हिन्दू वैवाहिक रस्म शगुन Hindu Wedding Ritual Shagun in Hindi

हिन्दू वैवाहिक रस्म शगुन Hindu Wedding Ritual Shagun in Hindi

भारतीय हिन्दू विवाहों में अनेक प्रकार के रिवाज़ और परंपरा देखने को मिलती हैं। भारतीय हिन्दू विवाह स्वयं में अनेक ऐसी रस्मों को समाहित किये हुए हैं, जिनका व्यावहारिक और वैज्ञानिक रूप से बहुत अधिक महत्त्व है।

हर एक हिन्दू विवाह में कुछ ऐसी रस्में अनिवार्य रूप से निभाई जाती हैं, जिनका महत्व वैदिक काल से ही पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है। इनमे से कुछ रिवाज और प्रथाओं ने तो स्वयं को वक़्त की नजाकत को समझते हुए नए दौर के साथ ढाल भी लिया है।

आधुनिक हिन्दू विवाह ऐसी ही कुछ नई और पुरानी रीतियों और प्रथाओं का मिश्रण है और विवाह का जैसा जश्न हिन्दू परंपरा में देखने को मिलता है, वैसा शायद ही किसी अन्य संस्कृति या समुदाय के विवाह में देखने को मिल सके।

लोगों का रहन- सहन, भाषा-बोली भले ही कितनी बदल जाए, लेकिन शादी-ब्याह से सम्बंधित रस्म और रिवाज़ लगभग सब जगह एक ही तरह से मनाये जाते हैं। रस्म के तरीके भले ही बदल जाए परंतु उनका उद्देश्य और तार्किकता अभी भी वैसी ही है। फिर चाहे वो कन्यादान की रस्म हो, या फिर हल्दी, मेहंदी, शगुन, फलदान, तेल ही क्यों न हो, सिर्फ इन्हें मनाने के तरीकों में थोड़ा अंतर पाया जा सकता है।

हिन्दू वैवाहिक रस्म शगुन Hindu Wedding Ritual Shagun in Hindi

भारतीय विवाह परंपरा में शगुन रस्म की महत्ता पुराने समय से ही चली आ रही है। अक्सर किसी भी विवाह से पूर्व होने वाले अच्छे संकेतों को शुभ शगुन का नाम दिया जाता था। ऐसे शगुनों के होने के कारण ही वर- वधू के सुखपूर्ण दाम्पत्य जीवन के कयास लगाये जाते थे। वही दूसरी ओर, बुरे संकेतों के आधार पर यह माना जाता था, कि वर- वधू के जीवन में कठिनाइयां आएँगी, और उन्हें अनेक प्रकार के कष्टों का सामना भी करना पड़ सकता है। 

पूर्व में जो परम्पराएं और रस्में घर के बुजुर्गों द्वारा किसी विवाह के दौरान निभाई जाती थीं, वही रस्मे और परम्पराएं उतने ही उल्लास और भाव के साथ आज भी मनाई जाती हैं, लेकिन यह भी उल्लेखनीय है कि बदलते वक़्त के साथ उन्हें निभाने के तरीकों में भी हल्का- फुल्का बदलाव देखा जाता है। ये सभी रस्में जो विवाह में शगुन के लिए निभाई जाती हैं, इनके पीछे भी कई तरह के वैज्ञानिक और तार्किक कारण उपस्थित हैं। 

वैसे तो आज के समय में शगुन को एक नए रूप में जाना जाता है, इसमें विवाह के दौरान जो भी भेंट तथा व्यवहार का लोगों के बीच आदान- प्रदान किया जाता है, उसे शगुन या नेग कहा जाता है। और किसी भी विवाह के तय होते ही, लोगों के बीच शगुन अर्थात नेग लेने और देने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

गोद भराई की रस्म के लिए लड़के वालों की तरफ से लड़की तथा उसके परिवार के लिए अनेक मिठाईयां, फल, कपड़ें इत्यादि शगुन के रूप में लाये जाते हैं। ठीक उसी तरह बरीक्षा तथा तिलक या फलदान की रस्म के दौरान लड़की के पक्ष की तरफ से लड़के वालों के लिए अनेक फल, पीतल के बर्तन, तोहफें, मिठाईयां इत्यादि भेंट शगुन पूरा करने के लिए लाई जाती हैं। 

कुछ घरों में विवाह अच्छे से पूर्ण होने पर सुहागन स्त्रियों को भोजन कराया जाता है, तो वहीं कुछ घरों में नव- दंपत्ति के आने वाले जीवन में सुख- शांति बने रहने की कामना से हवन तथा कथा आदि का आयोजन किया जाता है।

ऐसे ही विवाह की शुरुआत से लेकर उसके पूर्ण होने के कई दिन बाद तक भी अनेक प्रकार की रस्मे और परम्पराएं मनाई जाती हैं। 

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