहने का हक़ नही है? धीरे-धीरे लोग बदल रहे है इसका अर्थ ये नही है कि हम अपने बड़े बुजुर्गों को छोड़ दे।

आज हम सभी अपने संस्कारों को भूलते जा रहे है। मैं आप सभी से कहना चाहता हूँ कि आप सभी को अपने बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। आज दादा-दादी/नाना-नानी दिवस मैं हम यहाँ इसीलिए एकत्र हुए है कि लोगो को जागरुक कर सके की हमें अपने संस्कार को भूलना नही चाहिए। 

दोस्तों अगर आप अपने बड़े बुजुर्गों को अपने घर से निकाल देते है तो क्या कभी बूढ़े नही होंगे क्या। आप के बच्चे आप को देख कर ही बड़े हो रहे है जैस आप करोगे क्या आप का बच्चा आप के साथ वैसा ही करेगा। इसीलिए मैं आप सभी से कहना चाहता हूँ आप लोगो अपने बड़े बुजर्गो की इज़्ज़त करना सीखे। 

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मैं ज्यादा कुछ नही कहना चाहता हूँ, बस अपने भाषण से अंत में यही कहूँगा आप सभी अपने बड़े बुजुर्ग (दादा-दादी/नाना-नानी) को सम्मान दे और उनके साथ सुनहरे पल बिताये। अपने आस- पास के लोगो को भी जागरूक करते रहे और हमेशा खुश रहे। आशा करता हूँ आप को मेर भाषण पसंद आया होगा।  

धन्यवाद 

आशा करते हैं आपको यह दादा-दादी या नाना-नानी पर भाषण Speech on Grandparents in Hindi अच्छा लगा होगा।

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