करतारपुर कॉरिडोर क्या है? कहाँ है? इसका महत्व Kartarpur Corridor project in Hindi

करतारपुर कॉरिडोर क्या है? कहाँ है? इसका महत्व Kartarpur Corridor project in Hindi

दोस्तों आज हम बात करेंगे करतारपुर कॉरिडोर के बारे में, और जानेंगे की असल में करतारपुर कॉरिडोर है क्या? क्योंकि आजकल समाचार में इसके बारे में काफी कुछ सुनने को मिल रहा है, तो दोस्तों शुरू करते है।

इससे पहले हम करतारपुर कॉरिडोर के बारे में जाने, उससे पहले हम बात करेंगे करतारपुर साहिब की।  

करतारपुर साहिब

करतारपुर साहिब सिखों का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जो पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है, यह भारत के पंजाब के गुरदासपुर शहर के डेरा बाबा नानक से तीन से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, और लाहौर से तक़रीबन 120 किमी की दूरी पर है।

यह तीर्थ स्थल सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी के जन्म स्थल के रूप में जाना जाता है, और यहीं पर उनका निधन भी हुआ था, बाद में उनकी याद में यहां पर गुरुद्वारा बनाया गया था, गुरुद्वारा सफेद रंग के पत्थरों से निर्मित है, जो देखने में बहुत ही खूबसूरत नजर आता है। इस गुरुद्वारे के अंदर एक कुआं भी है, मान्यता के अनुसार, यह गुरु नानक देव जी के समय से है। 

सन 1522 में सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक, करतारपुर आए थे, और उन्होंने अपनी ज़िंदगी के अंतिम 17-18 साल यही पर गुज़ारे थे, और सन 1539 को इसी गुरुद्वारे में उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांस  ली थी।

बाद में रावी नदी में आयी भयंकर बाढ़ के कारण इसका काफी नुक्सान भी हुआ था, 1920-29 के बीच इस गुरुद्वारे का पुनर्निर्माण महाराज पटियाला ने कराया था, तब इस पर 1 लाख 35 हजार 600 रुपये का खर्च आया। 

गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक

देश की सीमा के एक तरफ गुरुद्वारा करतारपुर साहिब है, तो वहीं बॉर्डर के इस पार गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक है। यह वही स्थान है जहां गुरु नानक देव जी ने अपनी पहली यात्रा के बाद ध्यान लगाया था। यह गुरुद्वारा गुरदासपुर में है और भारत-पाकिस्तान के बॉर्डर से सिर्फ 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 

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लगभग चार किलोमीटर दूर गुरु नानक देव जी ने करतारपुर की स्थापना की थी और अपनी सभी यात्राओं के बाद गुरु नानक देव जी करतारपुर में ही रहने लगे थे, करतारपुर गुरूद्वारा डेरा बाबा नानक से दिखाई देता है।

यह वही स्थान है, जहां गुरु अर्जुन देव जी ने डेरा बाबा नानक पहुंचने के बाद बाबा धर्म दास की शोकसभा में कीर्तन किया था। इस कीर्तन स्थान पर आज गुरु ग्रंथ साहिब सुशोभित हैं।

करतारपुर कॉरिडोर 

करतारपुर कॉरिडोर भारत और पाकिस्तान का बॉर्डर कॉरिडोर है, जो की दोनों देशो की सहमति पर बनाया जाना है, यह भारत और पाकिस्तान में स्थित दो सिख मंदिरों को जोड़ता है, यह दोनों मंदिर भारत के पंजाब जिले और पाकिस्तान के करतारपुर में स्थित है, यह स्थान लगभग भारत पाकिस्तान बॉर्डर से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर है, कुछ समय पहले से दोनों देशों के प्रधानमंत्रियो द्वारा इस स्थान को तीर्थ यात्रियों के लिए खोले जाने के लिए सहमति पर चर्चा हो रही है। 

क्योंकि काफी समय से सिख समुदाय द्वारा इस पवित्र स्थल के दरवाज़े भारतीयों के लिए खोले जाने के लिए अपील की जा रही थी, सन 2018 में पाकिस्तान सरकार सिख समुदाय को इस तीर्थ स्थल के दर्शन करने हेतु मंदिर तक कॉरिडोर बनाने के लिए तैयार हो गया, जिसके अनुसार भारतीयों से बिना वीज़ा के पाकिस्तान की सीमा में दर्शन करने के लिए प्रवेश दिया जा सकेगा, और भारतीय सिख समुदाय के लोग अब आसानी से गुरु नानक देव के इस स्थल तक पहुंच सकते हैं।

इसी के चलते प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी पाकिस्तान में स्थित श्री करतारपुर साहिब को जाने वाले करतारपुर कॉरिडोर का आठ नवंबर को उदघाटन करेंगे।

1999 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जब लाहौर बस यात्रा की थी, तब पहली बार करतारपुर साहिब कॉरिडोर को बनाने का प्रस्ताव दिया था, उसके 20 साल बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा में आया है। भारत-पाकिस्तान के बँटवारे के समय यह गुरुद्वारा पाकिस्तान में चला गया था। तभी से हिंदुस्तान से जाने वाले भक्तों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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अभी तक भारत सरकार ने भारतीय सीमा के नज़दीक एक बड़ा टेलीस्कोप लगाया हुआ है, जिसके माध्यम से तीर्थयात्री करतारपुर गुरुद्वारे के दर्शन करते हैं। करतारपुर कॉरिडोर के बनने से सिख समुदाय के लोग अब आसानी से दर्शन कर पाएंगे अब उनका सालों का इंतज़ार समाप्त हो जाएगा, इस साल नवंबर 2019 में गुरु नानक जी का 550वां जन्म दिवस पर्व मनाने के लिए करतारपुर कॉरिडोर को भारतीय सिख भक्तो के लिए खोल दिया जायेगा।   

इस कॉरिडोर का निर्माण डेरा बाबा नानक जो पंजाब के गुरुदासपुर में है, वहां से लेकर अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर तक बनाया जायेगा। यह बिलकुल एक बड़े धार्मिक स्थल के जैसा ही होगा।  यह कॉरिडोर लगभग 3 से 4 किमी का होगा और इसको बनाने में दोनों देशों की सरकार मदद करेंगी। करतारपुर कॉरिडोर के बनने से तीर्थयात्री बिना वीज़ा गुरुद्वारे के दर्शन करने के लिए जा सकेंगे एवं दर्शन करने लिए एक स्लिप या टिकट का प्रावधान भी होगा, जिससे अनुसार शाम तक दर्शन करके उन्हें भारत वापिस लौटना होगा, भारत पाकिस्तान की सहमति के समय ऐसा प्रस्ताव रखा गया था।  

इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसके बनने से भारत और पाकिस्तान के संबंधों में सुधार आएगा। इतिहास में ऐसा प्रथम बार देखने को मिलेगा जब बिना रोक-टोक के लोग बॉर्डर पार करेंगे, साथ ही पाकिस्तान और पंजाब में टूरिज़्म को भी काफी बढ़ावा मिलेगा, कहा जा रहा है कि यात्रियों के आने-जाने से वहां पर आस-पास की प्रॉपर्टी की कीमतों में भी इज़ाफा होगा। 

समाचार के अनुसार करतारपुर कॉरिडोर के लिए तीर्थयात्रियों का ऑनलाइन पंजीकरण शुरू हो गया है, जो भी यात्री दर्शन करने के इच्छुक है वो वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन फॉर्म भरकर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते है, गुरु नानक देव की 550वीं जयंती के उपलक्ष में श्रद्धालुओं का पहला जत्था 5 नवंबर और दूसरा जत्था 6 नवंबर 2019 को रवाना होगा।

संभावना है की पाकिस्तान सभी तीर्थयात्रियों से 20 डॉलर का शुल्क लेने पर जोर दे रहा है, जबकि भारत सरकार इस का विरोध कर रही है, भारत ने पाकिस्तान से तीर्थयात्री से किसी भी प्रकार का शुल्क न लेने के लिए की मांग की है।

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कुछ रोचक तथ्य

  • लोगो की माने तो गुरु नानक देव जी ने करतारपुर गुरुद्वारे में ही सिख धर्म की स्थापना की थी, और उनका पूरा परिवार भी यही रहता था।
  • रावी नदी के पास उन्होंने एक नगर बसाया और यहीं पर खेती कर ‘नाम जपो, किरत करो और वंड छको’ (नाम जपों, मेहनत करों और बांटकर खाओं) का उपदेश सभी को दिया।
  • इसी गुरुद्वारे से लंगर की नीव रखी गयी क्योंकि कहा जाता है, गुरु नानक साहब के पास जो भी आता था, वो उसको बिना खाए जाने नहीं देते थे। 
  • करतारपुर गुरुद्वारे में गुरु नानक देव जी की समाधि और कब्र दोनों अब भी मौजूद हैं, समाधि गुरुद्वारे के अंदर है, जब की कब्र बाहर है। 
  • गुरुनानक जी ने करतारपुर नगर की स्थापना की और वहां एक धर्मशाला भी बनवाई थी, जिसे आज करतारपुर साहिब गुरुद्वारा के नाम से जाना जाता है। 
  • अपनी शिक्षाओं को फैलाने के लिए उन्होंने दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व में यात्रा की। 
  • उनकी शिक्षाओं को 974 भजनों के रूप में अमर किया गया, जिसे ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ धार्मिक ग्रंथ के नाम से जाना जाता है। 
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