पंजाब के लोहड़ी त्यौहार पर निबंध Lohri Festival Essay in Hindi

दोस्तों, आज के इस लेख में हम आपको पंजाब के लोहड़ी त्यौहार पर निबंध (Essay on Lohri festival in Hindi) हिन्दी में लिखा है। ये लेख उन छात्रों के लिए है, जो अभी स्कूल, कॉलेज या किसी यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे है। हमने इस अनुच्छेद में लोहड़ी के बारे में सभी जानकारी को विस्तार से बताया है। इसके बारे में जानने के लिए लेख को पूरा पढ़े।

आईये शुरू करते हैं – लोहड़ी त्यौहार पर निबंध Lohri Festival Essay in Hindi

प्रस्तावना Introduction ( पंजाब का लोहड़ी त्यौहार पर निबंध – 1200 Words)

हम सभी जानते है कि लोहड़ी पंजाबी लोगो का एक बहुत ही प्रसिद्ध त्यौहार है। वैसे तो भारत में इस त्यौहार को सभी लोग मनाते है लेकिन ये विशेष रूप से पश्चिमी और उत्तरी भारत में बहुत उल्लास के साथ मनाते है। उत्तर भारत में जैसे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हिमांचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू में लोहड़ी बहुत ही उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

चूँकि लोहड़ी का त्यौहार पंजाबियों के लिए बहुत ही ख़ास होता है इसीलिए दुनिया में अलग-अलग जगहों पर रहने वाले पंजाबी इस त्यौहार को बहुत ही उत्साह के साथ मानते है। लोहड़ी त्यौहार, को सिन्धी लोग लाल लोई (Lal Loi) के नाम से मनाते हैं। भारत में यह कुछ उत्तरी राज्यों जैसे हरयाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश में भी धूम धाम से मनाया जाता है परन्तु पंजाब में इसको सबसे ज्यादा मान्यता दिया जाता है।

लोहड़ी कब है? When is Lohri?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आमतौर पर लोहड़ी हर साल 13 जनवरी को मनाई जाती है। अर्थात ये मकर सक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। लोगो का मानना है कि यह त्यौहार दर्शाता है कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ का महीना शुरू होने वाला है और हिन्दू महीना पौष जोकि वर्ष का सबसे ठंडा महीना होता है वो समाप्त होने वाला है। यही कारण है कि बहुत से लोग इस त्यौहार को माघी त्यौहार के रूप में भी मनाते है।

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लोहड़ी त्यौहार का महत्व Significance of Lohri Festival in Hindi

Lohri लोहड़ी सर्दियों के मौसम का अंत दर्शाता है। इसलिए यह एक मौसमी त्यौहार है जो शीत ऋतू के जाने पर मकर संक्रांति के समय मनाया जाता है। यह किसानों के लिए भी एक महत्वपूर्ण त्यौहार और दिन होता है।

आप सभी को पता होगा कि लोहड़ी मुख्य रूप से पंजाबियों का त्यौहार है क्योंकि लोगो का मानना है कि ये त्यौहार एक पंजाबी जिसका नाम दुल्ला भट्टी था। उसकी याद में मनाया जाता है। वैसे तो लोहड़ी मनाने के और भी कई कारण है जिनके बारे बारे में हमने नीचे विस्तार से बताया है।

वैसे तो पंजाबी इस त्यौहार हर साल 13 जनवरी को पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाते है। बहुत से लोगो का यह भी मनाना है कि यह त्यौहार उस दिन मनाया जाता है जब दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती है। यह त्यौहार भारत में हर जगह मनाई जाती है लेकिन कई लोग इस त्यौहार को अलग नामो से मनाते है।

जैसे तमिलनाडु में पोंगल, आंध्र प्रदेश में भोगी, उत्तर प्रदेश और बिहार में मकर संक्रांति, कर्नाटक में और असम में बिहू के रूप में मनाते हैं।  इसके अलावा सिंधी समुदाय के लोग इस त्योहार को “लाल लोई” के नाम से मनाते हैं और पंजाबी लोग इसे लोहड़ी के रूप में मनाते है।

लोहड़ी का पारंपरिक गीत Lohri Traditional Song

‘सुंदर मुंदरिये, होए
तेरा की विचारा, होए
दुल्ला भट्टी वाला, होए
दुल्ले दी धी वियाई, होए
सेर शकर पाई, होए’

लोहड़ी का इतिहास व कहानी History of Lohri Festival

अगर लोगो के विश्वास की बात करें, तो लोहड़ी मनाने के पीछे लोग कई कारण बताते है। पुराणों के आधार पर देखा जाए, तो लोगो का मानना यह भी है कि इसे सती के त्याग के रूप में हर साल याद किया जाता है और इस त्यौहार को मनाया जाता है।

इस कथा के अनुसार प्रजापति दक्ष ने सती के पति महादेव शिव का तिरस्कार किया था और अपने जमाता को इस महायज्ञ में शामिल न करने पर प्रजापति दक्ष की पुत्री यानि महादेव की पहली पत्नी सती ने खुद को उस यज्ञ की अग्नि में समर्पित कर दिया था।

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इसके बाद हर साल इसी दिन लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाने लगा। और इसी कारण घर की विवाहित बेटियों को तोहफे दिए जाने लगे और भोजन के लिए भी आमंत्रित किया जाने लगा।

इसके अलावा लोहड़ी मनाने के पीछे एक और ऐतिहासिक कथा भी है। इसे दुल्ला भट्टी के नाम से जाना जाता है। अधिकतर लोग लोहड़ी मानने के पीछे इसी ऐतिहासिक कथा को मान्यता देता है। ये कथा अकबर के शासनकाल की है।

जब अकबर पंजाब सहित कई अन्य राज्यों पर राज करते थे। उन दिनों पंजाब में दुल्ला भट्टी नाम का एक सरदार पंजाब प्रांत में रहता था। लोगो का ऐसा मानना है कि वो रोबिनहुड की तरह गरीब लोगो का मसीहा था और वो उनकी मदद करने के लिए अमीरों को लूटता था। लूट के धन को ज़रूरतमंदों में बाँट देता था। यही कारण था कि लोग उसे पंजाब का नायक मानते थे।

लोगो का ऐसा मानना है कि वह अमीरों को लूटने के अलावा, वो पंजाब के गुलाम बाजार में जबरन लाये जाने वाली हिंदू लड़कियों को भी बचाता था। साथ ही उन हिंदू लड़कियों की शादी हिंदू लड़कों के साथ हिंदू रीति-रिवाज़ों से करवाई जाती थी और साथ ही दहेज़ भी दिया जाता था।

वैसे तो दुल्ला भट्टी एक डाकू था लेकिन उसके द्वारा ग़रीबों के लिए किये जाने वालो कामों से वह सभी पंजाबियों का नायक बन गया। यही कारण है कि हर दूसरे लोहड़ी गीत में दुल्ला भट्टी शब्द का इस्तेमाल किया गया है। और शायद यही वजह है कि लोग लोहड़ी इनकी याद मनाते है।

कुछ लोगो का यह भी मानना है कि लोहड़ी शब्द “लोई” से उत्पन्न हुआ है, जो महान संत कबीर की पत्नी का नाम था। इसके अलावा कुछ लोगों का मानना ​​है कि लोहड़ी शब्द “लोह” से लिया गया है जो कि चपातियों को बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण है।

लोहड़ी उत्सव कैसे मनाई जाती है? How Lohri is Celebrated?

हम सभी जानते है कि लोहड़ी पंजाबियों का एक विशेष त्यौहार है, लेकिन यह त्यौहार पूरे भारत में अन्य त्यौहार की तरह धूमधाम के साथ मनाया जाता है। हर त्यौहार की तरह घर के सभी सदस्य और दोस्त इकट्ठा होकर ख़ुशी और उत्साह के साथ इस त्यौहार को भी मनाते है। इस दिन के अवसर पर लोग मिठाइयाँ बंटवाते है।

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इस त्यौहार पर लोग आग जाते है और आग के चारों ओर पंजाबी लोहड़ी गाते और नाचते हुए लोग गुड़, रेवड़ी, चीनी-कैंडी और तिल आग में फेंकते हैं।

इस दिन के अवसर पर लोग शाम के समय अपने घरो में पूजा समारोह आयोजित करते है। इस समय लोग पूजा अर्चना करके परिक्रमा करते है और ईश्वर से आशीर्वाद लेते है। लोग अपने रीति-रिवाज के अनुसार लोहड़ी के दिन लोग सरसो के साग, गुड़, गजक, तिल, मूंगफली, फूलिया और प्रसाद के साथ मक्की की रोटी जैसे अन्य खाद्य पदार्थ खाते है।

इसके अलावा लोग इस दिन नए कपड़े पहनते है और भांगड़ा भी करते है, जो पंजाब का लोग नृत्य है। किसानो के लिए यह दिन नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। क्योंकि किसान इस दिन अपनी फसल घर लाते है। यह पर्व पंजाब और हरियाण में ज्यादा मनाया जाता है। और इसी दिन को नव वर्ष के रूप में भी मनाते है।

लोहड़ी का आधुनिक रूप Modern form of Lohri festival

पहले के समय में लोग एक दूसरे को गजक गिफ्ट देकर इससे मनाते थे लेकिन समय के बदलाव के साथ लोग भी बदल गए। इस आधुनिक समय में लोग गजक के स्थान पर चाकलेट और केक गिफ्ट देकर मानते है।

पहले की तरह आज भी लोग इस त्यौहार को धूम-धाम से मनाते है लेकिन समय के साथ बहुत से बदलाव आये। लोग बधाई देने के लिए मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल करते है। बधाई संदेश व्हाट्स एप और मेल द्वारा एक दूसरे को भेज देते है।

इसके अलावा बढ़ते प्रदूषण के कारण पर्यावरण के बढ़ते खतरे को लेकर लोग अधिक जागरूक हो गए हैं इसलिए वे अलाव नहीं जलाना पसंद करते हैं। अब लोग लोहड़ी पर अलाव जलाने के लिए पेड़ और पौधों को काटने से बचते हैं। जिससे हमारा पर्यावरण संरक्षित रहे और इसके लिए लोग इस दिन पेड़ लगाकर लोहड़ी मनाते है।

आशा करते हैं आपको लोहड़ी त्यौहार पर निबंध Lohri Festival Essay in Hindi अच्छा लगा होगा।

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