भारत की सामाजिक समस्याएं निबंध Essay on Social Problems in India Hindi

भारत की सामाजिक समस्याएं निबंध Essay on Social Problems in India Hindi जानते हैं गरीबी, जनसंख्या, प्रदूषण, निरक्षरता, भ्रष्टाचार, असमानता, लैंगिक भेदभाव, आतंकवाद, सांप्रदायिकता, बेरोजगारी, क्षेत्रवाद, जातिवाद, शराब, नशाखोरी, जैसे सामाजिक समास्याओं के विषय में पूरी जानकारी।

आईए शुरू करते हैं- भारत की सामाजिक समस्याएं निबंध Essay on Social Problems in India Hindi…

सामाजिक समस्याएं क्या है? What are Social Problems?

भारत एक प्राचीन देश है और कुछ अनुमानों के अनुसार, भारतीय सभ्यता लगभग पाँच हज़ार साल की है। इसलिए, यह स्वाभाविक है कि इसका समाज भी बहुत पुराना और जटिल होगा। इसलिए, भारतीय समाज विविध संस्कृतियों, लोगों, विश्वासों और भाषाओं का एक जटिल मिश्रण है जो कि कहीं से भी आया हो, लेकिन अब इस विशाल देश का एक हिस्सा है।

यह जटिलता और समृद्धि भारतीय समाज को एक बहुत जीवंत और रंगीन सांस्कृतिक देश बनाता है। हमारे भारत देश में आज भी बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जो भारत के विकास में वाधा बनी हुई हैं। जैसे – गरीबी, जनसंख्या, प्रदूषण, निरक्षरता, भ्रष्टाचार, असमानता, लैंगिक भेदभाव, आतंकवाद, सांप्रदायिकता, बेरोजगारी, क्षेत्रवाद, जातिवाद, शराब, नशाखोरी, महिलाओं के खिलाफ हिंसा प्रमुख हैं।

सामाजिक समस्याओं की अवधारणा Concept of Social Problems in India

भारतीय समाज को कई मुद्दों के साथ जोड़ दिया जाता है जो सामाजिक समस्याओं का रूप ले लेती हैं । फुल्लर और मेयर्स के अनुसार “जब समाज के अधिकाँश सदस्य किसी विशिष्ट दशा एवं व्यवहार प्रतिमानों को अवांछित आपत्तिजनक मान लेते हैं तब उसे सामजिक समस्या कहा जाता है।

एक सामाजिक समस्या, सामान्य रूप से, ऐसी स्थिति है जो एक समाज के संतुलन को बाधित करती है। अगर हम मानव समाज के इतिहास पर दृष्टि डाले तो यह विभिन्न तरह की समस्याओं और चुनौतियों का इतिहास रहा है।

समाज चाहे शिक्षित ही क्यों न हो, सभ्य ही क्यों न हो, समस्याएं हर जगह व्याप्त हैं। यही समस्याएं सामाजिक विघटन का कारण हैं। सामाजिक समस्या को स्पष्ट करते हुए समाजशास्त्री ग्रीन ने कहा है “सामजिक समस्या ऐसी परिस्थितियों का पुंज है जिसे समाज के बहुसंख्यक अथवा पर्याप्त अल्पसंख्यक द्वारा नैतिकतया गलत समझा जा सकता है।”

सामाजिक समस्याओं के प्रकार Types of Social Problems in India

सामाजिक समस्याएं विभिन्न प्रकार की हो सकती हैं। हालाँकि, इन विविध सामाजिक समस्याओं को मोटे तौर पर चार श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

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  1. आर्थिक कारक –  ये समस्याएं आर्थिक वितरण में असंतुलन के कारण उत्पन्न होती हैं जैसे गरीबी, बेरोजगारी इत्यादि।
  2. सांस्कृतिक कारक – ऐसी समस्याएं जो किसी राष्ट्र या समाज की स्थापित मान्यताओं, मूल्यों, परंपराओं, कानूनों और भाषाओं से उत्पन्न होती हैं, जैसे कि दहेज, बाल विवाह, किशोर अपराध, आदि।
  3. जैविक कारक – प्राकृतिक आपदाओं, संक्रामक रोगों, अकाल आदि के कारण होने वाली समस्याएं।
  4. मनोवैज्ञानिक कारक – बीमार मानसिक और न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य से उत्पन्न समस्याएं इस श्रेणी में आती हैं।

भारत में कौन-कौन सी सामाजिक समस्याएं हैं? Major Social Problems in India

आज हमारे समाज में जो सामाजिक बुराईयां व्याप्त हैं, उन्हें शायद ही कभी सूचीबद्ध किया जा सके। उनमें से प्रमुख हैं- किशोर अपराधी; बाल शोषण; धोखा; ड्रग पेडलिंग; मुद्रा तस्करी; घूसखोरी और भ्रष्टाचार; सार्वजनिक निधियों का गबन; छात्र और युवा अशांति; सांस्कृतिक हिंसा; धार्मिक असहिष्णुता; सीमा विवाद; बेईमानी; चुनाव में धांधली; कर्तव्य के प्रति कमिटमेंट न देना; परीक्षा में गड़बड़ी; अनुशासनहीनता; अन्य प्रजातियों के लिए अनादर; सकल आर्थिक असमानता; गरीबी; बीमारी और भूख; व्यापक अशिक्षा; रोजगार के अवसरों की कमी;  अन्याय; अधिकार का दुरुपयोग; आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी; जनता का शोषण; भेदभाव और जातीय भाषावाद; जानवरों के साथ दुर्व्यवहारमानव क्षमता की कमी; गृह युद्ध; सूखा;  मानव तस्करी और बाल श्रम आदि। कुछ समस्याओं को यहाँ बताया जा रहा है –

1. गरीबी Poverty

गरीबी एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक घर जीवित रहने के लिए भोजन, कपड़े और आश्रय आदि जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। भारत में गरीबी एक व्यापक स्थिति है। स्वतंत्रता के बाद से, गरीबी एक मुख्य चिंता बनी हुई है। यह इक्कीसवीं सदी है और गरीबी अभी भी देश में बनी हुई है।

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2. निरक्षरता Illiteracy

निरक्षरता एक ऐसी स्थिति है जो राष्ट्र के विकास में बहुत बड़ी रुकाबट बनी हुई है। भारत की अधिकतर आबादी निरक्षर है। भारत सरकार ने हालांकि निरक्षरता के खतरे से निपटने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। भारत का विकास लोगों के साक्षर होने से ही हो पायेगा।

3. बाल विवाह Child marriage

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बाल विवाह का दूसरा स्थान है। पहला कानून जो बनाया गया था वह 1929 का बाल विवाह निरोधक कानून था जो जम्मू और कश्मीर को छोड़कर पूरे भारत में लागू किया गया था। बाल विवाह भारत में व्याप्त सामाजिक समस्याओं में से एक है जिसका अंत लोगों को जागरूक करके ही होगा।

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4. भुखमरी Starvation

भुखमरी एक ऐसी स्थिति है जिसका परिणाम कुपोषण है। जिसके बारे में ध्यान नहीं रखने पर अंत में मृत्यु हो जाती है। क्वाशीकोर और मार्समस बीमारी की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब लोग ऐसे आहार ले रहे होते हैं जो पोषक तत्वों (प्रोटीन, विटामिन, खनिज, कार्बोहाइड्रेट, वसा और फाइबर) से भरपूर नहीं होते हैं। भारत के संदर्भ में, यह कहना अनावश्यक है कि खाद्य वितरण प्रणाली त्रुटिपूर्ण है। लेकिन अब इन समस्याओं पर ध्यान दिया जा रहा है।

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5. बाल श्रम Child labour

बाल श्रम का मतलब आमतौर पर भुगतान के साथ या उसके बिना किसी भी काम में बच्चों का रोजगार है। बाल श्रम केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, यह एक वैश्विक घटना है। जहां तक ​​भारत का संबंध है, यह मुद्दा एक दुष्चक्र है क्योंकि भारत में बच्चे ऐतिहासिक रूप से अपने खेतों और अन्य प्राथमिक गतिविधियों में माता-पिता की मदद कर रहे हैं।

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6. भ्रष्टाचार Corruption

भ्रष्टाचार राष्ट्र की रीढ़ को बर्बाद कर रहा है, और इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ये भारत देश के लिए बहुत बड़ी समस्याओं में से एक है। सरकार को रिश्वत देने वाले और रिश्वत लेने वाले के खिलाफ समान रूप से कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है।

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7. आतंकवाद Terrorism

भारत के विभाजन के दिन से आतंकवाद ने भारत को प्रभावित किया है। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर विवाद लंबे समय से अनसुलझा मुद्दा रहा है। इसका उपयोग करते हुए, पड़ोसी देश ने भारत के खिलाफ आतंक का सबसे अधिक इस्तेमाल किया है। जो ख़तम ही नहीं हो रहा।

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8. सांप्रदायिकता Communalism

विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों का मिश्रण होने के कारण, भारत में सांप्रदायिक मतभेदों को बढ़ावा मिला है। सांप्रदायिक झड़पों के कारण देश भर में विभिन्न घटनाओं में बहुत हिंसा होती है। इस तरह की घटनाएं होने के कारण भारत आर्थिक और राजनीतिक रूप से प्रभावित होता है।

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9. मुद्रास्फीति Inflation

पिछले वर्षों में मुद्रास्फीति को आम आदमी द्वारा सामना करते हुए देखा गया है। वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने लोगों में रोष पैदा कर दिया है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती दरों ने मध्यम वर्ग की जेब को इतना प्रभावित किया है, जिससे लोगों को मुद्रास्फीति का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

10. महिलाओं का शोषण Exploitation of women

भारत में महिलाएं हर समय एक निरंतर भय से युक्त रहती हैं। अकेले बाहर जाने का डर, भारत में रहने वाली हर महिला के मन को परेशान करता है। देश भर में यौन शोषण और बलात्कार के बढ़ते मामलों ने भारत की प्रतिष्ठा पर एक काला निशान छोड़ दिया है। ये एक ऐसी समस्या है जो अभी भी हल नहीं हो पा रही है।

वर्तमान परिदृश्य Current scenario

हम अपने देश को दुनिया के एक आधुनिक, अग्रगामी राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश करते हैं और यह सच है कि भारत वैज्ञानिक, आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में विकास को प्रोत्साहित करने के साथ एक राष्ट्र के रूप में दुनिया में प्रगति कर रहा है, लेकिन जहां तक सामाजिक विकास का सवाल है अभी भी दुनिया के सबसे कम रैंक वाले देशों में से एक है।

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2013 के लिए भारत का मानव विकास सूचकांक (HDI) रैंक दुनिया के 187 देशों में से 135 है जो रिपोर्ट में सूचीबद्ध हैं। इससे यह पता चलता है कि एक समाज के रूप में हम अभी भी एक नकारात्मक अर्थ में रूढ़िवादी मान्यताओं के लोग हैं जो सभी की समानता और भाईचारे की अवधारणा में विश्वास नहीं करना चाहते हैं।

हालांकि कई सरकारी और गैर-सरकारी (NGO) सामाजिक क्षेत्रों में मौजूदा स्थिति को सुधारने की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन परिणाम अभी बहुत अच्छा नहीं हैं। उदाहरण के लिए: कन्या भ्रूण हत्या का मुद्दा हमारे देश की शर्मनाक प्रथाओं में से एक है। हालाँकि सरकार और गैर-सरकारी संगठनों ने कई तरह के निषेधात्मक उपाय किए हैं, लेकिन अभ्यास जारी है।

इसका वास्तविक कारण हमारे देश के समाज की पितृसत्तात्मक व्यवस्था है जो पुरुष को श्रेष्ठ अधिकारी और महिलाओं को उनके अधीनस्थ मानती है। इस प्रकार, यह विश्वास प्रणाली या लोगों की सांस्कृतिक कंडीशनिंग है जो समाज को तेज गति से बदलने की अनुमति नहीं दे रही है।

हालाँकि समाज में कई सकारात्मक परिवर्तन भी हुए हैं, जैसे कि अब लड़कियां भी बड़ी संख्या में स्कूल जा रही हैं और उनका रोजगार अनुपात भी बढ़ रहा है; पूरी तरह से निरक्षरता कम हो रही है; एससी / एसटी की स्थिति में भी सुधार हो रहा है, लेकिन स्थिति संतोषजनक नहीं है।

हम अपने घरों में महिलाओं के खिलाफ असमानता देखते हैं, महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा दैनिक आधार पर सुनी जा सकती है, कन्या भ्रूण हत्या जारी है, धार्मिक-सांप्रदायिक हिंसा बढ़ रही है, अस्पृश्यता अभी भी एक वास्तविकता है, बाल श्रम व्यापक रूप से प्रचलित है।

निष्कर्ष Conclusion

स्थिति में सुधार के लिए बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। लोगों के माइंड सेट और सोच को बदले बिना यह बहुत मुश्किल काम है। इस उद्देश्य के लिए लोगों को विभिन्न सामाजिक समस्याओं के बारे में शिक्षित करना और उन्हें अपने सोचने के तरीके को बदलने के प्रति संवेदनशील बनाना सबसे अच्छा तरीका है।

क्योंकि खुद को बदलने की कोशिश कर रहे लोगों के बिना, कोई भी सरकारी या गैर-सरकारी प्रयास आधे-अधूरे साबित होंगे। देश को अब सरकार के साथ मिलकर इस तरह की सामाजिक बुराइयों से निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत है। आशा करते हैं आपको भारत की सामाजिक समस्याएं निबंध Essay on Social Problems in India Hindi अच्छा लगा होगा।

Help Source – Sociologydiscussion
Elections.in

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