महिला सशक्तिकरण पर निबंध Essay on Women Empowerment in Hindi

महिला सशक्तिकरण पर निबंध व लेख Essay on Women Empowerment in Hindi

महिला सशक्तिकरण विश्व भर में महिलाओं को सशक्त बनाने की एक मुहिम है जिससे की महिलाएं स्वयं अपने निर्णय ले सके और हमारे इस समाज और अपने परिवार के कई निजी दायरों को तोड़कर अपने जीवन में आगे बढ़ सके।

आज ना सिर्फ समाज की महिलाओं को इसके विषय में समझाया जा रहा है बल्कि बच्चों को भी शिक्षा के माध्यम का से महिला सशक्तिकरण के विषय में बताया जा रहा है ताकि बड़े होने पर वह भी अपने पैरों पर खड़ी हो सके।

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महिला सशक्तिकरण का अर्थ क्या है? What is Women Empowerment in Hindi?

अगर हम आसान शब्दों में महिला सशक्तिकरण को समझें तो इसका उद्देश्य होता है महिलाओं को शक्ति प्रदान करना ताकि वह हमारे समाज में पीछे ना रह सकें और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने निर्णय ले सके और सर उठा कर समाज में चल सके। महिला सशक्तिकरण का मुख्य लक्ष्य महिलाओं को उनका सही अधिकार दिलाना है।

भारत में महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता क्यों है? In India Why Women Empowerment is Important?

जैसे की हम सभी जानते हैं हमारा देश भारत पुरुष प्रभुत्व वाला देश है जहां पुरुषों को महिलाओं की तुलना में ज्यादा माना जाता है जो कि सही बात नहीं है। आज भी भारत में ज्यादातर जगह में है महिलाओं को पुरुषों की तरह काम करने नहीं दिया जाता और उन्हें परिवार की देखभाल और घर से ना निकलने की हिदायत दी जाती है।

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महिला सशक्तिकरण पर लेख Mahila sashaktikaran essay in hindi

आज भी इस आधुनिक युग में 40 से 50% महिलाएं हैं जो शिक्षित होने पर भी घर पर ही बैठे हैं। यानी कि देश का आधा ज्ञान घर पर ही बैठे बैठे बेकार हो रहा है। हलाकि घर पर बच्चों की देखभाल या परिवार की देखभाल करना भी जीवन का एक हिस्सा है।

परंतु इसका मतलब यह तो नहीं कि जीवन वहीं पर सीमित है। महिलाओं को भी पुरुषों की तरह है ऑफिस जाना चाहिए और काम करना चाहिए क्योंकि इससे उनका ज्ञान और बढ़ता है और वह भी देश के लिए कुछ अच्छा कर सकती हैं।

भारत में महिला सशक्तिकरण की कमी एक सबसे बड़ा कारण है कि आज भी भारत विकासशील देशों में गिना जाता है। अगर हमारे देश की महिलाएं सशक्त बने और पुरुषों की तरह है अपने ज्ञान को विश्व के साथ बांटे और घर से बाहर निकलकर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करें तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा देश भारत भी विकसित देशों की लिस्ट में दिखेगा।

महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए पुरुषों की मदद तथा सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई नियम और कानून लाने होंगे।

महिला सशक्तिकरण का नारा इसलिए समाज में उठा क्योंकि हमारे समाज में लिंग भेदभाव आज भी इस आधुनिक युग में हो रहा है जो कि एक बहुत ही शर्म की बात है। आज भी कई जगहों पर गैरकानूनी तरीके से लिंग की जांच करवा कर कन्या भ्रूण हत्या जैसे महापाप हो रहे हैं।

बाकी लोग घर में लड़कियों को लड़कों से कम समझ रहे हैं तो कई जगहों पर विवाह के बाद लड़कियों के साथ अत्याचार हो रहा है। अगर हम सही नजरिए से देखेंगे तो पूर्ण रूप से महिलाओं के साथ अन्याय हो रहा है जो नहीं होना चाहिए क्योंकि इस दुनिया में हर किसी को स्वतंत्र रूप से जीने और जीवन में आगे बढ़ने का हक है।

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हमारे रीति रिवाज, पूजा पाठ और परंपरा का सम्मान करना चाहिए परंतु इसका यह अर्थ नहीं कि पौराणिक कथाओं का गलत मतलब निकाल कर महिलाओं के साथ अत्याचार किया जाए। आज भी हमारे देश भारत में जहां महिलाओं के रूप में माता पार्वती, लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा, काली, की पूजा की जाती है पता नहीं क्यों वहां मां, बहन, बेटी, पत्नी, या किसी महिला मित्र के साथ अन्याय होता है?

महिलाओं का सम्मान मात्र कर देने से काम नहीं चलेगा बल्कि हमें अपने समाज की महिलाओं को सशक्त बनाना होगा ताकि वह देश में निडरता के साथ चल पाएं और उन्हें कभी भी एहसास ना होने दिया जाए कि वह पुरुषों से कम है।

पौराणिक काल में भी महिलाओं के साथ अन्याय जैसे सती प्रथा, दहेज प्रथा, नगरवधू प्रणाली, यौन उत्पीड़न, पर्दा प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, लड़कियों से कम उम्र में काम करवाना, बाल विवाह होते थे।

हांलाकि आज इनमें से ज्यादातर चीजें कम हो चुकी है परंतु आज भी कुछ ऐसी बाधाएं हैं जिनके कारण महिलाएं सशक्त नहीं हो पा रही है जिन्हें हमें दूर करना होगा। भारत में महिलाओं को काम करने का अधिकार, शिक्षा की भूमिका, स्वयं का फैसला करने का अधिकार,नहीं मिल पा रहा है जो हमें उन्हें दिलाना होगा।

कुछ महान सही सोच रखने वाले नेता जैसे राजा राममोहन राय ने सती प्रथा को दूर करने के लिए ब्रिटिश सरकार को मजबूर किया बाद में कुछ अन्य महान समाज सुधारक जैसी ईश्वर चंद्र विद्यासागर, आचार्य विनोबा भावे,  स्वामी विवेकानंद ने महिलाओं के हक़ को समाज के समक्ष रखा और लोगों को सही मार्ग दिखाया।

इन आने वाले सालों में सरकार ने भी महिला सशक्तिकरण के अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए कई नए नियम और कानून तैयार किए हैं। आशा करते हैं यह नियम कानून और लोगों की सोच महिलाओं को उनका हक दिलाने में मददगार साबित होंगे। हमें भी अपने महिला सशक्तिकरण के महत्व को समझना होगा और समाज की महिलाओं का सम्मान करना चाहिए तथा उन्हें उनका हक प्रदान करना चाहिए।

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