ग्रीनहाउस प्रभाव पर निबंध Essay Green House Effect in Hindi

ग्रीनहाउस प्रभाव पर निबंध Essay Green House Effect in Hindi

ग्रीनहाउस प्रभाव पृथ्वी के वातावरण को गर्म करने में भूमिका निभाता है। वातावरण में आने वाली लघु-तरंगे या पराबैंगनी किरणें सौर विकिरण के लिए काफी हद तक पारदर्शी होती है, जो पृथ्वी की सतह द्वारा अवशोषित कर ली जाती है।

धरती, सूरज से ऊर्जा प्राप्त करती है, जो पृथ्वी की सतह को गर्म करती है। चूंकि यह ऊर्जा वायुमंडल से गुजरती है,जिससे इसका एक निश्चित प्रतिशत वायुमंडल में बिखर जाता हैं। इस ऊर्जा का कुछ हिस्सा भूमि और समुद्र की सतह द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है।

शेष बचा हुआ 70% जो कि पृथ्वी की ऊष्मा का कारण होता है। पृथ्वी पर संतुलन बनाये रखने के लिए ऊर्जा के कुछ विकिरण वातावरण द्वारा अवशोषित कर लिये जाते है।

ग्रीनहाउस प्रभाव पर निबंध Essay Green House Effect in Hindi

जैसा कि पृथ्वी सूरज की तुलना में ठंडी होती है, पर यह ऊर्जा प्रकाश के रूप में दिखाई नहीं देती है। यह अवरक्त या थर्मल विकिरण के माध्यम से उत्सर्जन का कार्य करती है।

हालांकि, वायुमंडल में कुछ गैस पृथ्वी के चारों ओर एक प्रकार का आवरण बनाती हैं और कुछ वातावरण मे वापस उत्सर्जित हो जाती है और कुछ ऊर्जा को अवशोषित कर लेती हैं। इस आवरण के प्रभाव के बिना धरती लगभग 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास तक ठंडी होती है, जो इसका सामान्य रूप होता है।

कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी इन गैसों में जलवाष्प के साथ वायुमंडल का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा होता है। इन्हें ‘ग्रीनहाउस गैस’ कहा जाता है क्योंकि इसका कार्य सिद्धांत एक ग्रीन हाउस में होता है।

जैसे ग्रीनहाउस एक कांच का दर्पण है जो अतिरिक्त ऊर्जा के विकिरण को रोकता है और यह ‘गैस का आवरण ‘ पृथ्वी से उत्सर्जित कुछ ऊर्जा को अवशोषित करता है और तापमान का संतुलन बनाये रखता है।

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यह प्रभाव पहली बार एक फ्रेंच वैज्ञानिक, जीन-बैप्टिस्ट फूरियर द्वारा पहचाना गया था, जिन्होंने वातावरण में और ग्रीन हाउस में क्या होता है इस घटना पर ध्यान दिया? इस तरह उन्होंने “ग्रीनहाउस प्रभाव” का उल्लेख किया।

पृथ्वी की सतह पर इन गैसों का एक आवरण है। चूंकि औद्योगिक क्रांति और मानव गतिविधियां वातावरण में इन ग्रीनहाउस गैसों को अधिक से अधिक रूप में मुक्त कर रही है। इससे गैसों का आवरण घना होता जा रहा है और इन विचलित गैसों को ‘स्रोत’ कहा जाता है। जो लोग इन्हें मुक्त करते हैं उन्हें ‘सिंक’ कहा जाता है। ‘स्रोतों’ और ‘सिंक’ के बीच एक संतुलन इन ग्रीनहाउस गैसों के स्तर को बनाए रखता है।

जब हम कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस के रूप में इस तरह के ईंधन जलाते हैं तो उससे कार्बन डाइआक्साइड गैस निकलती है। जब हम जंगलों को नष्ट कर देते हैं, तो वातावरण में संग्रहीत कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ जाता है।

जिससे कृषि उत्पादक भूमि में परिवर्तन आ जाता है, और अन्य स्रोतों से मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड आदि गैसों का स्तर काफी हद तक बढ़ जाता है। औद्योगिक प्रक्रियाएं कृत्रिम और नए ग्रीनहाउस गैसे जैसे सी एफ सी (क्लोरोफ्लोरोकार्बन) को मुक्त करती हैं। परिणामस्वरूप बढ़े हुये ग्रीनहाउस प्रभाव को सामान्य तौर पर ग्लोबल वार्मिंग या जलवायु परिवर्तन के रूप में जाना जाता है।

ग्लोबल वार्मिंग ग्रीनहाउस गैस परत की मोटाई में वृद्धि या जी एच जी (GHG) की वृद्धि का परिणाम है, जो कि मानव गतिविधि के माध्यम से वातावरण में मुक्त की जा रही है। बढ़ती हुयी ग्रीनहाउस गैस के परिणामस्वरूप वातावरण में अधिक गर्मी बढ़ती जा रही है।

हमारे द्वारा जो वाहन चलाये जाते है, घरों में खाना बनाने में उपयोग होने वाली भट्टियां और उद्योग जो तेल और गैस का उत्पादन करते हैं। बिजली बनाने में और दुनिया के बाजार के लिए उत्पादों के विकास के लिए आदि से निकलने वाली गैसों से हमारे वैश्विक तापमान में बृद्धि हो रही है।

ये ग्रीन हाउस गैस पूरी तरह से मानवीय कारण हैं। वे समताप मंडल के ओज़ोन को नुकसान पहुंचाती हैं, इसलिए ग्लोबल वार्मिंग के लिए कार्बन डाइऑक्साइड  सीधे जिम्मेदार नहीं हैं। स्ट्रैटोस्फियर में उनकी उपस्थिति को कम करने का सवाल एक अन्य वैश्विक सम्मेलन में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर ध्यान दिया गया।

ये गैसें पृथ्वी की सतह से दीर्घ तरंग विकिरण को अवशोषित करने और गर्मी को रोकने में विशेष रूप से प्रभावी हैं। यद्यपि ग्लोबल वार्मिंग और उसके संभावित प्रभावों के कारणों से संबंधित दुनिया के लोगों के विचार और राय अलग-अलग हैं। यह एक सामान्य समझ है कि यह एक प्रमुख वैश्विक चिंता का विषय है और तुरंत इसके संशोधन के लिये उपाय किये जाने चाहिए।

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