मातृ दिवस पर भाषण (मदर्स डे) Speech on Mothers Day in Hindi

मातृ दिवस पर भाषण (मदर्स डे पर स्पीच) Speech on Mothers Day in Hindi

इस आर्टिकल में हमने माँ के महत्व पर एक सुन्दर सा भाषण लिखा है। इस माँ पर स्पीच को आप मातृ दिवस के अवसर पर अपने स्कूल, कॉलेज और घर के कार्यक्रम में बोल सकते हैं।

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मातृ दिवस पर भाषण (मदर्स डे पर स्पीच) Speech on Mothers Day in Hindi

आदरणीय प्रिंसिपल सर, सभी शिक्षकगण, सहपाठियों और अभीभावकों को मेरा नमस्कार। मैं आप सभी का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ।

मेरा नाम…..है. मैं कक्षा… में अध्ययन करता हूं। आज हम सभी “मातृ दिवस” मनाने के लिए एकत्रित हुए है। मदर्स डे या “मातृ दिवस” हर साल मई महीने के दूसरे रविवार को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस अवसर पर मैं एक भाषण प्रस्तुत कर रहा हूँ। विश्व में 40 से अधिक देश “मातृ दिवस” को बड़ी खुशहाली से मनाते है।

आधुनिक “मातृ दिवस” की शुरुवात वर्जीनिया, अमेरिका में रहने वाली एना जार्विस ने की थी। अमेरिका समेत कई देशो में इस दिन अवकाश रहता है। इतिहास में “मातृ दिवस” की शुरुवात ग्रीस से हुई थी जो अपने देवताओं की माँ की पूजा करते थे। इसके अतिरिक्त प्राचीन रोमवासी मेट्रोनालिया नामक त्यौहार मनाते थे जिसमे माँ को उपहार दिया जाता था। 2018 का “मातृ दिवस” 13 मई 2018 को मनाया गया था।

किसी भी व्यक्ति के जीवन में माता का स्थान सबसे अधिक होती है क्यूंकि माता ही हमे जन्म देती है। पूरे 9 महीने अपने गर्भ में रखकर असहनीय पीढ़ा पाकर माँ हमे जन्म देती है। यदि माता न हो तो हमारा भी कोई वजूद नही होगा। “मातृ दिवस” के अवसर हम सभी अपनी माता के प्रति प्यार और सम्मान प्रकट करते है। उसे धन्यवाद देते है की उसने हमे इस दुनिया में आने का मौका दिया।

हमे चलना, बोलना, लिखना पढ़ना सिखाया। खुद अनेक दिक्कते सहकर हमारी अच्छी परवरिश की। हम सभी के जीवन में माता का स्थान कभी कम नही हो सकता है। भारत की संस्कृति में माता को पूजनीय माना जाता है, पिता को आकाश का स्थान दिया गया है और माता को पृथ्वी का। यदि पिता बच्चो को डांटता है तो माँ प्यार और दुलार करती है। बच्चे अपने पिता से शायद कोई बात छुपा ले पर माता से सारी बाते बताते है।

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सभी बच्चे अपनी माता को पिता से अधिक प्यार करते है। हम सभी का धर्म है की अपनी माता की देखभाल करे, उसे खुश रखे, उसकी सेवा करे। आज आधुनिक समय में बच्चे अपना कर्तव्य भूलते जा रहे है। अनेक बच्चे तो माता का अपमान करते रहते है, बहस और झगड़ा करते है। ऐसा बिलकुल नही करना चाहिये। बड़े आश्चर्य की बात है की आज की उच्च पढ़ी लिखी युवा पीढ़ी अपने वृद्ध माता-पिता का सम्मान नही करती है। वृद्ध हो जाने पर संताने अपनी संतानों को तो बहुत प्यार दुलार करती है, पर वृद्ध माता-पिता अपेक्षित महसूस करते है।

कई लोग तो अपने वृद्ध माँ- बाप को अनाथ आश्रम में जाकर छोड़ देते है। वो ये भूल जाते है यदि माँ-बाप ने उनको इसी तरह अपेक्षित छोड़ दिया होता तो क्या होता। वो भूल जाते है की बचपन में किस तरह एक छींक आ जाने पर माँ चिंतित हो जाती थी, बुखार आ जाने पर दौड़कर बच्चे को अपनी गोद में लेकर डॉक्टर के पास भागती थी, खुद भूखे रहकर माँ हमारे लिए भोजन का इंतजाम करती थी। हमारी गलतियों को पिता से छुपाती थी, पिता की मार से बचाती थी। इस तरह के हजारो उदाहरण दिए जा सकते है जब माँ ने अपने बच्चो की ख़ुशीयों के लिए अपनी ख़ुशी का बलिदान दे दिया। पर आज की आधुनिक युवा पीढ़ी वृद्ध हो जाने पर माँ का ख्याल नही रखती है।

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जैसे ही बेटे की शादी हो जाती है उसका ध्यान अपनी नव विवाहिता पत्नी की तरफ चला जाता है। अनेक बहुवें ससुराल में आते ही सास को ताने देना शुरू कर देती है। बेटा भी अपनी पत्नी का साथ देता है और माँ को अपेक्षित छोड़ देता है। पत्नी से उसका रिश्ता तो कुछ दिन पूर्व ही बना है जिसे बेटा अत्यधिक महत्व देता है।

पर आश्चर्य की बात है की माँ से बेटे का रिश्ता जन्म और खून का होता है जिसे वह कुछ दिनों में भुला देता है। इसलिए दोस्तों कहता हूँ की हम सभी को अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नही मोड़ना चाहिये।

“मातृ दिवस” मनाने का लक्ष्य है की अपने भाग दौड़ भरे व्यस्त जीवन से हम सभी अपनी माता को याद करने का समय निकाले। जिस तरह से आज सभी लोग बहुत व्यस्त है, शहरो में रह रहे बच्चे कई कई दिनों, हफ्तों तक अपनी माँ से बात नही कर पाते है। इसलिए यह दिवस मनाया जाता है जिससे हम अपनी माँ का हाल चाल से सकें।  

इस दिन सभी बच्चे अपनी माँ के लिए अनेक उपहार लाते है। गीत गाकर, स्पीच देकर माँ के प्रति अपनी कृतज्ञता, प्रेम और सम्मान प्रकट करते है। शुभकामनाये देते है। विभिन्न तरह की पार्टी का आयोजन किया जाता है। दुनिया में सभी लोग अपने अपने तरह से इस दिवस को मनाते है। यह दिन पूरी तरह से माँ को समर्पित होता है। कही पर माँ की पूजा की जाती है तो कही पर बच्चे रंग बिरंगे कार्ड बनाकर अपनी भावनाओं को लिखकर माँ को भेंट करते है।

इस दिवस को मनाने का सबसे अच्छा तरीका है की आप पूरा दिन अपनी माँ के साथ बितायें। उन्हें एक रानी जैसा सम्मान दें। इस दिन पूरे परिवार के साथ किसी पिकनिक पर घूमने जा सकते है। फेमिली रीयूनीयन सबसे अच्छा तरीका है।

पूरे परिवार को एकत्र कर सकते है, सभी भाई बहनों और उनके बच्चो को घर पर बुलाना और पार्टी करना सबसे अच्छा रहेगा। सभी पोते- पोतियों को देखकर आपकी माँ जरुर खुश होगी। माँ के पसंद का खाना बनाकर भी आप उनको खुश कर सकते है। हमे अपने बच्चो को भी माँ की सम्मान करने को कहना चाहिये।

“मातृ दिवस” के इस महान अवसर पर मैं एक कविता पढ़ना चाहूँगा –

घुटनों से रेंगते-रेंगते,
कब पैरों पर खड़ा हुआ,
तेरी ममता की छाँव में,
जाने कब बड़ा हुआ।।
काला टीका दूध मलाई
आज भी सब कुछ वैसा है,
मैं ही मैं हूँ हर जगह,
माँ प्यार ये तेरा कैसा है?
सीधा-साधा, भोला-भाला,
मैं ही सबसे अच्छा हूँ,
कितना भी हो जाऊ बड़ा,
माँ!मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ।।

आशा है आपको मेरा भाषण पसंद आया होगा। इन्ही शब्दों के साथ मैं अपना भाषण समाप्त करता हूँ। धन्यवाद!

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