हिन्दू वैवाहिक रस्म मेहंदी Hindu Wedding Ritual Mehendi in Hindi

हिन्दू वैवाहिक रस्म मेहंदी Hindu Wedding Ritual Mehendi in Hindi

विवाह से पूर्व की रस्मों में ‘मेहंदी’ अत्यधिक महत्वपूर्ण है। भारतीय शादियों में रिवाजों और परंपराओं की विशेष भूमिका होती है, जो कि विवाह से पूर्व की जाने वाली ‘मेहँदी’ रस्म में भी देखने को मिलती है।

हिन्दू वैवाहिक रस्म मेहंदी Hindu Wedding Ritual Mehendi in Hindi

भारतीय विवाह में मेहंदी की रस्म क्या है?

मेहँदी किसी भी भारतीय विवाह का अभिन्न अंग है, जिसके बिना उस विवाह की कल्पना करना भी मुमकिन नही है। इसके साथ ही साथ मेहँदी को किसी भी दुल्हन या विवाहिता द्वारा किये जाने वाले 16 श्रृंगारों में से एक माना जाता है और मेहँदी के बिना दुल्हन का श्रृंगार अधूरा माना जाता है। मेहँदी की रस्म शादी होने से कुछ देर पहले ही अदा की जाती है।

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इसका महत्व

इसकी मान्यता के अनुसार, जब एक बार दुल्हन के हाथों में मेहँदी लग जाती है, उसके बाद वह घर से बाहर नही जाती है। मेहँदी अक्सर दुल्हन के परिवार द्वारा आयोजित की जाती है और यह एक निजी रस्म है, जो घर के कुछ खास सदस्यों, मित्रों तथा रिश्तेदारों की उपस्थिति में अदा की जाती है। हालाँकि कुछ लोग इसे बहुत ही धूम धाम के साथ मनाते हैं, यह उनकी व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है। 

इतिहास

मेहँदी मनुष्य द्वारा रचित शारीरिक कला के प्राचीनतम रूपों में से एक है। हिंदी और अरबी शब्द ‘मेहँदी’ वास्तव में संस्कृत भाषा के शब्द ‘मेंधिका’ से निकला है। मेहँदी के पौधे को ही संस्कृत में मेंधिका कहा जाता है। सर्वप्रथम मेहँदी के उपयोग के स्त्रोत हमे कांस्य- युग से मिले हैं।

भारतीय प्रायद्वीप तथा इसके आस पास, साज- सज्जा हेतु मेहँदी का प्रयोग वैदिक काल के पहले से होता चला आ रहा है। भारत के रास्ते से ही मेहँदी की यह कला अनेक स्थानों जैसे कि मिस्र, एशिया तथा मध्य- पूर्वी देशों में फ़ैल गई।

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मेहँदी का प्रयोग समस्त विश्व में अलग-अलग रीति-रिवाजों तथा रस्मों में बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है, विशेषकर हिन्दू धर्म में। हिंदुओं में मेहँदी को एक स्त्री के सोलह सिंगारों में से एक प्रमुख सिंगार माना गया है, जिसके बिना उसकी ख़ूबसूरती अधूरी- सी मानी जाती है।

पारंपरिक रूप से, मेहँदी का लेप सूखी हुई मेहँदी की पत्तियों को पीस कर, उसमे नींबू का रस, पानी इत्यादि मिलाकर रात भर के लिए रख दिया जाता है। सुबह इसे प्लास्टिक के कोन इत्यादि में भरकर आसानी से हाथों तथा पैरों में अलग अलग किस्म की डिज़ाइन के अनुरूप लगा दिया जाता है। 

कैसे मेहेंदी की रस्म की जाती है?

सामान्य तौर पर, मेहँदी की रस्म विवाह से एक दिन पूर्व, सुबह के समय निभाई जाती है। दुल्हन तथा दूल्हे दोनों के घर में यह रस्म अलग-अलग निभाई जाती है। पारंपरिक रूप से यह रस्म महिलाओं के द्वारा मनाई जाती है, और उस स्थान पर पुरुषों की अनुपस्थिति रहती है।

इस रस्म के दौरान लोग चमकीले वस्त्र न पहनकर, सादे तथा हल्के रंगों वाले वस्त्र पहनते हैं। पूरे समारोह स्थल को अनेक तरह के फूलों तथा झालरों से सजाया जाता है। दूल्हे के हाथों में मेहँदी लगाना कोई अनिवार्य नही होता है, पर फिर भी शगुन के रूप में उसके हाथ अथवा पैर में मेहँदी की एक बिंदु बना दी जाती है।

इस आयोजन के दौरान दूल्हे के बालों में तेल भी लगाया जाता है। दुल्हन के घर पर मेहँदी दूल्हे के परिवार की ओर से अन्य कुछ तोहफों, फल, मेवों और मिठाई के साथ ही भेजी जाती है। घर की सारी स्त्रियाँ एक स्थान पर एकत्रित हो जाती हैं और फिर दुल्हन के हाथ में मेहँदी घर की ही किसी रिश्तेदार या किसी पेशेवर मेहँदी लगाने वाली स्त्री से लगवाई जाती है।

दुल्हन की इच्छा एवं पसंद के अनुसार उसके दोनों हाथों में दोनों तरफ कोहनी तक, दोनों पैरों में घुटने तक मेहँदी लगाई जाती है। घर की बुज़ुर्ग महिलाएं एक जगह एकत्रित होकर ढोलक तथा अन्य वाद्य यंत्रों की धुन पर मेहँदी से जुड़े पारंपरिक गीत गाती हैं और नृत्य करती हैं। इसके बाद दुल्हन की सहेलियां तथा अन्य रिश्तेदार भी अपने अपने हाथों पर मेहँदी लगवाती हैं। 

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पारंपरिक मेहँदी रस्म अपने आप में ही अनेक प्राचीन विश्वासों को समेटे हुए हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे तक आते जा रहे हैं। दुल्हन के हाथों में लगाई गई मेहँदी में कहीं पर दूल्हे का नाम छिपा कर लिख दिया जाता है। विवाह के बाद दूल्हे को यह नाम दुल्हन की मेहँदी में ढूंढना होता है।

अक्सर यह दुल्हन और दूल्हे के बीच की जमी बर्फ को पिघलाने का काम करती है, विशेषकर जब उनका विवाह प्रेम विवाह न होकर माता-पिता द्वारा तय किया गया हो। ऐसा भी कहा जाता है, दुल्हन के हाथ में रची गई मेहँदी का रंग जितना अधिक गाढ़ा होगा, दुल्हन को अपने ससुराल वालों और विशेषकर अपने पति से उतना ही अधिक प्यार मिलेगा। 

विवाह से पूर्व दुल्हन के हाथों में मेहँदी लगवाने का कारण सिर्फ और सिर्फ उसकी खूबसूरती बढ़ाना और साज सज्जा नही है, वरन इसके कुछ गहन वैज्ञानिक कारण भी हैं। मेहँदी को इसके शीतल गुण स्वभाव के लिए भी जाना जाता है। और इसी कारण जब यह मेहँदी दुल्हन के हाथ और पैर में लगाई जाती है, तो यह पूरी विवाह प्रक्रिया के दौरान दुल्हन को शांत रखकर उसे राहत पहुंचाने का काम भी करती है। 

भारतीय विवाहों में ऐसी अनेकों रीति- रिवाज और रस्मे होती हैं , जिन्हें शादी से कुछ दिन पूर्व से लेकर शादी के कुछ दिनों बाद तक पूरा किया जाता है। यह खूबसूरत रिवाज और रस्में पूरे परिवार और रिश्तेदारों को एक साथ एक ही जगह पर ले आती हैं, फिर भले ही वे कितनी ही दूर क्यों ना रहते हों।

अनेकों रस्मों और रिवाजों को पूरा करने के बहाने ही सही दोनों परिवारों के लोग, रिश्तेदार और मित्र साथ मिलकर इस विवाह का जश्न मनाते हैं और नए वैवाहिक जोड़े को अनेक प्रकार की भेंट और आशीर्वाद देते हैं। मेहँदी की रस्म एक ऐसी रस्म है, जो किसी भी भारतीय विवाह का एक अभिन्न अंग है। यह खुशियों और रंगों से भरी रस्म होती है, जिसमे सभी लोग गाते हैं, नाचते हैं और ठहाके लगाते हैं। मेहँदी लगने के तुरंत बाद ही शादी की तैयारियां को और अधिक गति मिल जाती है।

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मेहँदी की रस्म सिर्फ उत्तर और पूर्वी भारत में हिन्दू विवाहों में ही महत्वपूर्ण नही होती है, बल्कि मुस्लिम परिवारों के विवाह में भी मेहँदी की अहम भूमिका होती है। मेहँदी की यह रस्म भारत से जुड़े देश जैसे पाकिस्तान और नेपाल के साथ ही साथ मध्य- पूर्व के अरब देशों में भी अत्यधिक प्रचलित है। 

यद्यपि पूर्व में मेहँदी की यह रस्म भारत के कुछ राज्यों जैसे कि राजस्थान, गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब आदि के विवाहों में मनाई जाती रही है। परंतु, धीरे-धीरे ही सही अब मेहँदी का प्रसार पूरे भारत में हो रहा है।

अधिक से अधिक संस्कृतियां विवाह से पूर्व अदा की जाने वाली मेहँदी रस्म को अपना रहे हैं, जिसके पीछे साज सज्जा तथा इससे जुड़े अन्य कारण हैं। मेहँदी की यह रस्म शोभा, उत्सव तथा उत्साह का प्रतीक बन चुकी है और यह विवाह से पूर्व लड़कियों के आपस में साथ इकठ्ठा होकर हंसी- ठिठोली करने का बहाना भी है।

Help Source- हिन्दू वैवाहिक रस्म मेहंदी Hindu Wedding Ritual Mehendi in Hindi

https://en.wikipedia.org/wiki/Mehndi

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