जल ही जीवन है पर निबंध Essay on Water is Life in Hindi

जल ही जीवन है पर निबंध Essay on Water is Life in Hindi

जल ही जीवन है, जल से ही जीवन है, या यूं भी कह सकते हैं कि जल में ही जीवन है। ऐसा कहने का तात्पर्य ?? पानी के अनेकों नाम है, हम कई नामों से पानी को पुकारते हैं – जल, वारी, नीर, अंबु, सलिल। पानी सभी जीव जंतुओं के जीवित रहने के लिए आवश्यक है, पानी के बगैर इस पृथ्वी पर किसी भी प्राणी का जी पाना संभव नहीं है।

जल ही जीवन है पर निबंध Essay on Water is Life in Hindi

पानी इतना ज़रूरी क्यों?

वैसे कहें तो हमारी पृथ्वी का 70% भाग ही पानी है परंतु पीने लायक स्वच्छ पानी केवल 2% के भाग में ही है। पीने का पानी हमें अलग-अलग जगहों से प्राप्त होता है, जैसे नदियां, तालाब, वर्षा का पानी, भूमिगत पानी परंतु इन सभी जल स्त्रोतों में दिन-ब-दिन कमी आती जा रही है जो कि अपने आप में चिंता की बात है।  पानी हमारे जीवन का अभिन्न अंग है, अत्यंत महत्वपूर्ण है हमारे लिए।

यहां तक कि मानव शरीर का 70% भाग भी जल से ही बना है अर्थात जल के बिना जीवन की कल्पना करना भी संभव नहीं है, क्योंकि मनुष्य भोजन के बिना तो काफी अवधि तक रह सकता है परंतु बिना पानी के मानव शरीर जीवित नहीं रह सकता है और अगर पूरा 1 सप्ताह पानी ना मिले तो मृत्यु भी संभव है।

हम यह बात बहुत अच्छे से जानते हैं कि हमारी पृथ्वी पर जितनी भी संसाधन है, वे सभी सीमित मात्रा में ही है तो इस बात से हमें यह समझना चाहिए कि हमें इन संसाधनों को बहुत ध्यानपूर्वक और कुशलता के साथ उपयोग करना है वरना इन संसाधनों की कमी के कारण हाहाकार मचने में देर नहीं लगेगी और खासतौर पर पानी को तो बहुत ध्यान से इस्तेमाल करना चाहिए।

बिना पानी के तो हम अपना 1 दिन भी नहीं गुजार सकते हैं। हमारे रोजमर्रा के अनेकों कामों में पानी इस्तेमाल होता है, जैसे – पीने के लिए, खाना बनाने के लिए, कपड़े धोने के लिए, खेतों की सिंचाई के लिए, नहाने के लिए आदि। पानी तो हमारे जीवन के लिए अत्यंत लाभकारी है, यह वह अमृत है जिसके बिना हम अपना जीवन काट नहीं सकते हैं परंतु हम इसका मूल्य समझते ही नहीं है और इसका दुरुपयोग करते हैं।

इसी प्रकार सब कुछ चलता रहा तो आगे आने वाले वर्षों में पानी की भारी समस्या खड़ी हो सकती है हमारी आगे की पीढ़ियों को जल नहीं मिलेगा और हम यह अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं कि परिस्थितियां कितनी खतरनाक हो सकती है।

मनुष्य के इतने कर्मों द्वारा प्रदूषण पैदा होता है और उसी प्रदूषण द्वारा भी पानी के स्रोत भी प्रदूषित होते हैं, वह कैसे ?? जितनी भी फैक्ट्रियां हैं, उन सब का मलबा और कूड़ा हमारी नदियों और तालाबों में बहा दिया जाता है जिसकी वजह से आज हमारे लगभग सभी जल के स्रोत मिलावटी हो चुके हैं और इसी कारण से बीमारियां भी फैलती है।

पानी मनुष्य के लिए तो अत्यंत महत्वपूर्ण है ही, साथ ही साथ हमारी पृथ्वी की सेहत के लिए भी बहुत जरूरी है। हमारी पृथ्वी को हरा भरा और स्वस्थ रखना पानी की ही जिम्मेदारी है, सोचिए अगर पानी नहीं होगा तो पृथ्वी का विनाश होने में देर नहीं लगेगी और जीवन भी लुप्त हो जाएगा, खेत खलिहान सूख जाएंगे, जंगलों में जीवन खत्म हो जाएगा, बारिश होना बंद हो जाएगी और आगे तो आप कल्पना कर ही सकते हैं कि क्या होगा; अर्थात हमें आज की परिस्थितियां देखकर सचेत हो जाना चाहिए।

यहां तक कहा जाता है कि तीसरा विश्वयुद्ध पानी की किल्लत की वजह से ही लड़ा जाएगा, अब आप ही सोचिए कि पानी की कमी के कारण यह नौबत भी आ सकती है इसलिए हमें इस मूल्यवान संसाधन का ध्यान पूर्वक उपयोग करना चाहिए।

हम क्या कर सकते हैं ??

हमें अनावश्यक रूप से जल का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। बारिश के पानी को संग्रहित करना होगा, जब भी जितनी भी मात्रा में बारिश हो उसका पानी इकट्ठा करने और फिर उसी पानी से अपने रोजमर्रा के काम करें।

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भारत के उन क्षेत्रों में जहां बारिश बहुत तादाद में होती है वहां यह कार्य बहुत प्रचलित है, इस प्रकार पानी की बचत भी होगी और हमारे काम भी हो जाएंगे। यही चीज अगर पूरे भारत में प्रचलन में आ जाए, तो काफी मुश्किलें हल हो सकती है।

हमें अपनी अनावश्यक आदतों को सीमित करना होगा जिसमें हम पानी की बर्बादी करते हैं। ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाने होंगे क्योंकि जितनी ज्यादा हरियाली पृथ्वी पर रहेगी उतनी ही बारिश होगी तथा भूमिगत जल का भंडारण कभी कम नहीं होगा। 

एक ही पानी को बार-बार अलग प्रकार से इस्तेमाल करने से भी मुश्किलें हल हो सकती है, जैसे जिस पानी से बर्तन धोए हैं वही पानी बाद में घर के बगीचे के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

निष्कर्ष

यही सब कुछ विशेष बिंदु है जिनका हमें पालन करना होगा और इन्हें अपने जीवन में अपनाना होगा वरना बहुत परेशानियां खड़ी हो सकती है। ऐसा ना हो कि आगे चलकर भविष्य में हमें पानी भी करोड़ों के भाव में खरीदना पड़े और हम पानी की एक-एक बूंद को तरस जाएं।

ऐसी त्रासदी मचने में देर नहीं लगेगी, अगर हम अब भी नहीं जागे अर्थात सभी को मिलकर एक साथ कदम उठाने होंगे ताकि इस मूल्यवान संसाधन एवं जीवन देने वाले अमृत को हम संग्रहित कर पाए, और इसका ठीक प्रकार से उपयोग कर पाए। इस प्रकार हम और हमारे साथ साथ पृथ्वी के सभी जीव जंतु भी जीवित एवं स्वस्थ रह पाएंगे।

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