मध्यकालीन भारत का इतिहास History of Medieval India in Hindi

मध्यकालीन भारत का इतिहास History of Medieval India in Hindi

किसी भी देश की कला, संस्कृति, एवं उस देश के विकास को जानना समझना तथा उसका अध्ययन करना हो तो उस देश के इतिहास का अध्ययन करना अति आवश्यक होता है।

मध्यकालीन भारत का इतिहास History of Medieval India in Hindi

अगर भारत की परम्पराओं, रीति रिवाजों तथा संस्कृतियों को जानना है तो इस देश के इतिहास को पढ़ना बहुत जरूरी है। भारत देश का इतिहास बहुत ही प्राचीन एवं बड़ा है इसीलिए इसके अध्ययन के लिए इसे तीन काल खंडो में विभाजित किया गया है। जो कि निम्न है-

आज इस लेख के माध्यम से हम भारत के इतिहास के मध्यकाल के बारे में महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी प्राप्त करेंगे।

भारत का मध्यकालीन इतिहास

भारत के मध्यकाल के समय के बारे में इतिहासकारों में मतभेद है परन्तु कई इतिहासकार 8वीं सदी से लेकर 12वीं सदी के काल खण्ड के तहत भारत के मध्यकालीन इतिहास का अध्ययन करते है। मध्यकालीन भारत के इतिहास को और अच्छे से जानने के लिए इसे पुनः तीन काल खण्डो में विभाजित किया जाता है –

  • भारत पर अरबो का आक्रमण
  • दिल्ली सल्तनत
  • मुगलों का शासन

भारत प्राचीन काल में धन सम्पदाओं से सम्पन्न देश था। भारत की इसी सम्पन्नता ने अरबों देश के लोगो को आकर्षित किया। भारत की धन सम्पदा को लूटने के लिए ही सबसे पहले 712 ई0 में इराक के शासक अल हजाल ने मुहम्मद बिन कासिम को भारत पर आक्रमण के लिए भेजा जिसने भारत के सिन्ध क्षेत्र पर आक्रमण करके उस पर अपना अधिकार कर लिया।

इसके बाद महमूद गजनवी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया था। इसका सबसे चर्चित आक्रमण 1025 ई0 में किया गया सौराष्ट्र में स्थित सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण था। इस आक्रमण के बाद इसने सोमनाथ मंदिर से लगभग 20 लाख दिनार की संपत्ति को लूटा था।

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इसके बाद इराक के पास गौर प्रदेश के साथ भिन्न वंश से संबंधित मोहम्मद गौरी ने भारत के प्रांतीय राजाओं के साथ कई युद्ध लड़े। इसके द्वारा पृथ्वीराज चौहान के साथ दूसरी बार तराईन के मैदान में लड़ा गया युद्ध बहुत ही महत्वपूर्ण था क्योंकि  इसी युद्ध के बाद मोहम्मद गौरी ने वास्तविक रूप से उत्तर भारत में मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना की थी।

अभी तक भारत पर हुए आक्रमण का उद्देश्य भारत में लूटपाट करना था परंतु 1206 ई0 में मुहम्मद गौरी की हत्या के तुरंत बाद ही कुतुबुद्दीन ऐबक नामक इसके गुलाम ने 24 जून 1206 ई0 में अपना राज्याभिषेक करके भारत में गुलाम वंश की स्थापना की।

जिसका उद्देश्य भारत पर राज करना था। इसके बाद 13 जून 1290 ई0 को जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने गुलाम वंश को समाप्त करके खिलजी वंश नाम के एक नए साम्राज्य की स्थापना की।  खिलजी वंश के अंतिम शासक मुबारक खां की हत्या करके इसके ही वजीर खुसरो खां ने तुगलक वंश नाम के एक नए साम्राज्य की स्थापना की।

इसी क्रम में भारत में सैय्यद वंश और लोदी वंश का उदय भी होता है। जिन्होंने दिल्ली सल्तनत पर राज किया। सल्तनत काल की शासन व्यवस्था काफी हद तक व्यवस्थित थी। दिल्ली के सल्तनत काल में राजकीय कार्यों को संपादित करने के लिए विभिन्न विभागों की भी स्थापना की गई थी।

सल्तनत काल की कानून व्यवस्था पूर्ण रूप से शरीयत, कुरान एवं हदीस पर आधारित थी। सल्तनत काल में ही विभिन्न छोटे-छोटे स्वतंत्र प्रांतीय राज्यों का भी उदय हुआ था। भारत के इतिहास के मध्यकाल में ही छठी शताब्दी में भक्ति आंदोलन की भी शुरुआत हुयी थी।

पंजाब के शासक दौलत खां लोदी के निमंत्रण पर बाबर ने भारत की ओर कूच किया जहां उसका सामना सबसे पहले यूसुफ जाई जातियों के साथ हुआ। जिसके बाद बाबर ने बाजौर तथा भेरा पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया।

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इसके बाद बाबर का सामना पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी के साथ हुआ। जिसमें इब्राहिम लोदी को हार का सामना करना पड़ा और अपनी इसी जीत के साथ ही बाबर ने 1526 ई0 में भारत में मुगल वंश को स्थापित किया।

इसके बाद मुगल वंश ने भारत पर लगभग 300 वर्षों तक एकछत्र राज किया। दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने के बाद बाबर को भारत के राजपूत शासकों के विद्रोह का भी सामना करना पड़ा था। 1530 ई0 में बाबर की मृत्यु के बाद उसका सबसे बड़ा बेटा नसीरुद्दीन हुमायूँ दिल्ली की गद्दी पर बैठा। सूर साम्राज्य के संस्थापक अफगान वंशीय शेरशाह सूरी ने बिलग्राम के युद्ध में हुमायूँ को पराजित करके स्वयं दिल्ली की गद्दी पर बैठा।

परंतु शेरशाह की मृत्यु के बाद हुमायूं ने पुनः दिल्ली पर अपना कब्जा कर लिया। हुमायूं के बाद अकबर ने मात्र 13 वर्ष 4 माह की अवस्था में बैरम खां के संरक्षण में मुग़ल साम्राज्य की डोर को अपने हाथों में लिया।

अकबर एक योग्य महान शासक था, जिसने मुगल साम्राज्य को सर्वाधिक विस्तारित किया था। इसके साथ ही अकबर ने हिंदू एवं मुस्लिमों के बीच की दूरियों को कम करने के लिए दीन-ए-इलाही धर्म की स्थापना करके धार्मिक सहिष्णुता एवं उधार राजनीति का भी परिचय दिया था।

अकबर के बाद जहांगीर ने मुगल साम्राज्य की सत्ता को संभाला। जहांगीर को न्याय की जंजीर के लिए याद किया जाता है। यह जंजीर सोने की बनी हुई थी तथा इस जंजीर को आगरे के किले के शाहबुर्ज तथा यमुना नदी के तट पर स्थित पत्थरों के खंभे में लगवाया गया था।

इसके बाद शाहजहां दिल्ली के तख्त पर काबिज हुआ। जिसने ताज महल का निर्माण करवाया जो आज भी सात अजूबों में से एक है। भारत मे स्थापत्य कला का विकास मुगल काल मे ही हुआ था। इसके बाद दिल्ली की सत्ता की डोर को औरंगजेब ने अपने हाथों में लिया।

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इसके शासनकाल में बहुत से सैनिक एवं धार्मिक विद्रोह हुए लेकिन वह इन सभी विद्रोहो पर काबू पाने में असफल रहा। सन 1707 ई0 में इसकी मृत्यु के साथ ही मुगल साम्राज्य का पतन भी प्रारंभ हो गया।

जहां एक ओर मराठा शक्तियों ने तो दूसरी ओर अंग्रेजों के आक्रमण ने दिल्ली के शासक को नाममात्र का शासक बना दिया था। औरंगजेब के मृत्यु के बाद से ही इतिहासकार भी भारत के मध्यकाल को भी समाप्त मानते हैं।

Featured Image Source – https://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/8/87/India1760_1905.jpg

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