महिला सशक्तिकरण पर निबंध Essay on Women Empowerment in Hindi

इस लेख में महिला सशक्तिकरण पर निबंध (Essay on Women Empowerment in Hindi) स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए लिखा गया है। इसमें आप महिला सशक्तिकरण का अर्थ एवं परिभाषा, आवश्यकता, बाधायें, सरकार की भूमिका, जरूरी अधिनियम, राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका, लाभ तथा इसको बढ़ावा देने के उपायों के विषय में आप पढ़ सकते हैं।

महिला सशक्तिकरण पर निबंध Essay on Women Empowerment in Hindi

इस लेख में महिला सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों को आसान भाषा में बताया गया है।

महिला सशक्तिकरण का अर्थ एवं परिभाषा Meaning and Definitions of Women Empowerment in Hindi

इस धरती पर एकमात्र इंसान ऐसा प्राणी है जिसने अपनी बुद्धि और चलाकी का इस्तेमाल करके पृथ्वी से दूसरे ग्रहों तक का सफर तय किया है। हमने विज्ञान के क्षेत्र में अद्वितीय उपलब्धियां प्राप्त की है।

अगर पहले के समय की बात की जाए तो जो सुख सुविधाएं हमने आज विकसित की हैं, वह पहले नहीं थी। साधारण सी बात है कि वैज्ञानिक युग के साथ ही हमारी मानसिकता में भी बदलाव आया होगा।

लेकिन हमारे समाज में नवीनता के साथ लोगों का पिछड़ापन भी साफ दिखाई पड़ता है। समाज के कुछ ऐसे तबके के लोग होते हैं, जो किसी लिंग, विशेष धर्म, जाति अथवा मजहब के लोगों को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते हैं।

लिंग भेद ज्यादातर महिलाओं के प्रति किया जाता है। हमारा भारतीय समाज पितृसत्तात्मक विचारधारा से पीड़ित है। ऐसे में महिलाओं पर सामाजिक, आर्थिक और न जाने कितने प्रकार के अत्याचार किए जाते हैं।

महिला सशक्तिकरण एक ऐसी मुहिम है, जिसका उद्देश्य सभी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्हें इस काबिल बनाना है, कि वह खुद ही समाज के दूषित विचारधारा वाले लोगों को मुंह तोड़ जवाब दे पाए।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ आज के समय में ही महिलाओं पर अत्याचार किए जाते हैं। बल्कि प्राचीन समय में भी  सती प्रथा, दूध पीती प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और न जाने कितने सारे पाप किए जाते थे।

महिला सशक्तिकरण का गठन समाज में महिलाओं को एक अलग नाम प्रदान करना है। अब धीरे-धीरे महिलाएं भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं।

आज के समय में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले कहीं भी पीछे नहीं रहती। एक गृहणी से लेकर देश के बड़े-बड़े राजनीतिक पदों का कार्यभार वे बेहद आसानी से उठा लेती हैं।

भारत में महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता Need for Women Empowerment in India in Hindi

जब तक हमारा समाज आधुनिकता से वंचित था, तब से महिलाओं की स्थिति काफी दयनीय है। केवल विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति कर लेने से विकास नहीं होता, बल्कि मानसिकता में भी बदलाव करना पड़ता है।

ऐसे में महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता बहुत बढ़ जाती है। किसी भी समाज को ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लोगों की मानसिकता भी ऊंची होनी चाहिए। रूढ़िवादी प्रथाओं और पितृसत्तात्मक विचारधारा से जूझते लोग समाज में अपना योगदान तभी दे पाएंगे जब उनमें समानता की भावना विकसित हो सकेगी।

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आए दिन हम खबरें सुनते हैं, कि दहेज के कारण किसी नववधू को ससुराल वालों ने प्रताड़ित किया और हत्या कर दिया। यही नहीं यदि कोई बेटी समाज से बाहर निकल कर अपना नाम कमाना चाहती हो, तो उसे हर पल रोका जाता है।

यदि किसी भी देश को वास्तव में उन्नति के पथ पर अग्रसर होना है, तो सर्वप्रथम वहां के नागरिकों की मनोस्थिति में बदलाव लाना होगा। महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए भारत में महिला सशक्तिकरण की जरूरत है।

समाज का दोगलापन तब सामने आता है, जब एक तरफ वे स्त्री के रूप में देवियों की पूजा अर्चना करते हैं, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं को डरा धमका कर उनका शोषण करते हैं।

महिला सशक्तिकरण के अंतर्गत सभी महिलाएं जिनका समाज ने जीना हराम कर के रखा है वे अपने अधिकारों को पहचान कर लोगों के सामने अपनी आवाज बुलंद कर सकती हैं।

हमारे देश में कुछ पढ़े-लिखे और शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले लोग अब महिलाओं को समर्थन प्रदान कर रहे हैं। वही आज भी पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं पर अत्याचार होना जारी है।

अब लोगों की अवधारणाएं महिलाओं के प्रति सकारात्मक रूप से बदल रही है। महिला सशक्तिकरण का गठन समाज को एक चरित्रवान और विकसित पथ पर दिशा निर्देश करने का पहल करना है।

भारत में महिला सशक्तिकरण के मार्ग में आने वाली बाधाएँ Barriers in the Way of Women Empowerment in India in Hindi

महिला सशक्तिकरण के मार्ग में आने वाले बाधाओं में सबसे बड़ा योगदान लोगों की निरक्षरता है। सर्वप्रथम माता-पिता ही किसी बच्ची के जन्म लेने पर शोक मनाना शुरू कर देते हैं, तो भला आगे चलकर समाज कैसे खुशी मना सकता है।

इन लोगों को बच्ची के जन्म लेने पर उसके पढ़ाई लिखाई और पालन पोषण करने की चिंता से पहले विवाह और दहेज की चिंता होने लगती है।

हमारे देश में हर दिन लगभग सैकड़ों ऐसी खबरें सुनाई पड़ती हैं जिनमें महिलाओं पर दहेज का दबाव बनाकर उसे मौत के घाट उतार दिया जाता है। यदि कोई महिला देर रात तक अपने काम से घर लौटती है, तो उसे लोग चरित्रहीन और मनमर्जी कहते है।

सबसे पहले अपराधियों के खिलाफ जो तथाकथित नियम कानून बनाए गए हैं, उन्हें लागू करना चाहिए। हम सभी दहेज की निंदा करते हैं, लेकिन वास्तव में खुलेआम दहेज़ का लेनदेन भी करते हैं।

ऐसे कड़े नियम बनाने चाहिए जिसके अंतर्गत यदि ऐसी कोई भी निंदनीय वारदात हो तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।

महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए देश की सरकारें तो बहुत बयान बाजी और वादा करते हैं लेकिन वक्त आने पर यही राजनेता और मंत्री मुंह मोड़ लेते हैं। महिलाओं को खुद यह बात समझनी होगी कि उनके हक की लड़ाई उन्हें स्वयं लड़नी होगी।

समाज और परिवार के दबाव में आकर खुद को प्रताड़ित होने देना किसी समस्या का हल नहीं होता है। कई बार तो समाज क्या कहेगा इस डर से महिलाएं ही खुद जुर्म को सहती रहती हैं और हर बार समाज के पैर तले कुचल दी जाती हैं।

भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार की भूमिका Role of Government for Women Empowerment in India in Hindi

हमारे भारत देश में महिला सशक्तिकरण को मजबूती प्रदान करने के लिए कई नियम कानून बनाए जाते हैं। अब सरकार ने महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचारों को नष्ट करने में काफी भूमिका निभाई है। नियम कानून तो बहुत सारे बनाए गए हैं, बशर्ते उन्हें अच्छे से लागू किया जाना चाहिए।

यदि किसी महिला पर जबरन दहेज का दबाव डाला जाता है, तो वह किसी भी सरकारी अधीरक्षकों के सम्मुख शिकायत दर्ज करवा सकती है। यदि किसी भी कार्य स्थल पर महिलाओं के साथ यदि कोई उत्पीड़न होता है, तो इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने पर बहुत जल्दी जांच पड़ताल शुरू कर दी जाएगी।

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इसके अलावा बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत कई सरकारी विद्यालयों और विश्वविद्यालयों का निर्माण किया गया है जहां बिना किसी मूल्य के उन्हें अच्छी शिक्षा दी जाती है। ऐसा होने से माता पिता पर भी शिक्षा के खर्च का दबाव नहीं पड़ता और वे अपनी बेटियों को भी आसानी से शिक्षित कर सकते हैं।

संसद द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए पास किए कुछ अधिनियम Some Acts Passed by Parliament for Women Empowerment in Hindi

लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम, 1994 या पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए संसद में लाया गया एक महत्वपूर्ण अधिनियम था।

यदि कोई भी माता-पिता कन्या भ्रूण हत्या की वारदात को अंजाम देते हैं, तो वे एक हत्या के बराबर का जुर्म करते हैं। जीने के अधिकार का हनन करने के कारण ऐसे लोगों को सालों की सजा और काफी मोटी रकम का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

कई बार देखा जाता है कि पुरखों के संपत्तियों पर केवल पुरुषों का ही अधिकार होता है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम एक ऐसा अधिनियम था, जिसके मुताबिक माता-पिता के पुश्तैनी संपत्तियों को बेटों और बेटियों में बराबर का हिस्सा बांटा जाता है। ऐसे में यह संपत्ति का अधिकार महिला सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान साबित हुआ है।

दहेज उन्मूलन अधिनियम 1961 के मुताबिक यदि वधू पक्ष पर वर पक्ष के परिवार वाले किसी भी तरह का दहेज मांग करते हैं तो शिकायत दर्ज करवाने पर उन्हें जेल की सजा भी काटनी पड़ सकती है। इस अधिनियम से नवविवाहित स्त्रियों को अपना जीवन सुखमय यापन करने में सहायता मिली है।

एक समान कार्य करने पर महिलाओं और पुरुषों को समान वेतन दिया जाएगा। एक बराबर पारिश्रमिक एक्ट 1976 महिला सशक्तिकरण के लिए लाया गया एक ऐसा ही अधिनियम है, जो महिलाओं को उनके परिश्रम की न्याय पूर्वक कीमत भुगतान करता है।

इसके अलावा यदि कोई महिला गर्भवती है, तो उसे मेडिकल टर्म्नेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1987 के तहत कुछ दिन का अवकाश दिया जाएगा, जिससे कि वह अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दे सकें।

महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ कार्यस्थल पर सुरक्षा विधेयक के तहत किसी भी कार्यकारिणी महिलाओं को यदि कोई भी उनके कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार का उत्पीड़न दबाव डालता है, तो उसे पुलिस की हिरासत में ले लिया जाएगा और हजारों का जुर्माना भरना होगा। यह विधेयक लाने के बाद कुछ दूषित मानसिकता वाले लोगों में डर का माहौल उत्पन्न हुआ है।

महिलाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका Role of women in nation building in Hindi

एक सभ्य शिक्षित समाज का निर्माण का श्रेय एक शिक्षित स्त्री को जाता है। यदि कोई महिला पढ़ी लिखी है, तो वह अपने बच्चों को भी अच्छी शिक्षा देने में ध्यान केंद्रित करेगी।

हम जानते हैं, कि एक विकसित देश का निर्माण कार्य आज के बच्चों के हाथों में है। यह तो केवल गृहणी का कार्य था, लेकिन इसके अलावा महिलाएं पुरुषों के साथ हर क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर उन्हें चुनौती दे रही हैं।

 न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी जाकर भारत की बेटियों ने अपने मातृभूमि का नाम रोशन किया है। यह तो वास्तविकता है कि केवल पुरुषों के विकास हो जाने से देश विकसित नहीं होता।

देश का नाम रोशन करने के लिए पुरुषों और महिलाओं दोनों को ही अपना योगदान देने के लिए सामने आना होगा। असमानता का भाव एक नीच चरित्र की निशानी है।

सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और पारिवारिक क्षेत्रों में भी महिलाओं ने राष्ट्र निर्माण के लिए अहम भूमिका अदा की है। वर्तमान समय में महिलाएं समाज सेवा के कार्यों में भी पीछे नहीं हटती हैं। अपनी कर्मठता और कर्तव्य परायणता से उन्होंने यह साबित किया है, कि वे किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है।

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जब भारत अंग्रेजों की गिरफ्त में था, तब रानी लक्ष्मीबाई ने अकेले ही अंग्रेजों की नाक में दम कर के रखा था। यहां तक की राष्ट्रीय सुरक्षा के स्तर पर भी पहली महिला आईपीएस किरण बेदी ने देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

एक महिला के कारण ही हिंदुस्तान को शिवाजी जैसे महान योद्धाओं की प्राप्ति हुई थी। माता जीजाबाई जिन्होंने छत्रपति शिवाजी को बचपन से ही देश भक्ति की शिक्षा देकर एक कुशल योद्धा बनाया था।

महिला सशक्तिकरण के लाभ Benefits of Women Empowerment in Hindi

लैंगिक पक्षपात असमानता हमारे समाज में एक व्यापक स्तर पर फैल चुकी है। महिलाओं को केवल रसोई घर तक और घर के चारदीवारी तक सीमित कर दिया गया है।

लेकिन महिला सशक्तिकरण के कारण अब उन्हें परिवारिक बंधन से छुटकारा पाकर अपने और अपने देश के बारे में विचार करने और सफलता प्राप्त करने का अवसर दिया जा रहा है।

अगर महिलाएं खुद अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगी तो वे अपनी पहचान को समाज में विकसित कर पाएंगी। महिला सशक्तिकरण देश में जगह-जगह हो रहे अन्याय पूर्ण गतिविधियों के खिलाफ एक लक्ष्य है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को सशक्त करना और उन्हें मजबूत करना है।

महिलाओं को उनका आत्मसम्मान तथा आत्मविश्वास से परिचित करवाने के लिए यह एक अहम पहल है। एक  सीमित दायरे से निकलकर वे अपने स्वामित्व का जीवन जी सकती हैं। समाज में एक नाम प्राप्त करने के लिए वे समर्थ हो गई हैं।

महिला सशक्तिकरण देश में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों को कम करने में बेहद सहायक है। यदि देश के किसी भी कोने में महिला प्रताड़ना की खबरें सुनाई पड़ती है तो महिला सशक्तिकरण में जुड़ी अन्य महिलाएं अपना सहयोग देने के लिए हर वक्त तैयार रहती हैं।

आज के समय में हमारा समाज बहुत हद तक बदल चुका है। अपने हक की लड़ाई लड़ने पर समाज में बैठे रूढ़िवादी लोगों की विचारधारा में भी परिवर्तन आया है।

अब महिलाएं हर क्षेत्र में हिस्सा ले रही हैं, वह भी बिना किसी झिझक के। जो पुरुष महिलाओं की आजादी पर सवाल उठाते थे, महिला सशक्तिकरण के प्रयासों के वजह से उनकी मानसिकता में भी कुछ हद तक बदलाव आया है।

महिला सशक्तिकरण के उपाय Women Empowerment Measures in Hindi

पुराने ख्यालों वाले लोगों द्वारा महिलाओं पर कसे गए जंजीरों को अब महिलाओं ने तोड़ना आरंभ कर दिया है।

आज हमारे देश में महिला प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, अधिकारी, वकील, डॉक्टर इत्यादि विभिन्न पदों पर कार्य कर रही हैं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि कुछ प्रतिशत महिलाओं के जागृत हो जाने से सभी महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागृत होंगी।

आज भी कई ऐसे गांव हैं, जहां महिलाओं पर अत्याचार होते हैं। ऐसी महिलाओं का जीवन किसी नर्क से कम नहीं होता है। इसके उपायों में हमें महिला सशक्तिकरण की शक्ति बढ़ानी होगी। केवल संगठन बना लेने से कार्य नहीं होता है, बल्कि उसे सख्ती से चलाना भी पड़ता है।

आज तक जितने भी प्रथाएं और रीतियां बनाई गई हैं, वह सिर्फ महिलाओं के लिए ही हैं। सरकार को चाहिए कि वे देश में एक समान नागरिक संहिता प्रस्तुत करें। ताकि विभिन्न धर्मों में व्यक्तिगत कानूनों के द्वारा किसी भी प्रकार से महिलाओं का शोषण न किया जाए।

अगर महिला सशक्तिकरण को हमें और मजबूत करना है, तो विभिन्न स्तरों पर बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए जिनमें महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागृत किया जाना चाहिए। इसकी शुरुआत विद्यालय से करना उचित होगा जहां बच्चे अपना जीवन शुरुआत से प्रारंभ करते हैं।

निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में आपने हिंदी में महिला सशक्तिकरण पर निबंध (Women Empowerment essay in Hindi) पढ़ा। आशा है यह लेख आपको अच्छा लगा होगा। अगर यह लेख आपको पसंद आया हो और जानकारी से भरपूर लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें।

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