सत्संगति पर निबंध हिन्दी में Essay on Satsangati in Hindi

इस लेख में आप (अच्छी संगति) सत्संगति पर निबंध हिंदी में (Essay on Sadsangati in Hindi) पढ़ेंगे। इस विषय पर निबंध कक्षा 4 से 12 तक पूछा जाता है, यहाँ पर दिए गए सत्संगति के ऊपर निबंध को किसी भी परीक्षा में लिखा जा सकता है क्योंकि यह निबंध बेहद सरल भाषा में लिखा गया है।

सत्संगति पर निबंध Essay on Satsangati in Hindi (1000 Words)

हमारे विचार व व्यवहार में हमारे साथ रह रहे लोगों की संगती का असर न्यूनाधिक मात्र में देखने को मिलता है। हमारे आस-पास का वातावरण जैसा होता है, वैसी ही स्थिति हम ढल जातें है।

हमारे चारों तरफ जिस मानसिकता के लोग रहते हैं तो हमारे विचारों पर उनका प्रभाव पड़ता है। जिस प्रकार अच्छे लोगों की संगती से अच्छे विचारों का आदान प्रदान होता है, उसी प्रकार बुरे विचारों वाले मनुष्य के साथ रहने से लोगों में केवल बुराईयों का ही जन्म होता है।

कुसंगति से हमेशा अपकीर्ति और हानि ही हाथ लगती है, परन्तु सत्संगति से सदैव मान सम्मान बढ़ता है। सत्संगति जो की सत् और संगती शब्द से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है अच्छे लोगों की संगती। अच्छे लोगों को हर जगह आदर सम्मान मिलता है लेकिन बुरे लोगों से कोई बात भी करना पसंद नहीं करता है और ऐसे लोगों की बहुत आलोचना की जाती है।

सत्संगति का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर होता है, क्योंकि बच्चों को जो कुछ भी शिक्षा दी जाती है वे उसे बहुत जल्दी अमल में लाने लगते हैं यही कारण है की गलत माहौल व् संगती के कारण बच्चे अक्सर मार्ग से भटक जाते हैं। यह बात सत्य है की व्यक्ति जैसे लोगों के साथ रहता है, उसकी मनोवृत्ति वैसी ही बन जाती है।

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सत्संगति के प्रभाव Effects of Good Company

उत्तम विचारों और अच्छे चरित्र वाले लोगों के साथ रहना ही सत्संगति कहलाता है। मानव एक सामाजिक प्राणी है जिससे वह हमेशा लोगों के बीच में रहना पसंद करता है, और उसके अगल बगल हर प्रकार के मानसिकता वाले लोग रहते हैं।

जीवन में हर किसी को अच्छा मित्र चाहिए होता है परन्तु इसका यह मतलब नहीं है की कैसी भी मानसिकता वाले मनुष्य को मित्र बना लिया जाये, एक ख़राब इंसान के प्रभाव के कारण एक अच्छे भले इंसान की सोच बिगड़ सकती है तथा एक भले इंसान के साथ रहने से किसी बुरे व्यक्ति की मनोस्थिति सुधर भी सकती है।

जिस प्रकार थोड़े से गंगा जल को नाले में डालने पर वह भी नाले का ही पानी कहलाने लगता है, उसी तरह थोड़े से नाली के गंदे पानी को पवित्र गंगा में डालने से वह भी पवित्र हो जाता है। सत्संगति में आने से लोगों के जीवन की दिशा ही बदल जाती है।

इसका श्रेष्ठ उदाहरण एक कहानी के द्वारा देखा जा सकता है की किस प्रकार महर्षि वाल्मीकि एक डाकू थे और बाद में नारद जी के सत्संगति के कारण वे महर्षि बने और उन्हें भगवन राम के गुरु होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, इसी तरह अंगुलिमाल डाकू को गौतम बुद्ध की संगती मिलने से उसका जीवन ही बदल गया। सत्संगति के प्रभावों के ऐसे हजारों उदहारण इतिहास में मिलते है।

हमारे आसपास रहीं चीज़ों का हमारे जीवन में बहुत प्रभाव पड़ता है चाहे वह पुस्तकें हो या फिर मोबाइल, दूरदर्शन अथवा अन्य टेक्नोलॉजी से जुडी अन्य चीजे। एक अच्छी पुस्तक एक अच्छे मित्र के बराबर होती है जो की जीवन को सही मार्गदर्शन देती है परन्तु बेकार मानचित्र वाली पुस्तकें बुरी आदतें सिखातीं हैं।

सत्संगति के लाभ Benefits of Good Fellowship

सत्संगति वह गुण है जिसके प्राप्त होने से किसी भी मनुष्य के जीवन की काया पलट हो सकती है। सत्संगति से सभी को केवल लाभ ही लाभ होतें है हानियाँ कुछ भी नहीं होती है। सत्संगति से जीवन में सदाचार की भावना आती है, तथा साथ ही साथ कर्मनिष्ठ तथा धर्म की भावना भी उत्पन्न होती है।

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अच्छे लोगों की संगती करने से बुरे से बुरे व्यक्ति की आत्मा पवित्र हो जाती है और मन में परोपकार की भावना जागृत होती है, सत्संगति यह निश्चित करती है की लोग अपने जीवन में कितने सफल होंगे।

कोई भी इंसान चाहे कितना भी निर्धन क्यों न हो परन्तु अगर वह सत्संगति में रहता है तो उसे हमेशा सबसे आदर और सम्मान मिलेगा। लेकिन अगर कोई व्यक्ति कितना भी अमिर हो पर वह कुसंगति में रहता है तो उसकी इज्जत कोई भी नहीं करेगा और सदा उसकी आलोचना ही की जाएगी।

अच्छी संगती में रहने से मनुष्य नशापान जैसी बुरी चीजों के सेवन से बच जाता है और अपना स्वस्थ ख़राब होने से बचा लेता है। कुसंगति के कारण मानव में चोरी, लूटमार, हत्या, नशा सेवन आदि भ्रष्ट आदतें आती है लेकिन सत्संगति के कारण ऐसे कोई भी दुर्गुण शेष नहीं रहते हैं।

कुसंगति से हानियाँ Disadvantages of BAd Fellowship

जो व्यक्ति जैसा सोचता और काम करता है वह वैसा ही बन जाता है। बुरे लोगों की संगत में आने से कुछ समय के लिए फायदा हो सकता है परन्तु यह कुसंगति किसी भी प्रतिभावान व्यक्ति को असफल और बेकार बना देती है।

कुसंगति वह बुरी बीमारी है जिसे भी लगती है उसका बर्बाद होना तय है। बुरे लोग हमेशा सबका अहित ही सोचतें है, हमेशा दूसरों की बुराई करते हैं और किसी को भी सफल नहीं होने देना चाहते है। ऐसे लोगों के संपर्क में आने से केवल हानि ही होती है। कुसंगति से जीवन में बुराइयाँ प्रवेश करती है और सभी अच्छी आदतों को नष्ट कर देती हैं।

बुरे विचारधारा वाले लोगों पर समाज विश्वास नहीं करता और ऐसे लोगों को कोई अपने घर पर भी बुलाना पसंद नहीं करता। कुसंगति में पड़ने से मनुष्य में दयावृत्ति नष्ट हो जाति है जिससे वह सभी के साथ क्रूरता और निर्दयता से व्यव्हार करता है, जिसके कारण बुरे लोगों के साथ कोई भी प्रेम व्यवहार नहीं रखना चाहता।

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कुसंगति में पड़कर व्यक्ति केवल खुद के लिए ही नहीं अपितु अपने परिवार के लिए भी समस्या का जड़ बन जाता है, ऐसे व्यक्ति खुद तो कलंकित होते ही है साथ ही अपने पुरे परिवार को भी कलंक लगा देते हैं।

कुसंगत में आने के कारण लोगों को बुराइयाँ इस प्रकार जकड लेती हैं, जिनसे छुटकारा पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। बरें लोगों का अपने जीवन का कोई लक्ष्य नहीं होता ऐसी संगती के कारण जीवन की सार्थकता ख़त्म हो जाति है जिससे जीवन में निराशा के भाव उत्पन्न होने लागतें हैं।

निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में आपने सत्संगति पर निबंध (Essay on Satsangati in Hindi) को पढ़ा जिसमें सत्संगति के महत्व से लेकर कुसंगति की हानियों को सरल रूप में लिखा गया है आशा है आपको यह लेख पसंद आया होगा अगर यह लेख सरल तथा मददगार लगी हों तो इसे शेयर जरुर करें।

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