ग्रीनहाउस प्रभाव पर निबंध Essay on Green House Effect in Hindi

इस लेख में आप ग्रीनहाउस प्रभाव पर निबंध Essay Green House Effect in Hindi पढ़ेंगे। इसमें हमने ग्रीन हाउस प्रभाव क्या है, ग्रीन हाउस के प्रकार, ग्रीन हाउस गैस, लाभ, कारण के विषय में पूरी जानकारी दी है।

ग्रीनहाउस प्रभाव पर निबंध Essay on Green House Effect in Hindi

ग्रीनहाउस प्रभाव पृथ्वी के वातावरण को गर्म करने में भूमिका निभाता है। वातावरण में आने वाली लघु-तरंगे या पराबैंगनी किरणें सौर विकिरण के लिए काफी हद तक पारदर्शी होती है, जो पृथ्वी की सतह द्वारा अवशोषित कर ली जाती है।

धरती, सूरज से ऊर्जा प्राप्त करती है, जो पृथ्वी की सतह को गर्म करती है। चूंकि यह ऊर्जा वायुमंडल से गुजरती है,जिससे इसका एक निश्चित प्रतिशत वायुमंडल में बिखर जाता हैं। इस ऊर्जा का कुछ हिस्सा भूमि और समुद्र की सतह द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है।

शेष बचा हुआ 70% जो कि पृथ्वी की ऊष्मा का कारण होता है। पृथ्वी पर संतुलन बनाये रखने के लिए ऊर्जा के कुछ विकिरण वातावरण द्वारा अवशोषित कर लिये जाते है।

ग्रीन हाउस प्रभाव क्या है? What is the Greenhouse Effect in Hindi

इस पूरे ब्रह्मांड में केवल पृथ्वी ही एक मात्र ऐसा ग्रह है, जहां जीवन है। पृथ्वी का वातावरण सौर मंडल के दूसरे ग्रहों के मुताबिक जीवन जीने के लिए बेहद अनुकूल है।

हमारे जीवंत ग्रह के चारों तरफ़ एक ऐसा प्राकृतिक आवरण है, जिसमें कुछ गैसें एक ऐसा तापमान वाला अनुकूल वातावरण बनाती हैं, जिसमें हम रहते हैं।

हरित गृह प्रभाव अथवा ग्रीन हाउस प्रभाव ऐसी ही प्राकृतिक घटना है, जिसके कारण किसी भी ग्रह पर एक निश्चित तापमान जो रहने योग्य आवश्यक हो वह बनता है।

सूर्य जो एक चमकता हुआ तारा है, वह पूरे सौर मंडल में ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना जाता है। सूर्य की रोशनी के कारण ही ग्रहों का आवरण निर्धारित होता है।

जो ग्रह सूर्य के नजदीक है, वह बेहद गर्म होते हैं जैसे कि बुध और शुक्र। और जो ग्रह सूर्य से बहुत ज्यादा दूर है वह बहुत ठंडे होते हैं, जहां पर जीवन ढूंढना असंभव है। इन ग्रहों पर ग्रीन हाउस जैसा कोई प्रभाव नहीं देखा जाता।

ग्रीन हाउस प्रभाव ना होने के कारण सूर्य से दूर के ग्रहों का तापमान लगभग -130 डिग्री सेल्सियस जितना पहुंच जाता है। अगर पृथ्वी पर ग्रीन हाउस प्रभाव की क्रिया ना हो तो जीवन की कल्पना संभव है।

दूसरे शब्दों में ग्रीन हाउस प्रभाव पृथ्वी के वातावरण के तापमान पर असर डालता है। हालाकि कई बार ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण ग्लोबल वार्मिंग जैसी प्राकृतिक तबाही भी देखी जाती है।

सर्वप्रथम जोसेफ फुरियर नामक एक साइंटिस्ट ने 1824 में ग्रीन हाउस प्रभाव के बारे में जानकारी दिया था। लेकिन निल्स गुस्टफ एकहोम ने सबसे पहले ग्रीनहाउस शब्द का उपयोग किया था।

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अगर ग्रीन हाउस प्रभाव के कई लाभ हैं, तो उसकी हानियां भी हैं। यदि किसी चीज की अधिकता हो जाए तो वह हमें फायदा पहुंचाने के बजाय हानि पहुंचाने लगती है। हालांकि ग्रीन हाउस प्रभाव की मौजूदगी बेहद जरूरी है।

लेकिन ग्रीन हाउस गैसें जिसमें मेथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, नाइट्रस ऑक्साइड इत्यादि का समावेश होता है इनके कई दुष्प्रभाव भी हमारे वातावरण पर पढ़ते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप कई बार ग्लोबल वार्मिंग जैसी भयंकर तबाही मच जाती है।

ग्रीन हाउस के विभिन्न प्रकार different types of greenhouses in Hindi

ग्रीन हाउस को ग्लास हाउस भी कहते हैं। इसका उपयोग दुर्लभ क्षेत्रों में खाद्य सामग्रियों जैसे की सब्जी और फल फूल को उगाने के लिए भी किया जाता है।

कुछ ऐसे जगह है, जहां पर सामान्य रूप से खेती कर पाना बेहद कठिन होता है। इसीलिए ऐसी जगह पर अनाजों को उगाने के लिए हरितगृह की एक इमारत बनाई जाती है।

ग्रीन हाउस के विभिन्न प्रकार हैं, जिनके द्वारा अलग-अलग पद्धतियों का उपयोग करके अनाज उत्पादन किया जाता है। ग्रीन हाउस के कुछ मुख्य प्रकार जो नीचे दिए गए हैं-

मिनी ग्रीन  हाउस

यह पद्धति किसी निश्चित जगह या घरों में सब्जियों और फलों को उगाने के लिए बेहद कामगार होती हैं। इसकी सहायता से बिना ज्यादा क्षेत्र घेरे एक छोटे और निर्धारित जगह पर खेती की जा सकती है। रोजाना धूप और पानी मिलने के कारण इस प्रकार उगाई जाने वाली फसलें अच्छी गुणवत्ता वाली होती हैं।

इंडस्ट्रियल ग्रीन हाउस

आज के समय में जो बड़े-बड़े उद्योग और कारखाने अनाजों से खाने पीने के लिए अन्य चीजें बनाते हैं, वे अक्सर इस प्रकार की ग्रीनहाउस पद्धति को अपनाते हैं। सेलुलर पॉलीकार्बोनेट से निर्मित यह एक ग्लास जैसी संरचना होती है, जिसके चारों ओर धातु के फ्रेम बने होते हैं।

इसकी बाहरी संरचना बेहद मजबूत और ठोस होती है। सब्जियों और फलों को उच्च गुणवत्ता देने के लिए इसमें सोलर पैनल का भी उपयोग किया जाता है। औद्योगिकी हरितगृह में अनाजों को पोषण युक्त मिट्टी में उगाया जाता है।

पिरामिड शेप ग्रीन हाउस

प्रत्येक छोर को एक दूसरे से जोड़ने वाले पिरामिड आकार के ग्रीन हाउस फसलों को उगाने के लिए यह बेहद चर्चित विकल्प है। अधिकतर लोग पिरामिड ग्रीन हाउस का उपयोग अपने फसलों के बेहतर उपज के लिए किया करते हैं।

यह त्रिकोण आकार के ऐसे पैनल से बनाए जाते हैं, जो किसी भी परिस्थिति में अनाज उत्पादन कर सकता है। इसके तीनों ओर सोलर प्लेट भी लगाई जाती हैं, जिससे कि एनर्जी स्टोर करके अंकुरित बीजों को उगाया जा सके।

पॉलीगोनल ग्रीन हाउस

एलुमिनियम से बने पॉलीगोनल अथवा बहुभुज ग्रीन हाउस रसीले फलों के उत्पादन के लिए सर्वश्रेष्ठ  होता है। इसके अंदर कई छोटे ऊर्ध्वाधर खंभों का निर्माण भी किया जाता है, जिससे फलों और सब्जियों को टिकाए रखने में आसानी हो।

पॉलीगोनल ग्रीन हाउस के चारों ओर हवादार जालियां लगाई जाती हैं, जिससे कि फसलों को नमी और प्रकाश दोनों मिल सके। ग्रीन हाउस का यह प्रकार फसल उत्पादन के लिए एक बहुत ही अच्छा माध्यम  है।

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ग्रीन हाउस गैसों के बारे में जानकारी Information About Greenhouse Gases in Hindi

पृथ्वी के चारों तरफ गैसों का एक आवरण बना हुआ है, जो वातावरण को बनाए रखने में अपनी अलग अलग भूमिका निभाते हैं।

आमतौर पर जब सूर्य की किरणें पृथ्वी तक पहुंचती हैं, तो अधिकतर ऊर्जा जमीन और पृथ्वी के आवरण में समाहित हो जाता है। जमीन के समीकरण और वातावरण में परिवर्तन इसी के परिणाम स्वरूप होता है।

ग्रीन हाउस गैसें साधारण तौर पर तो प्राकृतिक होती हैं, लेकिन मानव उत्सर्जन के कारण इन गैसों में बढ़ोतरी हो जाती है, जिससे कई दुष्परिणाम भी सामने आता है।

ग्रीन हाउस गैसों में कार्बन डाइऑक्साइड सबसे मुख्य गैस होती है। एक अनुमान के मुताबिक कुछ सालों में ही कार्बन डाइऑक्साइड जैसे ग्रीन हाउस गैसों में काफी बढ़ोतरी देखी गई है।

डाई हाइड्रोजन ऑक्साइड अथवा जलवाष्प गैस वायुमंडल में दूसरे स्थान पर सबसे महत्वपूर्ण ग्रीन हाउस गैसों में गिना जाता है। वाष्पीकरण की क्रिया डाई हाइड्रोजन ऑक्साइड में बढ़ोतरी का ही परिणाम है।

जिस प्रकार जलाशयों से पानी का वाष्पीकरण शीघ्रता से हो रहा है, वह जलवाष्प जैसे ग्रीन हाउस गैसों का ही प्रभाव है।

कार्बन डाइऑक्साइड की तरह ही मीथेन गैस काफी प्रभावकारी ग्रीनहाउस गैस है। वायुमंडल में मीथेन की उपस्थिति बहुत कम है। ज्वालामुखी, पशुधन, बायोमास  का दहन, आर्द्रभूमि इत्यादि मिथेन के गुणवत्ता की प्रदर्शित करता है।

ओजोन वातावरण में स्थित एक महत्वपूर्ण गैस है जो, सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों से हमारी रक्षा करता है। ओजोन एक प्रकार का ग्रीनहाउस गैस है। भू स्तरीय पर उठने वाले हानिकारक धुएं जो प्रदूषण का काम करते हैं, वह वायुमंडल में स्थित इसी के प्रभाव के कारण ही होता है।

कई बार इंडस्ट्रियल रिफाइनरी और केमिकल प्लांट्स जैसे दूसरे प्रदूषण के बड़े स्त्रोतों से भी पर्यावरण के आवरण को क्षति पहुंचता है।

बड़े बड़े उद्योगों व कारखानों से निकलने वाले हानिकारक धुओं में नाइट्रस ऑक्साइड भी शामिल होता है। इसके अलावा मानवीय गतिविधियों के जरिए उत्सर्जित होने वाले यह हानिकारक धुएं वातावरण को प्रदूषित करता है।

ग्रीन हाउस के लाभ Benefits of Green House in Hindi

सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को रोकने में  ओजोन बेहद महत्वपूर्ण होता है, जो कि ग्रीन हाउस  गैसों का ही एक स्वरूप है।

इसके अलावा ग्रीन हाउस पृथ्वी के चारों ओर एक फिल्टर का काम करती है जो अंतरिक्ष से आने वाली अवांछित तत्वों को पृथ्वी के आवरण में प्रवेश करने से रोकती है। यदि ग्रीनहाउस ना होता तो शायद पृथ्वी भी अन्य ग्रहों की भांति एक निर्जीव ग्रह होता है।

इसके अलावा ग्रीन हाउस के कई महत्वपूर्ण फायदे हैं। पृथ्वी पर एक निश्चित तापमान बनाए रखने में ग्रीन हाउस सहायता करता है।

क्योंकि किसी भी जगह जीवन तभी संभव हो पाएगा जब वहां सांस लेने के लिए एक निश्चित आवरण हो। ना ही अधिक ठंडा और ना ही अधिक ज्यादा तापमान ही जीवित प्राणियों के रहने योग्य होता है।

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सामान्य तौर पर किसी भी फसल को उगाने के लिए सामान्य तापमान वाले वातावरण की आवश्यकता होती है, जिससे बीज अंकुरित होकर पोषण युक्त बने। ग्रीन हाउस की सहायता से फसलों को उचित तापमान उपलब्ध तो करवाया जाता है, साथ ही आंधी, तूफान और बर्फ से फसलों की रक्षा ढाल बनकर भी करता है।

आज के समय में किसी भी कृषि क्षेत्र में फसलों को उपजाऊ बनाने और उन्हें किटको से बचाने के लिए तरह-तरह की दवाइयों का छिड़काव किया जाता है।

इसके सुरक्षा कवच के कारण फसलों पर कीटक नहीं लगता। ग्रीन हाउस का उपयोग आमतौर पर सब्जियों फल तंबाकू इत्यादि को उगाने के लिए किया जाता है।

ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण Causes for Green House Effect in Hindi

पृथ्वी में ग्रीन हाउस प्रभाव के कई कारण है जिनके परिणाम स्वरूप हमारे प्राकृतिक आवरण में बदलाव देखे जाते हैं। सर्वप्रथम प्राकृतिक कारण से पृथ्वी पर मौजूद कुछ गैसों द्वारा ग्रीन हाउस प्रभाव देखा जाता है।

कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और डाई हाइड्रोजन जैसे गैसों की अधिकता हमारे पर्यावरण को अस्तव्यस्त कर देती है। वायुमंडल में तापमान बढ़ने का यह मुख्य कारण है।

इस विशाल धरती पर लगभग अरबों खरबों जीव श्वसन की क्रिया करते हैं। ऑक्सीजन ग्रहण करने और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ने की क्रिया सभी सजिवों द्वारा किया जाता है।

लंबे समय से इन गैसों के उत्सर्जन में काफी बढ़ोतरी देखी जाती है, जिसके परिणाम स्वरूप ग्रीन हाउस प्रभाव की घटना होती है

प्राकृतिक कारणों के साथ ही मानव द्वारा की जाने वाली क्रियाएं भी हरित गृह प्रभाव के लिए जिम्मेदार है।  बड़े स्तर पर वृक्षों के काटे जाने के कारण ऑक्सीजन की मात्रा घट रही है। वनोन्मूलन के कारण कई प्राकृतिक घटनाओं के दुष्प्रभाव देखे जा रहे हैं।

विज्ञान ने आज के समय में लगभग पूरी दुनिया में अपना विस्तार कर लिया है। नवीनता तो अच्छी बात होती है, लेकिन जब मानव क्रियाएं प्रकृति को हानि पहुंचाने लगती हैं तो यह पूरे मानव जाति के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।

दुनिया के लगभग हर  कोने में उद्योग और कारखाने बड़े स्तर पर चलाए जाते हैं। लेकिन इनसे निकलने वाले धुएं और जहरीला पानी वातावरण को दूषित करता है। यही प्रदूषित तत्व के कारण वाष्पीकरण भी अब दूषित होता जा रहा है।

इसके अलावा इंधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले तेल और कोयले इत्यादि जिनका प्रयोग दहन क्रिया में किया जाता है, वह मुख्य रूप से ग्रीन हाउस प्रभाव के लिए जिम्मेदार है। कोयले और दूसरी आवश्यक चीजों के लिए खनन कार्य से गहरे गड्ढे या कुएं में से मीथेन गैस का उत्सर्जन होता है।

मीथेन गैस की अधिकता वातावरण में प्रदूषण फैलाता है, जिसके परिणाम स्वरूप ग्रीन हाउस के दुष्प्रभाव अपना असर दिखाते हैं।

निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में हमने ग्रीन हाउस प्रभाव पर निबंध (Essay on Green House Effect in Hindi) पढ़ा। आशा है यह निबंध आपको पसंद आया होगा। अगर यह लेख आपको अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें।

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