वैश्विक जल संकट पर निबंध Essay on Global Water Crisis in Hindi

इस लेख में आप वैश्विक जल संकट पर निबंध हिंदी में (The Essay on Global Water Crisis in Hindi) पढ़ेंगे। जिसमें वैश्विक जल संकट का अर्थ, कारण, प्रभाव व दूर करने के उपाय को बेहद सरल और आकर्षक रूप से लिखा गया है।

वैश्विक जल संकट पर निबंध Essay on Global Water Crisis in Hindi

आज वैश्विक जल संकट एक प्रमुख विषय बन चुका है क्योंकि जल ही जीवन है। अगर मनुष्य को अपने भविष्य को सुरक्षित और सुंदर बनाना है तो जल संकट को दूर करने के उपायों पर ज्यादा ज़ोर देना होगा।

वैश्विक जल संकट का अर्थ Meaning of Global Water Crisis in Hindi

मनुष्य के लिए जल सबसे कीमती प्राकृतिक अनुदानों में से एक है। प्राकृतिक विरासत को दो मुख्य भागों में बांटा जाता है। पुनः प्राप्य और पुनः अप्राप्य।

पुनः प्राप्य में ऐसे संसाधनों को शामिल किया जाता है जिन्हें एक बार समाप्त होने पर फिर से बनाकर उपयोग में लिया जा सके। 

वहीं दूसरी ओर पुनः अप्राप्य स्त्रोतों के समाप्त होने के बाद उन्हें किसी प्रकार से उपयोग में नहीं लिया जा सकता। अर्थात वे धरती पर बेहद ही सीमित मात्रा में मौजूद हैं उदाहरण के तौर पर जल, पेट्रोलियम, कोयला इत्यादि।

जल को जीवन कह कर संबोधित किया जाता है क्योंकि यह सजीव और निर्जीव सभी के लिए बेहद ही जरूरी है। जल के बेतहाशा दुरुपयोग के कारण यह अपनी सतह से बेहद नीचे की तरफ खिसकता जा रहा है।

जिसके कारण दुनिया के कई स्थानों पर जल संकट उत्पन्न हो गया है, जब यह जल संकट वैश्विक स्तर पर बढ़ जाता है तो इससे वैश्विक जल संकट कहां जाता है।

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वैश्विक जल संकट के कारण Due to Global Water Crisis in Hindi

प्रकृति ने इंसानों को सभी प्रकार के अनुदानों से नवाजा है, लेकिन इंसान अपने स्वार्थ लोलुपता के कारण प्रकृति का ही दोहन करने लगा है। नतीजतन इंसान अपनी तथा धरती के अन्य जीवो के जान को जोखिम में डाल रहा है।

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शहरीकरण और विकास के नाम पर दुनिया के हजारों लाखों वृक्षों को बेधड़क काटा जा रहा है। जिसके कारण पर्यावरण संतुलन को अधिक नुकसान हो रहा है। पर्यावरण असंतुलन के कारण धरती पर महामारी तथा विनाश जैसी परिस्थितियां बनने लगी है।

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वैश्विक जल संकट के सबसे बड़े कारण के रूप में इंसान के लोभ-लालच को ही माना जाता है। क्योंकि अधिक पाने की लालसा के कारण वह जल जैसे अमूल्य संपत्ति को दूषित कर रहा है।

वैश्विक जल संकट के कारणों में कुछ बड़े कारण निम्नलिखित हैं:

1. पर्यावरण के तरफ उदासीनता

आज मानव अपने कर्तव्य को भूलकर प्रकृति का लगातार दोहन कर रहा है। चंद रुपयों के लिए वह जल जैसे अमूल्य संपत्ति को बेतहाशा प्रदूषित कर रहा है। 

उदाहरण के तौर पर ऐसे मील और कारखाने जो निकले हुए केमिकल्स को कहीं दूर निष्क्रिय करने के बजाए नजदीक के नदियों तथा नालों में छोड़ देते हैं, जिनका परिणाम बेहद गंभीर निकलता है।

दूसरी ओर विकासशील तथा गरीब देश के ज्यादातर लोग अपने रोजमर्रा के लिए नदियों पर ही निर्भर होते हैं। जिसके कारण प्रदूषित कचरे का एक बड़ा भाग नदियों में बहा दिया जाता है। वही कचरा समुद्र में जाकर मिल जाता है जिसके कारण पर्यावरण असंतुलन में वृद्धि होती है।

2. वायु प्रदूषण

जल प्रदूषण कहीं न कहीं वायु प्रदूषण के साथ जुड़ा हुआ है। क्योंकि जल का सबसे बड़ा स्त्रोत वर्षा है, जो पूरी तरह से वायु तथा बादलों से जुड़ा हुआ है। आज लाखों-करोड़ों टन कार्बन वाहनों के धुएं के रूप में निकलता है। 

जो कहीं ना कहीं धरती के ओजोन स्तर को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि अम्लीय वर्षा के लिए भी जवाबदार होता है। अम्लीय वर्षा से धरती के पेड़-पौधे तथा जमीन को ज्यादा प्रदूषण का सामना करना पड़ता है।

बड़ी-बड़ी कंपनियां तथा कारखाने निकले हुए प्रदूषित धुएं को बड़ी आसानी से आसमान में छोड़ देते हैं। वही धुएं वायु प्रदूषण के स्तर को बढ़ाते हैं इसका सीधा असर जल पर पड़ता है।

3. ग्लोबल वार्मिग

वैश्विक जल संकट सबसे बड़े कारण के रूप में ग्लोबल वार्मिंग को लिया जा सकता है। पर्यावरण असंतुलन के कारण धरती पर ग्लोबल वार्मिंग की समस्या भी बढ़ चुकी है। जिसके कारण ग्लेशियर बड़ी तेजी से पिघल रहे हैं।

इसलिए सुनामी तथा बाढ़ जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। ऐसी घटनाओं से जल का एक बड़ा भाग दूषित होता है जो लंबे समय तक पर्यावरण के लिए हानिकारक बना रहता है।

4. जवाबदारी की कमी

दुनिया के विकसित देश हो या विकासशील जब बात विश्वव्यापी जल संकट से उभरने की आती है तो सभी देशों में जवाबदारी की कमी देखने को मिलती है। 

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उदाहरण के तौर पर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश चीन है जहां पर प्रदूषण का स्तर भी ज्यादा देखने को मिलता है लेकिन वैश्विक स्तर पर चीन इन बातों को एक सिरे से नकार देता है।

वहीं दूसरी तरफ पाश्चात्य देश जो खुद को सुखी और संपन्न बताने में कोई कसर नहीं छोड़ते वह भी इन जवाबदारियो को लेने से बचते हैं। अगर वैश्विक जल संकट से निपटना है तो सभी देशों को जवाबदारी लेनी पड़ेगी।

5. कड़े नियमों का अभाव

कानून में कई ऐसे नियम है जिन्हे ताक पर रखकर कई लोग जल को बड़ी मात्रा में प्रदूषित कर रहे हैं। इसलिए ऐसे कड़े कानून बनाने तथा  पालन करने की जरूरत है, जो जल को प्रदूषित करने वाले दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दे सके। 

वैश्विक जल संकट के प्रभाव Effects of global water crisis in Hindi

वैश्विक जल संकट के कारण दुनिया के कई देशों में शुद्ध जल की कमी देखने को मिलती है। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार साल 2030 तक कई देशों में पानी का स्तर बेहद ही नीचे गिर सकता है।

भारत जैसे बड़े देशों में कई ऐसे जिले हैं जहां पर पानी सतह से बेहद नीचे जा चुका है। इसलिए वहां के रहने वाले लोगों को जल की आपूर्ति बेहद मुश्किल से हो पाती है। जिसके कारण किसान फसल के लिए जरूरी जल के अभाव में नुकसान के भागीदार बनते हैं।

वैश्विक जल संकट के सबसे बड़े प्रभाव के रूप में प्राकृतिक आपदाओं को शामिल किया जा सकता है। हर वर्ष कहीं ना कहीं प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिलती है जिसके कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

पर्यावरण जल पर निर्भर है। अगर जल की गुणवत्ता अच्छी नहीं होगी तो उससे सजीव निर्जीव दोनों को हानी उठानी पड़ेगी। दुनिया के कई ऐसे देश है जहां से लोगों का पलायन हो रहा है क्योंकि वहां पर जल की मात्रा बेहद कम हो चुकी है।

दूषित जल का उपयोग करने के कारण दुनिया की एक बड़ी आबादी गंभीर रोगों में से पीड़ित हो चुकी है। इसलिए वैश्विक जल संकट को रोकने की सबसे अधिक जरूरत है।

पूरे विश्व में उपलब्ध जल का 4% भाग भारत में पाया जाता है जो दुनिया भर के 17% आबादी की जरूरतों को पूरा करता है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2030 तक भारत की लगभग 40% आबादी साफ पानी से वंचित हो जाएगी।

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वैश्विक जल संकट को दूर करने के उपाय Measures to solve the global water crisis in Hindi

वैश्विक जल संकट को दूर करने के लिए दुनिया के सभी देशों को एक साथ मिलकर प्रयास करना होगा। जल संकट से निपटने के लिए पर्यावरण संतुलन को बनाए रखना एक मुख्य कार्य होगा।

वृक्ष पर्यावरण को संतुलित करने तथा वर्षा लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा वायुमंडल में नमी बनाए रखने तथा तापमान को नियंत्रित करने में भी सहायक होते हैं। इसलिए वैश्विक जल संकट से निपटने के लिए वृक्षारोपण करने की अति आवश्यकता है।

इंसान अपने रहने के लिए नदियों के नजदीक वाले आवास को पसंद करता है। इसलिए कहा जा सकता है कि नदियां मनुष्य के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे न वह सिर्फ स्वयं के लिए जल का प्रबंधन करता है बल्कि अपने व्यवसाय के लिए भी जल की आपूर्ति करता है।

लेकिन उद्योगों के जरिए शहरों की नालियों के गंदे पानी को भी प्रायः नदियों में ही बहा दिया जाता है। इसलिए ऐसे कठोर कानून व्यवस्था बनाने की जरूरत है जो इन गंदे पानी को नदियों में जाने से रोक सके।

इसके अलावा जल को संचय के माध्यम से दूसरे जरूरी कामों में लिया जा सकता है। जिससे वैश्विक जल संकट में काफी कमी देखने को मिल सकती है। विदेशों में वर्षा के पानी को संरक्षित कर जरूरी कार्यों में लिया जाने लगा है जिससे जल के व्यय में कमी आई है।

विश्वव्यापी जल संकट को दूर करने के लिए जल के व्यय करना पड़ेगा। लोगों में जागरूकता फैलानी पड़ेगी ताकि वे अपने घरों में पानी को बचाकर जल संकट से सामूहिक तौर पर सामना करें।

वैश्विक जल संकट से निपटने के लिए गांव में बड़े-बड़े तालाब तथा नहरों का निर्माण किया जाना चाहिए ताकि उनमें वर्षा के जल को संरक्षित किया जा सके और जरूरत हो तो उसका प्रयोग सिंचाई में किया जा सके। इससे न सिर्फ जरूरतें पूरी होगी बल्कि भूमिगत जल के स्तर में वृद्धि होगी।

ऐसे बड़े संकटों से निपटने के लिए भूतकाल में की हुई गलतियों से सीखकर भविष्य में उसे न दोहराने का प्रण लेना चाहिए। इसलिए विद्यालयों में जल संरक्षण और वैश्विक जल संकट से जुड़े जरूरी मुद्दों को पढ़ाना चाहिए।

निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में आपने वैश्विक जल संकट पर निबंध हिंदी में (Essay on Global Water Crisis in Hindi) पढ़ा। आशा है यह लेख आपको सरल लगा हो। अगर यह लेख आपको अच्छा लगा हो तो शेयर जरूर करें।

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