भारत में भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता Freedom of Speech & Expression in India Hindi

आज हम बात करेंगे भारत में भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता Freedom of Speech & Expression in India Hindi

हमारा भारत देश विविधताओं का देश है। यहाँ भांति भांति के लोग पाए जाते हैं और उन्हीं के होने में हैं – अलग-अलग प्रकार के चेहरे, बोलियां, संस्कार, संस्कृति, स्वभाव, जीवन शैली, रहन-सहन, खाना-पीना और भी ना जाने बहुत कुछ।

पर हमारे हिंदुस्तान की खूबसूरती इसी बात में है कि इतनी भिन्नता के साथ भी अनेकता में एकता वाली बात है। यही सुंदरता है भारतीय होने की, पर सबसे मजेदार एवं रोचक बात यह है कि इतने अलग अलग प्रकार के लोगों के साथ जो बात सबसे ज्यादा उभर कर आती है, जो बात सबसे अहम है, वह है सब के विचार।

भारत में भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता Freedom of Speech & Expression in India Hindi

विचार असल में होते क्या है? विचार दरअसल एक व्यक्ति के चरित्र की पहचान होती है, विचार जिंदा है तो मनुष्य जिंदा है। विचारों के कारण ही एक व्यक्ति की शख्सियत बनती है या बिगड़ती है। अगर विचार अच्छे होंगे शुद्ध होंगे निर्मल निश्चल होंगे तो जीवन भी सुखमय होगा।

सभी आसपास के लोग भी आपसे स्नेह एवं प्रेम रखेंगे, दुनिया सलाम करेगी, कठिन से कठिन परिस्थितियों में, मुश्किलों के हालात में भी अगर एक इंसान जिंदा रह पाता है, तो वह अपनी सकारात्मक सोच के कारण ही रह पाता है।

विचार दरअसल सोच है, सोच जो हमारे दिमाग में चलती रहती है, सोच से ही जीवन बिखरता है और बनता ।है अगर वहीं दूसरी ओर आपके विचार खराब होंगे घुटन और नकारात्मकता से भरे होंगे, तो कितना ही कुछ कर ले फिर भी जीवन में आप का कभी भला नहीं हो पाएगा, आप बस दुखों में ही डूबे रहेंगे।

फिर विचारों से भी ऊपर बात आती है विचारों की अभिव्यक्ति की!! बिल्कुल, जो भी आपके विचार हैं आपको उनकी अभिव्यक्ति करनी आनी चाहिए, मतलब अगर आपके पास अच्छे से अच्छे विचार हैं आपकी सोच अच्छी है पर आप उन शब्दों को बोल नहीं पा रहे हैं तो सब बेकार है। अर्थात आपको आपके विचारों को अभिव्यक्त करना आना चाहिए।

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आपको अपनी सोच के बारे में बताना आना चाहिए, आप क्या सोचते हैं आपकी ज़ुबान पर आना चाहिए, तभी बात बनेगी। मतलब सीधे शब्दों में कहें तो दिल की बात जुबान पर आनी चाहिए।

फिर हम आए इस बात पर कि भारत में विचारों की अभिव्यक्ति पर कितनी स्वतंत्रता है, तो जवाब मिला जुला होगा। थोड़ा खट्टा थोड़ा मीठा होगा!! दरअसल सच्ची बात कहें तो हमारे देश में विचारों की अभिव्यक्ति पर कोई जबरन रोक-टोक नहीं है, आपके जो मन की बात है वह आप कह सकते हैं जिससे चाहे उससे कह सकते हैं, किसी पर भी कोई प्रकार की जबरदस्ती नहीं है, पूरा खुलापन है विचारों का।

आप अपने मन की बात बिना रोक-टोक अभिव्यक्त कर सकते हैं पूरी स्वतंत्रता है इस बात की!! परंतु कभी-कभी कुछ लोग इस स्वतंत्रता का गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं और देश में अशांति फैलाने में जुटे रहते हैं। दरअसल होता क्या है कि विचारों की अभिव्यक्ति करने का भी एक अंदाज होता है एक तरीका होता है, विचारों को सही प्रकार सही ढंग से व्यक्त करना भी एक कला है।

कभी-कभी लोग अच्छी सोच को भी गलत शब्दों में डालकर बोल देते हैं, उनकी सोच या उनकी मंशा गलत नहीं होती है बस उनका अंदाज उनका तरीका और कभी-कभी बस वक्त भी गलत हो जाता है। ऐसे में होता क्या है कि बेचारा व्यक्ति बुरी परिस्थितियों में फंस जाता है और कटाक्ष एवं मजाक का पात्र बन जाता है।

फिर आते हैं वह लोग जो जानबूझकर कड़वी बात करते हैं, जानते हुए भी घटिया हरकतें करते हैं। ऐसे लोग भड़काऊ उत्तेजक बयान बाजी करके नकारात्मकता फैलाने की कोशिश करते हैं, ऐसे में होता यह है कि जो लोग इन सब चीजों से अनजान है मासूम है वह इन सब का आकस्मिक शिकार बन जाते हैं और कभी-कभी अपने आसपास के लोगों से झगड़ा कर बैठते हैं।

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कुछ लोगों का तो मकसद ही होता है नकारात्मकता का माहौल पैदा करना और इन मंसूबों में वह कामयाब हो जाते हैं क्योंकि काफी लोग इन खराब लोगों की घटिया दर्जे की राजनीति से अनजान रहते हैं। देश में, मुल्क में तो हमेशा ही मुहब्बत, प्रेम की लहर होनी चाहिए और सकारात्मकता फैलाने के लिए हमारे विचार सबसे बड़ा जरिया होते हैं, तो बस इन्हीं विचारों को ढंग से नाप तोल कर व्यक्त करें तो ही बेहतर होगा।

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