स्टैच्यू ऑफ यूनिटी – सरदार पटेल Statue of Unity Details in Hindi

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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी – सरदार पटेल Statue of Unity Details in Hindi

यह स्मारक भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और प्रथम गृह मंत्री “सरदार वल्लभ भाई पटेल” को समर्पित है। यह उनकी विशाल मूर्ति है जिसे गुजरात के भरूच जिले के निकट नर्मदा बांध के पास 3.2 किलोमीटर दूर साधु बेट नामक द्वीप पर बनाया जा रहा है। बनने के बाद यह चीन की प्रसिद्ध “स्प्रिंग टेंपल बुद्ध” मूर्ति जो कि 152 मीटर है, से भी अधिक हो जाएगी।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी – सरदार पटेल Statue of Unity Details in Hindi

“स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी” मूर्ति अभी निर्माणाधीन है और शीघ्र ही इसका लोकार्पण किया जाएगा। यह 182 मीटर (597 फीट) ऊंची होगी। पूरा होने के बाद यह विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति होगी। इस मूर्ति को कंक्रीट और स्टील से बनाया जा रहा है।

इसका अनावरण तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2018 को सरदार वल्लभभाई पटेल के 138वें जन्मदिवस पर करेंगे। भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि सरदार वल्लभ भाई पटेल को सदैव पंडित जवाहरलाल नेहरू के पीछे रखा गया और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान नहीं मिली। यह मूर्ति बनने के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।

स्मारक की आधारशिला Memorial foundation of Statue of Unity

इस भव्य स्मारक (मूर्ति) की आधारशिला 7 अक्टूबर 2010 को रखी गई थी। सरदार वल्लभभाई पटेल एक किसान परिवार से संबंध रखते थे। वह जड़ों से जुड़े हुए व्यक्ति थे। इसलिए इस विशाल मूर्ति को बनाने के लिए देश भर के किसानों ने अपने पुराने औजार से लोहा दिया है।

5 लाख किसानों से लोहा एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया है। 6 लाख से अधिक किसानों ने 5000 मीट्रिक टन लोहे उपलब्ध करवाया है। यह मूर्ति बनाने के लिए स्वराज प्रार्थना पत्र लिखा गया जिसमें 2 करोड़ों लोगों ने लोगों ने हस्ताक्षर किए।

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यह हस्ताक्षर अभियान विश्व का सबसे बड़ा हस्ताक्षर अभियान था। 15 दिसंबर 2013 को “रन फॉर यूनिटी” मैराथन का आयोजन किया गया। स्मारक को नर्मदा बांध के पास 3.2 किलोमीटर दूर साधु बेट नामक द्वीप पर बनाया जा रहा है।

स्मारक की विशेषताएं Characteristics of the Monument Statue of Unity

स्मारक पर पहुंचने के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। इस पर कांस्य लेपन किया जाएगा। मूर्ति में फ्लोर छज्जा और छत है। स्मारक में बगीचा, संग्रहालय एवं प्रदर्शनी भी बनाई जाएगी। सरदार पटेल के जीवन से जुड़े हुए योगदानों को दिखाया जायेगा।

इस स्मारक पर 500 फीट ऊंचा ऑब्जर्वर डेक भी बनाया जाएगा जिसमें 200 से अधिक लोग एकसाथ मूर्ति देख सकेंगे। नाव के द्वारा मूर्ति तक दर्शक जा सकेंगे। इस स्मारक में जलपान गृह, दुकाने, गिफ्ट शॉप, खाने पीने की दुकाने व अन्य चीजें शामिल होगी जिससे पर्यटको को हर तरह की सुविधा प्राप्त हो सके।

स्मारक में आने वाला खर्च और निर्माण Statue of Unity Expenditure and construction in the monument

इस बड़ी और भव्य इमारत को बनाने के लिए खर्च भी बहुत अधिक हो रहा है। 2012- 13 में 100 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। 2014-15 में 500 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इस परियोजना की कुल लागत 2063 करोड़ों रुपए होगी।

भारतीय कंपनी लार्सन एंड टर्बो ने स्मारक की आकृति निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी ली है। चीन के 100 से अधिक कारीगरों को इसे बनाने के लिए बुलाया गया है। स्मारक का स्टील फ्रेमवर्क बनाने के लिए लार्सन एंड टुब्रो ने मलेशिया स्थित एवरसेंडाई नामक कंपनी से समझौता किया है।

यह मशहूर कंपनी दुबई के प्रसिद्ध बुर्ज खलीफा और बुर्ज अल अरब जैसी जानी-मानी इमारतें बना चुकी है। “स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी” स्मारक को बनाने के लिए 2400 मजदूर दिन रात काम कर रहे हैं।

स्मारक का विरोध

किसानों ने इस स्मारक के लिए अधिग्रहित की गई भूमि का विरोध किया है। पर्यावरणविदों ने कहा है कि इस परियोजना की शुरुआत पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी के बिना ही की गई है। इस योजना पर दो अरब रुपयों की भारी-भरकम लागत आई है।

इसका भी विरोध अनेक लोगों ने किया है। उनका कहना था कि यह धन महिला सुरक्षा, शिक्षा, कृषि योजनाओं पर खर्च करना चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने इस परियोजना की आलोचना की है। गुजरात के केवाडिया, कोठी, वघाडिया, लिम्बडी, नवगाम तथा गोरा ग्राम के किसानो ने मूर्ति निर्माण का विरोध किया है।

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