पुराण क्या हैं? 18 पुरानों के विषय में संक्षिप्त जानकारी What are Puranas in Hindi?

इस लेख में हमने पुराण क्या हैं? (What are Puranas in Hindi?) इसके भाग और उन 18 पुरानों के विषय में संक्षिप्त जानकारी दिया है।

पुराण क्या हैं? What is Puranas in Hindi?

पुराण का अर्थ है पुरानी कथा। पुराण हमारे विश्व के साहित्य के प्रचीनतम ग्रँथ में से एक हैं। पुराण में लिखी गयी ज्ञान की बातें और नैतिकता की सीख आज भी अमूल्य रत्न है तथा हमारी सभ्यता की आधारशिला हैं।

वेदों में लिखी गयी भाषा कठिन है पर पुराण में उसी ज्ञान को सहजता के साथ प्रस्तुत  किया है । पुराण में कठिन तथ्यों को कहानियों के माध्यम से समझाया गया है। 

18 पुरानों के विषय में संक्षिप्त जानकारी 18 Puranas in Hindi

महृर्षि वेदव्यास ने 18 पुराणों को संस्कृत भाषा में लिखा है। ब्रह्मा, विष्णु और महेश इन पुराणों के मुख्य देवता हैं। यह त्रिमूर्ति कहलाते है अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु, महेश।  

1. ब्रह्म पुराण

ब्रह्म पुराण सबसे प्राचीनतम पुराण है। इस पुराण में 246 अध्याय और 14000 श्लोक हैं। इस ग्रंथ में ब्रह्मा जी की महानता के अलावा  सृष्टि की उत्पत्ति और गंगा माँ का अवतरण तथा कृष्णावतार और रामायण की कहानियों का सचित्र वर्णन किया गया हैं। इस ग्रंथ से सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर सिन्धु घाटी सभ्यता भी हम  प्राप्त की जा सकते है।

2. पद्म पुराण

पद्म पुराण में 55000 श्र्लोक शामिल हैं और यह पुराण पाँच खण्डों में विभाजित किया गया है, जिनके नाम है स्वर्गखण्ड, सृष्टिखण्ड, उत्तरखण्ड, पातालखण्ड तथा भूमिखण्ड हैं। इस पुराण में आकाश पृथ्वी, तथा नक्षत्रों की उत्पन्न होने के बारे में बताया गया है।

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पुराण में बताया गया है कि चार प्रकार से जीवों की उत्पत्ति होती है जिन्हें उदिभज, अणडज, स्वेदज तथा जरायुज की श्रेणी में रखा गया है। भारत के सभी नदियों तथा पर्वतों के बारे में भी विस्तार से वर्णन किया है।

इस पुराण में शकुन्तला दुष्यन्त तथा भगवान राम के कई पूर्वजों का इतिहास शामिल किया गया है। शकुन्तला दुष्यन्त के पुत्र नाम भरत था उनके नाम से ही हमारे देश का नाम पहले जम्बूदीप से भरतखण्ड और उसके बाद भारत पडा गया था।

3. शिव पुराण

शिवपुराण में 24000 श्र्लोक दिए गये हैं तथा भगवान शिव की महानता की कहानियां तथा उनसे सम्बन्धित कुछ घटनाओं को दिखाया गया है। इस पुराण को हम वायु पुराण के नाम से भी जानते हैं।

इस पुराण में शिवलिंग, कैलाश पर्वत, तथा रुद्राक्ष का सचित्र वर्णन है हमारे सौर मण्डल के ग्रहों के आधारित पर ही हमारे  सप्ताह के दिनों के नाम हैं और आज भी यह दिनों के नाम लगभग पूरे विश्व में प्रयोग किये जाते हैं।

4. विष्णु पुराण

विष्णु पुराण में 6 अँश और 23000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में बालक ध्रुव, भगवान विष्णु, तथा कृष्णावतार की कथायें सम्मलित हैं। इस के अलावा सम्राट पृथु की कहानी भी शामिल है जिसके कारण हमारी धरती माँ का नाम पृथ्वी पड़ गया था। इस पुराण में चन्द्रवँशी और सू्र्यवँशी  राजाओं महाराजाओं का इतिहास दर्शाया गया है।

हमारे भारत की राष्ट्रीयता की पहचान तो सदियों पुरानी है| जिसका प्रमाण विष्णु पुराण के निम्नलिखित शलोक में मिलता है वह भूगौलिक क्षेत्र जो उत्तर में हिमालय तथा दक्षिण में सागर से घिरा हुआ है उसे हम भारत देश कहते है तथा भारत में निवास करने वाले सभी लोग भारत देश की ही संतान कहलाते हैं।) विष्णु पुराण एक ऐतिहासिक ग्रंथ है।

6. नारद पुराण

नारद  पुराण में लगभग 25000 श्र्लोक हैं और इसको दो भागों में बांटा हैं। इस ग्रंथ में हमारी अठारह पुराणों का सार दिया है।

इसके पहले भाग में मन्त्र तथा मृत्यु बाद के क्रम आदि के विधान भी दिया गया हैं। गंगा अवतरण की कथा को भी इस पुराण में सविस्तार दी गयी है। दूसरे भाग में संगीत के सातों स्वर तथा सप्तक है। संगीत पद्धति, आज भी भारतीय संगीत का आधार मानी जाती है। 

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7. मार्कण्डेय पुराण

यह पुराणों अन्य की तुलना में कुछ छोटा है। मार्कण्डेय पुराण में 9000 श्र्लोक शामिल किये गये है और इसमें 137 अध्याय शामिल हैं। इस पुराण में सामाजिक न्याय और योग के विषय में ऋषिमार्कण्डेय तथा ऋषि जैमिनी के बीच ज्ञान की बातें सम्मलित है। इसके अलावा भगवती दुर्गा तथा श्रीक़ृष्ण से जुड़ी हुयी कथायें भी इसमें दी गयी हैं।

8.अग्नि पुराण

अग्नि पुराण में 383 अध्याय शामिल है और इसमें 15000 श्र्लोक दिये गये हैं। इस पुराण को हम भारतीय संस्कृति का ज्ञानकोष कह सकते है। इस ग्रंथ में महाभारत, मत्स्यावतार तथा रामायण की छोटी-छोटी कथायें दी गयी हैं, इसके अलावा कई विषयों के बारे में बताया है|

9. भविष्य पुराण

भविष्य पुराण में 129 अध्याय शामिल किये गये है तथा 28000 श्र्लोक शामिल हैं। इस ग्रंथ में सूर्य के महत्व का वर्णन तथा  साल के 12 महीनों के निर्माण का सविस्तार वर्णन किया है भारत के सामाजिक, धार्मिक तथा शैक्षिक विधानों आदि कई विषयों के बारे में बताया है। इस पुराण में साँपों की पहचान को चित्रित किया है |

इस पुराण की कई कथायें एसी है जो बाईबल की कथाओं से भी मिलती जुलती हैं। इस पुराण में पुराने राजवँशों के अलावा भविष्य में आने वाले  नन्द वंश, मुग़ल वँश,मौर्य वँश, महारानी विक्टोरिया और छत्रपति शिवाजी तक का वृतान्त दिया गया है यहाँ तक कि सत्य नारायण भगवान की कथा भी इसी पुराण से ली गयी है।

10. ब्रह्म वैवर्त पुराण

ब्रह्म बैबर्त पुराण में 18000 श्र्लोक और 218 अध्याय को शामिल हैं। इस ग्रंथ में ब्रह्मा, तुल्सी,गणेश, सावित्री, सरस्वती, लक्ष्मी, तथा क़ृष्ण की महानता को दर्शाया गया है तथा उनसे जुड़ी हुयी कथायें भी दी गई  हैं। इस पुराण में भी आयुर्वेद सम्बन्धी ज्ञान दिया गया है।

11. लिंग पुराण

लिंग पुराण में 163 अध्याय शामिल है और 11000 श्र्लोक शामिल हैं। इसमें खगौलिक काल में युग की सृष्टि की उत्पत्ति और कल्प आदि का वर्णन किया गया है। राजा अम्बरीष की कहानी भी इसी पुराण में लिखी गयी  है। इस ग्रंथ में अघोर विद्या तथा अघोर मंत्रों के बारें में भी बताया गया है।

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12. वराह पुराण

वराह पुराण में 217 स्कन्ध शामिल है और 10000 श्र्लोक भी इसी में हैं। इस ग्रंथ में बारह अवतार की कहानी के अतिरिक्त भगवत गीता का भी सविस्तार वर्णन दिया गया है। इस पुराण में पाताल, स्वर्ग तथा अन्य कई लोकों का सविस्तार वर्णन किया गया है। 

13. स्कन्द पुराण

स्कन्द पुराण सबसे वृहद पुराण है तथा इस पुराण में 81000 श्र्लोक और छः खण्ड हैं। स्कन्द पुराण में 27 नक्षत्रों, 18 नदियों, का वर्णन है इसमें 12 ज्योतिर्लिंगों, तथा गंगा अवतरण के आख्यान शामिल हैं। इसी पुराण में कन्याकुमारी मन्दिर का उल्लेख भी किया गया है।

14. वामन पुराण

वामन पुराण में 95 अध्याय है और 10000 श्र्लोक को शामिल किया गया है तथा इसको दो खण्डों में बांटा गया हैं। इसमें सात दूीपों की उत्पत्ति तथा  पृथ्वी की भूगौलिक स्थिति, पर्वत और नदियों का जिक्र है।

15. कुर्मा पुराण

इस पुराण में चारों वेदों का सार दिया गया है। कुर्मा पुराण में 18000 श्र्लोक तथा चार खण्ड शामिल हैं। इसमें सागर मंथन की कहानियां विस्तार से लिखी गयी है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु, शिव, पृथ्वी, गंगा की उत्पत्ति का वर्णन है।

16. मतस्य पुराण

मतस्य पुराण में 290 अध्याय शामिल है तथा 14000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में मतस्य अवतार की कहानियां दी गयी है। 

17. गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण में 279 अध्याय दिए है और 18000 श्र्लोक शामिल हैं। इस ग्रंथ में मृत्यु पश्चात की घटनायें यम लोक, प्रेत लोक, नरक के बारे में बताया है तथा 84 लाख योनियों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

स पुराण में कई चन्द्रवँशी तथा सूर्यवँशी राजाओं के बारे में भी बताया है। साधारणतः लोग इस पुराण को पढ़ने से हिचकिचाते हैं क्योंकि इस ग्रंथ को किसी की मृत्यु होने के पश्चात ही पढ़वाया जाता है| 

18. ब्रह्माण्ड पुराण

ब्रह्माण्ड पुराण में 12000 श्र्लोक शामिल है| इस पुराण में ब्रह्माण्ड में स्थित ग्रहों के बारे में वर्णन किया गया है। कई सूर्यवँशी तथा चन्द्रवँशी राजाओं का इतिहास भी संकलित है। 

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